गढ़वा के चिनिया प्रखंड अंतर्गत रानीचेरी गांव में सोमवार को झारखंड वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, गढ़वा दक्षिणी वन प्रमंडल के तत्वावधान में 77वें वन महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि गढ़वा-रंका विधानसभा क्षेत्र के विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर डीएफओ एबिन बेनी अब्राहम, रेंजर अजय टोप्पो, जिला परिषद सदस्य बनारसी सिंह, उप प्रमुख सुनैना देवी, समाजसेवी मोहम्मद फरीद खां, विधायक प्रतिनिधि रिंकू तिवारी, मुखिया गोपाल यादव, महावीर सिंह और विजय सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वन विभाग की ओर से सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत लोगों से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। मुख्य अतिथि विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने वन महोत्सव को सभी उत्सवों में सबसे बड़ा बताते हुए कहा कि जंगल है तो जल है और जल है तो जीवन है। उन्होंने चेतावनी दी कि अंधाधुंध वृक्षों की कटाई के कारण ही जंगली हाथी और अन्य वन्यजीव गांवों की ओर आने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के इन जागरूकता कार्यक्रमों की सराहना करते हुए हर व्यक्ति से जंगल बचाने में योगदान देने की अपील की। वहीं, समाजसेवी मोहम्मद फरीद खां ने कहा कि लोग केवल महुआ के पेड़ को उसकी आय के कारण बचाते हैं, जबकि जंगल का हर पेड़ मानव जीवन के लिए अमूल्य है। समारोह का सफल संचालन संजय प्रसाद ने किया। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों ने मिलकर पौधा रोपण किया और अधिक से अधिक पौधे लगाने का संकल्प लिया। इस मौके पर भाजपा नेता कपिल प्रसाद, शिवलाल सिंह, सुरेंद्र प्रसाद, गरीबा शाह, गुड्डू यादव, छोटू यादव सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
गढ़वा के चिनिया प्रखंड अंतर्गत रानीचेरी गांव में सोमवार को झारखंड वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, गढ़वा दक्षिणी वन प्रमंडल के तत्वावधान में 77वें वन महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि गढ़वा-रंका विधानसभा क्षेत्र के विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर डीएफओ एबिन बेनी अब्राहम, रेंजर अजय टोप्पो, जिला परिषद सदस्य बनारसी सिंह, उप प्रमुख सुनैना देवी, समाजसेवी मोहम्मद फरीद खां, विधायक प्रतिनिधि रिंकू तिवारी, मुखिया गोपाल यादव, महावीर सिंह और विजय सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वन विभाग की ओर से सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत लोगों से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। मुख्य अतिथि विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने वन महोत्सव को सभी उत्सवों में सबसे बड़ा बताते हुए कहा कि जंगल है तो जल है और जल है तो जीवन है। उन्होंने चेतावनी दी कि अंधाधुंध वृक्षों की कटाई के कारण ही जंगली हाथी और अन्य वन्यजीव गांवों की ओर आने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के इन जागरूकता कार्यक्रमों की सराहना करते हुए हर व्यक्ति से जंगल बचाने में योगदान देने की अपील की। वहीं, समाजसेवी मोहम्मद फरीद खां ने कहा कि लोग केवल महुआ के पेड़ को उसकी आय के कारण बचाते हैं, जबकि जंगल का हर पेड़ मानव जीवन के लिए अमूल्य है। समारोह का सफल संचालन संजय प्रसाद ने किया। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों ने मिलकर पौधा रोपण किया और अधिक से अधिक पौधे लगाने का संकल्प लिया। इस मौके पर भाजपा नेता कपिल प्रसाद, शिवलाल सिंह, सुरेंद्र प्रसाद, गरीबा शाह, गुड्डू यादव, छोटू यादव सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
- गढ़वा जिले के रंका प्रखंड स्थित चुतरू पंचायत के उर्दू विद्यालय में खेल मैदान की जमीन पर अतिक्रमण कर खेती करने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बुधवार दोपहर करीब 3:00 बजे कुछ लोगों ने विद्यालय के लिए वर्षों पहले दान की गई जमीन को अपनी रैयती भूमि बताकर ट्रैक्टर से जुताई कर दी और उसमें तिल तथा अरहर की बुआई कर दी। इससे विद्यालय के बच्चों के खेलने के लिए उपलब्ध मैदान पूरी तरह समाप्त होने की स्थिति में आ गया है। ग्रामीणों के अनुसार, यह भूमि पहले कल्लू यादव, सोमारू यादव, राजमणि यादव, शिवपुर यादव सहित अन्य यादव परिवार की थी, जिन्होंने बच्चों के खेलकूद और विद्यालय के विकास के लिए इसे उपलब्ध कराया था और इसे राजपाल के नाम दर्ज भी कराया गया था। वहीं, जमीन दान देने वाले परिवार के लोगों का आरोप है कि विद्यालय की जमीन पर कुछ अन्य प्रभावशाली लोग भी खेती कर रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न करके केवल कुछ ही लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। इस घटना से विद्यालय के छात्र-छात्राओं में निराशा है और ग्रामीणों ने बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास का हवाला देते हुए मैदान की सुरक्षा को जरूरी बताया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि विद्यालय प्रबंधन समिति, प्रधानाध्यापक और संबंधित राजस्व विभाग संयुक्त रूप से भूमि की पैमाइश कराकर विधिवत सीमांकन करें तथा राजपाल के नाम दर्ज भूमि को विद्यालय के अभिलेखों में शामिल कर सुरक्षित कराएं, ताकि भविष्य में विवाद खत्म हो और प्रशासन के समय रहते हस्तक्षेप से बच्चों के खेलकूद का अधिकार सुरक्षित रहे।1
- गढ़वा में विवाह का दावा करते हुए एक युवती अपने ससुराल पहुंची और उसने मामले में पुलिस से न्याय की गुहार लगाई है। दूसरी ओर, पति ने युवती द्वारा लगाए गए सभी आरोपों से साफ़ इनकार कर दिया है।1
- दहेज प्रथा विवाह जैसे पवित्र बंधन को सौदेबाजी में बदलकर पूरे समाज के लिए एक घातक अभिशाप बनती जा रही है। यह प्रथा महिलाओं को महज एक वस्तु मानती है और दहेज की मांग पूरी न होने पर नवविवाहितों का शारीरिक व मानसिक शोषण किया जाता है, जिससे दहेज हत्या जैसे जघन्य अपराध भी होते हैं। इस कुप्रथा के कारण बेटियों को परिवार पर आर्थिक बोझ समझा जाने लगता है, जिससे कन्या भ्रूण हत्या की घटनाएं बढ़ती हैं और समाज में लड़का-लड़की के बीच भेदभाव व लैंगिक असमानता मजबूत होती है। बेटी की शादी में भारी दहेज देने के चक्कर में गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की जीवनभर की जमा पूंजी खत्म हो जाती है और लोग भयंकर कर्ज के जाल में डूब जाते हैं। वहीं समाज में इस बढ़ती कुप्रथा और इसके दुष्प्रभावों को लेकर एक महिला का संगीत गाते हुए वीडियो भी वायरल हो रहा है।4
- पलामू जिले के विश्रामपुर स्थित डांकबंगला परिसर में मेदिनीनगर के लाइफलाइन हॉस्पिटल एवं न्यू लाइफ आईवीएफ सेंटर द्वारा स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन विश्रामपुर थाना प्रभारी ऋषिकेश कुमार दुबे, एसआई शैलभ कुमार, डॉ. स्वीटी किसन पवार और डॉ. शमशाद आलम ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।1
- फेसबुक क्रिएटरों ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए गरीब सुखना बहू को नई छत दिलाई है। क्रिएटरों के इस प्रयास से गरीब महिला को रहने के लिए नया सहारा और छत मिल सकी है।1
- नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को एक छात्र प्रदर्शन के हिंसा में बदल जाने के बाद भारी टकराव पैदा हो गया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में दिल्ली पुलिस प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए बल प्रयोग करती दिख रही है, वहीं कुछ छात्र भी वस्तुएं फेंककर और पुलिसकर्मियों से भिड़कर जवाबी कार्रवाई करते नजर आ रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ था, लेकिन जब पुलिस ने सभा को रोकने की कोशिश की तो तनाव बढ़ गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने वहां मौजूद छात्रों और डॉक्टरों समेत सभी लोगों पर बल प्रयोग किया। पुलिस कार्रवाई से आक्रोशित कुछ प्रदर्शनकारियों के पलटवार करने से दोनों पक्षों में झड़प शुरू हो गई और पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि अनधिकृत प्रदर्शनों पर रोक लागू थी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई की गई। इस घटना के पूरे क्रम और दोनों पक्षों के आरोपों की आगे समीक्षा किए जाने की बात कही जा रही है। इस वारदात ने एक बार फिर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को लेकर देशव्यापी बहस छेड़ दी है।1