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चंद्रशेखर पर हमले के विरोध में वाराणसी में आजाद समाज पार्टी का प्रदर्शन, बारिश में भी लगे नारे न्यूज टू इंडिया से उप संपादक प्रदीप कुमार वर्मा उर्फ राजन की खास रिपोर्ट वाराणसी। बाराबंकी में आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर पर हुए हमले के विरोध में बुधवार को वाराणसी में पार्टी कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया बारिश के बावजूद कार्यकर्ताओं के हौसले नहीं टूटे। जिलाधिकारी कार्यालय के गेट पर कार्यकर्ताओं ने बाराबंकी जमकर नारेबाजी की और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।इस दौरान बारिश में भी एक दरोगा और सिपाही जिलाधिकारी कार्यालय के गेट पर सुरक्षा की कमान संभाले रहे।
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चंद्रशेखर पर हमले के विरोध में वाराणसी में आजाद समाज पार्टी का प्रदर्शन, बारिश में भी लगे नारे न्यूज टू इंडिया से उप संपादक प्रदीप कुमार वर्मा उर्फ राजन की खास रिपोर्ट वाराणसी। बाराबंकी में आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर पर हुए हमले के विरोध में बुधवार को वाराणसी में पार्टी कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया बारिश के बावजूद कार्यकर्ताओं के हौसले नहीं टूटे। जिलाधिकारी कार्यालय के गेट पर कार्यकर्ताओं ने बाराबंकी जमकर नारेबाजी की और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।इस दौरान बारिश में भी एक दरोगा और सिपाही जिलाधिकारी कार्यालय के गेट पर सुरक्षा की कमान संभाले रहे।
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- खबर का असर दिखा और अब केदारनाथ संस्कृत महाविद्यालय में वित्तीय मामलों को लेकर मचा हुआ बवाल को देखते हुए जांच शुरू होने वाली है। जिला विद्यालय निरीक्षक ने आदेश दिया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी। Varanasi Breking News1
- रथयात्रा में बंद मकान में जुए के अड्डे का भंडाफोड़, 47 गिरफ्तार न्यूज टू इंडिया से उप संपादक प्रदीप कुमार वर्मा उर्फ राजन की खास रिपोर्ट वाराणसी। सिगरा थाना क्षेत्र के रथयात्रा इलाके में बंद मकान में चल रहे जुए के अड्डे का पुलिस और एसओजी-2 की संयुक्त टीम ने बुधवार को भंडाफोड़ किया। छापेमारी में 47 जुआरियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि मौके से 19 लाख 53 हजार रुपये नकद बरामद हुए। पुलिस ने कई वाहन, मोबाइल फोन और अन्य सामान भी जब्त किया है पुलिस के अनुसार मकान विशाल सिंह ने लीज पर लिया था, जिसमें जुए का अड्डा संचालित किया जा रहा था। सूचना मिलने के बाद पुलिस और एसओजी-2 की टीम पिछले 3-4 दिनों से निगरानी कर रही थी। पुख्ता जानकारी मिलने पर बुधवार को छापेमारी की गई।गिरफ्तार आरोपितों के आपराधिक इतिहास की जांच की जा रही है। पुलिस गैंगस्टर एक्ट समेत अन्य धाराओं में कार्रवाई की तैयारी कर रही है।1
- बालक नरेंद्र मोदी का वडनगर की तंग गलियों से उठकर भारत के प्रधानमंत्री बनने तक का सफर पूरी कहानी केशव की जुबानी में देखे बालक नरेंद्र मोदी का वडनगर की तंग गलियों से उठकर भारत के प्रधानमंत्री बनने तक का सफर कड़े संघर्ष, अटूट देशभक्ति और असाधारण नेतृत्व की एक प्रेरणादायक कहानी है। 17 सितंबर 1950 को गुजरात के एक छोटे से कस्बे वडनगर में जन्मे नरेंद्र दामोदरदास मोदी स्वतंत्र भारत में पैदा होने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री हैं। उनके इस ऐतिहासिक सफर को हम कुछ मुख्य पड़ावों के माध्यम से समझ सकते हैं: 1. बचपन और संघर्ष के दिन (1950 - 1967) चाय की दुकान पर हाथ बंटाना: नरेंद्र मोदी का जन्म एक बेहद साधारण और सीमित साधनों वाले परिवार में हुआ था। उनके पिता दामोदरदास मोदी वडनगर रेलवे स्टेशन पर चाय की दुकान चलाते थे, जहाँ बालक नरेंद्र भी स्कूल के बाद अपने पिता का हाथ बंटाते थे।1
- चांदमारी रिंग रोड चौराहा बना तालाब, राहगीरों की बढ़ी मुश्किलें जनता न्यूज़ टीवी संवाददाता हरीशचंद्र पटेल वाराणसी1
- चंद्रशेखर आजाद के समर्थन में वाराणसी में प्रदर्शन, दोषियों पर कार्रवाई की मांग1
- कालिका धाम में शतचंडी महायज्ञ व श्रीमद्भागवत कथा शुरू 108 महिलाओं ने निकाली भव्य कलश यात्रा, नौ दिन चलेगा धार्मिक अनुष्ठान कालिका धाम में शतचंडी महायज्ञ व श्रीमद्भागवत कथा शुरू 108 महिलाओं ने निकाली भव्य कलश यात्रा, नौ दिन चलेगा धार्मिक अनुष्ठान वाराणसी के सेवापुरी क्षेत्र स्थित सिद्धपीठ माता कालिका धाम मंदिर परिसर में बुधवार सुबह करीब 10 बजे श्री शतचंडी महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। प्रथम दिन 108 महिलाओं समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भव्य कलश यात्रा निकाली। राम जनम योगी के शंखनाद और माता कालिका के जयकारों के बीच यात्रा कालिका बारा, बाराडीह, पुरानी बाजार और हरिभनपुर होते हुए मंदिर परिसर पहुंची। श्रीधाम अयोध्या से आए यज्ञ पुरुष राजेंद्रानंद जी महाराज की देखरेख में धार्मिक अनुष्ठान नौ दिनों तक चलेगा। समापन 25 सितंबर को होगा। इस दौरान संत-भक्त दर्शन मेला और 64 गांवों का विशाल भंडारा आयोजित किया जाएगा। राजेंद्रानंद जी महाराज ने बताया कि सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से अब तक 51 महायज्ञ हो चुके हैं। कालिका धाम में 52वां महायज्ञ है। उनका लक्ष्य 108 महायज्ञ कराने का है। कलश यात्रा में डॉ. हर्षवर्धन सिंह, सुरेंद्र सिंह मास्टर, अदिति सिंह पटेल, नीरज सिंह समेत सैकड़ों श्रद्धालु शामिल रहे।1
- वाराणसी में ऐतिहासिक दंगल,पहलवानों के दांव-पेंच देख झूमे दर्शक न्यूज़ टू इंडिया से उप संपादक प्रदीप कुमार वर्मा उर्फ राजन की खास रिपोर्ट वाराणसी। तीज़ के अवसर पर ककरमत्ता एवं बजरडीहा क्षेत्र में बहुरा मेले के मौके पर ऐतिहासिक दंगल का आयोजन किया गया।तीज़ के अवसर पर बहुरा मेले में उमड़ा जनसैलाब, सदियों पुरानी कुश्ती परंपरा ने बटोरी वाहवाही।दंगल में दूर-दराज के क्षेत्रों से आए पहलवानों ने अखाड़े में अपनी ताकत, फुर्ती और कुश्ती के हुनर का शानदार प्रदर्शन किया। पहलवानों के दांव-पेंच देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक अखाड़े के चारों ओर जुटे रहे और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा माहौल गूंजता रहा।बहुरा मेले के अवसर पर आयोजित यह दंगल केवल कुश्ती का मुकाबला नहीं, बल्कि बनारस की पुरानी लोक परंपरा, संस्कृति और आपसी भाईचारे की जीवंत मिसाल भी रहा। अखाड़े में उतरे पहलवानों ने एक-दूसरे को कड़ी चुनौती दी और शानदार मुकाबलों से दर्शकों का उत्साह बढ़ाया।मोहम्मद वसीम, पूर्व मीडिया प्रभारी उत्तर प्रदेश, ने कहा कि ककरमत्ता और बजरडीहा में होने वाला पारंपरिक दंगल हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसी परंपराओं को आगे बढ़ाने की जरूरत है, ताकि नई पीढ़ी भी कुश्ती और अखाड़े की इस पुरानी संस्कृति से जुड़ सके।उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक दौर में जब पारंपरिक खेल और लोक संस्कृतियां धीरे-धीरे पीछे छूट रही हैं, ऐसे आयोजनों का महत्व और भी बढ़ जाता है। दंगल जैसे आयोजन युवाओं को खेलों से जोड़ने के साथ-साथ आपसी भाईचारा, अनुशासन और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का संदेश भी देते हैं।दंगल के दौरान विजेता पहलवानों का उत्साहवर्धन किया गया। आयोजन में मौजूद लोगों ने मांग की कि बहुरा मेले और दंगल की इस ऐतिहासिक परंपरा को हर वर्ष और भव्य रूप से आयोजित किया जाए, ताकि वाराणसी की यह पहचान आने वाली पीढ़ियों तक कायम रहे।ककरमत्ता और बजरडीहा का यह दंगल एक बार फिर साबित कर गया कि बनारस की मिट्टी में आज भी अखाड़े की परंपरा, पहलवानों का जुनून और लोक संस्कृति की मजबूत जड़ें मौजूद हैं।1
- वाराणसी: ककरमत्ता और बजरडीहा में ऐतिहासिक दंगल,पहलवानों के दांव-पेंच देख झूमे दर्शक न्यूज टू इंडिया से उप संपादक प्रदीप कुमार वर्मा उर्फ राजन की खास रिपोर्ट वाराणसी। तीज़ के अवसर पर ककरमत्ता एवं बजरडीहा क्षेत्र में बहुरा मेले के मौके पर ऐतिहासिक दंगल का आयोजन किया गया।तीज़ के अवसर पर बहुरा मेले में उमड़ा जनसैलाब, सदियों पुरानी कुश्ती परंपरा ने बटोरी वाहवाही।दंगल में दूर-दराज के क्षेत्रों से आए पहलवानों ने अखाड़े में अपनी ताकत, फुर्ती और कुश्ती के हुनर का शानदार प्रदर्शन किया। पहलवानों के दांव-पेंच देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक अखाड़े के चारों ओर जुटे रहे और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा माहौल गूंजता रहा।बहुरा मेले के अवसर पर आयोजित यह दंगल केवल कुश्ती का मुकाबला नहीं, बल्कि बनारस की पुरानी लोक परंपरा, संस्कृति और आपसी भाईचारे की जीवंत मिसाल भी रहा। अखाड़े में उतरे पहलवानों ने एक-दूसरे को कड़ी चुनौती दी और शानदार मुकाबलों से दर्शकों का उत्साह बढ़ाया।मोहम्मद वसीम, पूर्व मीडिया प्रभारी उत्तर प्रदेश, ने कहा कि ककरमत्ता और बजरडीहा में होने वाला पारंपरिक दंगल हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसी परंपराओं को आगे बढ़ाने की जरूरत है, ताकि नई पीढ़ी भी कुश्ती और अखाड़े की इस पुरानी संस्कृति से जुड़ सके।उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक दौर में जब पारंपरिक खेल और लोक संस्कृतियां धीरे-धीरे पीछे छूट रही हैं, ऐसे आयोजनों का महत्व और भी बढ़ जाता है। दंगल जैसे आयोजन युवाओं को खेलों से जोड़ने के साथ-साथ आपसी भाईचारा, अनुशासन और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का संदेश भी देते हैं।दंगल के दौरान विजेता पहलवानों का उत्साहवर्धन किया गया। आयोजन में मौजूद लोगों ने मांग की कि बहुरा मेले और दंगल की इस ऐतिहासिक परंपरा को हर वर्ष और भव्य रूप से आयोजित किया जाए, ताकि वाराणसी की यह पहचान आने वाली पीढ़ियों तक कायम रहे।ककरमत्ता और बजरडीहा का यह दंगल एक बार फिर साबित कर गया कि बनारस की मिट्टी में आज भी अखाड़े की परंपरा, पहलवानों का जुनून और लोक संस्कृति की मजबूत जड़ें मौजूद हैं।1
- 5 बच्चों की सास का 20 साल छोटे दामाद पर दिल आ गया रातभर पंचायत चली 5 बच्चों की सास का 20 साल छोटे दामाद पर दिल आ गया रातभर पंचायत चली, लेकिन दोनों को अलग नहीं कर पाई अब दोनों ने एकसाथ रहने का ऐलान कर दिया है मामला मैनपुरी, उत्तर प्रदेश का है1