राजिम के मेला मैदान को मिली नई पहचान, अब कहलाएगा ‘भगवान राजीव लोचन सामाजिक समरसता मेला मैदान’ सर्वसम्मति से पारित हुआ नामकरण का प्रस्ताव, सामाजिक एकता और सर्व समाज के सम्मान का दिया संदेश राजिम 14 सितंबर। भगवान श्रीराजीवलोचन की पावन नगरी राजिम में सामाजिक समरसता को नई पहचान देने वाला महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। राजिम के प्रमुख मेला मैदान का नाम अब “भगवान राजीवलोचन सामाजिक समरसता मेला मैदान” रखने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया है। भारतीय जनता पार्टी शिक्षा प्रकोष्ठ, छत्तीसगढ़ के प्रदेश सह-संयोजक प्रोफेसर (डॉ.) संजीव कर्मकार ‘वशिष्ठ’ के प्रयास एवं प्रस्ताव तथा सर्व समाज समन्वय महासभा, गरियाबंद के संरक्षक मुन्नालाल देवदास और अध्यक्ष केशर निर्मलकर के आह्वान पर सर्व समाज के अनुमोदन के बाद यह निर्णय लिया गया। जिला शिक्षा प्रकोष्ठ के सह-संयोजक अशोक मिश्रा के अनुमोदन एवं सहयोग से नगर पालिका अध्यक्ष महेश यादव, उपाध्यक्ष पूर्णिमा चंद्राकर एवं पार्षदगणों ने मेला मैदान के नए नाम के प्रस्ताव को सर्वसम्मति प्रदान की। बताया गया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ सरकार के सुशासन, जनभागीदारी और ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना को यह निर्णय स्थानीय स्तर पर मजबूती प्रदान करता है। धार्मिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक नगरी राजिम में सभी समाजों को साथ लेकर चलने और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। नामकरण में एकता और भाईचारे का संदेश राजिम विभिन्न समाजों की साझा आस्था और संस्कृति का केंद्र रहा है। ऐसे में भगवान राजीव लोचन से जुड़े प्रमुख मेला मैदान के नाम में ‘सामाजिक समरसता’ को शामिल करना सभी वर्गों के बीच एकता, समानता, सद्भाव और भाईचारे का संदेश देगा। यह नामकरण इस भावना को भी मजबूत करेगा कि भगवान राजीव लोचन की नगरी में सभी समाज समान हैं और सामाजिक समरसता ही समाज की वास्तविक शक्ति है। ‘यह केवल नामकरण नहीं, सामाजिक संकल्प’ प्रोफेसर (डॉ.) संजीव कर्मकार ‘वशिष्ठ’ ने इस निर्णय पर सर्व समाज समन्वय महासभा, गरियाबंद के पदाधिकारियों, समाज प्रमुखों, भाजपा कार्यकर्ताओं एवं सहयोगियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह केवल मेला मैदान के नामकरण का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, समरसता और सर्व समाज के सम्मान को प्रतिष्ठित करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय है। राजिम की पावन भूमि से सामाजिक समरसता का संदेश पूरे छत्तीसगढ़ में पहुंचेगा। उन्होंने इस निर्णय को भाजपा छत्तीसगढ़ के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक उपलब्धि बताते हुए विधायक रोहित साहू, नगर पालिका अध्यक्ष महेश यादव, उपाध्यक्ष पूर्णिमा चंद्राकर, सभी पार्षदगण एवं अभियान से जुड़े सर्व समाज के प्रतिनिधियों का अभिनंदन किया।
राजिम के मेला मैदान को मिली नई पहचान, अब कहलाएगा ‘भगवान राजीव लोचन सामाजिक समरसता मेला मैदान’ सर्वसम्मति से पारित हुआ नामकरण का प्रस्ताव, सामाजिक एकता और सर्व समाज के सम्मान का दिया संदेश राजिम 14 सितंबर। भगवान श्रीराजीवलोचन की पावन नगरी राजिम में सामाजिक समरसता को नई पहचान देने वाला महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। राजिम के प्रमुख मेला मैदान का नाम अब “भगवान राजीवलोचन सामाजिक समरसता मेला मैदान” रखने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया है। भारतीय जनता पार्टी शिक्षा प्रकोष्ठ, छत्तीसगढ़ के प्रदेश सह-संयोजक प्रोफेसर (डॉ.) संजीव कर्मकार ‘वशिष्ठ’ के प्रयास एवं प्रस्ताव तथा सर्व समाज समन्वय महासभा, गरियाबंद के संरक्षक मुन्नालाल देवदास और अध्यक्ष केशर निर्मलकर के आह्वान पर सर्व समाज के अनुमोदन के बाद यह निर्णय लिया गया। जिला शिक्षा प्रकोष्ठ के सह-संयोजक अशोक मिश्रा के अनुमोदन एवं सहयोग से नगर पालिका अध्यक्ष महेश यादव, उपाध्यक्ष पूर्णिमा चंद्राकर एवं पार्षदगणों ने मेला मैदान के नए नाम के प्रस्ताव को सर्वसम्मति प्रदान की। बताया गया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ सरकार के सुशासन, जनभागीदारी और ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना को यह निर्णय स्थानीय स्तर पर मजबूती प्रदान करता है। धार्मिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक नगरी राजिम में सभी समाजों को साथ लेकर
चलने और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। नामकरण में एकता और भाईचारे का संदेश राजिम विभिन्न समाजों की साझा आस्था और संस्कृति का केंद्र रहा है। ऐसे में भगवान राजीव लोचन से जुड़े प्रमुख मेला मैदान के नाम में ‘सामाजिक समरसता’ को शामिल करना सभी वर्गों के बीच एकता, समानता, सद्भाव और भाईचारे का संदेश देगा। यह नामकरण इस भावना को भी मजबूत करेगा कि भगवान राजीव लोचन की नगरी में सभी समाज समान हैं और सामाजिक समरसता ही समाज की वास्तविक शक्ति है। ‘यह केवल नामकरण नहीं, सामाजिक संकल्प’ प्रोफेसर (डॉ.) संजीव कर्मकार ‘वशिष्ठ’ ने इस निर्णय पर सर्व समाज समन्वय महासभा, गरियाबंद के पदाधिकारियों, समाज प्रमुखों, भाजपा कार्यकर्ताओं एवं सहयोगियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह केवल मेला मैदान के नामकरण का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, समरसता और सर्व समाज के सम्मान को प्रतिष्ठित करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय है। राजिम की पावन भूमि से सामाजिक समरसता का संदेश पूरे छत्तीसगढ़ में पहुंचेगा। उन्होंने इस निर्णय को भाजपा छत्तीसगढ़ के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक उपलब्धि बताते हुए विधायक रोहित साहू, नगर पालिका अध्यक्ष महेश यादव, उपाध्यक्ष पूर्णिमा चंद्राकर, सभी पार्षदगण एवं अभियान से जुड़े सर्व समाज के प्रतिनिधियों का अभिनंदन किया।
- 102 वर्षीय बेदूबाई ने रखा निर्जला तीजा व्रत, आस्था और परंपरा के प्रति दिखा अटूट समर्पण नवापारा-राजिम। तीजा पर्व पर नवापारा के बगदेही पारा स्थित शांति चौक में आस्था और परंपरा का अनूठा उदाहरण देखने को मिला। यहां 102 वर्षीय वृद्धा बेदूबाई अग्रवाल ने भी पूरे श्रद्धाभाव के साथ निर्जला तीजा व्रत रखा। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर पति की दीर्घायु तथा परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। बढ़ती उम्र के बावजूद बेदूबाई का तीजा पर्व के प्रति उत्साह और धार्मिक आस्था लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। परिवार के सदस्यों के अनुसार वे लंबे समय से तीजा पर्व की परंपरा का निर्वहन करती आ रही हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उन्होंने अपनी आस्था और वर्षों पुरानी परंपरा को कायम रखते हुए व्रत रखा। बेदूबाई का कहना है कि तीजा उनके लिए केवल एक धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि परिवार और समाज से जुड़े संस्कारों एवं परंपराओं का पर्व है। शिव-पार्वती की आराधना से उन्हें मानसिक शांति और आत्मिक संतोष मिलता है। स्थानीय लोगों ने कहा कि 102 वर्ष की उम्र में भी बेदूबाई द्वारा निर्जला व्रत रखना उनकी दृढ़ आस्था और संकल्प का परिचायक है। उनकी श्रद्धा नई पीढ़ी के लिए भी प्रेरणादायी है। बेदूबाई का यह समर्पण छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, पारंपरिक मान्यताओं और पारिवारिक संस्कारों से गहरे जुड़ाव की मिसाल प्रस्तुत करता है।1
- गाय के नाम पर राजनीति या वास्तव में चिंता निगम की व्यवस्था रायपुर नगर निगम की महापौर मीनल चौबे का कहना है कि सड़कों पर जो गए घूम रही है जिनके लिए अव्यवस्थाएं हो रही है उसका सीधा और सरल जिम्मेदार अगर कोई व्यक्ति है तो सबसे पहले वह व्यक्ति जो इन गायों का मालिक है वह अगर इनको खुल नहीं छोड़ेंगे तो सड़कों पर इतनी अव्यवस्थाएं नहीं फैलेगी1
- ढाबा बंद कराने की बात को लेकर घर में घुसकर तोड़फोड़ करने, मारपीट व जान से मारने की धमकी देने वाले 05 आरोपी गिरफ्तार, आर्म्स / अन्य संगीन धाराओं के तहत कार्रवाई *ढाबा बंद कराने की बात को लेकर घर में घुसकर तोड़फोड़ करने, मारपीट व जान से मारने की धमकी देने वाले 05 आरोपी गिरफ्तार, आर्म्स / अन्य संगीन धाराओं के तहत कार्रवाई* ▪️ *मुखबिर व पीड़ित की सूचना पर थाना पुलगांव / चौकी अंजोरा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घेराबंदी कर 05 आरोपियों को पकड़ा.* ▪️ *आरोपियों द्वारा ढाबा बंद करने का दबाव बनाते हुए घर में जबरन घुसकर तोड़फोड़ की गई तथा जान से मारने की धमकी दी गई.* ▪️ *आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त डंडे बरामद कर विधिवत जप्ती की कार्रवाई की गई*. ▪️ *प्रकरण में अपराध क्रमांक 0808/2026, धारा 191(2), 331(6), 296, 351(3), 324(4) बी.एन.एस. के तहत कार्रवाई कर आरोपियों को न्यायिक रिमाण्ड पर भेजा गया.* मुख्य बिंदु दिनांक 14.09.2026 को थाना पुलगांव अंतर्गत चौकी अंजोरा क्षेत्र में ढाबा संचालक को फोन पर धमकाते हुए घर में घुसकर तोड़फोड़ करने और मारपीट करने वाले आरोपियों के खिलाफ पुलिस टीम द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए 05 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. संक्षिप्त विवरण दिनांक 14.09.2026 की रात्रि में आरोपी चेतन खन्ना उर्फ सनी एवं उसके साथियों द्वारा ढाबा बंद करने को लेकर पीड़ित के मोबाईल पर लगातार फोन कर धमकाया गया. इसके पश्चात सभी आरोपी एकजुट होकर पीड़ित के किराए के मकान में जबरन घुसे, गाली-गलौज की तथा घर के बाहर रखे सामान व लाइटिंग आदि में तोड़फोड़ कर नुकसान पहुंचाया. सूचना पर थाना पुलगांव/अंजोरा पुलिस ने तत्काल वैधानिक कार्रवाई करते हुए अपराध पंजीबद्ध किया और आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमाण्ड पर भेजा. घटना स्थल काली मंदिर के पास, अंजोरा (चौकी अंजोरा, थाना पुलगांव क्षेत्र), जिला दुर्ग. गिरफ्तार आरोपियों के नाम व पते 1)सनी उर्फ चेतन खन्ना पिता स्वर्गीय अनिल खन्ना, उम्र 33 वर्ष, निवासी ग्राम पुलगांव। 2)धर्मपाल खन्ना उर्फ गोल्डी पिता स्वर्गीय अनिल खन्ना, उम्र 29 वर्ष, निवासी पुलगांव। 3)चंद्रप्रकाश खन्ना उर्फ मनी पिता स्वर्गीय अनिल खन्ना, उम्र 31 वर्ष, निवासी पुलगांव। 4)गणेश साहू पिता दीपक साहू, उम्र 22 वर्ष, निवासी अटारी नंदनवन बगलामुखी मंदिर के पास, टाटीबंध, रायपुर। 5)नीरें सुबह पिता राजेश सुबह, उम्र 26 वर्ष, साकिन चूहा पढ़ती गार्डन, जलपाईगुड़ी (पश्चिम बंगाल), हाल मुकाम- खन्ना ढाबा, जोड़ा। जप्त सामग्री घटना में प्रयुक्त डंडे। आरोपियों के मोबाइल फोन्स। दुर्ग पुलिस की अपील दुर्ग पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति में कानून अपने हाथ में न लें तथा तुरंत पुलिस को सूूचित करें। इस तरह की गैर-कानूनी गतिविधियों और हुड़दंगई करने वालों पर पुलिस द्वारा सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। —0000—1
- केसीजी जिले में पशु तस्करी पर कार्रवाई, 4 भैंसा और पिकअप जब्त साल्हेवारा थाना क्षेत्र में पुलिस ने की कार्रवाई, आरोपी गिरफ्तार, केसीजी जिले में पशु तस्करी पर कार्रवाई, 4 भैंसा और पिकअप जब्त साल्हेवारा थाना क्षेत्र में पुलिस ने की कार्रवाई, आरोपी गिरफ्तार, 15 सितंबर मंगलवार को दोपहर 1 बजे मिली जानकारी अनुसार केसीजी जिले के साल्हेवारा थाना क्षेत्र में पुलिस ने पशु तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 4 भैंसा, पिकअप वाहन और मोबाइल सहित कुल 7.88 लाख रुपए की संपत्ति जब्त की है। पुलिस ने आरोपी सुमित कुमार धुर्वे (20 वर्ष) निवासी नेवासपुर, जिला कबीरधाम को गिरफ्तार किया है। वहीं एक विधि से संघर्षरत बालक को भी न्यायालय में पेश किया गया। पुलिस के अनुसार, 13 सितंबर को मुखबिर की सूचना पर ग्राम खादी आबकारी चेक पोस्ट के पास नाकाबंदी की गई थी। इस दौरान पिकअप क्रमांक CG 04 LW 0483 को रोककर जांच की गई, जिसमें 4 भैंसा बिना चारा-पानी के क्रूरता पूर्वक भरे मिले। मवेशियों को नागपुर की ओर कत्लखाना ले जाने की आशंका थी। मामले में अपराध क्रमांक 41/2026 दर्ज कर संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई। आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया।1
- 🐘 पिथौरा मुख्य मार्ग पर हाथियों का डेरा, 28 हाथियों का दल विचरणरत कुकरीकोना–पोड़ी–पचपेड़ी–कसडोल से पिथौरा मार्ग पर वन विभाग अलर्ट बलौदाबाजार। कुकरीकोना, पोड़ी, पचपेड़ी, कसडोल होते हुए पिथौरा मुख्य मार्ग के आसपास इन दिनों 28 हाथियों का दल विचरण करता नजर आ रहा है। हाथियों की मौजूदगी से क्षेत्र में हलचल बढ़ गई है। बलौदाबाजार वन विभाग द्वारा हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है तथा मार्ग से गुजरने वाले लोगों को सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। हाथियों के मार्ग में अनावश्यक रूप से न जाने और उन्हें छेड़ने से बचने की सलाह दी गई है। वन विभाग की निगरानी के बीच हाथियों का विचरण क्षेत्रवासियों के लिए कौतूहल के साथ-साथ सतर्कता का विषय बना हुआ है।1
- तीज पर्व पर ग्राम कारी में सजा खेलों का रंग, माताओं-बहनों ने दिखाया हुनर विभिन्न मनोरंजक प्रतियोगिताओं में उमड़ा उत्साह, विजेताओं का हुआ सम्मान कारी। तीज पर्व के अवसर पर ग्राम कारी में लवली याराना ग्रुप के तत्वावधान में माताओं एवं बहनों के लिए विभिन्न खेल एवं मनोरंजक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं ने उत्साह और उमंग के साथ भागीदारी करते हुए विभिन्न प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा और खेल कौशल का प्रदर्शन किया। आयोजन के दौरान कुर्सी दौड़, गुब्बारा फुलाना,मटकी फोड़, सरगुल्ला-चम्मच, पानी डिस्पोज सहित अनेक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। प्रतियोगिताओं को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह नजर आया। प्रतिभागियों ने खेलों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और आयोजन का आनंद उठाया। प्रतियोगिताओं में विजेता रहीं माताओं एवं बहनों को आयोजन समिति की ओर से सम्मान के साथ सहयोग राशि प्रदान कर पुरस्कृत किया गया। विजेताओं के सम्मान से महिलाओं का उत्साह बढ़ा और आयोजन स्थल पर खुशी का माहौल रहा। आयोजन समिति के अनुसार तीज पर्व के अवसर पर इस आयोजन का उद्देश्य महिलाओं को मनोरंजन के साथ अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, आपसी मेल-जोल बढ़ाने तथा सामाजिक सहभागिता का अवसर उपलब्ध कराना था। लवली याराना ग्रुप की इस पहल की उपस्थित लोगों ने सराहना की।4
- छत्तीसगढ़ की बदहाल व्यवस्था के खिलाफ 7 सूत्रीय मांगों को लेकर आम आदमी पार्टी बिल छत्तीसगढ़ की बदहाल व्यवस्था के खिलाफ 7 सूत्रीय मांगों को लेकर आम आदमी पार्टी बिल्हा विधानसभा के द्वारा मुख्यमंत्री के नाम बिल्हा तहसीलदार, एस डी एस, को ज्ञापन सौंपा आज बुधवार की साम 6 बजे आम आदमी पार्टी बिल्हा विधानसभा के संजय गढ़े वाला जी से मिली जानकारी अनुसार आम आदमी पार्टी द्वारा छत्तीसगढ़ में एग्रीस्टेक और रकबा समर्पण के नाम पर किसानों से धोखा,लचर शिक्षा व्यवस्था,बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था, ख़राब सड़कें,बिजली बिल से हलाकान जनता,बढ़ता अवैध नशे का कारोबार और सड़क पर घूम रहे मवेशियों का व्यवस्थापन सहित 7 सूत्रीय मांगों को लेकर बुधवार को को बिल्हा तहसीलदार /एसडीएम/कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री जी को ज्ञापन दिया गया । बिल्हा विधानसभा के आप नेता संजय गढ़ेवाल ने कहा कि प्रदेश में किसान परेशान हैं, किसानों को इस साल भी महंगी यूरिया खाद लेना पड़ा,किसानों को एग्रीस्टेक और रकबा समर्पण के नाम पर धोखा बंद किया जाये, ताकि पिछले साल की भांति इस साल प्रदेश में किसानों को आत्महत्या ना करना पड़े और यदि ऐसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी तहसीलदार एसडीएम और कलेक्टर की होगी। गरीब बच्चों के लिए सरकारी शिक्षा सरकार पूरी तरह बर्बाद कर दी है, प्रदेश शिक्षा के मामले में 34 वें नंबर पर है जो कि शर्मनाक है। पेपर लीक सरकार रोक नहीं पा रही है, स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटीलेटर पर है, हर तरफ जर्ज़र सड़कें हैं, सड़को पर बैठे मवेशियों की जान जा रही है, बढ़े बिजली बिल से जनता त्रस्त है। बढ़ते नशे के कारोबार और मिलावटी शराब पर नियंत्रण किया जाये ।1
- ऋषि पंचमी पर राजिम के निकट ग्राम देवरी में निकली नागों की शोभायात्रा पूजा के बाद सांपों को जंगल में छोड़ने की परंपरा निभाई गई, बड़ी संख्या में शामिल हुए ग्रामीण नागों की शोभायात्रा देखने देवरी सहित आसपास के गांवों और दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पहुंचे लोग राजिम।ऋषि पंचमी पर मंगलवार को राजिम के ग्राम देवरी में वर्षों पुरानी लोकपरंपरा देखने को मिली। तंत्र-मंत्र और पारंपरिक मान्यताओं के बीच सांपों की विशेष पूजा-अर्चना कर उनकी शोभायात्रा निकाली गई। नागों की शोभायात्रा देखने देवरी सहित आसपास के गांवों और दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। पूरे आयोजन में आस्था के साथ लोगों में कौतूहल भी नजर आया। ग्रामीणों के अनुसार, ऋषि पंचमी पर देवरी में विशेष परंपरा के तहत सांपों को पकड़ा जाता है। इसके बाद गांव के सांवरा बैगा द्वारा पारंपरिक विधि-विधान और तंत्र-मंत्र के बीच उनकी पूजा की जाती है। ग्रामीणों की मान्यता है कि नाग देवता को प्रसन्न करने से गांव में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। पूजा के बाद नागों को लेकर शोभायात्रा निकाली गई। यह अटल चौक से होते हुए शीतला माता प्रांगण तक पहुंची। रास्तेभर नागों के दर्शन के लिए लोगों की भीड़ जुटी रही। तीजहारिन बहनों सहित ग्रामीणों ने श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की। ग्रामीणों का कहना है कि देवरी में नाग पूजा की यह परंपरा नई नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही है। ऋषि पंचमी आते ही आयोजन की तैयारी शुरू हो जाती है। बैगा परंपरा, तंत्र-मंत्र और नाग पूजा से जुड़ी मान्यताओं के कारण हर साल बड़ी संख्या में लोग इसे देखने पहुंचते हैं। पूजा के के बाद बाद जंगल में छोड़ते हैं ग्रामीणों के अनुसार पूजा और शोभायात्रा के बाद सांपों को सुरक्षित तरीके से जंगल में छोड़ने की परंपरा है। वे इसे नाग देवता के प्रति श्रद्धा और प्रकृति के सम्मान से जोड़ते हैं। यही परंपरा देवरी को आसपास के गांवों से अलग पहचान देती है।1