खून के रिश्ते में दरार: अंबेडकरनगर में चाचा-भतीजे के बीच हक़ की जंग, दबंगई पर उठे सवाल खून के रिश्ते, जो भरोसे और अपनापन की नींव माने जाते हैं, जब लालच और दबंगई की भेंट चढ़ जाएं तो कहानी सिर्फ विवाद की नहीं, बल्कि इंसाफ की लड़ाई बन जाती है। कुछ ऐसा ही मामला अंबेडकरनगर के राजेसुलतानपुर थाना क्षेत्र की ग्रामसभा भभौरा से सामने आया है, जहाँ चाचा-भतीजे का रिश्ता अब कटु संघर्ष में बदल चुका है। चाचा फ़िरतू ने बेखौफ अंदाज़ में दो टूक कह दिया है—“घर बनाने में मदद की तो क्या हुआ, भतीजे को एक इंच भी हिस्सा नहीं देंगे।” यह बयान सिर्फ पारिवारिक तकरार नहीं, बल्कि खुलेआम हक़ छीनने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। दूसरी ओर, भतीजा मदन न्याय की गुहार लगाते हुए कह रहा है कि उसे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए, वह केवल अपने पिता का वैध हिस्सा चाहता है। मामला यहीं तक सीमित नहीं है। आरोप है कि चाचा फ़िरतू ने मदन का घर में प्रवेश तक बंद कर दिया है, जिससे हालात और भी तनावपूर्ण हो गए हैं। जब यह विवाद पंचायत तक पहुँचा, तो पंचायत ने भी माना कि फ़िरतू भतीजे के हिस्से को हड़पने की कोशिश कर रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि चाचा फ़िरतू को किसी का कोई डर नहीं है। वह खुलेआम दावा करते फिर रहे हैं कि पुलिस और अधिकारी उनकी जेब में हैं, इसलिए उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। ऐसे बयान न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि पीड़ित को न्याय मिलने की उम्मीदों पर भी चोट करते हैं। अब मजबूर भतीजा मदन न्याय के लिए अधिकारियों के दरवाजे खटखटा रहा है। सवाल यही है—क्या सिस्टम इस दबंगई के सामने झुकेगा, या फिर सच में न्याय जीत पाएगा?
खून के रिश्ते में दरार: अंबेडकरनगर में चाचा-भतीजे के बीच हक़ की जंग, दबंगई पर उठे सवाल खून के रिश्ते, जो भरोसे और अपनापन की नींव माने जाते हैं, जब लालच और दबंगई की भेंट चढ़ जाएं तो कहानी सिर्फ विवाद की नहीं, बल्कि इंसाफ की लड़ाई बन जाती है। कुछ ऐसा ही मामला अंबेडकरनगर के राजेसुलतानपुर थाना क्षेत्र की ग्रामसभा भभौरा से सामने आया है, जहाँ चाचा-भतीजे का रिश्ता अब कटु संघर्ष में बदल चुका है। चाचा फ़िरतू ने बेखौफ अंदाज़ में दो टूक कह दिया है—“घर बनाने में मदद की तो क्या हुआ, भतीजे को एक इंच भी हिस्सा नहीं देंगे।” यह बयान सिर्फ पारिवारिक तकरार नहीं, बल्कि खुलेआम हक़ छीनने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। दूसरी ओर, भतीजा मदन न्याय की गुहार लगाते हुए कह रहा है कि उसे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए, वह केवल अपने पिता का वैध हिस्सा चाहता है। मामला यहीं तक सीमित नहीं है। आरोप है कि चाचा फ़िरतू ने मदन का घर में प्रवेश तक बंद कर दिया है, जिससे हालात और भी तनावपूर्ण हो गए हैं। जब यह विवाद पंचायत तक पहुँचा, तो पंचायत ने भी माना कि फ़िरतू भतीजे के हिस्से को हड़पने की कोशिश कर रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि चाचा फ़िरतू को किसी का कोई डर नहीं है। वह खुलेआम दावा करते फिर रहे हैं कि पुलिस और अधिकारी उनकी जेब में हैं, इसलिए उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। ऐसे बयान न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि पीड़ित को न्याय मिलने की उम्मीदों पर भी चोट करते हैं। अब मजबूर भतीजा मदन न्याय के लिए अधिकारियों के दरवाजे खटखटा रहा है। सवाल यही है—क्या सिस्टम इस दबंगई के सामने झुकेगा, या फिर सच में न्याय जीत पाएगा?
- Post by Dushyant Kumar Journalist1
- *अंबेडकरनगर* सम्मनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत दाउदपुर गांव में 10:00 बजे रात्रि को अचानक गंगाराम नाम के व्यक्ति के गौशाला में भीषण आग लग गई जिससे गौशाला में बांधे तीन मावेशी जलकर राख हो गए, ग्रामीणों द्वारा किसी तरीके से आग पर काबू पाया गया। आग लगने का कारण शार्ट सर्किट बताया जा रहा है। *ब्यूरो रिपोर्ट वैभव सिंह* ✍️2
- खून के रिश्ते में दरार: अंबेडकरनगर में चाचा-भतीजे के बीच हक़ की जंग, दबंगई पर उठे सवाल खून के रिश्ते, जो भरोसे और अपनापन की नींव माने जाते हैं, जब लालच और दबंगई की भेंट चढ़ जाएं तो कहानी सिर्फ विवाद की नहीं, बल्कि इंसाफ की लड़ाई बन जाती है। कुछ ऐसा ही मामला अंबेडकरनगर के राजेसुलतानपुर थाना क्षेत्र की ग्रामसभा भभौरा से सामने आया है, जहाँ चाचा-भतीजे का रिश्ता अब कटु संघर्ष में बदल चुका है। चाचा फ़िरतू ने बेखौफ अंदाज़ में दो टूक कह दिया है—“घर बनाने में मदद की तो क्या हुआ, भतीजे को एक इंच भी हिस्सा नहीं देंगे।” यह बयान सिर्फ पारिवारिक तकरार नहीं, बल्कि खुलेआम हक़ छीनने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। दूसरी ओर, भतीजा मदन न्याय की गुहार लगाते हुए कह रहा है कि उसे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए, वह केवल अपने पिता का वैध हिस्सा चाहता है। मामला यहीं तक सीमित नहीं है। आरोप है कि चाचा फ़िरतू ने मदन का घर में प्रवेश तक बंद कर दिया है, जिससे हालात और भी तनावपूर्ण हो गए हैं। जब यह विवाद पंचायत तक पहुँचा, तो पंचायत ने भी माना कि फ़िरतू भतीजे के हिस्से को हड़पने की कोशिश कर रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि चाचा फ़िरतू को किसी का कोई डर नहीं है। वह खुलेआम दावा करते फिर रहे हैं कि पुलिस और अधिकारी उनकी जेब में हैं, इसलिए उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। ऐसे बयान न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि पीड़ित को न्याय मिलने की उम्मीदों पर भी चोट करते हैं। अब मजबूर भतीजा मदन न्याय के लिए अधिकारियों के दरवाजे खटखटा रहा है। सवाल यही है—क्या सिस्टम इस दबंगई के सामने झुकेगा, या फिर सच में न्याय जीत पाएगा?1
- अंबेडकर नगर जिले में 24 घंटे के अंदर अलग-अलग थाना क्षेत्र में दो-दो युवकों की फंदे से लटकती हुई लाश मिली । हड़कंप मच चुका है अकबरपुर थाना क्षेत्र में जहां लावारिस एक 28 वर्षीय युवक की लाश वहीं टांडा थाना क्षेत्र में घर के अंदर पंखे से लटकता हुआ एक किशोर की लाश मिली पुलिस गुत्थी सुलझाने में जुटी1
- अम्बेडकर नगर के बसखारी ब्लॉक की ग्राम सभा बनियानी में पंचायत भवन का “जादुई शौचालय” विवादों में है। आरोप है कि शौचालय कक्ष से टंकी तक पाइप कनेक्शन ही नहीं किया गया, जिससे यह उपयोग से पहले ही बेकार हो गया। बावजूद इसके रंगाई-पुताई व मरम्मत के नाम पर लगातार भुगतान दिखाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि शौचालय जर्जर है और भवन भी अक्सर बंद रहता है। वृक्षारोपण को भी कागजों तक सीमित बताया गया। पूरे मामले में सचिव और प्रधान की भूमिका पर सवाल उठे हैं। ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।1
- _अम्बेडकरनगर (टाण्डा):_ तहसील टाण्डा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत हरैया साईं धर्म कांटा(सतनापुर–बलवा रोड) पर विधायक निधि से हो रहे सड़क निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों द्वारा यह बताया जा रहा है सड़क निर्माण स्थानीय विधायक राममूर्ति वर्मा की निधि से कराया जा रहा है, लेकिन गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण कार्य पूरी तरह मानक विहीन तरीके से किया जा रहा है। उनका कहना है कि निर्माण के दौरान तारकोल (डामर) का इस्तेमाल नाम मात्र किया जा रहा है। इतना ही नहीं, सड़क को ठीक से साफ किए बिना ही उस पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है, जिससे सड़क की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जहां-जहां सड़क में गड्ढे थे, वहां बिना बड़ी गिट्टी डाले ही काम कर दिया गया है। नतीजा, सड़क बनते ही जगह-जगह से उखड़ने और बिखरने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की हालत इतनी खराब है कि एक महीने भी ठीक से चल पाना मुश्किल लग रहा है, जबकि बरसात में इसके टिके रहने पर भी संदेह जताया जा रहा है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने निर्माण कार्य का विरोध किया तो ठेकेदार के मजदूर द्वारा उन्हें धमकाया गया और कहा गया कि “जहां जाना है जाओ, कुछ नहीं होने वाला।” इससे ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई है। लोगों का सवाल है कि आखिर लोक निर्माण विभाग इस पूरे मामले में क्या कर रहा है? क्या विभाग की ओर से निर्माण कार्य की कोई निगरानी नहीं की जा रही है, या फिर सब कुछ अधिकारियों की जानकारी में ही हो रहा है? ग्रामीणों ने यह भी आशंका जताई कि कहीं न कहीं इस मामले में मिलीभगत की वजह से ही मानकों की अनदेखी की जा रही है।फिलहाल, ग्रामीणों की नजर अब लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों पर टिकी है कि वे इस मामले में जांच कर उचित कार्रवाई करते हैं या नहीं। अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ तो यह सड़क जल्द ही खराब होकर सरकारी धन की बर्बादी का उदाहरण बन सकती है।1
- अम्बेडकर नगर जलालपुर इण्डियन गैस सिलेंडर के लिए रात तीन बजे से लाइन लगाकर खड़े ग्राहक1
- Post by Dushyant Kumar Journalist1