उत्तर प्रदेश के एटा जनपद की जलेसर तहसील के अंतर्गत स्थित पुन्हैरा माइनर के अकराबाद बम्बा की पटरी भयंकर बारिश के कारण पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे एक बड़ी दुर्घटना की आशंका जताई जा रही है। पिछले चौबीस घंटों से लगातार हो रही भारी बारिश के कारण खेतों में भरा पानी ओवरफ्लो होकर पटरी के ऊपर से बह रहा है, जिसके चलते आधी से ज्यादा पटरी कट चुकी है। इस गंभीर समस्या से आज सिंचाई विभाग के ए.ई. एटा वैभव शर्मा को फोन पर अवगत कराया गया। ए.ई. वैभव शर्मा ने सिंचाई विभाग जलेसर के जूनियर इंजीनियर अशोक शर्मा को तत्काल मौके पर पहुंचकर समस्या का निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं। इस बीच, लगातार हो रही तेज बारिश ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, जिससे क्षेत्रीय लोग पिछले चौबीस घंटों से जरूरी कामों के लिए भी अपने घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के एटा जनपद की जलेसर तहसील के अंतर्गत स्थित पुन्हैरा माइनर के अकराबाद बम्बा की पटरी भयंकर बारिश के कारण पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे एक बड़ी दुर्घटना की आशंका जताई जा रही है। पिछले चौबीस घंटों से लगातार हो रही भारी बारिश के कारण खेतों में भरा पानी ओवरफ्लो होकर पटरी के ऊपर से बह रहा है, जिसके चलते आधी से ज्यादा पटरी कट चुकी है। इस गंभीर समस्या से आज सिंचाई विभाग के ए.ई. एटा वैभव शर्मा को फोन पर अवगत कराया गया। ए.ई. वैभव शर्मा ने सिंचाई विभाग जलेसर के जूनियर इंजीनियर अशोक शर्मा को तत्काल मौके पर पहुंचकर समस्या का निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं। इस बीच, लगातार हो रही तेज बारिश ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, जिससे क्षेत्रीय लोग पिछले चौबीस घंटों से जरूरी कामों के लिए भी अपने घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।
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- एक वाहन चालक संगठन को उसके असाधारण कार्य के लिए सराहा जा रहा है, जिसे इस समय सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाला संगठन बताया गया है। इस संगठन की प्रशंसा की जा रही है क्योंकि यह देश के सभी ड्राइवरों के हितों की बात प्रमुखता से उठाता है।1
- उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में मानसून की बारिश ने एक बार फिर प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोल दी है। सहपऊ क्षेत्र के पचावारी गांव में हालात ऐसे हो गए हैं कि गलियां तालाब में तब्दील हो चुकी हैं और कई घरों तक पानी घुस गया है। इंडिया टाइम रिपोर्ट टीवी की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, लगातार बारिश के चलते गांव के कई हिस्सों में गंभीर जलभराव हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए घर से बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो गया है। सबसे चिंताजनक दृश्य तब सामने आया जब पैर में प्लास्टर बंधा एक व्यक्ति भी घुटनों तक भरे पानी को पार करने के लिए मजबूर दिखाई दिया। स्थानीय निवासियों ने स्वास्थ्य और सुरक्षा की चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि किसी मरीज या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना पड़ा तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने इस जलभराव की समस्या को लेकर पहले भी अधिकारियों से शिकायत की थी। उनके अनुसार, पहले अस्थायी तौर पर पानी निकालने की कोशिश की गई, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। इंडिया टाइम रिपोर्ट टीवी इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है। राष्ट्रवादी पार्टी के मंडल प्रभारी सनी भारत ने इस मुद्दे पर कहा है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की तो उनकी पार्टी ग्रामीणों की आवाज बनकर प्रशासन तक स्थायी जलनिकासी व्यवस्था की मांग पहुंचाएगी। समाचार लिखे जाने तक संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बताया गया है कि प्रतिक्रिया मिलने पर समाचार को अपडेट किया जाएगा।1
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- महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में भारी बारिश के कारण हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के पातालगंगा एलपीजी बॉटलिंग प्लांट से करीब 3,000 खाली और भरे हुए गैस सिलेंडर पातालगंगा नदी में बह गए हैं। स्थानीय लोग उफान के कारण इस नदी को बाणगंगा या बाढ़ गंगा भी कह रहे हैं। नदी में तैरते लाल सिलेंडरों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह घटना खालापुर और पनवेल तालुका के चावणे स्थित HPCL प्लांट परिसर की सुरक्षा दीवार के भारी बारिश और बाढ़ के दबाव के कारण ढह जाने से हुई, जिससे बाढ़ का पानी सीधे प्लांट में घुस गया और तेज बहाव के साथ सिलेंडरों को बहा ले गया। प्रशासन ने इस संबंध में एक सख्त चेतावनी और अपील जारी की है। रायगढ़ के जिलाधिकारी किशन जावले ने नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि नदी या उसके किनारों पर बहकर आए किसी भी गैस सिलेंडर के पास न जाएं। नागरिकों से उत्सुकता या मुफ्त मिलने के लालच में इन सिलेंडरों को उठाने, खोलने या घर ले जाने की कोशिश न करने की अपील की गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह ज्ञात नहीं है कि सिलेंडरों में गैस भरी है या वे किस स्थिति में हैं, इसलिए उन्हें संभालना या इस्तेमाल करना बेहद खतरनाक और जानलेवा साबित हो सकता है। यह खबर 09 जुलाई 26 को AIN नेटवर्क से प्रधान संपादक अनुज रावत द्वारा अपडेट की गई है।1