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झारखंड विधानसभा में सभी कर्मी एक शव के साथ धरने पर बैठ गए हैं। यह धरना सेंटेविटा अस्पताल पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए किया जा रहा है।

1 hr ago
user_MUKESH NATH
MUKESH NATH
चंदवा, लातेहार, झारखंड•
1 hr ago
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झारखंड विधानसभा में सभी कर्मी एक शव के साथ धरने पर बैठ गए हैं। यह धरना सेंटेविटा अस्पताल पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए किया जा रहा है।

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  • झारखंड के बालूमाथ की सड़कें अब "मौत का रास्ता" बन चुकी हैं, जहाँ दर्जनों सड़क दुर्घटनाएँ आम हैं। दिन-रात बेलगाम रफ्तार से दौड़ते हाइवा वाहनों के कारण धूल-धक्कड़ से लोग बीमार हो रहे हैं और घंटों जाम से बाज़ार त्रस्त है। जनता की लगातार उठती आवाज़ के बावजूद, जिला प्रशासन के साथ-साथ डीवीसी (DVC) और कोल माइन्स प्रबंधन ने जनता की पीड़ा को गंभीरता से नहीं समझा और न ही कोई ठोस पहल की है। इससे स्कूल जाने वाले छोटे बच्चे भय के साये में सड़क पार करने को मजबूर हैं, बुजुर्ग घर से निकलने में घबराते हैं, किसान धूल प्रदूषण से अपनी फसल और पशुधन बचाने के लिए परेशान हैं, वहीं बाज़ार क्षेत्र लगातार जाम और दुर्घटनाओं की आशंका से जूझ रहा है। जनता का आरोप है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार, जिसमें सुरक्षित वातावरण और भयमुक्त जीवन शामिल है, को उनसे धीरे-धीरे छीना जा रहा है। जनता की एकमात्र मांग यह थी कि कम-से-कम दिन के समय भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगाई जाए, ताकि स्कूली बच्चे, राहगीर और आम नागरिक सुरक्षित रह सकें। हालांकि, बार-बार आवेदन देने, विरोध प्रदर्शन करने और दुर्घटनाओं के ठोस सबूत सामने रखने के बावजूद, किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता देना ज़रूरी नहीं समझा। बालूमाथ की जनता अब गंभीर सवाल पूछ रही है कि क्या आम लोगों की जान की कोई कीमत नहीं है, क्या प्रशासन किसी और बड़ी दुर्घटना का इंतज़ार कर रहा है, और क्या कंपनियों का मुनाफा नागरिकों के जीने के संवैधानिक अधिकार से भी बड़ा हो गया है। इन गंभीर सवालों और लगातार हो रही प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ, बालूमाथ और आसपास के प्रभावित लोगों ने सभी गवाहों एवं ठोस प्रमाणों के साथ अब यह निर्णय लिया है कि इस जनहित की लड़ाई को हाईकोर्ट तक ले जाया जाएगा। इसका उद्देश्य संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जनता को मिले जीवन, सुरक्षा और स्वच्छ वातावरण के अधिकार की रक्षा करना है। इस आंदोलन को पूरे क्षेत्र के भविष्य का संघर्ष बताया जा रहा है, जो इंसानों की सुरक्षा, पशुधन की रक्षा, खेती-किसानी, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित जीवन के लिए लड़ा जाएगा। अतः, सभी प्रभावित ग्रामीणों, बुद्धिजीवियों, युवाओं, किसानों, व्यापारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों से इस जनहित आंदोलन में अधिक-से-अधिक संख्या में भागीदारी सुनिश्चित करने और स्वेच्छा से सहयोग व उचित चंदा देकर इस मुहिम को मजबूत बनाने की अपील की गई है। चेतावनी दी गई है कि अगर आज नहीं जागे, तो आने वाला समय केवल हादसों, आँसुओं और पछतावे की कहानी बनकर रह जाएगा, और अगर सरकार जल्द कार्रवाई नहीं करती तो जनता बाध्य होकर सड़कों पर उतरने का काम करेगी।
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    झारखंड के बालूमाथ की सड़कें अब "मौत का रास्ता" बन चुकी हैं, जहाँ दर्जनों सड़क दुर्घटनाएँ आम हैं। दिन-रात बेलगाम रफ्तार से दौड़ते हाइवा वाहनों के कारण धूल-धक्कड़ से लोग बीमार हो रहे हैं और घंटों जाम से बाज़ार त्रस्त है। जनता की लगातार उठती आवाज़ के बावजूद, जिला प्रशासन के साथ-साथ डीवीसी (DVC) और कोल माइन्स प्रबंधन ने जनता की पीड़ा को गंभीरता से नहीं समझा और न ही कोई ठोस पहल की है। इससे स्कूल जाने वाले छोटे बच्चे भय के साये में सड़क पार करने को मजबूर हैं, बुजुर्ग घर से निकलने में घबराते हैं, किसान धूल प्रदूषण से अपनी फसल और पशुधन बचाने के लिए परेशान हैं, वहीं बाज़ार क्षेत्र लगातार जाम और दुर्घटनाओं की आशंका से जूझ रहा है। जनता का आरोप है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार, जिसमें सुरक्षित वातावरण और भयमुक्त जीवन शामिल है, को उनसे धीरे-धीरे छीना जा रहा है।

जनता की एकमात्र मांग यह थी कि कम-से-कम दिन के समय भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगाई जाए, ताकि स्कूली बच्चे, राहगीर और आम नागरिक सुरक्षित रह सकें। हालांकि, बार-बार आवेदन देने, विरोध प्रदर्शन करने और दुर्घटनाओं के ठोस सबूत सामने रखने के बावजूद, किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता देना ज़रूरी नहीं समझा। बालूमाथ की जनता अब गंभीर सवाल पूछ रही है कि क्या आम लोगों की जान की कोई कीमत नहीं है, क्या प्रशासन किसी और बड़ी दुर्घटना का इंतज़ार कर रहा है, और क्या कंपनियों का मुनाफा नागरिकों के जीने के संवैधानिक अधिकार से भी बड़ा हो गया है।

इन गंभीर सवालों और लगातार हो रही प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ, बालूमाथ और आसपास के प्रभावित लोगों ने सभी गवाहों एवं ठोस प्रमाणों के साथ अब यह निर्णय लिया है कि इस जनहित की लड़ाई को हाईकोर्ट तक ले जाया जाएगा। इसका उद्देश्य संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जनता को मिले जीवन, सुरक्षा और स्वच्छ वातावरण के अधिकार की रक्षा करना है। इस आंदोलन को पूरे क्षेत्र के भविष्य का संघर्ष बताया जा रहा है, जो इंसानों की सुरक्षा, पशुधन की रक्षा, खेती-किसानी, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित जीवन के लिए लड़ा जाएगा। अतः, सभी प्रभावित ग्रामीणों, बुद्धिजीवियों, युवाओं, किसानों, व्यापारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों से इस जनहित आंदोलन में अधिक-से-अधिक संख्या में भागीदारी सुनिश्चित करने और स्वेच्छा से सहयोग व उचित चंदा देकर इस मुहिम को मजबूत बनाने की अपील की गई है। चेतावनी दी गई है कि अगर आज नहीं जागे, तो आने वाला समय केवल हादसों, आँसुओं और पछतावे की कहानी बनकर रह जाएगा, और अगर सरकार जल्द कार्रवाई नहीं करती तो जनता बाध्य होकर सड़कों पर उतरने का काम करेगी।
    user_Satish Kumar
    Satish Kumar
    Local News Reporter बालूमाथ, लातेहार, झारखंड•
    7 hrs ago
  • झारखंड के लोहरदगा जिले के चिरी नामा टोली में एक घटना सामने आई है, जहाँ अज्ञात लोगों ने बर पूजा का धागा जला दिया। इस कार्रवाई से धार्मिक भावनाओं को गहरा आघात पहुँचा है, और इस तरह किसी के भी धर्म को ठेस पहुँचाना बिल्कुल भी उचित नहीं बताया गया है।
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    झारखंड के लोहरदगा जिले के चिरी नामा टोली में एक घटना सामने आई है, जहाँ अज्ञात लोगों ने बर पूजा का धागा जला दिया। इस कार्रवाई से धार्मिक भावनाओं को गहरा आघात पहुँचा है, और इस तरह किसी के भी धर्म को ठेस पहुँचाना बिल्कुल भी उचित नहीं बताया गया है।
    user_Chiri mere jaan
    Chiri mere jaan
    Tour operator कुरु, लोहरदगा, झारखंड•
    7 hrs ago
  • दामोदर नदी के उद्गम स्थल पर माननीय राज्यपाल महोदय द्वारा विधि-विधान और श्रद्धा भाव के साथ पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर एक मेले का आयोजन किया गया था, जिसमें हजारों की संख्या में लोगों ने शामिल होकर अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
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    दामोदर नदी के उद्गम स्थल पर माननीय राज्यपाल महोदय द्वारा विधि-विधान और श्रद्धा भाव के साथ पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर एक मेले का आयोजन किया गया था, जिसमें हजारों की संख्या में लोगों ने शामिल होकर अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
    user_Badri Narayan Sahu
    Badri Narayan Sahu
    किसको, लोहरदगा, झारखंड•
    23 hrs ago
  • लातेहार में सलमान ज़फर खिजोरी ने अपर समाहर्ता पद का कार्यभार संभाल लिया है। पदभार ग्रहण करने के उपरांत उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पहली प्राथमिकता जनता से जुड़ी जमीन संबंधी समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने विशेष रूप से जमीन विवादों की समस्या को दूर करने का संकल्प जताया। खिजोरी ने यह भी कहा कि अंचल स्तर पर लंबित मामलों को प्रभावी ढंग से दूर कर आम लोगों को बेहतर प्रशासनिक सुविधाएँ प्रदान करने का निरंतर प्रयास किया जाएगा।
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    लातेहार में सलमान ज़फर खिजोरी ने अपर समाहर्ता पद का कार्यभार संभाल लिया है। पदभार ग्रहण करने के उपरांत उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पहली प्राथमिकता जनता से जुड़ी जमीन संबंधी समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने विशेष रूप से जमीन विवादों की समस्या को दूर करने का संकल्प जताया। खिजोरी ने यह भी कहा कि अंचल स्तर पर लंबित मामलों को प्रभावी ढंग से दूर कर आम लोगों को बेहतर प्रशासनिक सुविधाएँ प्रदान करने का निरंतर प्रयास किया जाएगा।
    user_Manoj dutt dev
    Manoj dutt dev
    Local News Reporter लातेहार, लातेहार, झारखंड•
    3 hrs ago
  • फिलहाल, एक तालाब में सुंदरीकरण का काम चल रहा है, लेकिन इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, यह सुंदरीकरण गलत तरीके से किया जा रहा है, जिस पर चिंता व्यक्त की जा रही है।
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    फिलहाल, एक तालाब में सुंदरीकरण का काम चल रहा है, लेकिन इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, यह सुंदरीकरण गलत तरीके से किया जा रहा है, जिस पर चिंता व्यक्त की जा रही है।
    user_AAM JANATA
    AAM JANATA
    लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
    9 hrs ago
  • लातेहार जिले के ग्राम रिचूघुटा में हिंडालको बॉक्साइट साइडिंग के समीप ग्रामीणों, मजदूरों और बेरोजगार युवाओं का आक्रोश फूट पड़ा। हजारों की संख्या में एकजुट होकर प्रदर्शनकारियों ने हिंडालको कंपनी और प्रस्तावित कोयला साइडिंग परियोजना पर स्थानीय लोगों की अनदेखी, बढ़ती बेरोजगारी, प्रदूषण और मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखने का गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी क्षेत्र के संसाधनों का तो उपयोग कर रही है, लेकिन स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के बजाय बाहरी लोगों को काम पर रख रही है। साथ ही, पास में बन रही कोयला साइडिंग का निर्माण लगभग पूरा होने के बावजूद किसी भी स्थानीय मजदूर को रोजगार नहीं मिला है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता दी जाए, लोडिंग-अनलोडिंग का काम स्थानीय मजदूरों को मिले, तथा गांव में स्कूल, अस्पताल, एंबुलेंस और बेहतर सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले महीनों में डीवीसी द्वारा तुबेद क्षेत्र से कोयला डंप किए जाने से इलाके में भारी प्रदूषण फैलेगा, जिसका सीधा असर कुओं, नदियों, तालाबों और खेती पर पड़ेगा। कोयले की ढुलाई से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने और बच्चों व ग्रामीणों को परेशानी होने की आशंका भी जताई गई, जिसके मद्देनजर कोयला साइडिंग को आबादी से दूर स्थानांतरित करने और बायपास रोड से कोयला परिवहन करने की मांग उठाई गई ताकि गांवों तक धूल और प्रदूषण न पहुंचे। सभा को संबोधित करते हुए विधायक प्रकाश राम ने कंपनी पर ग्रामीणों की उपेक्षा का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि जब तक स्थानीय लोगों को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और सीएसआर फंड से मिलने वाली सुविधाओं की गारंटी नहीं दी जाती, तब तक ग्रामीण कोयला गिराने नहीं देंगे। उन्होंने जरूरत पड़ने पर सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करने की बात कही। वहीं विधायक प्रतिनिधि पवन कुमार ने हिंडालको कंपनी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी भी मजदूरों के स्वास्थ्य का ख्याल रखती थी, लेकिन यह भारतीय कंपनी ग्रामीणों के साथ उससे भी बदतर व्यवहार कर रही है। उन्होंने डीवीसी और कंपनी से ग्रामीणों का विश्वास जीतने, रोजगार और सुविधाएं देने की अपील करते हुए आंदोलन को और उग्र करने की चेतावनी दी। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर जन आंदोलन किया जाएगा।
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    लातेहार जिले के ग्राम रिचूघुटा में हिंडालको बॉक्साइट साइडिंग के समीप ग्रामीणों, मजदूरों और बेरोजगार युवाओं का आक्रोश फूट पड़ा। हजारों की संख्या में एकजुट होकर प्रदर्शनकारियों ने हिंडालको कंपनी और प्रस्तावित कोयला साइडिंग परियोजना पर स्थानीय लोगों की अनदेखी, बढ़ती बेरोजगारी, प्रदूषण और मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखने का गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी क्षेत्र के संसाधनों का तो उपयोग कर रही है, लेकिन स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के बजाय बाहरी लोगों को काम पर रख रही है। साथ ही, पास में बन रही कोयला साइडिंग का निर्माण लगभग पूरा होने के बावजूद किसी भी स्थानीय मजदूर को रोजगार नहीं मिला है।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता दी जाए, लोडिंग-अनलोडिंग का काम स्थानीय मजदूरों को मिले, तथा गांव में स्कूल, अस्पताल, एंबुलेंस और बेहतर सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले महीनों में डीवीसी द्वारा तुबेद क्षेत्र से कोयला डंप किए जाने से इलाके में भारी प्रदूषण फैलेगा, जिसका सीधा असर कुओं, नदियों, तालाबों और खेती पर पड़ेगा। कोयले की ढुलाई से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने और बच्चों व ग्रामीणों को परेशानी होने की आशंका भी जताई गई, जिसके मद्देनजर कोयला साइडिंग को आबादी से दूर स्थानांतरित करने और बायपास रोड से कोयला परिवहन करने की मांग उठाई गई ताकि गांवों तक धूल और प्रदूषण न पहुंचे।

सभा को संबोधित करते हुए विधायक प्रकाश राम ने कंपनी पर ग्रामीणों की उपेक्षा का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि जब तक स्थानीय लोगों को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और सीएसआर फंड से मिलने वाली सुविधाओं की गारंटी नहीं दी जाती, तब तक ग्रामीण कोयला गिराने नहीं देंगे। उन्होंने जरूरत पड़ने पर सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करने की बात कही। वहीं विधायक प्रतिनिधि पवन कुमार ने हिंडालको कंपनी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी भी मजदूरों के स्वास्थ्य का ख्याल रखती थी, लेकिन यह भारतीय कंपनी ग्रामीणों के साथ उससे भी बदतर व्यवहार कर रही है। उन्होंने डीवीसी और कंपनी से ग्रामीणों का विश्वास जीतने, रोजगार और सुविधाएं देने की अपील करते हुए आंदोलन को और उग्र करने की चेतावनी दी। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर जन आंदोलन किया जाएगा।
    user_Nihit Kumar
    Nihit Kumar
    Latehar, Jharkhand•
    10 hrs ago
  • पटना के रूपसपुर स्थित 'हिडन विला' होटल एक गंभीर आपराधिक मामले को लेकर इन दिनों सुर्खियों में है। इस होटल में एक युवती के साथ छेड़खानी और बदसलूकी का मामला सामने आया है, जिसकी गंभीरता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना युवती के पिता के सामने हुई। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई की है। होटल के मैनेजर रोहित और स्टाफ काजू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। इसके अतिरिक्त, पुलिस ने मुख्य आरोपी को भी पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। जांच के दौरान होटल के मालिकाना हक को लेकर भी चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। खबरों के अनुसार, इस होटल के एक नहीं बल्कि पाँच अलग-अलग मालिक होने का पता चला है, जिसकी आगे और छानबीन की जा रही है। यह होटल पटना के रूपसपुर/दानापुर इलाके (कलिकेत नगर, आरपीएस लॉ कॉलेज के पास) में स्थित है, और यह मामला स्थानीय खबरों व सोशल मीडिया पर काफी चर्चित है।
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    पटना के रूपसपुर स्थित 'हिडन विला' होटल एक गंभीर आपराधिक मामले को लेकर इन दिनों सुर्खियों में है। इस होटल में एक युवती के साथ छेड़खानी और बदसलूकी का मामला सामने आया है, जिसकी गंभीरता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना युवती के पिता के सामने हुई।

पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई की है। होटल के मैनेजर रोहित और स्टाफ काजू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। इसके अतिरिक्त, पुलिस ने मुख्य आरोपी को भी पहले ही गिरफ्तार कर लिया था।

जांच के दौरान होटल के मालिकाना हक को लेकर भी चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। खबरों के अनुसार, इस होटल के एक नहीं बल्कि पाँच अलग-अलग मालिक होने का पता चला है, जिसकी आगे और छानबीन की जा रही है। यह होटल पटना के रूपसपुर/दानापुर इलाके (कलिकेत नगर, आरपीएस लॉ कॉलेज के पास) में स्थित है, और यह मामला स्थानीय खबरों व सोशल मीडिया पर काफी चर्चित है।
    user_Er KHAN Sir
    Er KHAN Sir
    लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
    10 hrs ago
  • झारखंड में एक बड़े 'बेंच घोटाले' का आरोप सामने आया है, जहाँ दावा है कि 15वें वित्त मद से खर्च किए गए ₹1.04 करोड़ में गंभीर वित्तीय अनियमितताएँ हुई हैं। इस मामले में, ₹4,500 की एक बेंच को अत्यधिक कीमत पर, यानी ₹18,800 में खरीदा गया है। इस कथित धांधली के कारण पंचायतों में कुल ₹79 लाख की गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है। भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष बंसी यादव ने इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है।
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    झारखंड में एक बड़े 'बेंच घोटाले' का आरोप सामने आया है, जहाँ दावा है कि 15वें वित्त मद से खर्च किए गए ₹1.04 करोड़ में गंभीर वित्तीय अनियमितताएँ हुई हैं। इस मामले में, ₹4,500 की एक बेंच को अत्यधिक कीमत पर, यानी ₹18,800 में खरीदा गया है।

इस कथित धांधली के कारण पंचायतों में कुल ₹79 लाख की गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है। भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष बंसी यादव ने इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है।
    user_Satish Kumar
    Satish Kumar
    Local News Reporter बालूमाथ, लातेहार, झारखंड•
    7 hrs ago
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