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फिलहाल, एक तालाब में सुंदरीकरण का काम चल रहा है, लेकिन इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, यह सुंदरीकरण गलत तरीके से किया जा रहा है, जिस पर चिंता व्यक्त की जा रही है।
AAM JANATA
फिलहाल, एक तालाब में सुंदरीकरण का काम चल रहा है, लेकिन इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, यह सुंदरीकरण गलत तरीके से किया जा रहा है, जिस पर चिंता व्यक्त की जा रही है।
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- दिल्ली में आदिवासी समाज ने एक प्रमुख मांग उठाई है कि यदि कोई व्यक्ति अपना धर्म बदलता है, तो उसका अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा समाप्त कर दिया जाना चाहिए। बताया जा रहा है कि इस मांग को लेकर कथित तौर पर लगभग 10 लाख आदिवासी समाज के सदस्य दिल्ली में एकत्र हुए हैं। यह मांग मुख्य रूप से ईसाई और मुस्लिम धर्मों में होने वाले धर्मांतरण के संदर्भ में है।1
- लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड मुख्यालय के मस्जिद मोहल्ला में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब झामुमो नेता गुलाम अशगर के घर के ऊपर से गुजर रहा 11 हजार वोल्ट का हाईटेंशन बिजली तार अचानक टूटकर उनकी छत पर गिर पड़ा। गनीमत रही कि घटना के समय घर में मौजूद सभी सदस्य बाल-बाल बच गए और कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन इस घटना से पूरे मोहल्ले में दहशत फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों ने बताया कि यह हाईटेंशन तार लंबे समय से घरों के ऊपर से गुजर रहा था और इसे हटाने की मांग कई बार बिजली विभाग से की गई थी, परंतु विभाग ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। पीड़ित गुलाम अशगर ने स्वयं पूर्व में कई बार विभाग को आवेदन देकर तार हटाने की मांग की थी, जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। परिजनों ने बिजली विभाग पर लापरवाही का सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि जर्जर और नीचे झूल रहे तारों के कारण हमेशा खतरा बना रहता था। इस घटना के बाद मोहल्ले में भय और आक्रोश का माहौल व्याप्त है। स्थानीय नागरिकों ने बिजली विभाग से जर्जर तार को तत्काल हटाने, वैकल्पिक लाइन की व्यवस्था करने और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा जांच अभियान चलाने की मांग की है, साथ ही चेतावनी दी है कि जल्द कार्रवाई न होने पर विभाग के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा। इस गंभीर समस्या को गंभीरता से लेते हुए भाजपा चतरा लोकसभा सांसद के बरवाडीह प्रखंड प्रतिनिधि दीपक राज ने दूरभाष पर सांसद कालीचरण सिंह से वार्ता की। सांसद कालीचरण सिंह ने मोहल्लेवासियों को आश्वस्त किया है कि उनका 27 मई को बरवाडीह दौरा प्रस्तावित है, जिसके दौरान वे स्वयं क्षेत्र का निरीक्षण कर स्थानीय लोगों से मुलाकात करेंगे। इसके अतिरिक्त, उन्होंने बताया कि 30 मई को वे लातेहार में संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश देंगे, ताकि इस समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।1
- गुमला के सिसई प्रखंड से उत्तर प्रदेश के बनारस स्थित एक ईंट भट्ठे में काम करने गए मज़दूरों के साथ अमानवीय व्यवहार, मारपीट और बकाया मजदूरी का भुगतान न किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। बनारस से वापस लौटे पीड़ित मज़दूरों ने अपनी आपबीती समाजसेवी संजय वर्मा को सुनाई, जिसके बाद उनके नेतृत्व में मज़दूरों ने श्रम विभाग गुमला में शिकायत दर्ज कराई है। सिसई के इन मज़दूरों ने बनारस के 'सागर ब्रिक्स ईंट भट्ठा' के मालिक और एक स्थानीय एजेंट पर बंधक बनाकर दिन-रात काम कराने, मारपीट करने और बाल मज़दूरी कराने के साथ-साथ तय वेतन न देने का आरोप लगाया है। पीड़ित मज़दूर सिसई के लकेया बांसटोली निवासी जगरनाथ तुरी ने बताया कि अक्टूबर 2025 में (यह तिथि मूल पाठ में दी गई है) एक स्थानीय एजेंट ने लगभग 20 मज़दूरों को 15 हज़ार रुपये मासिक वेतन का लालच देकर भट्ठे पर ले गया था, लेकिन वहां उन्हें गुज़ारे के नाम पर मात्र 1500 रुपये दिए जाते थे और उनसे कड़ी मेहनत कराई जाती थी। मज़दूरों का आरोप है कि बकाया मज़दूरी मांगने पर भट्ठा मालिक डब्लू सिंह गाली-गलौज और मारपीट करता था। उन्होंने यह भी बताया कि ईंट भट्ठे में नाबालिग बच्चों से भी जबरन काम कराया जाता था और उनके साथ भी मारपीट की जाती थी, जिससे कई मज़दूर प्रताड़ना से परेशान होकर पहले ही वहां से भाग निकले थे। जगरनाथ तुरी सहित चार मज़दूरों ने किसी तरह 6 माह 15 दिन तक वहां काम किया, जिसके बाद भट्ठा मालिक ने उन्हें भी बिना मज़दूरी दिए मारपीट कर भगा दिया। वापस लौटने के लिए पैसे न होने पर, उन्होंने किसी दूसरे ईंट भट्ठे में एक सप्ताह काम करके पैसे जुटाए और फिर सिसई लौटे। पीड़ित मज़दूरों का कहना है कि उनके चार मज़दूरों के कुल 3 लाख 90 हज़ार रुपये की मज़दूरी भट्ठा मालिक के पास बकाया है। उन्होंने श्रम अधीक्षक से भट्ठा मालिक और एजेंट के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और उनकी बकाया राशि दिलाने की मांग की है। समाजसेवी संजय वर्मा ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गुमला ज़िले के मज़दूरों के साथ दूसरे राज्यों में ऐसी अमानवीय घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिसमें मारपीट और बकाया मजदूरी न दिए जाने के मामले पहले भी डिब्रुगढ़, असम से सामने आए थे। उन्होंने इन घटनाओं के लिए स्थानीय एजेंटों को सबसे अधिक दोषी ठहराया, जो अपनी मोटी कमाई के लालच में भोले-भाले गरीब मज़दूरों को पैसे का लालच देकर दूसरे राज्यों में ले जाते हैं और उन्हें 'बेचने' का काम करते हैं। वर्मा ने बताया कि इन एजेंटों के पास मज़दूर भेजने का कोई वैध दस्तावेज़ या लाइसेंस नहीं है, फिर भी वे धड़ल्ले से ऐसे गैर-कानूनी कार्यों में लिप्त हैं, जो सीधे तौर पर मानव तस्करी से जुड़ा है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि सख्ती दिखाते हुए इन एजेंटों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।3
- रांची में एक शातिर चोर ने चोरी की एक अजीबोगरीब घटना को अंजाम दिया है। चोर ने पहले सामान का बिल बनवाया, फिर उसे अपनी गाड़ी में रखा और उसके बाद मौके से रफूचक्कर हो गया। यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है।1
- बरवाडीह प्रखंड मुख्यालय के मस्जिद मोहल्ला में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब झामुमो नेता गुलाम अशगर के घर के ऊपर से गुजर रहा 11 हजार वोल्ट का हाईटेंशन बिजली का तार अचानक टूटकर छत पर गिर पड़ा। गनीमत रही कि इस घटना के वक्त परिवार के सदस्य बाल-बाल बच गए, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तार तेज आवाज के साथ टूटा, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई और आसपास के लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। परिजनों ने बिजली विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है, उनका कहना है कि बिजली विभाग की लापरवाही के कारण कभी भी बड़ी जनहानि हो सकती थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि लंबे समय से हाईटेंशन तार घरों के ऊपर से गुजर रहा है और इसे हटाने की मांग कई बार बिजली विभाग से की जा चुकी है, लेकिन विभाग ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। लोगों ने बताया कि तार काफी नीचे झूल रहा था, जिससे हमेशा खतरा बना रहता था। इस घटना के बाद मोहल्ले में लोगों में भारी आक्रोश देखा गया। स्थानीय नागरिकों ने बिजली विभाग से तत्काल जर्जर तार हटाने, वैकल्पिक लाइन की व्यवस्था करने और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा जांच अभियान चलाने की मांग की है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो विभाग के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।1
- झारखंड के बालूमाथ की सड़कें अब "मौत का रास्ता" बन चुकी हैं, जहाँ दर्जनों सड़क दुर्घटनाएँ आम हैं। दिन-रात बेलगाम रफ्तार से दौड़ते हाइवा वाहनों के कारण धूल-धक्कड़ से लोग बीमार हो रहे हैं और घंटों जाम से बाज़ार त्रस्त है। जनता की लगातार उठती आवाज़ के बावजूद, जिला प्रशासन के साथ-साथ डीवीसी (DVC) और कोल माइन्स प्रबंधन ने जनता की पीड़ा को गंभीरता से नहीं समझा और न ही कोई ठोस पहल की है। इससे स्कूल जाने वाले छोटे बच्चे भय के साये में सड़क पार करने को मजबूर हैं, बुजुर्ग घर से निकलने में घबराते हैं, किसान धूल प्रदूषण से अपनी फसल और पशुधन बचाने के लिए परेशान हैं, वहीं बाज़ार क्षेत्र लगातार जाम और दुर्घटनाओं की आशंका से जूझ रहा है। जनता का आरोप है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार, जिसमें सुरक्षित वातावरण और भयमुक्त जीवन शामिल है, को उनसे धीरे-धीरे छीना जा रहा है। जनता की एकमात्र मांग यह थी कि कम-से-कम दिन के समय भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगाई जाए, ताकि स्कूली बच्चे, राहगीर और आम नागरिक सुरक्षित रह सकें। हालांकि, बार-बार आवेदन देने, विरोध प्रदर्शन करने और दुर्घटनाओं के ठोस सबूत सामने रखने के बावजूद, किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता देना ज़रूरी नहीं समझा। बालूमाथ की जनता अब गंभीर सवाल पूछ रही है कि क्या आम लोगों की जान की कोई कीमत नहीं है, क्या प्रशासन किसी और बड़ी दुर्घटना का इंतज़ार कर रहा है, और क्या कंपनियों का मुनाफा नागरिकों के जीने के संवैधानिक अधिकार से भी बड़ा हो गया है। इन गंभीर सवालों और लगातार हो रही प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ, बालूमाथ और आसपास के प्रभावित लोगों ने सभी गवाहों एवं ठोस प्रमाणों के साथ अब यह निर्णय लिया है कि इस जनहित की लड़ाई को हाईकोर्ट तक ले जाया जाएगा। इसका उद्देश्य संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जनता को मिले जीवन, सुरक्षा और स्वच्छ वातावरण के अधिकार की रक्षा करना है। इस आंदोलन को पूरे क्षेत्र के भविष्य का संघर्ष बताया जा रहा है, जो इंसानों की सुरक्षा, पशुधन की रक्षा, खेती-किसानी, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित जीवन के लिए लड़ा जाएगा। अतः, सभी प्रभावित ग्रामीणों, बुद्धिजीवियों, युवाओं, किसानों, व्यापारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों से इस जनहित आंदोलन में अधिक-से-अधिक संख्या में भागीदारी सुनिश्चित करने और स्वेच्छा से सहयोग व उचित चंदा देकर इस मुहिम को मजबूत बनाने की अपील की गई है। चेतावनी दी गई है कि अगर आज नहीं जागे, तो आने वाला समय केवल हादसों, आँसुओं और पछतावे की कहानी बनकर रह जाएगा, और अगर सरकार जल्द कार्रवाई नहीं करती तो जनता बाध्य होकर सड़कों पर उतरने का काम करेगी।1
- सोशल मीडिया पर लोहरदगा से एक हैरान कर देने वाला सवाल वायरल हो रहा है, जिसमें सीधे तौर पर पूछा गया है कि क्या ईसाई और आदिवासी 'एक ही मां के औलाद' हैं। यह पोस्ट ईसाई और आदिवासी पहचान के बीच के संबंध पर एक तीव्र और विवादास्पद प्रश्न उठाता है, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।1
- बिशुनपुर प्रखंड के पूर्व प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) सुलेमान मुंडरी ने महुआडांड में नए अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) के रूप में अपना पदभार ग्रहण कर लिया है। प्रशासनिक सेवा में यह उनकी पहली एसडीएम नियुक्ति है, जिसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। अपने सरल स्वभाव, मृदुभाषी व्यक्तित्व और कर्मठ कार्यशैली के लिए लोकप्रिय रहे मुंडरी की इस नई नियुक्ति से क्षेत्रवासियों में भारी उत्साह और खुशी का माहौल है। पदभार ग्रहण करने के बाद एक विशेष इंटरव्यू में, नए एसडीएम सुलेमान मुंडरी ने महुआडांड की जनता को 'जोहार' कहकर अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता क्षेत्र में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखना है, जिसे महुआडांड के शांतिपूर्ण माहौल में पूरी तरह से कायम रखा जाएगा। दूसरी बड़ी प्राथमिकता विकास कार्यों को गति देना है, जिसके लिए ब्लॉक, अंचल और अनुमंडल प्रशासन मिलकर, जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार अधिकतम प्रयास करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि आम लोगों की समस्याओं और मुख्य मुद्दों को गंभीरता से सुना जाएगा तथा जनता के सक्रिय सहयोग से ही विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। एसडीएम मुंडरी ने क्षेत्र की जनता को बेझिझक होकर अपनी बात रखने का संदेश दिया है। उन्होंने महुआडांड की आम जनता से बिना किसी संकोच के उनसे मिलने, अपनी समस्याएं रखने और क्षेत्र की बेहतरी के लिए सुझाव साझा करने का आग्रह किया है, जिससे स्थानीय समस्याओं को करीब से जानने और उनके त्वरित व उचित समाधान निकालने में मदद मिलेगी। सुलेमान मुंडरी के पदभार ग्रहण करने पर महुआडांड अनुमंडल सांसद प्रतिनिधी संजय जायसवाल, भाजपा मंडल के पश्चिमी अध्यक्ष अमित कुमार जायसवाल, पूर्वी मंडल अध्यक्ष प्रशांत सिंह, नेतरहाट होटल संघ के सर्वेश प्रसाद, विनय प्रसाद, हेमंत प्रसाद और बिट्टू प्रसाद सहित कई गणमान्य लोगों ने खुशी जाहिर की। नेतरहाट के मुखिया राम विष्णु नगेसिया, गजेंद्र किसान, तेज नारायण किसान सहित दर्जनों स्थानीय नागरिकों ने उन्हें बुके देकर बधाई दी और सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं भी दीं। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि उनके पिछले प्रशासनिक अनुभवों और कार्यकुशलता का लाभ इस पूरे अनुमंडल को मिलेगा।1
- झारखंड में एक बड़े 'बेंच घोटाले' का आरोप सामने आया है, जहाँ दावा है कि 15वें वित्त मद से खर्च किए गए ₹1.04 करोड़ में गंभीर वित्तीय अनियमितताएँ हुई हैं। इस मामले में, ₹4,500 की एक बेंच को अत्यधिक कीमत पर, यानी ₹18,800 में खरीदा गया है। इस कथित धांधली के कारण पंचायतों में कुल ₹79 लाख की गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है। भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष बंसी यादव ने इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है।1