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दिल्ली में आदिवासी समाज ने एक प्रमुख मांग उठाई है कि यदि कोई व्यक्ति अपना धर्म बदलता है, तो उसका अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा समाप्त कर दिया जाना चाहिए। बताया जा रहा है कि इस मांग को लेकर कथित तौर पर लगभग 10 लाख आदिवासी समाज के सदस्य दिल्ली में एकत्र हुए हैं। यह मांग मुख्य रूप से ईसाई और मुस्लिम धर्मों में होने वाले धर्मांतरण के संदर्भ में है।
AAM JANATA
दिल्ली में आदिवासी समाज ने एक प्रमुख मांग उठाई है कि यदि कोई व्यक्ति अपना धर्म बदलता है, तो उसका अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा समाप्त कर दिया जाना चाहिए। बताया जा रहा है कि इस मांग को लेकर कथित तौर पर लगभग 10 लाख आदिवासी समाज के सदस्य दिल्ली में एकत्र हुए हैं। यह मांग मुख्य रूप से ईसाई और मुस्लिम धर्मों में होने वाले धर्मांतरण के संदर्भ में है।
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- सवाल पूछे जाने पर एक भाजपा नेता ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत को आज़ादी मिलने के इतने समय बाद भी अब तक सड़क का निर्माण क्यों नहीं हो पाया था। उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि जब राज्यपाल महोदय को आना था, तो वही सड़क मात्र एक दिन के भीतर बनकर तैयार हो गई।1
- बिशुनपुर प्रखंड के पूर्व प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) सुलेमान मुंडरी ने महुआडांड में नए अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) के रूप में अपना पदभार ग्रहण कर लिया है। प्रशासनिक सेवा में यह उनकी पहली एसडीएम नियुक्ति है, जिसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। अपने सरल स्वभाव, मृदुभाषी व्यक्तित्व और कर्मठ कार्यशैली के लिए लोकप्रिय रहे मुंडरी की इस नई नियुक्ति से क्षेत्रवासियों में भारी उत्साह और खुशी का माहौल है। पदभार ग्रहण करने के बाद एक विशेष इंटरव्यू में, नए एसडीएम सुलेमान मुंडरी ने महुआडांड की जनता को 'जोहार' कहकर अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता क्षेत्र में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखना है, जिसे महुआडांड के शांतिपूर्ण माहौल में पूरी तरह से कायम रखा जाएगा। दूसरी बड़ी प्राथमिकता विकास कार्यों को गति देना है, जिसके लिए ब्लॉक, अंचल और अनुमंडल प्रशासन मिलकर, जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार अधिकतम प्रयास करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि आम लोगों की समस्याओं और मुख्य मुद्दों को गंभीरता से सुना जाएगा तथा जनता के सक्रिय सहयोग से ही विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। एसडीएम मुंडरी ने क्षेत्र की जनता को बेझिझक होकर अपनी बात रखने का संदेश दिया है। उन्होंने महुआडांड की आम जनता से बिना किसी संकोच के उनसे मिलने, अपनी समस्याएं रखने और क्षेत्र की बेहतरी के लिए सुझाव साझा करने का आग्रह किया है, जिससे स्थानीय समस्याओं को करीब से जानने और उनके त्वरित व उचित समाधान निकालने में मदद मिलेगी। सुलेमान मुंडरी के पदभार ग्रहण करने पर महुआडांड अनुमंडल सांसद प्रतिनिधी संजय जायसवाल, भाजपा मंडल के पश्चिमी अध्यक्ष अमित कुमार जायसवाल, पूर्वी मंडल अध्यक्ष प्रशांत सिंह, नेतरहाट होटल संघ के सर्वेश प्रसाद, विनय प्रसाद, हेमंत प्रसाद और बिट्टू प्रसाद सहित कई गणमान्य लोगों ने खुशी जाहिर की। नेतरहाट के मुखिया राम विष्णु नगेसिया, गजेंद्र किसान, तेज नारायण किसान सहित दर्जनों स्थानीय नागरिकों ने उन्हें बुके देकर बधाई दी और सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं भी दीं। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि उनके पिछले प्रशासनिक अनुभवों और कार्यकुशलता का लाभ इस पूरे अनुमंडल को मिलेगा।1
- गुमला के सिसई प्रखंड से उत्तर प्रदेश के बनारस स्थित एक ईंट भट्ठे में काम करने गए मज़दूरों के साथ अमानवीय व्यवहार, मारपीट और बकाया मजदूरी का भुगतान न किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। बनारस से वापस लौटे पीड़ित मज़दूरों ने अपनी आपबीती समाजसेवी संजय वर्मा को सुनाई, जिसके बाद उनके नेतृत्व में मज़दूरों ने श्रम विभाग गुमला में शिकायत दर्ज कराई है। सिसई के इन मज़दूरों ने बनारस के 'सागर ब्रिक्स ईंट भट्ठा' के मालिक और एक स्थानीय एजेंट पर बंधक बनाकर दिन-रात काम कराने, मारपीट करने और बाल मज़दूरी कराने के साथ-साथ तय वेतन न देने का आरोप लगाया है। पीड़ित मज़दूर सिसई के लकेया बांसटोली निवासी जगरनाथ तुरी ने बताया कि अक्टूबर 2025 में (यह तिथि मूल पाठ में दी गई है) एक स्थानीय एजेंट ने लगभग 20 मज़दूरों को 15 हज़ार रुपये मासिक वेतन का लालच देकर भट्ठे पर ले गया था, लेकिन वहां उन्हें गुज़ारे के नाम पर मात्र 1500 रुपये दिए जाते थे और उनसे कड़ी मेहनत कराई जाती थी। मज़दूरों का आरोप है कि बकाया मज़दूरी मांगने पर भट्ठा मालिक डब्लू सिंह गाली-गलौज और मारपीट करता था। उन्होंने यह भी बताया कि ईंट भट्ठे में नाबालिग बच्चों से भी जबरन काम कराया जाता था और उनके साथ भी मारपीट की जाती थी, जिससे कई मज़दूर प्रताड़ना से परेशान होकर पहले ही वहां से भाग निकले थे। जगरनाथ तुरी सहित चार मज़दूरों ने किसी तरह 6 माह 15 दिन तक वहां काम किया, जिसके बाद भट्ठा मालिक ने उन्हें भी बिना मज़दूरी दिए मारपीट कर भगा दिया। वापस लौटने के लिए पैसे न होने पर, उन्होंने किसी दूसरे ईंट भट्ठे में एक सप्ताह काम करके पैसे जुटाए और फिर सिसई लौटे। पीड़ित मज़दूरों का कहना है कि उनके चार मज़दूरों के कुल 3 लाख 90 हज़ार रुपये की मज़दूरी भट्ठा मालिक के पास बकाया है। उन्होंने श्रम अधीक्षक से भट्ठा मालिक और एजेंट के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और उनकी बकाया राशि दिलाने की मांग की है। समाजसेवी संजय वर्मा ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गुमला ज़िले के मज़दूरों के साथ दूसरे राज्यों में ऐसी अमानवीय घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिसमें मारपीट और बकाया मजदूरी न दिए जाने के मामले पहले भी डिब्रुगढ़, असम से सामने आए थे। उन्होंने इन घटनाओं के लिए स्थानीय एजेंटों को सबसे अधिक दोषी ठहराया, जो अपनी मोटी कमाई के लालच में भोले-भाले गरीब मज़दूरों को पैसे का लालच देकर दूसरे राज्यों में ले जाते हैं और उन्हें 'बेचने' का काम करते हैं। वर्मा ने बताया कि इन एजेंटों के पास मज़दूर भेजने का कोई वैध दस्तावेज़ या लाइसेंस नहीं है, फिर भी वे धड़ल्ले से ऐसे गैर-कानूनी कार्यों में लिप्त हैं, जो सीधे तौर पर मानव तस्करी से जुड़ा है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि सख्ती दिखाते हुए इन एजेंटों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।3
- दिल्ली के लाल किला में आयोजित जनजाति संस्कृति महा संगम कार्यक्रम में झारखंड के लातेहार जिले के पोचरा, माजर गांव निवासी सत्येंद्र सिंह खेरवार ने जनजाति हित, संस्कृति और समाज के उत्थान पर एक प्रभावशाली उद्बोधन दिया। इस कार्यक्रम में देश के गृहमंत्री अमित शाह भी मंच पर उपस्थित थे, जिन्होंने सत्येंद्र सिंह की बातों को गंभीरता से सुना। अपने संबोधन के दौरान, अमित शाह ने कई बार सत्येंद्र सिंह का नाम लेकर उनके कार्यों की सराहना की, जिससे लातेहार का नाम राष्ट्रीय मंच पर गूंज उठा। सत्येंद्र सिंह ने लातेहार जैसे छोटे जिले के माजर गांव से निकलकर एक संगठन के माध्यम से अपनी राष्ट्रीय पहचान बनाई है। उनका प्रारंभिक जीवन वनवासी कल्याण केंद्र में प्रखंड संगठन मंत्री के रूप में शुरू हुआ था। इस दौरान उन्हें स्व. डॉ. आर.पी. गुप्ता और उनकी धर्मपत्नी स्व. कुंती देवी का हर कदम पर मार्गदर्शन और सहयोग मिला। आज वे राष्ट्रीय स्तर पर जनजाति समाज की एक प्रमुख आवाज बन चुके हैं। नई दिल्ली में देशभर से आए लाखों जनजाति समाज के लोगों के बीच मंच से मार्गदर्शन देना लातेहार के लिए गौरव और सौभाग्य का विषय है। एक छोटे गांव से निकलकर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाना युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। माजर भले ही एक अविकसित गांव है, लेकिन इसके निवासी आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए वर्षों जेल में रहे थे। राष्ट्र और धर्म के लिए माजर गांव सदैव आगे रहा है।1
- रांची जिले के राठू थाना क्षेत्र के अंतर्गत काठीटांड चौक पर एक भीषण वाहन हादसा हो गया। इस दुर्घटना में कुल नौ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।1
- झारखंड प्रदेश प्रतिज्ञा महिला एसोसिएशन ने गुमला सदर अस्पताल में मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति और बेहतर इलाज व्यवस्था की मांग को लेकर सोमवार से आमरण अनशन शुरू कर दिया है। संगठन की जिला अध्यक्ष देवकी देवी के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने सदर अस्पताल परिसर के बाहर धरना दिया और सिविल सर्जन के नाम एक 15 सूत्री मांग पत्र उपाधीक्षक को सौंपा। देवकी देवी ने इस दौरान बताया कि गुमला एक आदिवासी बहुल जिला है, जहाँ दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए सदर अस्पताल आते हैं। हालाँकि, अस्पताल में समुचित सुविधा और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण अधिकांश मरीजों को रिम्स रेफर कर दिया जाता है। इस स्थिति से गरीब मरीजों को न केवल आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है, बल्कि कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण मृत्यु दर में भी वृद्धि हो रही है। संगठन की प्रमुख मांगों में गुमला सदर अस्पताल को “रिम्स-2” के रूप में विकसित करना शामिल है, ताकि जिलेवासियों को बेहतर और समुचित इलाज स्थानीय स्तर पर ही मिल सके। इसके अतिरिक्त, अस्पताल में सभी आवश्यक डॉक्टरों की नियुक्ति, जांच सुविधा, दवाइयों की उपलब्धता और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की भी मांग रखी गई है। अनशन के दौरान, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अनुपम किशोर ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए प्रदर्शनकारियों को पानी उपलब्ध कराया। इस पहल की उपस्थित लोगों ने काफी सराहना की। डॉ. अनुपम किशोर ने शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखते हुए प्रदर्शनकारियों की सुविधाओं का ध्यान रखा, जिससे अस्पताल प्रशासन की सकारात्मक और संवेदनशील कार्यशैली उजागर हुई। लोगों ने उनकी इस पहल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रशासनिक जिम्मेदारी के साथ-साथ मानवीय व्यवहार भी बेहद आवश्यक है, जिसे उपाधीक्षक ने बखूबी निभाया।3
- आदिवासी महिलाएँ अपने अधिकारों की रक्षा के लिए दिल्ली पहुँची हैं।1
- सोमवार को बरवाडीह प्रखंड मुख्यालय के मस्जिद मोहल्ला में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब झामुमो नेता गुलाम अशगर के घर के ऊपर से गुजर रहा 11 हजार वोल्ट का हाईटेंशन बिजली तार अचानक टूटकर छत पर गिर पड़ा। गनीमत रही कि घटना के वक्त परिवार के सदस्य बाल-बाल बच गए, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तार तेज आवाज के साथ टूटा, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई और आसपास के लोग घरों से बाहर निकल आए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हाईटेंशन तार लंबे समय से घरों के ऊपर से गुजर रहा है और इसे हटाने की मांग कई बार बिजली विभाग से की जा चुकी है, लेकिन विभाग ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। परिजनों ने बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी अनदेखी के कारण कभी भी बड़ी जनहानि हो सकती थी, क्योंकि तार काफी नीचे झूल रहा था जिससे हमेशा खतरा बना रहता था। इस घटना के बाद मोहल्ले में लोगों में भारी आक्रोश देखा गया। स्थानीय नागरिकों ने बिजली विभाग से तत्काल जर्जर तार हटाने, वैकल्पिक लाइन की व्यवस्था करने और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा जांच अभियान चलाने की मांग की है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे विभाग के खिलाफ आंदोलन करेंगे।1
- राजधानी रांची में लगातार गहराते पेयजल संकट को लेकर लोगों का गुस्सा सड़क पर उतर आया है। पानी की किल्लत से परेशान सैकड़ों की संख्या में महिलाएं, बच्चे और युवा हाथों में बाल्टी, जार और पानी के बर्तन लेकर कर्बला चौक पहुंच गए और सड़क जाम कर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। कई इलाकों में नियमित जलापूर्ति नहीं होने के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी के बीच हालात और भी कठिन हो गए हैं, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। आक्रोशित लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और जल्द से जल्द समस्या के समाधान की मांग की। इस प्रदर्शन के कारण कुछ समय तक यातायात भी प्रभावित रहा और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि पानी की समस्या का जल्द समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।1