कुछ मुद्दों पर पूरे देश की एकजुटता और अन्य पर खामोशी के पीछे की वजह पर एक सीधी, तेज और बेबाक चर्चा शुरू हुई है। यह चर्चा इस सवाल के इर्द-गिर्द घूमती है कि 'तुम करो तो लीला… हम करें तो कैरेक्टर ढीला?' यानी, जब कुछ लोग कुछ करते हैं तो उसे सही माना जाता है, जबकि दूसरों के लिए वही काम चरित्र पर सवाल उठा देता है। इसमें कंट्रोवर्सी, संगठन और शिक्षा की ताकत के साथ-साथ सोशल मीडिया के खेल की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह गंभीर बहस इस विडंबना को उजागर करती है कि कुछ विवादों और मुद्दों पर पूरा देश एकजुट होकर प्रतिक्रिया देता है, वहीं अन्य समान महत्व के मामलों पर गहरा सन्नाटा क्यों छा जाता है। इस चर्चा के केंद्र में अंजना ओम कश्यप और खान सर जैसे नाम तथा बिहार के मोतिहारी जैसे स्थान भी हैं, जो संभवतः इन विषयों के उदाहरण के रूप में देखे जा रहे हैं। 'निष्पक्ष खबरें अब तक बिहार' द्वारा आयोजित यह चर्चा इस दावे के साथ प्रस्तुत की गई है कि यहां सच बिकता नहीं, सीधा दिखता है।
कुछ मुद्दों पर पूरे देश की एकजुटता और अन्य पर खामोशी के पीछे की वजह पर एक सीधी, तेज और बेबाक चर्चा शुरू हुई है। यह चर्चा इस सवाल के इर्द-गिर्द घूमती है कि 'तुम करो तो लीला… हम करें तो कैरेक्टर ढीला?' यानी, जब कुछ लोग कुछ करते हैं तो उसे सही माना जाता है, जबकि दूसरों के लिए वही काम चरित्र पर सवाल उठा देता है। इसमें कंट्रोवर्सी, संगठन और शिक्षा की ताकत के साथ-साथ सोशल मीडिया के खेल की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह गंभीर बहस इस विडंबना को उजागर करती है कि कुछ विवादों और मुद्दों पर पूरा देश एकजुट होकर प्रतिक्रिया देता है, वहीं अन्य समान महत्व के मामलों पर गहरा सन्नाटा क्यों छा जाता है। इस चर्चा के केंद्र में अंजना ओम कश्यप और खान सर जैसे नाम तथा बिहार के मोतिहारी जैसे स्थान भी हैं, जो संभवतः इन विषयों के उदाहरण के रूप में देखे जा रहे हैं। 'निष्पक्ष खबरें अब तक बिहार' द्वारा आयोजित यह चर्चा इस दावे के साथ प्रस्तुत की गई है कि यहां सच बिकता नहीं, सीधा दिखता है।
- कुछ मुद्दों पर पूरे देश की एकजुटता और अन्य पर खामोशी के पीछे की वजह पर एक सीधी, तेज और बेबाक चर्चा शुरू हुई है। यह चर्चा इस सवाल के इर्द-गिर्द घूमती है कि 'तुम करो तो लीला… हम करें तो कैरेक्टर ढीला?' यानी, जब कुछ लोग कुछ करते हैं तो उसे सही माना जाता है, जबकि दूसरों के लिए वही काम चरित्र पर सवाल उठा देता है। इसमें कंट्रोवर्सी, संगठन और शिक्षा की ताकत के साथ-साथ सोशल मीडिया के खेल की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह गंभीर बहस इस विडंबना को उजागर करती है कि कुछ विवादों और मुद्दों पर पूरा देश एकजुट होकर प्रतिक्रिया देता है, वहीं अन्य समान महत्व के मामलों पर गहरा सन्नाटा क्यों छा जाता है। इस चर्चा के केंद्र में अंजना ओम कश्यप और खान सर जैसे नाम तथा बिहार के मोतिहारी जैसे स्थान भी हैं, जो संभवतः इन विषयों के उदाहरण के रूप में देखे जा रहे हैं। 'निष्पक्ष खबरें अब तक बिहार' द्वारा आयोजित यह चर्चा इस दावे के साथ प्रस्तुत की गई है कि यहां सच बिकता नहीं, सीधा दिखता है।1
- BPSC महिला शिक्षकों से जुड़ी हकीकत सामने आई है। इस जानकारी में उनसे संबंधित पूरी कहानी और सच्चाई को उजागर किया गया है।1
- नीतीश कुमार के विधायक अजीत कुमार और चिराग समर्थकों के बीच एक तीखी नोकझोंक हुई है। इस घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने बिहार की राजनीति में काफी बवाल मचा दिया है।1
- चेहहराकलां प्रखंड क्षेत्र के कबिलपुरा गांव में पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर तीन घरों में कुर्की जब्ती की कार्रवाई की है। यह कार्रवाई चंद्र देव सहनी, उपेंद्र सहनी और दिनेश सहनी के घरों पर की गई।1
- यह संदेश विजय थालपति जी के प्रति गहरे सम्मान और उनके जैसा मुख्यमंत्री होने की इच्छा को उजागर करता है। 'जय भीम' और 'जय हो सीएम' के नारों के साथ थालपति जी का अभिनंदन किया गया है। इसमें स्पष्ट रूप से यह कामना की गई है कि हर कोई अपना मुख्यमंत्री भी विजय थालपति जी जैसा ही चाहेगा।1
- एक स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, देश में 1 जून से कुछ परिवर्तन होने जा रहे हैं। इन बदलावों का सीधा प्रभाव आम जनता की जेब पर पड़ेगा, जिससे आर्थिक रूप से असर पड़ने की संभावना है।1
- यह पोस्ट वैशाली, बिहार के लालगंज, करथहा, राजापाकर और हाजीपुर जैसे विभिन्न स्थानों से संबंधित 'ब्रेकिंग न्यूज़' और 'अपराध समाचार' को इंगित करने वाले हैशटैग का एक संग्रह है। इसमें 'वैशाली पुलिस' का भी उल्लेख किया गया है।1
- यह बात कही गई है कि पाप का फल एक न एक दिन अवश्य मिलता है। इस संदेश में इस बात पर जोर दिया गया है कि कोई भी गलत कार्य अनसुना नहीं रहता और उसका परिणाम निश्चित तौर पर भुगतना पड़ता है, भले ही इस प्रक्रिया में काफी लंबा समय लग जाए, यहाँ तक कि 34 साल का वक्त भी क्यों न लग जाए।1