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दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बुधवार शाम हटा नाका पर संचालित एक शराब दुकान का लाइसेंस निरस्त कर दिया। यह कार्रवाई दुकान में अनियमितताओं की शिकायतें मिलने के बाद की गई। कलेक्टर ने स्वयं शराब दुकान का निरीक्षण किया, जहाँ उन्हें अनियमितताएं मिलीं, जिसके बाद उन्होंने तत्काल यह कार्रवाई की। आबकारी विभाग को इस मामले में कार्रवाई करनी थी, लेकिन विभाग के अधिकारियों द्वारा सही तरीके से जांच नहीं की गई। इसी कारण कलेक्टर को स्वयं शराब दुकान पर पहुंचकर अनियमितताओं पर कार्रवाई करते हुए लाइसेंस रद्द करना पड़ा।
Akib khan press
दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बुधवार शाम हटा नाका पर संचालित एक शराब दुकान का लाइसेंस निरस्त कर दिया। यह कार्रवाई दुकान में अनियमितताओं की शिकायतें मिलने के बाद की गई। कलेक्टर ने स्वयं शराब दुकान का निरीक्षण किया, जहाँ उन्हें अनियमितताएं मिलीं, जिसके बाद उन्होंने तत्काल यह कार्रवाई की। आबकारी विभाग को इस मामले में कार्रवाई करनी थी, लेकिन विभाग के अधिकारियों द्वारा सही तरीके से जांच नहीं की गई। इसी कारण कलेक्टर को स्वयं शराब दुकान पर पहुंचकर अनियमितताओं पर कार्रवाई करते हुए लाइसेंस रद्द करना पड़ा।
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- हटा नगर के शिव शक्ति दुर्गा मंदिर प्रांगण में 20 जून से 28 जून तक नौ दिवसीय श्रीमद् भागवतम कथा एवं शिव परिवार प्राण-प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन विधायक परिवार द्वारा, जै जै सरकार की असीम कृपा और पूजनीय छोटे सरकार के निर्देशन में संपन्न होगा। इस भव्य आयोजन की तैयारियों को लेकर बुधवार को मंदिर प्रांगण में एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें विधायक उमादेवी खटीक और अन्य गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।1
- दमोह जिले की पटेरा तहसील अंतर्गत ग्राम सतरिया में एक गंभीर भूमि विवाद सामने आया है, जहाँ एक आदिवासी परिवार ने राजस्व विभाग और स्थानीय प्रभावशाली लोगों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जिला प्रशासन से न्याय की मांग की है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पिछले लगभग चार से पांच वर्षों से वे अपनी कृषि भूमि को लेकर परेशान हैं और लगातार अधिकारियों के चक्कर काटने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। पीड़ित आदिवासी किसान फूलन सिंह एवं गेंगरानी के अनुसार, गांव के पटेल परिवार द्वारा उनकी निजी कृषि भूमि से जबरन सरकारी सड़क निकालने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि संबंधित क्षेत्र में बीच से सरकारी खसरा नंबर की भूमि मौजूद है, जबकि उसके आसपास की जमीन राजस्व अभिलेखों में उनके नाम पर दर्ज है। ग्रामीणों के अनुसार, हल्का पटवारी नीरज द्वारा तीन बार मौके पर सीमांकन (नाप) भी किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग भूमि छोड़ने को तैयार नहीं हैं, जिससे विवाद बना हुआ है। आदिवासी परिवार ने आरोप लगाया है कि इस भूमि विवाद के चलते उन्हें खेती-किसानी करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जो लोग उनकी भूमि अधिया (बंटाई) पर लेकर खेती करना चाहते हैं, उन्हें भी परेशान किया जाता है। परिवार का यह भी आरोप है कि उनके खेत में लगे आम के पेड़ों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक क्षति हो रही है। इस संबंध में हल्का पटवारी नीरज ने बताया है कि मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई है और तहसीलदार के निर्देश पर एक संयुक्त टीम गठित कर विवाद का निराकरण किया जाएगा, ताकि दोनों पक्षों की स्थिति स्पष्ट हो सके और उचित समाधान निकाला जा सके। पीड़ित परिवार का कहना है कि वे करीब पांच वर्षों से तहसील, राजस्व कार्यालय और अन्य प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें न्याय नहीं मिला है, जिससे उनका जीवन प्रभावित हो रहा है। आदिवासी परिवार ने जिला कलेक्टर से निष्पक्ष जांच कराकर न्याय दिलाने की मांग की है। पीड़ित किसान का कहना है कि यदि प्रशासन उनकी भूमि की सुरक्षा और विवाद का समाधान नहीं कर सकता, तो उन्हें अपनी जमीन बेचने की अनुमति दी जाए, ताकि वे इस लंबे विवाद और मानसिक तनाव से बाहर निकल सकें। ग्रामीणों की नजरें अब जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई और गठित की जाने वाली जांच टीम की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं कि आदिवासी परिवार को कब तक राहत और न्याय मिल पाता है।1
- दमोह जिले के बटियागढ़ थाना क्षेत्र में अवैध शराब तस्करी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीती रात फुटेरा के पास पुलिस ने एक दुर्घटनाग्रस्त कार से 21 पेटी अवैध लाल मसाला शराब जब्त की है। हालांकि, हमेशा की तरह, आरोपी मौके से भागने में सफल रहे। बटियागढ़ थाना पुलिस द्वारा कार का पीछा करने के दौरान यह वाहन पलट गया था। जब्त की गई 21 पेटी देशी शराब में करीब 1050 पाव थे, जिसकी कीमत लगभग 1 लाख रुपए बताई गई है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने कार मालिक को गिरफ्तार कर लिया है। क्षेत्र में लगातार ब्लैक फिल्म लगी फोर व्हीलर कारों से खुलेआम अवैध शराब का कारोबार किया जा रहा है। इस कार्यवाही में बटियागढ़ थाना प्रभारी रजनी शुक्ला, प्रधान आरक्षक विपेश चौबे और आरक्षक संदीप की सराहनीय भूमिका रही। पुलिस अब वाहन के आधार पर मामले की जांच कर रही है। पुलिस ने यह भी बताया कि कार की रफ्तार इतनी तेज थी कि अगर कोई व्यक्ति क्रॉसिंग पर मौजूद होता तो एक बड़ी दुर्घटना भी हो सकती थी।2
- छतरपुर में कानून व्यवस्था की स्थिति गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है, जहाँ से पत्रकार और पुलिस कर्मियों के साथ मारपीट और गोलीबारी की खबरें सामने आई हैं। बताया गया है कि यह घटना टोरिया मोहल्ला में हुई, जहाँ जमकर बवाल हुआ और गुंडागर्दी का अब तक का सबसे चरम रूप देखने को मिला। इस दौरान पत्रकारों के परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की गई, वहीं पुलिसकर्मियों पर गालीगलौच और हमले जैसी सूचनाएँ भी प्राप्त हुई हैं। इन घटनाओं में, पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे एक पत्रकार का सिर फूट गया, जिससे स्थिति की गंभीरता और बढ़ गई है।1
- दमोह शहर के फुटेरा वार्ड क्रमांक 4 स्थित छोटा नरसिंह मंदिर के पास एक युवक द्वारा अपने ही घर में फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने का मामला सामने आया है। मृतक विष्णु साहू ने 1 जून 2026 की शाम करीब 7 बजे यह कदम उठाया था। घटना के बाद से ही परिजनों ने इसे आत्महत्या के लिए उकसाने और मानसिक प्रताड़ना का मामला बताते हुए पुलिस से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। परिजनों के अनुसार, मृतक विष्णु साहू लंबे समय से शिवानी मंत्री नामक युवती और उसके चाचा तरू सोनी, जो महाकाली चौराहा निवासी हैं, द्वारा मानसिक प्रताड़ना, धमकी और दबाव का सामना कर रहा था। मृतक ने इस बारे में कई बार अपने परिजनों को जानकारी भी दी थी। आरोप है कि घटना से पहले विष्णु साहू एक रेस्टोरेंट में शिवानी सोनी और अंजली साहू से मिलने गया था। इसके बाद वह शाम करीब 6 बजे घर लौटा और 6:56 बजे उसने शिवानी सोनी को व्हाट्सएप कॉल भी किया था, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुआ। इस घटना के कुछ ही समय बाद उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों का दृढ़ता से कहना है कि लगातार मिल रही मानसिक प्रताड़ना और दबाव के कारण ही युवक ने अपनी जान ली। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से मोबाइल की साइबर जांच कराने, डिलीट किए गए मैसेज और कॉल डिटेल्स रिकवर कराने, साथ ही मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस घटना के बाद, परिजनों ने मृतक की अस्थियां लेकर कोतवाली थाना का घेराव करने की चेतावनी दी थी। इसके परिणामस्वरूप, गुरुवार दोपहर 2 बजे स्वयं कोतवाली टीआई मनीष कुमार अपने दलबल के साथ मृतक के घर पहुंचे और परिजनों तथा आसपास मौजूद लोगों के बयान दर्ज करते हुए घटना के विभिन्न पहलुओं पर साक्ष्य संकलित कर बारीकी से जांच शुरू कर दी है।1
- टीकमगढ़ जिले के जतारा स्थित विद्युत कार्यालय में बिजली की समस्या को लेकर पहुंचे ग्रामीणों और कर्मचारियों के बीच विवाद के बाद जमकर हंगामा हो गया। आरोप है कि शुरुआती कहासुनी के दौरान महिलाओं के साथ मारपीट की गई, जिसके बाद ग्रामीण आक्रोशित हो उठे। इसी बीच, एक ग्रामीण ने कथित तौर पर कर्मचारियों पर ईंट से हमला कर दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को तुरंत नियंत्रित किया। पुलिस फिलहाल दोनों पक्षों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों के आधार पर पूरे मामले की जांच कर रही है।1
- कटनी जिले के आदिवासी अंचल स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नैगवां में कक्षा 9वीं एवं 11वीं की द्वितीय परीक्षा के दिन शिक्षा के प्रति एक प्रेरक मिसाल देखने को मिली। बुधवार की सुबह जब विद्यालय खुला, तो परीक्षा कक्ष लगभग खाली था और निर्धारित समय पर केवल एक छात्रा ही परीक्षा देने पहुँची थी, जिससे विद्यालय परिवार चिंतित हो उठा। इस स्थिति से हार न मानते हुए, प्राचार्य श्री विपिन तिवारी ने स्वयं जिम्मेदारी संभाली और एक सहयोगी शिक्षक के साथ अपने निजी वाहन से लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित आदिवासी बस्तियों खुसरा और रामपुरा पहुँचे। वहाँ उन्होंने पाया कि कुछ विद्यार्थी अभी नींद में थे, तो कुछ बिना किसी चिंता के इधर-उधर घूम रहे थे, वहीं अभिभावकों में भी परीक्षा को लेकर विशेष जागरूकता का अभाव दिखाई दिया। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को समझाया, प्रेरित किया और अपने वाहन से उन्हें विद्यालय लाकर परीक्षा में शामिल कराया। यह उल्लेखनीय है कि इनमें से कई विद्यार्थियों ने परीक्षा शुल्क तक जमा नहीं किया था, फिर भी उनका भविष्य प्रभावित न हो, इसके लिए हरसंभव प्रयास किए गए। यह घटना कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के मार्गदर्शन और जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देशन में आदिवासी अंचलों में शिक्षा की अलख जगाने के लगातार जारी अभियान का हिस्सा है। यह दर्शाता है कि जब शिक्षक केवल पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और अभिभावक की भूमिका निभाता है, तभी शिक्षा की रोशनी दूर-दराज़ बस्तियों तक पहुँचती है। इस पहल से यह बात सच साबित हुई कि जब शिक्षक घर-घर पहुँचता है, तभी विद्यार्थी परीक्षा कक्ष तक पहुँच पाता है और तभी शिक्षा अपने वास्तविक उद्देश्य को प्राप्त करती है।1
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