खाकी पर दाग: घर में घुसकर की छेड़खानी, पुलिस ने मदद मांगने वाले पीड़ित परिवार को ही भेजा जेल #Apkiawajdigital फतेहपुर | रविवार, 15 मार्च 2026 गाजीपुर (फतेहपुर)। जनपद के गाजीपुर थाना क्षेत्र के बिझौली गांव में कानून-व्यवस्था और पुलिस की निष्पक्षता को शर्मसार करने वाला मामला प्रकाश में आया है। यहां एक तरफ नशे में धुत दबंग ने घर में घुसकर महिलाओं के साथ सरेआम बदसलूकी की, वहीं दूसरी ओर यूपी पुलिस ने न्याय देने के बजाय शिकायतकर्ता परिवार के ही 5 सदस्यों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। पुलिस की इस कार्यप्रणाली से ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। क्या है पूरी घटना? प्राप्त विवरण के अनुसार, शनिवार (14 मार्च) की रात बिझौली निवासी संदीप तिवारी अत्यधिक नशे की हालत में प्रदीप शुक्ला के घर में घुस गया। आरोप है कि संदीप ने घर की महिलाओं के साथ छेड़खानी और अभद्रता की। जब परिवार ने विरोध किया, तो आरोपी ने हंगामा शुरू कर दिया। घटना की सूचना तत्काल डायल-112 और स्थानीय थाने को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस के सामने भी आरोपी संदीप भारी नशे की स्थिति में पाया गया। मदद मांगने वालों पर ही गिरी गाज हैरानी की बात यह रही कि पुलिस ने पीड़ित महिलाओं के बयान के आधार पर आरोपी के विरुद्ध कार्रवाई करने के बजाय, शिकायत करने वाले शुक्ला पक्ष के लोगों को ही हिरासत में ले लिया। पुलिस ने इस मामले में विकास शुक्ला, विनोद शुक्ला, अभय शुक्ला, सुभाष शुक्ला और कल्लू शुक्ला के विरुद्ध आनन-फानन में एफआईआर (FIR) दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। ग्रामीणों में उबाल, उठ रहे सवाल क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर पुलिस ने वास्तविक अपराधी को संरक्षण क्यों दिया? घर की महिलाओं के साथ हुई बदसलूकी के मामले में पुलिस का यह 'अजीबोगरीब' न्याय क्षेत्रवासियों के गले नहीं उतर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि "जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और अपराधियों के बजाय पीड़ितों को दंडित किया जाए, तो जनता न्याय की गुहार कहां लगाए?" उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग शुक्ला परिवार की महिलाओं ने उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार लगाते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध जांच और बेगुनाह सदस्यों की रिहाई की मांग की है। अब देखना यह होगा कि क्या जिले के आला अधिकारी इस मामले में हस्तक्षेप कर खाकी की धूमिल होती छवि को बचाते हैं या न्याय यूं ही फाइलों में दबा रहेगा। नोट: इस खबर के प्रकाशित होने के बाद क्षेत्र में पुलिस प्रशासन के प्रति अविश्वास बढ़ा है। विभाग की ओर से अभी तक इस 'एकतरफा' कार्रवाई पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है।
खाकी पर दाग: घर में घुसकर की छेड़खानी, पुलिस ने मदद मांगने वाले पीड़ित परिवार को ही भेजा जेल #Apkiawajdigital फतेहपुर | रविवार, 15 मार्च 2026 गाजीपुर (फतेहपुर)। जनपद के गाजीपुर थाना क्षेत्र के बिझौली गांव में कानून-व्यवस्था और पुलिस की निष्पक्षता को शर्मसार करने वाला मामला प्रकाश में आया है। यहां एक तरफ नशे में धुत दबंग ने घर में घुसकर महिलाओं के साथ सरेआम बदसलूकी की, वहीं दूसरी ओर यूपी पुलिस ने न्याय देने के बजाय शिकायतकर्ता परिवार के ही 5 सदस्यों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। पुलिस की इस कार्यप्रणाली से ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। क्या है पूरी घटना? प्राप्त विवरण के अनुसार, शनिवार (14 मार्च) की रात बिझौली निवासी संदीप तिवारी अत्यधिक नशे की हालत में प्रदीप शुक्ला के घर में घुस गया। आरोप है कि संदीप ने घर की महिलाओं के साथ छेड़खानी और अभद्रता की। जब परिवार ने विरोध किया, तो आरोपी ने हंगामा शुरू कर दिया। घटना की सूचना तत्काल डायल-112 और स्थानीय थाने को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस के सामने भी आरोपी संदीप भारी नशे की स्थिति में पाया गया। मदद मांगने वालों पर ही गिरी गाज हैरानी की बात यह रही कि पुलिस ने पीड़ित महिलाओं के बयान के आधार पर आरोपी के विरुद्ध कार्रवाई करने के बजाय, शिकायत करने वाले शुक्ला पक्ष के लोगों को ही हिरासत में ले लिया। पुलिस ने इस मामले में विकास शुक्ला, विनोद शुक्ला, अभय शुक्ला, सुभाष शुक्ला और कल्लू शुक्ला के विरुद्ध आनन-फानन में एफआईआर (FIR) दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। ग्रामीणों में उबाल, उठ रहे सवाल क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर पुलिस ने वास्तविक अपराधी को संरक्षण क्यों दिया? घर की महिलाओं के साथ हुई बदसलूकी के मामले में पुलिस का यह 'अजीबोगरीब' न्याय क्षेत्रवासियों के गले नहीं उतर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि "जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और अपराधियों के बजाय पीड़ितों को दंडित किया जाए, तो जनता न्याय की गुहार कहां लगाए?" उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग शुक्ला परिवार की महिलाओं ने उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार लगाते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध जांच और बेगुनाह सदस्यों की रिहाई की मांग की है। अब देखना यह होगा कि क्या जिले के आला अधिकारी इस मामले में हस्तक्षेप कर खाकी की धूमिल होती छवि को बचाते हैं या न्याय यूं ही फाइलों में दबा रहेगा। नोट: इस खबर के प्रकाशित होने के बाद क्षेत्र में पुलिस प्रशासन के प्रति अविश्वास बढ़ा है। विभाग की ओर से अभी तक इस 'एकतरफा' कार्रवाई पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है।
- मा.काशीराम जयंती पर कांग्रेस पार्टी ने कांशीराम के सामाजिक न्याय के संघर्ष को याद करते हुए उन्हें भारत रत्न देने की मांग उठाई।1
- बांदा के रामदा होटल में नेशनल एंटी करप्शन कमिटी आफ इंडिया के जिला इकाई के पदाधिकारी को प्रशस्ति पत्र और आई कार्ड देकर नियुक्त किया गया और उज्जवल भविष्य की कामना की1
- बांदा । जनपद में आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी, कालाबाजारी और कृत्रिम कमी को रोकने के लिए जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने रविवार को शहर के विभिन्न होटल, रेस्टोरेंट और गैस एजेंसियों का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान कई प्रतिष्ठानों की जांच कर गैस सिलेंडरों के उपयोग और वितरण व्यवस्था की पड़ताल की गई। जांच के दौरान साई दरबार रेस्टोरेंट में कुल 12 गैस सिलेंडर पाए गए, जिनमें 3 कमर्शियल और 9 घरेलू श्रेणी के सिलेंडर थे। रेस्टोरेंट में घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग पाए जाने पर संचालक के खिलाफ नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा सारंग होटल, कृष्णा स्वीट्स, सिग्नेचर और राजदरबार रेस्टोरेंट में भी जांच की गई। यहां उपयोग में लाए जा रहे सभी गैस सिलेंडर कमर्शियल श्रेणी के पाए गए और किसी भी प्रकार का घरेलू सिलेंडर परिसर में नहीं मिला। संयुक्त टीम ने संकल्प गैस एजेंसी और आराधना इंडेन गैस एजेंसी का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों ने गैस वितरण व्यवस्था को पारदर्शी और त्वरित बनाने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान आराधना इंडेन गैस एजेंसी में मौजूद लोगों ने समय पर गैस न मिलने की शिकायत की। कुछ उपभोक्ताओं ने बताया कि टोकन किसी और के नाम पर जारी हुआ, जबकि गैस की डिलीवरी किसी अन्य व्यक्ति को कर दी गई। ऑनलाइन रिपोर्ट और भौतिक रिकॉर्ड में भी अंतर पाया गया, जिसके चलते एजेंसी संचालक के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है और अनियमितताओं पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनपद में आवश्यक वस्तुओं, पेट्रोलियम उत्पादों और रसोई गैस की किसी भी प्रकार की कमी नहीं है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और कहीं भी जमाखोरी, कालाबाजारी या घरेलू गैस के अवैध उपयोग की जानकारी मिले तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें, ताकि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।1
- #Apkiawajdigital गाजियाबाद/दिल्ली | रविवार, 15 मार्च 2026 विशेष संवाददाता: किसी माता-पिता के लिए इससे हृदयविदारक क्षण क्या होगा कि वे अपने ही जिगर के टुकड़े को 'अंतिम विदाई' देने के लिए अस्पताल ले जाएं, यह जानते हुए कि अब वह कभी वापस नहीं लौटेगा। गाजियाबाद के लोनी निवासी हरीश राणा, जो पिछले 13 वर्षों से बिस्तर पर बेजान पड़े थे, रविवार को दिल्ली एम्स (AIIMS) पहुंचाए गए। यहां मेडिकल बोर्ड की देखरेख में उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम से हटाकर 'इच्छा मृत्यु' (पैसिव यूथेनेशिया) देने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। एक हादसे ने छीन ली थी मुस्कान घटना साल 2011 की है, जब हरीश चंडीगढ़ में पढ़ रहे थे। एक हादसे में वह चौथी मंजिल से गिर गए और उनके सिर में गंभीर चोट आई। तब से हरीश न बोल सके, न हिल सके। वह एक ऐसी स्थिति में पहुंच गए जिसे चिकित्सा विज्ञान में 'कोमा' कहा जाता है। देश के बड़े से बड़े अस्पताल हरीश को दोबारा खड़ा करने में नाकाम रहे। 13 साल की तपस्या और खाली होती तिजोरी हरीश के पिता अशोक राणा ने अपने बेटे को वापस पाने के लिए अपनी जिंदगी की हर पाई खर्च कर दी। मां ने 13 सालों तक साये की तरह अपने बेटे की सेवा की, उसे नहलाने से लेकर खिलाने तक का हर काम एक नवजात शिशु की तरह किया। लेकिन जब आर्थिक संसाधन पूरी तरह खत्म हो गए और हरीश की स्थिति में कोई सुधार नहीं दिखा, तो भारी मन से माता-पिता ने 'इच्छा मृत्यु' का कठिन विकल्प चुना। "सबको माफ करना, सबसे माफी मांगना..." रविवार की सुबह जब एम्बुलेंस हरीश को एम्स ले जाने के लिए उनके घर पहुंची, तो पूरा मोहल्ला फफक कर रो पड़ा। माता-पिता ने रुंधे गले और कांपते हाथों से अपने बेटे को विदा किया। सोशल मीडिया पर भी यह विदाई वायरल हो रही है, जहां लोग कह रहे हैं— "हरीश, अब सब कष्टों से मुक्त होकर जाओ।" कानूनी प्रक्रिया के तहत विदाई भारत में 'पैसिव यूथेनेशिया' (निष्क्रिय इच्छा मृत्यु) को सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी है। हरीश का मामला भी इसी कानूनी दायरे में आता है। एम्स के डॉक्टरों की टीम और कानूनी पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में अब हरीश को शांतिपूर्ण मृत्यु की ओर ले जाया जा रहा है। संपादकीय टिप्पणी: हरीश राणा की कहानी केवल एक मेडिकल केस नहीं है, बल्कि यह माता-पिता के निस्वार्थ प्रेम और हमारे देश की महंगी स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच पिसते आम आदमी की दास्तां भी है। 13 साल तक एक बेजान शरीर में जान तलाशने वाले इस परिवार का धैर्य वंदनीय है।1
- बांदा में सपा ने मनाई मान्यवर काशीराम की 92वीं जयंती, दलित-वंचित समाज के अधिकारों पर दिया जोर यूपी बांदा के निजामी पैलेस में समाजवादी पार्टी द्वारा बहुजन समाज के महानायक मान्यवर काशीराम की 92वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता सपा के युवा क्रांतिकारी अध्यक्ष डॉ. मधुसूदन कुशवाहा ने की। मुख्य अतिथि पूर्व MLC तिलक चंद अहिरवार और मुख्य वक्ता प्रदेश सचिव मेघनाथ खंगार रहे। नेताओं और कार्यकर्ताओं ने काशीराम जी के चित्र पर माल्यार्पण कर उनके जीवन संघर्ष और दलित-वंचित समाज के उत्थान के लिए किए गए योगदान को याद किया। वक्ताओं ने सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने और सामाजिक न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम में कृष्णा देवी पटेल, उमेश यादव, प्रमोद गुप्ता राजा, ईशान सिंह लवी, ओम नारायण त्रिपाठी, किरण यादव, रजनी यादव समेत सैकड़ों की संख्या में सपा नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।1
- हरीश अब दिल्ली एम्स पहुंच गए हैं। यहां उनके लाइफ़ सपोर्ट सिस्टम हटाए जाएंगे और उन्हें इच्छा मृत्यु दी जाएगी। इस देश में कोई भी हरीश को ठीक नहीं कर पाया। उन मां–बाप के लिए बेहद भावुक पल था, जब वो हरीश को आखिरी विदाई दे रहे थे। उन्हें पता था कि हरीश अब कभी उठ खड़े नहीं हो सकते, फिर भी वो 13 साल तक बेड पर उसकी सेवा करते रहे।1
- झांसी के टहरौली थाना क्षेत्र के ग्राम घुरैया में काशी प्रसाद घोष के मकान में अचानक आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। देखते ही देखते आग ने पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया। इस घटना में घर में बंधी एक भैंस, एक पड़ा और दो बकरियां जलकर खाक हो गईं। साथ ही घर में रखा सामान भी जलकर नष्ट हो गया। सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। इस घटना से पीड़ित परिवार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।1
- संकल्प और आराधना इंडेन गैस एजेंसी का किया निरीक्षण आराधना गैस एजेंसी में उपभोक्ताओं ने समय पर गैस न मिलने व टोकन में गड़बड़ी की शिकायत की,प्रशासन ने शुरू की जांच।1