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पप्पू यादव अपने आवास पर प्रेस कांफ्रेंस कर रहे थे तभी उन पर हमला हो गया।पप्पू यादव ख़ुद ही हमलावर से भिड़ गए।
रामानंद सागर
पप्पू यादव अपने आवास पर प्रेस कांफ्रेंस कर रहे थे तभी उन पर हमला हो गया।पप्पू यादव ख़ुद ही हमलावर से भिड़ गए।
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- गोरखपुर में गरजे मुकेश साहनी! 'कार्यक्रम नहीं करने दिया जा रहा', निषाद पार्टी और BJP पर बड़ा हमला1
- बहन से छेड़खानी का विरोध करने पर मासूम की पीट-पीटकर हत्या, परिजनों का पुलिस पर गम्भीर आरोप गोरखपुर जिले के पिपराइच थानाक्षेत्र के माधोपुर बेला गांव में बहन से छेड़खानी का विरोध करने पर नौ साल के बच्चे की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। आधा दर्जन से अधिक लड़कों ने पहचे दोनों बच्चों को रास्ते में घेरकर लाठी-डंडों से पीटा। जब परिवार के लोग पहुंचे तो उन पर भी पथराव किया। इसके बाद भाग गए। परिजनों ने पुलिस पर समय रहते कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए सवाल खड़े किए हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान रविवार सुबह सरस सिंह (9) की मौत हो गई। वहीं, शिवकुमार की हालत गंभीर बनी हुई है। वहीं पुलिस ने मामले में गांव के ही 9 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। जबकि मामले में लापरवाही बरतने पर पिपराइच थाना प्रभारी विवेक त्रिवेदी को एसएसपी ने लाइन हाजिर कर दिया है। उनकी जगह झंगहा थाना प्रभारी रहे अनुप सिंह को थाना पिपराइच का प्रभारी बनाया गया है। सीओ कुंदन कुमार सिंह ने कहा कि पिपराइच के बेला क्षेत्र में माधवपुर ग्राम में एक मारपीट की घटना हुई जिसमें एक किशोर को चोटें आईं। मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गई है। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। परिवार की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।1
- पुस्तकें ही सच्ची मित्र, पढ़ने की आदत से ही होगा व्यक्तित्व का समग्र विकास - अमित कुमार राय (प्राचार्य) राजा देवी महिला पीजी कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना के तहत 'पुस्तक पढ़ें कार्यक्रम' आयोजित, विद्यार्थियों को सोशल मीडिया और रील्स की लत से दूर रहने का दिया संदेश देवरिया। भटनी क्षेत्र के सल्लहपुर स्थित राजा देवी महिला पीजी कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के तत्वावधान में 'पुस्तक पढ़ें कार्यक्रम' का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं में अध्ययन की नियमित आदत विकसित करना, बौद्धिक क्षमता का विकास करना तथा उन्हें सोशल मीडिया और रील्स की बढ़ती लत से दूर रहने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में पुस्तकों के महत्व पर विस्तार से चर्चा करते हुए विद्यार्थियों को बताया गया कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए पढ़ने की आदत सबसे प्रभावी माध्यम है। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग युवाओं के समय और एकाग्रता को प्रभावित कर रहा है। मोबाइल फोन पर घंटों रील्स देखने की प्रवृत्ति विद्यार्थियों के अध्ययन, सोचने-समझने की क्षमता और रचनात्मकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। ऐसे में पुस्तकों के प्रति रुचि विकसित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा गया कि अच्छी पुस्तकें हमारे सच्चे मित्र की तरह होती हैं। वे न केवल सही मार्गदर्शन देती हैं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में सकारात्मक सोच विकसित करने की प्रेरणा भी प्रदान करती हैं। पुस्तकें मनुष्य के व्यक्तित्व को निखारने, ज्ञान का विस्तार करने और जीवन के विभिन्न आयामों को समझने का अवसर देती हैं। कार्यक्रम में बताया गया कि नियमित अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों की एकाग्रता अधिक मजबूत होती है। पढ़ने की आदत से मस्तिष्क लगातार सक्रिय रहता है, जिससे स्मरण शक्ति और निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है। साथ ही भाषा पर पकड़ मजबूत होती है और लेखन व अभिव्यक्ति कौशल में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलता है। वक्ताओं ने कहा कि पुस्तकें केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे व्यक्ति के चरित्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। साहित्य, इतिहास, विज्ञान, जीवनी और प्रेरणादायक पुस्तकों का अध्ययन विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करता है। यही गुण उन्हें भविष्य में एक जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में आगे बढ़ाते हैं। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को प्रतिदिन कुछ समय पुस्तक पढ़ने का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया गया। उन्हें सलाह दी गई कि वे मोबाइल और सोशल मीडिया पर बिताए जाने वाले समय को कम करें तथा उस समय का उपयोग अच्छी पुस्तकों के अध्ययन में करें। इससे न केवल उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों में वृद्धि होगी, बल्कि मानसिक तनाव भी कम होगा और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी। इस अवसर पर यह भी बताया गया कि नियमित अध्ययन मानसिक शांति प्रदान करता है। पुस्तकें पढ़ने से मन सकारात्मक विचारों से भरता है और व्यक्ति नई जानकारियों से निरंतर जुड़ा रहता है। इससे रचनात्मक सोच विकसित होती है तथा जीवन में बेहतर निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों की उपयोगी पुस्तकों का अध्ययन करने और पुस्तकालय से नियमित रूप से पुस्तकें लेने के लिए भी प्रेरित किया गया। राष्ट्रीय सेवा योजना के इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि बदलते दौर में तकनीक का संतुलित उपयोग आवश्यक है, लेकिन पुस्तकों का स्थान कोई भी डिजिटल माध्यम नहीं ले सकता। ज्ञान, संस्कार, विवेक और व्यक्तित्व विकास का सबसे प्रभावी साधन आज भी पुस्तकें ही हैं। कार्यक्रम के अंत में छात्राओं ने नियमित अध्ययन करने, अच्छी पुस्तकों को अपना साथी बनाने तथा सोशल मीडिया के अनावश्यक उपयोग से बचने का संकल्प लिया।2
- सीडीओ के औचक निरीक्षण में संस्कृत महाविद्यालय की खुली पोल, कुर्सी पर सोता मिला कर्मचारी, जांच के आदेश सीडीओ के औचक निरीक्षण में संस्कृत महाविद्यालय की खुली पोल, कुर्सी पर सोता मिला कर्मचारी, जांच के आदेश1
- मां बाप के सपनों पर युवक ने फेरा पानी क्या-क्या सोचते हैं लोग की जब मेरा बेटा बड़ा होगा तो मैं कैसे शादी उसकी धूमधाम से करूंगा लेकिन एक युवक बिना अपने माता-पिता को बताएं की ज्योति से विवाह कर लिया विवाह करने के बाद जैसे ही घर लाया परिवार के पिता हुए नाराज मां बाप के भी कुछ सपने है, उनका भी समाज है, उनके भी अरमान है सम्मान है लेकिन आजकल कुछ युवा अपने मन की ही करते है जिसके कारण मां बाप आहत होते है इस वीडियो में पिता ने सही किया या गलत ये आप लोग बताएं।1
- रुद्रपुर तहसील में डीएम का निरीक्षण, पुराने राजस्व वादों के समयबद्ध निस्तारण के दिए निर्देश तहसीलदार न्यायालय की पत्रावलियों का किया अवलोकन, साफ-सफाई, अभिलेखों के सुव्यवस्थित रखरखाव और पारदर्शी न्याय व्यवस्था पर दिया जोर देवरिया। जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने शनिवार को रुद्रपुर तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में शामिल होने से पहले तहसीलदार न्यायालय का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने लंबे समय से लंबित राजस्व वादों की पत्रावलियों का अवलोकन किया और तहसीलदार को सभी पुराने मामलों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने न्यायालय की पत्रावलियों के सुव्यवस्थित रखरखाव, न्यायालयीय कार्यवाही के नियमित एवं अद्यतन अंकन तथा तहसील परिसर में साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्यायालय की कार्यप्रणाली व्यवस्थित और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि फरियादियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। जिलाधिकारी ने कहा कि फरियादियों को समयबद्ध, पारदर्शी एवं निष्पक्ष न्याय दिलाना राजस्व अधिकारियों की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी राजस्व अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया कि न्यायालय में प्रस्तुत प्रत्येक प्रकरण का शासन की मंशा के अनुरूप गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ निस्तारण किया जाए, जिससे आमजन को त्वरित न्याय मिल सके। निरीक्षण के दौरान उपजिलाधिकारी रुद्रपुर, तहसीलदार सहित राजस्व विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।1
- गोरखपुर: नारियल काटने वाले गड़ासे से सिपाही पर हमला, पुलिस टीम में मचा हड़कंप.....1