ज़मीन तो मां है, न कोई खरीद सकता है न बेच सकता है’ बिना जमीन बेच ही कई गुना बढ़ेगी कमाई बिना ज़मीन बेचे ही कई गुना बढ़ेगी कमाई, विकास में ‘पार्टनर’ होंगे किसान जगह: रामपुर बाघेलान जिला: सतना,मध्य प्रदेश मौका: जन सुनवाई बड़ी संख्या में इलाके के किसान जमा हैं। दिल में उम्मीद है और आंखों में सवाल हैं। उत्सुक तो वहां मौजूद हर शख्स हैं और वो सब उस नीति और उस नियम के बारे में जानना चाहते हैं, जिसे सरकार ने किसानों से मिले फीडबैक और लंबी चर्चा के बाद तैयार किया है। जन सुनवाई में इलाके के एसडीएम और दूसरे अधिकारी भी मौजूद थे, लेकिन, किसानों को सीधी और सरल भाषा में जानकारी एक ऐसे व्यक्ति दे रहे थे जो नीति नियम से भी वाकिफ हैं और इस बात से भी कि किसानों की चिंताएं क्या हैं। “जमीन एक ऐसी चीज है जिसे न बेचा जा सकता है, न खरीदा जा सकता है, हम उसे मां कहते हैं।” ये सोच उस सपने की बुनियाद है, जिस पर डालमिया सीमेंट इलाके में नया प्लांट लगाना चाहता है। कंपनी को मध्य प्रदेश सरकार ने माइनिंग लीज दी है। किसी वक्त ऐसे किसी परियोजना के लिए किसानों की ज़मीन ले ली जाती थी। अधिग्रहण के बाद किसान जमीन पर अपना मालिकाना हक खो देते थे। उन्हें एकमुश्त तय रकम तो मिल जाती थी, लेकिन कई मामलों में देखा गया कि वो पैसा ज़्यादा दिनों तक टिक नहीं पाता था। एकमुश्त मिली रकम खर्च हो जाने के बाद किसान और उनका परिवार मुश्किल स्थिति में आ जाते थे, तब उनके पास न ज़मीन बचती थी और न ही आय का कोई जरिया। इसीलिए सरकार ने नई नीति तय की। अधिकारियों के मुताबिक, “किसानों के हित की सबसे बड़ी बात ये है कि ज़मीन पर मालिकाना हक किसानों के पास ही रहेगा, ओनरशिप ऑफ लैंड उन्हीं के पास रहेगी।” सरकार ज़मीन का मुआवजा (किराया) तय करेगी, जो हर साल एडवांस में दिया जाएगा मुआवजे की रकम किसानों को खेती से अभी हो रही आय के दोगुने से ज्यादा होगी मुआवजे की रकम हर साल बढ़ाई जाएगी जो फसल की पैदावार और उसकी कीमतों पर आधारित होगी ये मुआवाजा ‘द मिनिरल (अदर देन अटोमिक एंड हाइड्रो कार्बन एनर्जी मिनरल्स) कंसेशन रुल्स 2016’ (एमसीआर, 2016) के मुताबिक ही तय किया जाएगा। फायदे गिना रहे वो अधिकारी कहते हैं, “किसान को अपने खाद बीज मौसम की चिंता नहीं करनी होगी.” किसानों को किस बात की चिंता हो सकती है, उन्हें इसका भी अंदाज़ा है, “ आपका (किसानों का) एक ही सवाल आएगा कि मेरी ज़मीन का स्वरुप बदल जाएगा, अगर मैं भी किसान होऊंगा को तो मेरे जहन में भी यही सवाल आएगा, कि वो तो गड्ढा हो जाएगा कैसे काम चलेगा?” वो जवाब भी देते हैं, "नियम कहते हैं कि माइनिंग लीज खत्म होने पर नुकसान का मुआवजा तय किया जाए। लेकिन राज्य सरकार इससे आगे बढ़कर अभी से यह मुआवजा तय करना चाहती है, जो हर साल एक खास खाते में जमा होता रहेगा। लीज खत्म होने पर आपको इस जमा रकम पर मूलधन के साथ ब्याज भी मिलेगा।“ वो ये भी कहते हैं कि भरोसा बहाल होगा तभी गाड़ी आगे बढ़ेगी। “आप लोग सहमति देंगे तभी हम आगे बढ़ पाएंगे। लेकिन याद रखिए, एक उद्योग आएगा तो यहां विकास होगा।“ रामपुर बाघेलान के एसडीएम आरएन खरे भी कुछ इसी अंदाज़ में आश्वासन देते हैं। वो कहते हैं, “भाई जो किसान चाहेंगे वही होगा” अरिंदम मुखर्जी डालमिया सीमेंट के डिप्टी एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। वो भी आसान तरीके से बताते हैं कि ये नियम किसानों के लिए किस तरह और कितने फायदेमंद हैं। सबसे पहले तो ये जानना जरूरी है कि खनिज पर हक राज्य सरकार का होता है और सरकार ही माइनिंग के लिए पट्टा देती है। अरिंदम मुखर्जी कहते हैं कि सरकार ‘लैंड सर्कुलेरिटी’ लाना चाहती है। वो कहते हैं, “ माइनिंग 15-20 साल चलती है। कई मामलों में उसके बाद ज़मीन को खुदी हुई स्थिति में ही छोड़ दिया जाता है। सरकार इसी स्थिति को किसानों के हिसाब से बेहतर करना चाहती है। सरकार ने ऐसा कानून बनाया है कि ज़मीन से किसानों को जो इनकम होती है, वो तो लगातार मिले ही साथ ही, जो नुकसान होता है, उसकी भरपाई भी हो।“ अरिंदम बताते हैं, “ज़मीन को होने वाले नुकसान के लिए किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। ये राशि सरकार ही तय करेगी। ” किसानों को भरोसा दिलाते हुए वो कहते हैं, “हम आज से, पहले दिन से मुआवजा देने को तैयार हैं। ये एक खास अकाउंट में राज्य सरकार के पास रहे जिससे किसानों को मुआवजे पर ब्याज भी मिलता रहे। और खुदा न खास्ता अगर कभी कंपनी दिक्कत में भी आती है तो किसानों को कोई नुकसान न हो।“ अरिंदम मुखर्जी बताते हैं कि ज़मीन लीज पर देने के बाद भी किसान उसे आसानी से बेच सकता है। वो कहते हैं, “किसान अगर ये ज़मीन लीज़ पर देते हैं तो उनको करीब हम दोगुना से ज्यादा आमदनी दे रहे हैं अगर आप केलकुलेशन देखेंगे, किसी भी जमीन का करीब करीब 93 हज़ार रुपये प्रति एकड़ के करीब का एवरेज आ रहा है, यहां पर किसी भी किसान को अभी उतनी ही जमीन से 25-30 हज़ार से ज्यादा (आय) नहीं मिलता है। हर समझदार आदमी ये आदमनी हासिल करना चाहेगा।“ जानकार बताते हैं कि ये नियम किसानों के लिए 'डबल फायदे' वाला है और कमाई बढ़ाने का सुनहरा अवसर है। इसके फायदों को इन दो बड़े बिंदुओं से समझा जा सकता है: आय की सुरक्षा (नौकरी जैसी गारंटी): खेती-किसानी में हर बार आय की गारंटी नहीं होती। कभी मौसम खराब होता है तो कभी फसल के दाम गिर जाते हैं। लेकिन इस नीति के तहत, किसान को अपनी ज़मीन पर होने वाली खेती की वर्तमान सालाना आय से ठीक दोगुनी राशि हर साल मिलेगी। यह आय किसी सरकारी नौकरी की तरह तय और सुरक्षित होगी, जिसकी गारंटी लीज की पूरी अवधि तक रहेगी। मालिकाना हक और पार्टनरशिप: इस मॉडल का सबसे क्रांतिकारी पहलू यह है कि ज़मीन पर मालिकाना हक किसान का ही बना रहेगा। किसान एक तरह से इस पूरी परियोजना में एक 'पार्टनर' या 'साझेदार' की तरह होंगे। उनकी ज़मीन उनके ही नाम रहेगी और कंपनी को केवल एक तय मियाद के लिए माइनिंग का अधिकार दिया जाएगा। खास बातें: नुक़सान के लिए मुआवजा: एक अलग अकाउंट में सालाना मुआवज़ा जमा करते हुए उसे सुरक्षित रखा जाएगा। ये मुआवजा आज की गाइडलाइन वैल्यू के बराबर होगा। लीज़ खत्म होने पर खास अकाउंट में जमा मुआवजा ज़मीन मालिक किसानों को दिया जाएगा। इस तरह लीज खत्म होने के बाद ज़मीन मालिकों के आर्थिक हित सुरक्षित किए गए हैं। ज़मीन को वैज्ञानिक तरीके से दुरुस्त किया जाएगा। ये पॉलिसी ज़मीन मालिक किसानों के लिए दो तरह से फायदेमंद है लीज़ की मियाद खत्म होने के बाद ज़मीन वापस मिल जाएगी लीज के दौरान सालाना मुआवजा मिलता रहेगा और लीज़ खत्म होने पर भी मुआवजे के रुप में एक बड़ी राशि मिलेगी और इस तरह किसी भी तरह की अनिश्चितता की स्थिति नहीं रहेगी। ये नीति किसानों के हितों को भी सुरक्षित करती है और खनन के क्षेत्र में जिम्मेदारी के साथ विकास का रास्ता भी तैयार करती है। विकास यात्रा के प्रत्यक्ष भागीदार इस पूरी योजना का सार यह है कि अब विकास की दौड़ में किसान पीछे नहीं छूटेगा। वह इस औद्योगिक विकास यात्रा का सबसे अहम हिस्सा और प्रत्यक्ष भागीदार होगा। डालमिया सीमेंट जैसे प्रोजेक्ट्स के आने से जहाँ इलाके की सूरत बदलेगी, वहीं स्थानीय भूमि मालिक अपनी ज़मीन का मालिक रहते हुए ही आर्थिक समृद्धि की नई ऊंचाइयों को छुएंगे।
ज़मीन तो मां है, न कोई खरीद सकता है न बेच सकता है’ बिना जमीन बेच ही कई गुना बढ़ेगी कमाई बिना ज़मीन बेचे ही कई गुना बढ़ेगी कमाई, विकास में ‘पार्टनर’ होंगे किसान जगह: रामपुर बाघेलान जिला: सतना,मध्य प्रदेश मौका: जन सुनवाई बड़ी संख्या में इलाके के किसान जमा हैं। दिल में उम्मीद है और आंखों में सवाल हैं। उत्सुक तो वहां मौजूद हर शख्स हैं और वो सब उस नीति और उस नियम के बारे में जानना चाहते हैं, जिसे सरकार ने किसानों से मिले फीडबैक और लंबी चर्चा के बाद तैयार किया है। जन सुनवाई में इलाके के एसडीएम और दूसरे अधिकारी भी मौजूद थे, लेकिन, किसानों को सीधी और सरल भाषा में जानकारी एक ऐसे व्यक्ति दे रहे थे जो नीति नियम से भी वाकिफ हैं और इस बात से भी कि किसानों की चिंताएं क्या हैं। “जमीन एक ऐसी चीज है जिसे न बेचा जा सकता है, न खरीदा जा सकता है, हम उसे मां कहते हैं।” ये सोच उस सपने की बुनियाद है, जिस पर डालमिया सीमेंट इलाके में नया प्लांट लगाना चाहता है। कंपनी को मध्य प्रदेश सरकार ने माइनिंग लीज दी है। किसी वक्त ऐसे किसी परियोजना के लिए किसानों की ज़मीन ले ली जाती थी। अधिग्रहण के बाद किसान जमीन पर अपना मालिकाना हक खो देते थे। उन्हें एकमुश्त तय रकम तो मिल जाती थी, लेकिन कई मामलों में देखा गया कि वो पैसा ज़्यादा दिनों तक टिक नहीं पाता था। एकमुश्त मिली रकम खर्च हो जाने के बाद किसान और उनका परिवार मुश्किल स्थिति में आ जाते थे, तब उनके पास न ज़मीन बचती थी और न ही आय का कोई जरिया। इसीलिए सरकार ने नई नीति तय की। अधिकारियों के मुताबिक, “किसानों के हित की सबसे बड़ी बात ये है कि ज़मीन पर मालिकाना हक किसानों के पास ही रहेगा, ओनरशिप ऑफ लैंड उन्हीं के पास रहेगी।” सरकार ज़मीन का मुआवजा (किराया) तय करेगी, जो हर साल एडवांस में दिया जाएगा मुआवजे की रकम किसानों को खेती से अभी हो रही आय के दोगुने से ज्यादा होगी मुआवजे की रकम हर साल बढ़ाई जाएगी जो फसल की पैदावार और उसकी कीमतों पर आधारित होगी ये मुआवाजा ‘द मिनिरल (अदर देन अटोमिक एंड हाइड्रो कार्बन एनर्जी मिनरल्स) कंसेशन रुल्स 2016’ (एमसीआर, 2016) के मुताबिक ही तय किया जाएगा। फायदे गिना रहे वो अधिकारी कहते हैं, “किसान को अपने खाद बीज मौसम की चिंता नहीं करनी होगी.” किसानों को किस बात की चिंता हो सकती है, उन्हें इसका भी अंदाज़ा है, “ आपका (किसानों का) एक ही सवाल आएगा कि मेरी ज़मीन का स्वरुप बदल जाएगा, अगर मैं भी किसान होऊंगा को तो मेरे जहन में भी यही सवाल आएगा, कि वो तो गड्ढा हो जाएगा कैसे काम चलेगा?” वो जवाब भी देते हैं, "नियम कहते हैं कि माइनिंग लीज खत्म होने पर नुकसान का मुआवजा तय किया जाए। लेकिन राज्य सरकार इससे आगे बढ़कर अभी से यह मुआवजा तय करना चाहती है, जो हर साल एक खास खाते में जमा होता रहेगा। लीज खत्म होने पर आपको इस जमा रकम पर मूलधन के साथ ब्याज भी मिलेगा।“ वो ये भी कहते हैं कि भरोसा बहाल होगा तभी गाड़ी आगे बढ़ेगी। “आप लोग सहमति देंगे तभी हम आगे बढ़ पाएंगे। लेकिन याद रखिए, एक उद्योग आएगा तो यहां विकास होगा।“ रामपुर बाघेलान के एसडीएम आरएन खरे भी कुछ इसी अंदाज़ में आश्वासन देते हैं। वो कहते हैं, “भाई जो किसान चाहेंगे वही होगा” अरिंदम मुखर्जी डालमिया सीमेंट के डिप्टी एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। वो भी आसान तरीके से बताते हैं कि ये नियम किसानों के लिए किस तरह और कितने फायदेमंद हैं। सबसे पहले तो ये जानना जरूरी है कि खनिज पर हक राज्य सरकार का होता है और सरकार ही माइनिंग के लिए पट्टा देती है। अरिंदम मुखर्जी कहते हैं कि सरकार ‘लैंड सर्कुलेरिटी’ लाना चाहती है। वो कहते हैं, “ माइनिंग 15-20 साल चलती है। कई मामलों में उसके बाद ज़मीन को खुदी हुई स्थिति में ही छोड़ दिया जाता है। सरकार इसी स्थिति को किसानों के हिसाब से बेहतर करना चाहती है। सरकार ने ऐसा कानून बनाया है कि ज़मीन से किसानों को जो इनकम होती है, वो तो लगातार मिले ही साथ ही, जो नुकसान होता है, उसकी भरपाई भी हो।“ अरिंदम बताते हैं, “ज़मीन को होने वाले नुकसान के लिए किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। ये राशि सरकार ही तय करेगी। ” किसानों को भरोसा दिलाते हुए वो कहते हैं, “हम आज से, पहले दिन से मुआवजा देने को तैयार हैं। ये एक खास अकाउंट में राज्य सरकार के पास रहे जिससे किसानों को मुआवजे पर ब्याज भी मिलता रहे। और खुदा न खास्ता अगर कभी कंपनी दिक्कत में भी आती है तो किसानों को कोई नुकसान न हो।“ अरिंदम मुखर्जी बताते हैं कि ज़मीन लीज पर देने के बाद भी किसान उसे आसानी से बेच सकता है। वो कहते हैं, “किसान अगर ये ज़मीन लीज़ पर देते हैं तो उनको करीब हम दोगुना से ज्यादा आमदनी दे रहे हैं अगर आप केलकुलेशन देखेंगे, किसी भी जमीन का करीब करीब 93 हज़ार रुपये प्रति एकड़ के करीब का एवरेज आ रहा है, यहां पर किसी भी किसान को अभी उतनी ही जमीन से 25-30 हज़ार से ज्यादा (आय) नहीं मिलता है। हर समझदार आदमी ये आदमनी हासिल करना चाहेगा।“ जानकार बताते हैं कि ये नियम किसानों के लिए 'डबल फायदे' वाला है और कमाई बढ़ाने का सुनहरा अवसर है। इसके फायदों को इन दो बड़े बिंदुओं से समझा जा सकता है: आय की सुरक्षा (नौकरी जैसी गारंटी): खेती-किसानी में हर बार आय की गारंटी नहीं होती। कभी मौसम खराब होता है तो कभी फसल के दाम गिर जाते हैं। लेकिन इस नीति के तहत, किसान को अपनी ज़मीन पर होने वाली खेती की वर्तमान सालाना आय से ठीक दोगुनी राशि हर साल मिलेगी। यह आय किसी सरकारी नौकरी की तरह तय और सुरक्षित होगी, जिसकी गारंटी लीज की पूरी अवधि तक रहेगी। मालिकाना हक और पार्टनरशिप: इस मॉडल का सबसे क्रांतिकारी पहलू यह है कि ज़मीन पर मालिकाना हक किसान का ही बना रहेगा। किसान एक तरह से इस पूरी परियोजना में एक 'पार्टनर' या 'साझेदार' की तरह होंगे। उनकी ज़मीन उनके ही नाम रहेगी और कंपनी को केवल एक तय मियाद के लिए माइनिंग का अधिकार दिया जाएगा। खास बातें: नुक़सान के लिए मुआवजा: एक अलग अकाउंट में सालाना मुआवज़ा जमा करते हुए उसे सुरक्षित रखा जाएगा। ये मुआवजा आज की गाइडलाइन वैल्यू के बराबर होगा। लीज़ खत्म होने पर खास अकाउंट में जमा मुआवजा ज़मीन मालिक किसानों को दिया जाएगा। इस तरह लीज खत्म होने के बाद ज़मीन मालिकों के आर्थिक हित सुरक्षित किए गए हैं। ज़मीन को वैज्ञानिक तरीके से दुरुस्त किया जाएगा। ये पॉलिसी ज़मीन मालिक किसानों के लिए दो तरह से फायदेमंद है लीज़ की मियाद खत्म होने के बाद ज़मीन वापस मिल जाएगी लीज के दौरान सालाना मुआवजा मिलता रहेगा और लीज़ खत्म होने पर भी मुआवजे के रुप में एक बड़ी राशि मिलेगी और इस तरह किसी भी तरह की अनिश्चितता की स्थिति नहीं रहेगी। ये नीति किसानों के हितों को भी सुरक्षित करती है और खनन के क्षेत्र में जिम्मेदारी के साथ विकास का रास्ता भी तैयार करती है। विकास यात्रा के प्रत्यक्ष भागीदार इस पूरी योजना का सार यह है कि अब विकास की दौड़ में किसान पीछे नहीं छूटेगा। वह इस औद्योगिक विकास यात्रा का सबसे अहम हिस्सा और प्रत्यक्ष भागीदार होगा। डालमिया सीमेंट जैसे प्रोजेक्ट्स के आने से जहाँ इलाके की सूरत बदलेगी, वहीं स्थानीय भूमि मालिक अपनी ज़मीन का मालिक रहते हुए ही आर्थिक समृद्धि की नई ऊंचाइयों को छुएंगे।
- मॉडिफाइड साइलेंसर वाली बुलेट पर यातायात पुलिस का डंडा, 3 दिनों में हुई सख्त कार्यवाही नरसिंहपुर। शहर की सड़कों पर कानफोड़ू आवाज और पटाखों जैसे शोर मचाने वाले मॉडिफाइड साइलेंसरों के खिलाफ नरसिंहपुर यातायात पुलिस ने मोर्चा खोल दिया है। पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीणा के सख्त निर्देशन में चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के तहत पिछले तीन दिनों में तीन बुलेट मोटरसाइकिलों पर कार्यवाही की गई है।1
- पुलिस अधीक्षक डॉक्टर ऋषिकेश मीना के निर्देशन में अवैध मादक पदार्थों के विरूद्ध आपरेशन ईगल क्ला चलाया जा रहा है इस अभियान के तहत गोटेगांव थाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया मिनी ट्रक में जबलपुर से गाडरवारा जा रही 203 पेटी अवैध शराब को जप्त किया जिसकी लगभग कीमत 17 लाख रुपए बताई जा रही है पुलिस अधीक्षक डॉक्टर ऋषिकेश मीना ने कंट्रोल रूम में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अवैध शराब के विरुद्ध की गई कार्रवाई की पत्रकारों को जानकारी दी।1
- ऑपरेशन “ईगल क्लॉ” में बड़ी सफलता, 203 पेटी अवैध अंग्रेजी शराब जब्त नरसिंहपुर। अवैध शराब के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान “ऑपरेशन ईगल क्लॉ” के तहत नरसिंहपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में अवैध अंग्रेजी शराब जब्त की है। पुलिस ने 203 पेटी अवैध शराब और एक मिनी ट्रक सहित लगभग 25 लाख रुपये का मशरूका जप्त कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना के निर्देशन में जिले में अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में 10 मार्च 2026 की रात्रि को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि जबलपुर की ओर से एक वाहन में अवैध शराब की बड़ी खेप लाई जा रही है। सूचना पर एसडीओपी गोटेगांव मनीष त्रिपाठी के नेतृत्व में पुलिस टीमों ने जबलपुर मार्ग पर सघन नाकेबंदी की। नाकेबंदी के दौरान गोटेगांव बायपास रोड पर एक मिनी ट्रक को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन चालक वाहन तेज गति से लेकर भागने लगा। पुलिस टीम ने पीछा कर धूमा तिराहे के पास वाहन को घेरकर रोक लिया। तलाशी लेने पर ट्रक में रखे कार्टूनों से 203 पेटी अवैध अंग्रेजी शराब बरामद हुई। पुलिस ने मोनू ठाकुर निवासी परियट, जिला जबलपुर को गिरफ्तार कर आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत मामला दर्ज किया है। इस कार्रवाई में थाना गोटेगांव पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका3
- Post by पंकज गुप्ता "पत्रकार"1
- प्रदीप शर्मा नरसिंहपुर एसीएन भारत समाचार गोटेगांव पुलिस की बड़ी कार्यवाही, 25 लाख की अवैध शराब जब्त नरसिंहपुर। पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना के निर्देशन में चलाए जा रहे "ऑपरेशन ईगल क्लॉ" के तहत गोटेगांव पुलिस ने अवैध शराब तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। 1
- Post by Satish Vishwakarma2
- Post by Kailash gupta tv 241
- मॉडिफाइड साइलेंसरों के खिलाफ यातायात पुलिस की बड़ी कार्यवाही नरसिंहपुर। शहर की सड़कों पर कानफोड़ू आवाज और पटाखों जैसे शोर मचाने वाले मॉडिफाइड साइलेंसरों के खिलाफ नरसिंहपुर यातायात पुलिस ने मोर्चा खोल दिया है। पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीणा के सख्त निर्देशन में चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के तहत पिछले तीन दिनों में तीन बुलेट मोटरसाइकिलों पर कार्यवाही की गई है।1