मैहर संत रविदास मंदिर ट्रस्ट और मुनि रामपाल के विवाद ने पकड़ा तूल, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल मैहर संत शिरोमणि रविदास मंदिर निर्माण और उसके प्रबंधन को लेकर जिला मैहर में विवाद गहराता जा रहा है। संत शिरोमणि रविदास मंदिर समिति, जिसने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में इस मंदिर के निर्माण के लिए लंबा संघर्ष किया था, ने अब वर्तमान प्रशासनिक कार्रवाई और मुनि रामपाल की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं *मुख्य विवाद व्यक्तिगत नाम पर ट्रस्ट का आवेदन* समिति का आरोप है कि नियमानुसार रविदास मंदिर के नाम पर एक सार्वजनिक ट्रस्ट का पंजीकरण किया जाना चाहिए था। लेकिन, मुनि रामपाल द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मैहर के समक्ष कथित तौर पर किसी व्यक्ति विशेष के नाम से ट्रस्ट का आवेदन प्रस्तुत किया गया है कानूनी पक्ष: मप्र सार्वजनिक ट्रस्ट अधिनियम 1951 के तहत, किसी भी धार्मिक या सामाजिक संपत्ति को सार्वजनिक ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत किया जाना चाहिए। यदि सार्वजनिक चंदे या सरकारी अनुदान से निर्मित संपत्ति को निजी या व्यक्तिगत लाभ के लिए ट्रस्ट बनाने की कोशिश की जाती है, तो यह कानूनन अवैध माना जा सकता है *चौधरी समाज का अपमान और प्रशासनिक चुप्पी* समिति के सदस्यों का कहना है कि मुनि रामपाल ने न केवल समिति की अनदेखी की, बल्कि चौधरी समाज के प्रति कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी कर सामाजिक समरसता को बिगाड़ने का प्रयास किया है। समिति ने सवाल उठाया है कि गंभीर शिकायतों के बावजूद जिला कलेक्टर मैहर ने अब तक इस मामले में कोई दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की *सत्ता के दबाव की आशंका* समिति के प्रतिनिधियों ने आशंका जताई है कि प्रशासन स्थानीय भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के दबाव में काम कर रहा है। आरोप है कि राजनैतिक रसूख के चलते ही मुनि रामपाल को संरक्षण मिल रहा है और मंदिर की संपत्ति को एक 'व्यक्ति विशेष' के नाम करने की साजिश रची जा रही है। "जिस मंदिर के लिए हमने वर्षों संघर्ष किया, उसे निजी स्वार्थों की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा। प्रशासन की चुप्पी यह संकेत देती है कि कहीं न कहीं सत्ता का संरक्षण प्राप्त है प्रतिनिधि, संत शिरोमणि रविदास मंदिर समिति निष्कर्ष और आगामी कदम यदि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं करता है, तो यह मामला केवल स्थानीय विवाद न रहकर एक बड़े कानूनी और सामाजिक आंदोलन का रूप ले सकता है। पारदर्शिता की मांग कर रहे समाज के लोगों का कहना है कि वे इस मामले को उच्च न्यायालय तक ले जाने के लिए तैयार हैं।
मैहर संत रविदास मंदिर ट्रस्ट और मुनि रामपाल के विवाद ने पकड़ा तूल, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल मैहर संत शिरोमणि रविदास मंदिर निर्माण और उसके प्रबंधन को लेकर जिला मैहर में विवाद गहराता जा रहा है। संत शिरोमणि रविदास मंदिर समिति, जिसने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में इस मंदिर के निर्माण के लिए लंबा संघर्ष किया था, ने अब वर्तमान प्रशासनिक कार्रवाई और मुनि रामपाल की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं *मुख्य विवाद व्यक्तिगत नाम पर ट्रस्ट का आवेदन* समिति का आरोप है कि नियमानुसार रविदास मंदिर के नाम पर एक सार्वजनिक ट्रस्ट का पंजीकरण किया जाना चाहिए था। लेकिन, मुनि रामपाल द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मैहर के समक्ष कथित तौर पर किसी व्यक्ति विशेष के नाम से ट्रस्ट का आवेदन प्रस्तुत किया गया है कानूनी पक्ष: मप्र सार्वजनिक ट्रस्ट अधिनियम 1951 के तहत, किसी भी धार्मिक या सामाजिक संपत्ति को सार्वजनिक ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत किया जाना चाहिए। यदि सार्वजनिक चंदे या सरकारी अनुदान से निर्मित संपत्ति को निजी या व्यक्तिगत लाभ के लिए ट्रस्ट बनाने की कोशिश की जाती है, तो यह कानूनन अवैध माना जा सकता है *चौधरी समाज का अपमान और प्रशासनिक चुप्पी* समिति के सदस्यों का कहना है कि मुनि रामपाल ने न केवल समिति की अनदेखी की, बल्कि चौधरी समाज के प्रति कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी कर सामाजिक समरसता को बिगाड़ने का प्रयास किया है। समिति ने सवाल उठाया है कि गंभीर शिकायतों के बावजूद जिला कलेक्टर मैहर ने अब तक इस मामले में कोई दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की *सत्ता के दबाव की आशंका* समिति के प्रतिनिधियों ने आशंका जताई है कि प्रशासन स्थानीय भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के दबाव में काम कर रहा है। आरोप है कि राजनैतिक रसूख के चलते ही मुनि रामपाल को संरक्षण मिल रहा है और मंदिर की संपत्ति को एक 'व्यक्ति विशेष' के नाम करने की साजिश रची जा रही है। "जिस मंदिर के लिए हमने वर्षों संघर्ष किया, उसे निजी स्वार्थों की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा। प्रशासन की चुप्पी यह संकेत देती है कि कहीं न कहीं सत्ता का संरक्षण प्राप्त है प्रतिनिधि, संत शिरोमणि रविदास मंदिर समिति निष्कर्ष और आगामी कदम यदि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं करता है, तो यह मामला केवल स्थानीय विवाद न रहकर एक बड़े कानूनी और सामाजिक आंदोलन का रूप ले सकता है। पारदर्शिता की मांग कर रहे समाज के लोगों का कहना है कि वे इस मामले को उच्च न्यायालय तक ले जाने के लिए तैयार हैं।
- Anandraj RajNagod, Satnaरविदास जी के गुरु कौन थे हमें भी बता दो16 hrs ago
- मैहर संत रविदास मंदिर ट्रस्ट और मुनि रामपाल के विवाद ने पकड़ा तूल, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल मैहर संत शिरोमणि रविदास मंदिर निर्माण और उसके प्रबंधन को लेकर जिला मैहर में विवाद गहराता जा रहा है। संत शिरोमणि रविदास मंदिर समिति, जिसने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में इस मंदिर के निर्माण के लिए लंबा संघर्ष किया था, ने अब वर्तमान प्रशासनिक कार्रवाई और मुनि रामपाल की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं *मुख्य विवाद व्यक्तिगत नाम पर ट्रस्ट का आवेदन* समिति का आरोप है कि नियमानुसार रविदास मंदिर के नाम पर एक सार्वजनिक ट्रस्ट का पंजीकरण किया जाना चाहिए था। लेकिन, मुनि रामपाल द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मैहर के समक्ष कथित तौर पर किसी व्यक्ति विशेष के नाम से ट्रस्ट का आवेदन प्रस्तुत किया गया है कानूनी पक्ष: मप्र सार्वजनिक ट्रस्ट अधिनियम 1951 के तहत, किसी भी धार्मिक या सामाजिक संपत्ति को सार्वजनिक ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत किया जाना चाहिए। यदि सार्वजनिक चंदे या सरकारी अनुदान से निर्मित संपत्ति को निजी या व्यक्तिगत लाभ के लिए ट्रस्ट बनाने की कोशिश की जाती है, तो यह कानूनन अवैध माना जा सकता है *चौधरी समाज का अपमान और प्रशासनिक चुप्पी* समिति के सदस्यों का कहना है कि मुनि रामपाल ने न केवल समिति की अनदेखी की, बल्कि चौधरी समाज के प्रति कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी कर सामाजिक समरसता को बिगाड़ने का प्रयास किया है। समिति ने सवाल उठाया है कि गंभीर शिकायतों के बावजूद जिला कलेक्टर मैहर ने अब तक इस मामले में कोई दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की *सत्ता के दबाव की आशंका* समिति के प्रतिनिधियों ने आशंका जताई है कि प्रशासन स्थानीय भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के दबाव में काम कर रहा है। आरोप है कि राजनैतिक रसूख के चलते ही मुनि रामपाल को संरक्षण मिल रहा है और मंदिर की संपत्ति को एक 'व्यक्ति विशेष' के नाम करने की साजिश रची जा रही है। "जिस मंदिर के लिए हमने वर्षों संघर्ष किया, उसे निजी स्वार्थों की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा। प्रशासन की चुप्पी यह संकेत देती है कि कहीं न कहीं सत्ता का संरक्षण प्राप्त है प्रतिनिधि, संत शिरोमणि रविदास मंदिर समिति निष्कर्ष और आगामी कदम यदि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं करता है, तो यह मामला केवल स्थानीय विवाद न रहकर एक बड़े कानूनी और सामाजिक आंदोलन का रूप ले सकता है। पारदर्शिता की मांग कर रहे समाज के लोगों का कहना है कि वे इस मामले को उच्च न्यायालय तक ले जाने के लिए तैयार हैं।1
- मैहर को मिला पत्रकार भवन की सौगात जगह मिलने पर जल्द होगा निर्माण---श्रीकांत चतुर्वेदी मैहर । जैसा कि भाजपा की नीति हमेशा ही पत्रकारों के हित में रही है उसी तर्ज में विगत दिनों ग्राम पंचायत बदेरा में मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ इकाई मैहर के पत्रकार सम्मान समारोह में मैहर विधायक ने दी पत्रकार भवन की सौगात ज्ञात हो हाल में ही मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के जिला अध्यक्ष श्रीनिवास चतुर्वेदी लल्लू महराज को नियुक्त किया गया जिस पर श्री चतुर्वेदी के सानिध्य में पत्रकार सम्मान समारोह रखा गया जिस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मैहर विधायक माननीय श्रीकांत चतुर्वेदी जी रहे उक्त कार्यक्रम में मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ मैहर के जिला अध्यक्ष ने मैहर विधायक से मांग की कि मैहर जिला बन गया है और मैहर में पत्रकार भवन नहीं है इस लिए मैहर में एक पत्रकार भवन होना आवश्यक है जिस पर मैहर विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी ने कहा कि आप लोग सभी मैहर के पत्रकार साथी जगह बताए हम प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री जी से राशि स्वीकृत कराते हुए भवन का निर्माण कराएंगे पैसे की कोई कमी नहीं आएगी आगे मैहर विधायक ने पत्रकारों के सम्मान में अपने वक्तव्यों में कहा कि पत्रकारों के सम्मान में मेरे द्वारा कभी कोई कमी नहीं आएगी हा आप सभी तमाम मुद्दों से हमें अवगत कराते रहे अभी मैहर के देवी जी धाम में माई का लोक भी बनने जा रहा जिसकी बेहतर तैयारी हो गई है हम सब का दायित्व है कि सकारात्मक विचार के साथ मैहर के विकाश में एकजुट होकर कार्य करे विधायक ने संबोधन में कहा कि मैहर में जो विकाश कार्य चल रहे है उनको भी जनता के समक्ष बीच बीच में प्रकाशित करते रहे सभी पत्रकार साथियों ने मैहर के लोकप्रिय विधायक का आभार व्यक्त किया1
- *आज बृहस्पतिवार (गुरुवार) और जया एकादशी मतलब दिन ( वार)और तिथि दोनों श्री हरि विष्णु भगवान जी को समर्पित ऐसे शुभ और पवन दिन राजाधिराज श्री द्वारिकाधीश जी एवं देवी श्री रुक्मणि माता जी के श्रृंगार आरती दर्शन*🙏🏻1
- मेरे द्वारा दायर याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा UGC नए नियमों पर आज स्टे लगा दिया।मुख्य न्यायाधीश ने ये माना कि नए नियमों का सेक्शन 3C जातिवाद को बढ़ावा देने वाला लगता है।अब अगली सुनवाई 19.03.2026 की रखी गई है और तब तक पुराने 2012 वाले नियम ही लागू होंगे:- विनीत जिंदल, अधिवक्ता व याचिकाकर्ता1
- सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में भेदभाव को रोकने के लिए यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन की ओर से जारी नए नियमों पर गुरुवार को रोक लगा दी है. पिछले काफ़ी समय से इन नियमों का विरोध हो रहा था. बीबीसी संवाददाता उमंग पोद्दार के मुताबिक़, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 'यूजीसी प्रमोशन ऑफ़ इक्विटी रेग्युलेशंस 2026' के प्रावधानों में प्रथम दृष्टया अस्पष्टता है और इनके दुरुपयोग की आशंका है.1
- मौका मिला… पर परफॉर्मेंस नहीं! सवाल पूरे देश का है। #SanjuSamson #BharatCricket #INDvsNZ1
- #न_जन्मा_न_मरा मगहर से सतलोक गया कबीरा, जाका पाया नहीं शरीरा। आदरणीय धर्मदास जी ने परमेश्वर कबीर साहेब जी की महिमा में कहा है :- हिन्दू के तुम देव कहाये, मुसलमान के पीर। दोनो दीन का झगड़ा छिड़ गया, टोहे न पाया शरीर।। 508th God Kabir NirvanDiwas8
- 🙏कल दिनांक 30 जनवरी दोपहर 12:00 बजे सिस्टम तो सुधरेगा संगठन संस्थापक नीरज शर्मा भारत के राष्ट्रपति महोदय के लिए UGC बिल वापस लेने के संबंध में खून से पत्र लिखेंगे सभी सहयोगियों से निवेदन है ज्यादा से ज्यादा संख्या में धरना स्थल पर पहुंचे 27 जनवरी 2026 से सिस्टम तो सुधरेगा संगठन संस्थापक नीरज शर्मा धरने पर बैठे हैं, धरना स्थल-नागला मकारोल ग्वालियर रोड आगरा सूचना समझ में ना आने पर या स्थान न मिलने पर कॉल करें 88689616091