मुरैना जिले के जौरा विकासखंड की ग्राम पंचायत थरा गंभीर जलभराव की समस्या से त्रस्त है, जहाँ जल निकासी की व्यवस्था न होने से ग्रामीणों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने इस समस्या के समाधान के लिए मुरैना कलेक्टर, जनपद पंचायत सीईओ और प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना तक गुहार लगाई है, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे उनमें गहरा आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात शुरू होने से पहले ही गाँव में गंदा पानी जमा है, जिससे आम रास्ते, किसानों की निजी भूमि और रिहायशी क्षेत्र भर गए हैं। बरसात के दौरान स्थिति और भयावह होने की आशंका है, जहाँ जलभराव का पानी घरों तक पहुँचने से जहरीले जीव-जंतु और साँप आने का खतरा है। गंदगी के कारण संक्रामक और जानलेवा बीमारियों के फैलने की आशंका भी बढ़ गई है। ग्रामीण माधव सिंह रावत ने बताया कि जल निकासी के अभाव में रास्तों पर कीचड़ और पानी भरा रहने से आए दिन दुर्घटनाएँ होती हैं, और अब तक 8 से 10 लोग बाइक फिसलने से घायल हो चुके हैं, जिनमें से कई के पैर में फ्रैक्चर भी हुए हैं। किसान विशंभर सिंह रावत ने बताया कि उनकी निजी कृषि भूमि में लगातार पानी भरे रहने से फसल उत्पादन नहीं हो पा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीण उदय सिंह रावत ने चेतावनी दी कि जलभराव के कारण महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों का घर से निकलना भी मुश्किल हो गया है, और यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो बरसात के दिनों में ग्रामीणों को गाँव छोड़ने पर मजबूर होना पड़ सकता है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि गंदे पानी के कारण कई घरों के बोरवेल और पेयजल स्रोत भी प्रभावित हो रहे हैं, जिससे भूजल में गंदा पानी मिलने और पीने के पानी की समस्या के साथ लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है। ग्राम पंचायत थरा के सरपंच रसाल सिंह रावत ने भी इस बात की पुष्टि की कि पंचायत और ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से कलेक्टर, जनपद पंचायत सीईओ और कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना को लिखित शिकायतें दी हैं, लेकिन इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि स्थायी जल निकासी व्यवस्था के अभाव में यह समस्या लगातार विकराल रूप ले रही है। अब ग्रामीण प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि बरसात शुरू होने से पहले गाँव में स्थायी नाला निर्माण और अन्य आवश्यक जल निकासी व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जाएँ, ताकि इस गंभीर समस्या से लोगों को तत्काल राहत मिल सके।
मुरैना जिले के जौरा विकासखंड की ग्राम पंचायत थरा गंभीर जलभराव की समस्या से त्रस्त है, जहाँ जल निकासी की व्यवस्था न होने से ग्रामीणों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने इस समस्या के समाधान के लिए मुरैना कलेक्टर, जनपद पंचायत सीईओ और प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना तक गुहार लगाई है, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे उनमें गहरा आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात शुरू होने से पहले ही गाँव में गंदा पानी जमा है, जिससे आम रास्ते, किसानों की निजी भूमि और रिहायशी क्षेत्र भर गए हैं। बरसात के दौरान स्थिति और भयावह होने की आशंका है, जहाँ जलभराव का पानी घरों तक पहुँचने से जहरीले जीव-जंतु और साँप आने का खतरा है। गंदगी के कारण संक्रामक और जानलेवा बीमारियों के फैलने की आशंका भी बढ़ गई है। ग्रामीण माधव सिंह रावत ने बताया कि जल निकासी के अभाव में रास्तों पर कीचड़ और पानी भरा रहने से आए दिन दुर्घटनाएँ होती हैं, और अब तक 8 से 10 लोग बाइक फिसलने से घायल हो चुके हैं, जिनमें से कई के पैर में फ्रैक्चर भी हुए हैं। किसान विशंभर सिंह रावत ने बताया कि उनकी निजी कृषि भूमि में लगातार पानी भरे रहने से फसल उत्पादन नहीं हो पा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीण उदय सिंह रावत ने चेतावनी दी कि जलभराव के कारण महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों का घर से निकलना भी मुश्किल हो गया है, और यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो बरसात के दिनों में ग्रामीणों को गाँव छोड़ने पर मजबूर होना पड़ सकता है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि गंदे पानी के कारण कई घरों के बोरवेल और पेयजल स्रोत भी प्रभावित हो रहे हैं, जिससे भूजल में गंदा पानी मिलने और पीने के पानी की समस्या के साथ लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है। ग्राम पंचायत थरा के सरपंच रसाल सिंह रावत ने भी इस बात की पुष्टि की कि पंचायत और ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से कलेक्टर, जनपद पंचायत सीईओ और कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना को लिखित शिकायतें दी हैं, लेकिन इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि स्थायी जल निकासी व्यवस्था के अभाव में यह समस्या लगातार विकराल रूप ले रही है। अब ग्रामीण प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि बरसात शुरू होने से पहले गाँव में स्थायी नाला निर्माण और अन्य आवश्यक जल निकासी व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जाएँ, ताकि इस गंभीर समस्या से लोगों को तत्काल राहत मिल सके।
- मुरैना जिले के जौरा विकासखंड की ग्राम पंचायत थरा गंभीर जलभराव की समस्या से त्रस्त है, जहाँ जल निकासी की व्यवस्था न होने से ग्रामीणों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने इस समस्या के समाधान के लिए मुरैना कलेक्टर, जनपद पंचायत सीईओ और प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना तक गुहार लगाई है, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे उनमें गहरा आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात शुरू होने से पहले ही गाँव में गंदा पानी जमा है, जिससे आम रास्ते, किसानों की निजी भूमि और रिहायशी क्षेत्र भर गए हैं। बरसात के दौरान स्थिति और भयावह होने की आशंका है, जहाँ जलभराव का पानी घरों तक पहुँचने से जहरीले जीव-जंतु और साँप आने का खतरा है। गंदगी के कारण संक्रामक और जानलेवा बीमारियों के फैलने की आशंका भी बढ़ गई है। ग्रामीण माधव सिंह रावत ने बताया कि जल निकासी के अभाव में रास्तों पर कीचड़ और पानी भरा रहने से आए दिन दुर्घटनाएँ होती हैं, और अब तक 8 से 10 लोग बाइक फिसलने से घायल हो चुके हैं, जिनमें से कई के पैर में फ्रैक्चर भी हुए हैं। किसान विशंभर सिंह रावत ने बताया कि उनकी निजी कृषि भूमि में लगातार पानी भरे रहने से फसल उत्पादन नहीं हो पा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीण उदय सिंह रावत ने चेतावनी दी कि जलभराव के कारण महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों का घर से निकलना भी मुश्किल हो गया है, और यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो बरसात के दिनों में ग्रामीणों को गाँव छोड़ने पर मजबूर होना पड़ सकता है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि गंदे पानी के कारण कई घरों के बोरवेल और पेयजल स्रोत भी प्रभावित हो रहे हैं, जिससे भूजल में गंदा पानी मिलने और पीने के पानी की समस्या के साथ लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है। ग्राम पंचायत थरा के सरपंच रसाल सिंह रावत ने भी इस बात की पुष्टि की कि पंचायत और ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से कलेक्टर, जनपद पंचायत सीईओ और कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना को लिखित शिकायतें दी हैं, लेकिन इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि स्थायी जल निकासी व्यवस्था के अभाव में यह समस्या लगातार विकराल रूप ले रही है। अब ग्रामीण प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि बरसात शुरू होने से पहले गाँव में स्थायी नाला निर्माण और अन्य आवश्यक जल निकासी व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जाएँ, ताकि इस गंभीर समस्या से लोगों को तत्काल राहत मिल सके।1
- मुरैना के पहाड़गढ़ जनपद क्षेत्र से सरकारी राशन वितरण में कथित धांधली का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहाँ एक राशन दुकान संचालित डीलर पर 'हिटलरशाही' का आरोप है। जनपद की ग्राम पंचायत बिश्नोई के आश्रित गाँव 'मुरली का पूरा' से राशन डीलर की मनमानी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालाँकि, हम इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करते कि यह कब का है या किसके द्वारा बनाया गया है। वायरल वीडियो के अनुसार, राशन डीलर पात्रताधारी ग्रामीणों से राशन देने के नाम पर मशीन में उनका अंगूठा लगवा लेता है और पर्ची भी काट देता है। इसके बाद ग्रामीणों को यह आश्वासन दिया जाता है कि उन्हें राशन के बदले पैसे दिए जाएंगे। ग्रामीणों का आरोप है कि अंगूठा लगवाने के बाद डीलर द्वारा न तो राशन दिया जाता है और न ही पैसे। हद तो तब हो जाती है जब महीना पूरा होने पर उन पर्चियों को निरस्त (कैंसिल) कर दिया जाता है, जिसके कारण ग्रामीणों को उनके हक के राशन से वंचित होना पड़ रहा है। इस धोखाधड़ी को लेकर 'मुरली का पूरा' गांव के निवासियों में भारी रोष व्याप्त है। परेशान और आक्रोशित ग्रामीणों ने वायरल वीडियो के माध्यम से शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से इस पूरे मामले की गहन जांच करने और क्षेत्र की राशन वितरण व्यवस्था को तुरंत दुरुस्त करने की गुहार लगाई है। ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि आरोपी राशन डीलर के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।1
- भिंड जिले के कंचनपुर गांव में आयोजित भागवत कथा के सातवें और अंतिम दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े। इस दौरान, कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में महिलाएं और बुजुर्ग भी उपस्थित थे, जिससे पूरे गांव में भारी भीड़ देखी गई।1
- आज ही के दिन, वर्ष 2019 में, पीएम श्री नरेन्द्र मोदी ने लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण कर 'नए भारत' के संकल्प को एक नई गति प्रदान की थी। इस निर्णायक पड़ाव के साथ, नए भारत की यात्रा ने महत्वपूर्ण प्रगति की है, जिसकी शुरुआत 2014 में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से हुई थी। यह यात्रा अब डिजिटल भुगतान, सेमीकंडक्टर निर्माण, हरित ऊर्जा के उपयोग, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में नई ऊंचाइयों पर पहुंच चुकी है। यह केवल सरकार की सफलताओं की कहानी नहीं है, बल्कि यह 140 करोड़ भारतीयों के सपनों और उनके अटूट विश्वास की एक विकास गाथा है। यह नया भारत 'संकल्प से सिद्धि तक' और 'आत्मनिर्भर भारत से विकसित भारत तक' के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ रहा है।1
- शहर के कन्हैया रिसोर्ट में बाड़ी भारत विकास परिषद शाखा बाड़ी का कार्यशाला एवं दायित्व ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान परिषद के सदस्यों ने शपथ ली। यह समारोह नवनियुक्त अध्यक्ष मनोज शिवहरे की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।2
- देश में प्लास्टिक के नोटों की छपाई का ट्रायल शुरू हो गया है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण बताए गए हैं: कागज़ के नोटों की छपाई पर होने वाला अधिक खर्च, उनकी अपेक्षाकृत कम जीवन अवधि, और साइबर ठगों को नकली नोट छापने से रोककर उन्हें इस धंधे से दूर करना। यह स्पष्ट किया गया है कि ये प्लास्टिक नोट मोबाइल ग्लास जैसे कड़े नहीं होंगे, बल्कि दूध की थैली के समान ही बेहद मुलायम होंगे। हालांकि, इस बात पर चिंता जताई गई है कि यदि प्लास्टिक के नोटों की शुरुआत होती है, तो जनता को 2016 की तरह ही कठोर मुश्किलों से गुजरना पड़ सकता है।2
- धौलपुर में तेज़ आंधी और बारिश के कारण एक बड़ा हादसा हो गया है। इस घटना में जहाँ लोग बाल-बाल बच गए, वहीं कई मवेशी चोटिल हो गए। आंधी-बारिश के चलते घरेलू सामान भी अस्त-व्यस्त हो गया और दो ट्रैक्टरों को भारी नुकसान पहुँचा है।1