फादर्स डे के अवसर पर जहाँ दुनिया पिता के त्याग को याद कर रही है, वहीं कोरबा जिले की ग्राम पंचायत करतली में एक बेटे ने अपने पिता की स्मृति को जनसेवा का रूप देकर एक अनूठी मिसाल पेश की है। तत्कालीन सरपंच पति स्वर्गीय जयपाल सिंह कुसरो के आकस्मिक निधन के बाद उनके पुत्र ज्योतिष कुसरो ने न केवल पिता के ग्राम विकास के सपने को आगे बढ़ाया, बल्कि गांव के तिराहे पर उनकी प्रतिमा स्थापित कर यादों को जीवंत कर दिया है। ज्योतिष कुसरो के पिता स्वर्गीय जयपाल सिंह कुसरो करतली के एक लोकप्रिय व्यक्तित्व और तत्कालीन सरपंच पति थे, जिनका निधन गत विधानसभा चुनाव के समय हो गया था। उस समय ज्योतिष बिलासपुर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। पिता को खोने का गम और उनके ग्राम विकास के अधूरे सपने ने ज्योतिष की जिंदगी की राह बदल दी। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़कर गांव लौटने का फैसला किया और पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सरपंच पद के प्रत्याशी बने। उनकी सादगी, पिता के प्रति सम्मान और गांव के लिए कुछ करने का जज्बा देखकर करतली की जनता ने उन्हें भारी मतों से विजयी बनाया, और आज वे गांव के निर्वाचित सरपंच के रूप में पूरी निष्ठा से अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। सड़क, पानी, शिक्षा और स्वच्छता जैसे मुद्दों पर उनकी सक्रियता गांव में स्पष्ट रूप से दिख रही है। सरपंच बनने के बाद ज्योतिष ने पहला काम अपने पिता की स्मृति को चिरस्थायी बनाने का किया। उन्होंने गांव के मुख्य तिराहे पर स्वर्गीय जयपाल सिंह कुसरो की आदमकद प्रतिमा स्थापित करवाई, जिसमें क्षेत्रीय विधायक मद का महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रतिमा के लोकार्पण पर पूरा गांव भावुक हो उठा। पीले गमछे से सजी पिता की यह प्रतिमा आज न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे गांव के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत बन गई है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि जब भी वे तिराहे से गुजरते हैं, तो लगता है कि जयपाल आज भी गांव को देख रहे हैं। जयपाल जी ने गांव के लिए बहुत कुछ किया था, और अब उनका बेटा उससे भी आगे बढ़कर काम कर रहा है। वहीं, युवा सरपंच ज्योतिष के लिए यह प्रतिमा हर दिन पिता के ग्राम विकास के अधूरे सपने की याद दिलाती है। सरपंच ज्योतिष कहते हैं कि उनके पिता हमेशा कहते थे कि सरपंची पद नहीं, सेवा है, और उनका सपना करतली को एक आदर्श गांव बनाना था। उनके अचानक गुजर जाने से वह सपना अधूरा रह गया। ज्योतिष मानते हैं कि इंजीनियर बनकर शहर में नौकरी करना आसान था, लेकिन पिता के सपने को जीना उन्होंने अपना धर्म समझा। उन्हें लगता है कि जब गांव का कोई काम होता है तो उनके पिता साथ खड़े हैं, और यह प्रतिमा उन्हें हर पल जिम्मेदारी से काम करने की ताकत देती है। करतली का यह घटनाक्रम बताता है कि पिता का सच्चा सम्मान उनकी विरासत को आगे बढ़ाने में निहित है। ज्योतिष ने न केवल गांव की जिम्मेदारी संभाली, बल्कि अपने पिता के मूल्यों, सेवा भाव और ग्राम विकास के विजन को भी आत्मसात किया है। शहर की चकाचौंध को छोड़कर गांव की मिट्टी से जुड़ना और पिता के नाम को अमर करना, आज की पीढ़ी के लिए एक बड़ी सीख है। यह घटना दर्शाती है कि पिता सिर्फ एक रिश्ता नहीं, बल्कि एक विचार हैं जो पीढ़ियों को राह दिखाता है।
फादर्स डे के अवसर पर जहाँ दुनिया पिता के त्याग को याद कर रही है, वहीं कोरबा जिले की ग्राम पंचायत करतली में एक बेटे ने अपने पिता की स्मृति को जनसेवा का रूप देकर एक अनूठी मिसाल पेश की है। तत्कालीन सरपंच पति स्वर्गीय जयपाल सिंह कुसरो के आकस्मिक निधन के बाद उनके पुत्र ज्योतिष कुसरो ने न केवल पिता के ग्राम विकास के सपने को आगे बढ़ाया, बल्कि गांव के तिराहे पर उनकी प्रतिमा स्थापित कर यादों को जीवंत कर दिया है। ज्योतिष कुसरो के पिता स्वर्गीय जयपाल सिंह कुसरो करतली के एक लोकप्रिय व्यक्तित्व और तत्कालीन सरपंच पति थे, जिनका निधन गत विधानसभा चुनाव के समय हो गया था। उस समय ज्योतिष बिलासपुर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। पिता को खोने का गम और उनके ग्राम विकास के अधूरे सपने ने ज्योतिष की जिंदगी की राह बदल दी। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़कर गांव लौटने का फैसला किया और पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सरपंच पद के प्रत्याशी बने। उनकी सादगी, पिता के प्रति सम्मान और गांव के लिए कुछ करने का जज्बा देखकर करतली की जनता ने उन्हें भारी मतों से विजयी बनाया, और आज वे गांव के निर्वाचित सरपंच के रूप में पूरी निष्ठा से अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। सड़क, पानी, शिक्षा और स्वच्छता जैसे मुद्दों पर उनकी सक्रियता गांव में स्पष्ट रूप से दिख रही है। सरपंच बनने के बाद ज्योतिष ने पहला काम अपने पिता की स्मृति को चिरस्थायी बनाने का किया। उन्होंने गांव के मुख्य तिराहे पर स्वर्गीय जयपाल सिंह कुसरो की आदमकद प्रतिमा स्थापित करवाई, जिसमें क्षेत्रीय विधायक मद का महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रतिमा के लोकार्पण पर पूरा गांव भावुक हो उठा। पीले गमछे से सजी पिता की यह प्रतिमा आज न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे गांव के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत बन गई है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि जब भी वे तिराहे से गुजरते हैं, तो लगता है कि जयपाल आज भी गांव को देख रहे हैं। जयपाल जी ने गांव के लिए बहुत कुछ किया था, और अब उनका बेटा उससे भी आगे बढ़कर काम कर रहा है। वहीं, युवा सरपंच ज्योतिष के लिए यह प्रतिमा हर दिन पिता के ग्राम विकास के अधूरे सपने की याद दिलाती है। सरपंच ज्योतिष कहते हैं कि उनके पिता हमेशा कहते थे कि सरपंची पद नहीं, सेवा है, और उनका सपना करतली को एक आदर्श गांव बनाना था। उनके अचानक गुजर जाने से वह सपना अधूरा रह गया। ज्योतिष मानते हैं कि इंजीनियर बनकर शहर में नौकरी करना आसान था, लेकिन पिता के सपने को जीना उन्होंने अपना धर्म समझा। उन्हें लगता है कि जब गांव का कोई काम होता है तो उनके पिता साथ खड़े हैं, और यह प्रतिमा उन्हें हर पल जिम्मेदारी से काम करने की ताकत देती है। करतली का यह घटनाक्रम बताता है कि पिता का सच्चा सम्मान उनकी विरासत को आगे बढ़ाने में निहित है। ज्योतिष ने न केवल गांव की जिम्मेदारी संभाली, बल्कि अपने पिता के मूल्यों, सेवा भाव और ग्राम विकास के विजन को भी आत्मसात किया है। शहर की चकाचौंध को छोड़कर गांव की मिट्टी से जुड़ना और पिता के नाम को अमर करना, आज की पीढ़ी के लिए एक बड़ी सीख है। यह घटना दर्शाती है कि पिता सिर्फ एक रिश्ता नहीं, बल्कि एक विचार हैं जो पीढ़ियों को राह दिखाता है।
- पुलिस ने 7 लाख रुपये की टाटा मैजिक गाड़ी सहित चोरी का अन्य सामान बरामद किया है। इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।4
- अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर कोरबा की अशोक वाटिका में एक भव्य योग शिविर का आयोजन किया गया, जहाँ बड़ी संख्या में नागरिकों ने योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संकल्प लिया। यह शिविर मॉर्निंग वॉक ग्रुप, सीए एसोसिएशन, प्रांतीय अग्रवाल सभा, भारत विकास परिषद शक्ति स्वरूपा और रेड क्रॉस सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था। योग विशेषज्ञ डॉ. आकृति तिवारी ने इस कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को विभिन्न योगासन और प्राणायाम का अभ्यास कराया। उन्होंने योग से प्राप्त होने वाले शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक लाभों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि नियमित योगाभ्यास से व्यक्ति अनेक रोगों से दूर रह सकता है और उसके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।1
- कोरबा जिले के बालको थाना क्षेत्र से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ पुलिस ने एक नाबालिग को ब्लैकमेल कर उससे संबंध बनाने का दबाव डालने के आरोप में कार्रवाई करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।1
- कोरबा में 'हर घर जल' योजना की शुरुआत तो हुई और इसके तहत हर घर में नल भी लगाए गए। हालांकि, इस योजना के बावजूद इन नलों से पानी की एक बूंद भी नहीं आ रही है, जिसके चलते पूरा गांव प्यासा है।1
- ज़िले के डबरा में आयोजित की गई जिला स्तरीय जैविक खेती कार्यशाला अब सवालों के घेरे में आ गई है।1
- जांजगीर-चांपा में प्रधानमंत्री आवास योजना में हुई बड़ी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। इस मामले में जांच पूरी होने के बाद रोजगार सहायक रिया यादव को उनके पद से बर्खास्त कर दिया गया है।1
- पुलिस ने एक नए तरह के अपराध रैकेट का पर्दाफाश किया है, जो 'कमीशन दो और महिलाओं को लूटो' के सिद्धांत पर काम करता था। इस रैकेट का भंडाफोड़ पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में सामने आया है।1
- कोरबा के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत रामसागरपारा तालाब के पास मुख्य मार्ग पर रविवार रात हुई एक हिंसक घटना का वीडियो सामने आया है। इस घटना में बीच-बचाव करने पहुंचे युवक रवि यादव, जिनके पिता लेथ मशीन का काम करते हैं, के सिर पर डंडे से वार किया गया, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना में रामसागरपारा निवासी हर्षित और महेंद्र गंगवानी का नाम सामने आ रहा है, जो वायरल वीडियो में एक युवक हाथ में ईंट और दूसरा डंडा लिए हुए दिख रहे हैं। जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले हुए एक विवाद का बदला लेने की नीयत से ये लोग युवक के घर गए थे और वहां जमकर मारपीट की। युवक सड़क पर गिर पड़ा और आसपास के लोग जमा हो गए। इसी दौरान रवि यादव सफेद शर्ट में वहां पहुंचे और ईंट पकड़े युवक को समझाने व रोकने का प्रयास करने लगे। ईंट पकड़ा युवक भी अपने साथी को डंडा मारने से रोकने की कोशिश कर रहा था, लेकिन एकाएक हमला कर दिया गया और रवि यादव के सिर पर जोरदार वार हुआ, जिससे वह सड़क पर गिर पड़े। रवि यादव को आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। संभवतः सिर में लगी गंभीर चोट के कारण उनकी मौत हुई है। इस घटना से आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने हर्षित व महेंद्र गंगवानी के घर पर जाकर अपना गुस्सा उतारने की कोशिश की, लेकिन हत्या की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत अलर्ट हो गई और आसपास के इलाकों में फैलकर आरोपियों के घर पर होने वाले संभावित हमले को समय रहते टाल दिया। हालांकि समाचार लिखे जाने तक आरोपियों की गिरफ्तारी के संबंध में कोई पुष्ट जानकारी नहीं मिल सकी थी, लेकिन बाद में वार्ड क्रमांक 1 रामसागरपारा (कोरबा) निवासी महेंद्र को गिरफ्तार कर लिया गया, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि दो बच्चों की आपसी लड़ाई ने खूनी मोड़ ले लिया और वह 'हत्यारा पिता' बन गया।2