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मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की गुड़ी रेंज के आमा खुजरी जंगल में अतिक्रमण हटाने पहुँची वन विभाग की टीम पर हमला हो गया। आरोप है कि लगभग 400 अतिक्रमणकारियों ने गोफन (गुलेल) और लाठियों से हमला किया, जिसमें आठ वनकर्मी घायल हो गए। इस हमले में कुछ वनकर्मियों का सिर फट गया तो किसी का कान कट गया। सभी घायल वनकर्मियों का जिला अस्पताल में इलाज जारी है।
Jansewak Krishna Gupta (Nitish)
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की गुड़ी रेंज के आमा खुजरी जंगल में अतिक्रमण हटाने पहुँची वन विभाग की टीम पर हमला हो गया। आरोप है कि लगभग 400 अतिक्रमणकारियों ने गोफन (गुलेल) और लाठियों से हमला किया, जिसमें आठ वनकर्मी घायल हो गए। इस हमले में कुछ वनकर्मियों का सिर फट गया तो किसी का कान कट गया। सभी घायल वनकर्मियों का जिला अस्पताल में इलाज जारी है।
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- हरसूद तहसील के ग्राम निशानियां में रविवार को एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें एक 10 वर्षीय बालक की पानी में डूबने से मौत हो गई।1
- मध्य प्रदेश के खंडवा वन मंडल की गुड़ी रेंज में वनभूमि पर अतिक्रमण रोकने गई वन विभाग की 'स्पेशल फ्लाइंग स्क्वॉड' पर रविवार दोपहर कथित अतिक्रमणकारियों ने जानलेवा हमला कर दिया। आमा खुजरी बीट के कक्ष क्रमांक 748 और 749 में गश्त कर रही इस विशेष टीम पर गोफन, पत्थरों और लाठियों से सुनियोजित तरीके से हमला किया गया, जिसमें 8 से अधिक वनरक्षक गंभीर रूप से घायल हो गए। हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कुछ जवानों का कान कट गया, तो कुछ का सिर फूट गया, जिससे वे लहूलुहान हो गए। यह हमला गुड़ी रेंज में वनभूमि पर हो रहे बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे के खिलाफ हाल ही में वन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा की गई अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई का सीधा प्रतिशोध बताया जा रहा है। खंडवा डीएफओ राकेश डामोर ने बताया कि वर्ष 2025 बैच के 45 नवपदस्थ वनरक्षकों को ट्रेनिंग के बाद गुड़ी रेंज में तैनात किया गया था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब यह युवा टीम नियमित गश्त पर निकली, तो पहले से घात लगाकर बैठे अतिक्रमणकारियों ने अचानक धावा बोल दिया, जिससे वन टीम को संभलने का मौका ही नहीं मिला। इस हमले में वनरक्षक ज्वाला सिंह, रोमांक नायक, शैलेंद्र यादव, राजेंद्र सिंह सक्तावत, राजेंद्र बागड़ी, प्रदीप बघेल, चंद्रपाल तोमर और राहुल लोधी घायल हो गए। घटना के बाद विभागीय सुरक्षा व्यवस्था और राहत कार्यों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, वहीं घायल वनकर्मियों ने वन विभाग की प्रतिक्रिया को 'शर्मनाक' बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि हमले की सूचना दिए जाने पर गुड़ी परिक्षेत्र के रेंजर नरेंद्र पटेल मदद के लिए घटनास्थल पर पहुंचने के बजाय सीधे खंडवा चले गए। इसके चलते, घायल वनरक्षक लगभग दो घंटे तक जंगल के भीतर बिना किसी प्राथमिक उपचार या बचाव दल के तड़पते रहे। पास की एक अन्य वन टीम भी डर के मारे जंगल के बाहर से ही वापस लौट गई। स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि पूर्व में भी ऐसी झड़पें हुई हैं, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए, जिसका खामियाजा नए वनरक्षकों को भुगतना पड़ा। वन विभाग के कर्मचारियों ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई और स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है।1
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- बुरहानपुर में नाली निर्माण का काम पिछले कई दिनों से बेहद धीमी गति से चल रहा है, जिसके कारण सड़क का निर्माण भी रुक गया है। स्थिति यह है कि पूरे क्षेत्र में भारी कीचड़ और गाद जमा हो गई है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिनमें हर समय पानी भरा रहता है। इस गंभीर स्थिति के बावजूद बच्चे इन्हीं गड्ढों और कीचड़ भरे इलाके में खेलते हुए देखे जाते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।1
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