उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जनपद खीरी का पलिया कस्बा और आसपास का इलाका इन दिनों गंभीर नशे के संकट से जूझ रहा है। इस शांत कहे जाने वाले क्षेत्र में नशे का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है, जिससे स्थानीय कानून व्यवस्था और समाज में चिंता व्याप्त है। नाबालिगों और युवाओं के नशा करते हुए कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जो पलिया में नशे के जहर के फैलने का सीधा प्रमाण हैं। स्थानीय सूत्रों और प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि इस पूरे गोरखधंधे के पीछे बड़े ड्रग्स माफिया सक्रिय हैं। ये सफेदपोश और शातिर अपराधी पर्दे के पीछे से बड़े पैमाने पर ड्रग्स और प्रतिबंधित नशीली दवाओं का सिंडिकेट चला रहे हैं। इनका मुख्य निशाना स्कूल-कॉलेज के छात्र और कम उम्र के युवा हैं, जिनका भविष्य इस जानलेवा लत के कारण अंधकार में धकेला जा रहा है। जनता के बीच यह बड़ा सवाल है कि जब पलिया में ड्रग्स का कोई स्थानीय निर्माण नहीं है, तो इतनी बड़ी मात्रा में यह ज़हर यहाँ कैसे पहुँच रहा है। नेपाल सीमा से सटे होने के कारण तस्करी की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। लोगों का मानना है कि पुलिस और जांच एजेंसियां यदि संदिग्धों और पहले पकड़े गए अपराधियों की सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) और डायरी की बारीकी से जांच करें, तो इस पूरे नेक्सस का पर्दाफाश हो सकता है। आश्चर्य की बात यह है कि कई नशे के कारोबारी, जिन पर पहले से मुकदमे दर्ज हैं, उनके हौसले अब भी बुलंद हैं और वे निडर होकर यह 'मौत का सामान' बेच रहे हैं। इन अपराधियों को कथित तौर पर किसका संरक्षण प्राप्त है, यह एक अहम सवाल है, क्योंकि कई बड़े नाम और मुख्य सरगना अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। नशे के इस बढ़ते कारोबार का सीधा असर पलिया के अपराध ग्राफ पर भी दिख रहा है। नशे की तलब पूरी करने के लिए युवा चोरी, छिनैती, आपसी मारपीट और महिलाओं से अभद्रता जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं, जिनमें तेजी से वृद्धि हुई है। पलिया की जनता में इस स्थिति को लेकर भारी आक्रोश है। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन और पलिया पुलिस से यह मांग की है कि छोटे-मोटे पैडलर्स के साथ-साथ इस धंधे के असली 'आकाओं' और ड्रग्स माफियाओं को चिह्नित कर उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट और बुलडोजर जैसी कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि पलिया की युवा पीढ़ी को इस बर्बादी से बचाया जा सके।
उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जनपद खीरी का पलिया कस्बा और आसपास का इलाका इन दिनों गंभीर नशे के संकट से जूझ रहा है। इस शांत कहे जाने वाले क्षेत्र में नशे का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है, जिससे स्थानीय कानून व्यवस्था और समाज में चिंता व्याप्त है। नाबालिगों और युवाओं के नशा करते हुए कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जो पलिया में नशे के जहर के फैलने का सीधा प्रमाण हैं। स्थानीय सूत्रों और प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि इस पूरे गोरखधंधे के पीछे बड़े ड्रग्स माफिया सक्रिय हैं। ये सफेदपोश और शातिर अपराधी पर्दे के पीछे से बड़े पैमाने पर ड्रग्स और प्रतिबंधित नशीली दवाओं का सिंडिकेट चला रहे हैं। इनका मुख्य निशाना स्कूल-कॉलेज के छात्र और कम उम्र के युवा हैं, जिनका भविष्य इस जानलेवा लत के कारण अंधकार में धकेला जा रहा है। जनता के बीच यह बड़ा सवाल है कि जब पलिया में ड्रग्स का कोई स्थानीय निर्माण नहीं है, तो इतनी बड़ी मात्रा में यह ज़हर यहाँ कैसे पहुँच रहा है। नेपाल सीमा से सटे होने के कारण तस्करी की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। लोगों का मानना है कि पुलिस और जांच एजेंसियां यदि संदिग्धों और पहले पकड़े गए अपराधियों की सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) और डायरी की बारीकी से जांच करें, तो इस पूरे नेक्सस का पर्दाफाश हो सकता है। आश्चर्य की बात यह है कि कई नशे के कारोबारी, जिन पर पहले से मुकदमे दर्ज हैं, उनके हौसले अब भी बुलंद हैं और वे निडर होकर यह 'मौत का सामान' बेच रहे हैं। इन अपराधियों को कथित तौर पर किसका संरक्षण प्राप्त है, यह एक अहम सवाल है, क्योंकि कई बड़े नाम और मुख्य सरगना अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। नशे के इस बढ़ते कारोबार का सीधा असर पलिया के अपराध ग्राफ पर भी दिख रहा है। नशे की तलब पूरी करने के लिए युवा चोरी, छिनैती, आपसी मारपीट और महिलाओं से अभद्रता जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं, जिनमें तेजी से वृद्धि हुई है। पलिया की जनता में इस स्थिति को लेकर भारी आक्रोश है। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन और पलिया पुलिस से यह मांग की है कि छोटे-मोटे पैडलर्स के साथ-साथ इस धंधे के असली 'आकाओं' और ड्रग्स माफियाओं को चिह्नित कर उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट और बुलडोजर जैसी कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि पलिया की युवा पीढ़ी को इस बर्बादी से बचाया जा सके।
- पलिया कलां खीरी स्थित गुड्डी सेवा अस्पताल में शुक्रवार को इलाज के दौरान एक पाँच दिन के नवजात शिशु की मौत के बाद अस्पताल परिसर छावनी में तब्दील हो गया। आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल के संचालक और वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ए.के. अवस्थी पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने और एक आठ साल के बच्चे के साथ मारपीट करने का गंभीर आरोप लगाते हुए कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। इस तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया। मृतक नवजात की माँ खुशबू और पिता मनोज ने रोते-बिलखते हुए बताया कि उनके बच्चे को समय पर सही उपचार नहीं मिला, जिसके कारण उसकी असमय मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टर पर संवेदनहीनता की सारी हदें पार करने का आरोप लगाया, जिसके बाद पीड़ित परिवार और उनके समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। दूसरी ओर, आरोपी चिकित्सक डॉ. ए.के. अवस्थी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि वे किसी भी निष्पक्ष जांच के लिए तैयार हैं और दोषी पाए जाने पर हर कार्रवाई भुगतने को राजी हैं। घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन की एक और बड़ी लापरवाही सामने आई, जहाँ नवजात की मौत के कई घंटों बाद तक उसके शव को एनआईसीयू (NICU) वार्ड से बाहर नहीं निकाला गया। इससे वार्ड में भर्ती तीन अन्य नवजात शिशुओं के परिजनों में हड़कंप मच गया, जिन्होंने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ तीखा विरोध दर्ज कराते हुए दूसरे बच्चों में गंभीर संक्रमण फैलने का खतरा बताया। घटना की सूचना मिलते ही पलिया कोतवाली पुलिस मौके पर पहुँची, स्थिति को नियंत्रित किया और नवजात के शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया है। पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। फिलहाल क्षेत्र में इस घटना को लेकर भारी तनाव और चर्चाओं का माहौल बना हुआ है।4
- बेरोजगारी और गरीबी से जूझ रहे एक युवक ने आत्महत्या कर ली है। इस दुखद घटना के कारण उसके परिवार में शोक और दुखों की लहर छा गई है।1
- लखीमपुर खीरी के इंडो-नेपाल बॉर्डर पर स्थित तिकुनिया कस्बे में महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज ग्राउंड पर पहली बार एक भव्य नाइट क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन किया गया है। ऑल इंडिया प्रेस जर्नलिस्ट एसोसिएशन (APPJA) के बैनर तले आयोजित इस प्रतियोगिता में कुल 16 टीमें हिस्सा ले रही हैं, जिससे पूरे क्षेत्र के खेल प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। टूर्नामेंट का शानदार शुभारंभ 20 जून 2026 की शाम 7 बजे पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी ने फीता काटकर किया। इस उद्घाटन समारोह में उन्होंने स्वयं पिच पर बल्ला थामकर कुछ शानदार शॉट खेले और खिलाड़ियों का भरपूर उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर APPJA के जिला सचिव अतीक शेख, तिकुनिया इकाई अध्यक्ष राजीव खत्री, संरक्षक रूपनारायण मिश्रा, कोषाध्यक्ष अतुल तिवारी, महामंत्री आनंद अग्रवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष योगेश श्रीवास्तव, मीडिया प्रभारी सुरेंद्र सिंगल ‘चट्टान’, उपाध्यक्ष विशाल विश्वकर्मा और महासचिव मुन्नालाल विश्वकर्मा समेत कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। प्रतियोगिता के विजेताओं के लिए आकर्षक पुरस्कार रखे गए हैं, जिसमें विजेता टीम को ₹31,000 नकद के साथ ट्रॉफी, उपविजेता टीम को ₹15,000 नकद के साथ ट्रॉफी और मैन ऑफ द सीरीज चुने जाने वाले खिलाड़ी को ₹2,100 का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। तिकुनिया इकाई अध्यक्ष राजीव खत्री के नेतृत्व में आयोजित इस टूर्नामेंट को सफल बनाने में तिकुनिया व्यापार मंडल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसके अध्यक्ष हैप्पी कुंछल सहित सभी पदाधिकारी सक्रिय सहयोग दे रहे हैं। महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज के प्रबंधक आशीष अग्रवाल और कॉलेज प्रशासन भी इस आयोजन में पूरा सहयोग कर रहा है। आयोजकों ने दूर-दराज से आने वाली सभी टीमों के लिए भोजन और ठहरने की उचित व्यवस्था भी की है। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें इस रोमांचक प्रतियोगिता पर टिकी हैं, यह जानने के लिए कि 16 टीमों के बीच होने वाले इन मुकाबलों में कौन सी टीम चैंपियन बनेगी और किस खिलाड़ी को अपनी नई पहचान मिलेगी।1
- उत्तर प्रदेश के बिजनौर में एक घटना सामने आई है, जहाँ CO अंजनी चतुर्वेदी ने सांसद चंद्रशेखर के प्रतिनिधि को जमकर फटकार लगाई। इस दौरान, बीच-बचाव करने आए एक इंस्पेक्टर को भी CO ने अपनी नसीहतों के लपेटे में ले लिया। यह पूरी घटना उन पुलिसकर्मियों के लिए खास तौर पर देखने लायक बताई जा रही है जो नेताओं की चमचागिरी में लिप्त रहते हैं, एक ऐसा पाठ पढ़ाया गया जिससे पुलिसकर्मियों को सीखने की बात कही गई है।1
- आज दिनांक 21 जून 2026 को सुबह 5:00 बजे बीर बाबा स्थान (मूर्तिया ग्राम पंचायत) में वन विभाग की टीम ने लगातार प्रयासों के बाद एक और तेंदुए को पिंजरे में कैद करने में सफलता हासिल की। इस नवीनतम उपलब्धि के साथ, वन विभाग की टीम ने बीते एक महीने के भीतर कुल चार तेंदुओं को पिंजरे में कैद किया है। भारतीय किसान यूनियन टिकैत की निघासन इकाई ने वन विभाग के सभी अधिकारी गणों और कर्मचारी गणों का इस सफलता के लिए हृदय से धन्यवाद व्यक्त किया है। उन्होंने विशेष रूप से वन क्षेत्राधिकार भूपेंद्र चौधरी साहब और S.D.O मनोज तिवारी जी, साथ ही उत्तर रेंज की D.F.O मैडम जी का आभार जताया, जिन्होंने तेंदुओं को पकड़ने के लिए उच्च अधिकारियों से बातचीत कर पिंजरे लगवाने में अहम भूमिका निभाई। संगठन ने ईश्वर से प्रार्थना की है कि सभी अधिकारी व कर्मचारी स्वस्थ रहें, उन्हें लंबी उम्र मिले और वे जनसेवा में सदैव तत्पर रहें।1
- लाखन आर्मी संगठन के मुखिया श्री सूरज पासी जी के नेतृत्व में पासी स्वाभिमान यात्रा दिनांक 06/07/2026 को जनपद लखीमपुर खीरी की धरती पर पहुँचेगी। इस यात्रा के मद्देनजर, लाखन आर्मी संगठन ने दिनांक 25/06/2026 को जनपद लखीमपुर खीरी में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक में जिला कार्यकारिणी के सभी सदस्य गण, प्रकोष्ठ के पदाधिकारी गण, विधानसभा अध्यक्ष, तहसील अध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्ष, ग्राम अध्यक्ष और सभी सक्रिय सदस्य शामिल होंगे। बैठक का मुख्य उद्देश्य पासी स्वाभिमान यात्रा के मार्ग का निर्धारण करना, कार्यक्रम के आयोजन स्थल का चुनाव करना और अन्य संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा करना है। संगठन ने सभी पदाधिकारी और विधानसभा अध्यक्ष जिला कार्यकारिणी के सदस्यों से इस बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का आग्रह किया है।1
- पूरनपुर में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच लोगों को राहत पहुँचाने के उद्देश्य से प्रेस क्लब पूरनपुर द्वारा एक शरबत प्याऊ का आयोजन किया गया है। यह पहल स्टेशन चौराहे पर स्थित पुलिस चौकी के पास की गई, जहाँ राहगीरों और स्थानीय लोगों को गर्मी से निजात दिलाने के लिए ठंडे शरबत का वितरण किया जा रहा है।1
- उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जनपद खीरी का पलिया कस्बा और आसपास का इलाका इन दिनों गंभीर नशे के संकट से जूझ रहा है। इस शांत कहे जाने वाले क्षेत्र में नशे का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है, जिससे स्थानीय कानून व्यवस्था और समाज में चिंता व्याप्त है। नाबालिगों और युवाओं के नशा करते हुए कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जो पलिया में नशे के जहर के फैलने का सीधा प्रमाण हैं। स्थानीय सूत्रों और प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि इस पूरे गोरखधंधे के पीछे बड़े ड्रग्स माफिया सक्रिय हैं। ये सफेदपोश और शातिर अपराधी पर्दे के पीछे से बड़े पैमाने पर ड्रग्स और प्रतिबंधित नशीली दवाओं का सिंडिकेट चला रहे हैं। इनका मुख्य निशाना स्कूल-कॉलेज के छात्र और कम उम्र के युवा हैं, जिनका भविष्य इस जानलेवा लत के कारण अंधकार में धकेला जा रहा है। जनता के बीच यह बड़ा सवाल है कि जब पलिया में ड्रग्स का कोई स्थानीय निर्माण नहीं है, तो इतनी बड़ी मात्रा में यह ज़हर यहाँ कैसे पहुँच रहा है। नेपाल सीमा से सटे होने के कारण तस्करी की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। लोगों का मानना है कि पुलिस और जांच एजेंसियां यदि संदिग्धों और पहले पकड़े गए अपराधियों की सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) और डायरी की बारीकी से जांच करें, तो इस पूरे नेक्सस का पर्दाफाश हो सकता है। आश्चर्य की बात यह है कि कई नशे के कारोबारी, जिन पर पहले से मुकदमे दर्ज हैं, उनके हौसले अब भी बुलंद हैं और वे निडर होकर यह 'मौत का सामान' बेच रहे हैं। इन अपराधियों को कथित तौर पर किसका संरक्षण प्राप्त है, यह एक अहम सवाल है, क्योंकि कई बड़े नाम और मुख्य सरगना अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। नशे के इस बढ़ते कारोबार का सीधा असर पलिया के अपराध ग्राफ पर भी दिख रहा है। नशे की तलब पूरी करने के लिए युवा चोरी, छिनैती, आपसी मारपीट और महिलाओं से अभद्रता जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं, जिनमें तेजी से वृद्धि हुई है। पलिया की जनता में इस स्थिति को लेकर भारी आक्रोश है। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन और पलिया पुलिस से यह मांग की है कि छोटे-मोटे पैडलर्स के साथ-साथ इस धंधे के असली 'आकाओं' और ड्रग्स माफियाओं को चिह्नित कर उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट और बुलडोजर जैसी कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि पलिया की युवा पीढ़ी को इस बर्बादी से बचाया जा सके।1