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श्रमिक अधिकार बनाम जमीनी हकीकत — क्या कानून सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है? मैंने जनपद सोनभद्र के ओबरा नगर स्थित तापी विद्युत परियोजना में कार्यरत श्रमिकों की समस्याओं के संदर्भ में IGRS पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। इस प्रक्रिया के दौरान जो अनुभव सामने आया, उसने केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि श्रमिक अधिकारों की संपूर्ण व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। भारत का संविधान और श्रम कानून स्पष्ट रूप से यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक श्रमिक को सम्मानजनक कार्य-परिस्थितियां, समय पर मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा (जैसे PF, EPF) और सुरक्षित कार्य वातावरण प्राप्त हो। इन अधिकारों के संरक्षण हेतु सख्त कानूनी प्रावधान भी बनाए गए हैं। किन्तु जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई देती है। ऐसा प्रतीत होता है कि व्यवस्था दो अलग-अलग स्तरों पर कार्य कर रही है— एक, जहां कानूनों का स्पष्ट और कठोर स्वरूप मौजूद है; दूसरा, जहां गरीब एवं श्रमिक वर्ग इन कानूनों के बावजूद लगातार शोषण और अनिश्चितता का सामना कर रहा है। तापी विद्युत परियोजना के संदर्भ में यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। मजदूरों द्वारा बार-बार अपनी समस्याओं को उठाने के बावजूद समाधान प्रायः “संवाद” और “समझौते” के दायरे में ही सीमित रह जाता है। कठोर और उदाहरणात्मक कार्रवाई का अभाव ही इस समस्या के निरंतर बने रहने का प्रमुख कारण प्रतीत होता है। यह भी एक महत्वपूर्ण तथ्य है कि वर्ष 2020 से अब तक लगभग 20–25 से अधिक प्रकरण श्रम विभाग की न्यायिक प्रक्रिया (श्रम न्यायालय) तक पहुंच चुके हैं। इसके बावजूद, लंबी अवधि बीत जाने के बाद भी यदि स्पष्ट न्यायिक परिणाम सामने नहीं आते, तो यह स्वाभाविक है कि श्रमिकों का विश्वास कमजोर हो और उल्लंघन करने वालों के हौसले मजबूत हों। श्रमिकों के सामने सामान्यतः दो ही विकल्प रह जाते हैं— या तो वे शिकायत कर किसी प्रकार के अस्थायी समाधान/समझौते की ओर बढ़ें, या फिर लंबी और जटिल न्यायिक प्रक्रिया में प्रवेश करें, जो आर्थिक और सामाजिक रूप से उनके लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण होती है। इसके साथ ही, परियोजना स्तर पर श्रमिकों के अधिकारों की निगरानी और संरक्षण के लिए जो अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, उनकी संवेदनशीलता और जवाबदेही भी एक महत्वपूर्ण प्रश्न बनकर सामने आती है। यदि यह स्तर कमजोर होता है, तो पूरी व्यवस्था का संतुलन प्रभावित होता है। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मेरा उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाना नहीं है, बल्कि एक ऐसी स्थिति को सामने लाना है जो लंबे समय से बनी हुई है और जिसके समाधान के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है। आशा है कि संबंधित विभाग इस विषय को गंभीरता से लेते हुए ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करेगा, जिससे श्रमिकों को उनके अधिकार केवल कागजों में नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन में भी प्राप्त हो सकें।

15 hrs ago
user_Abhishek agrahari संस्थापक सोन
Abhishek agrahari संस्थापक सोन
Student union ओबरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
15 hrs ago
24fed739-27f7-4bf5-a167-bf1af7a7dea5

श्रमिक अधिकार बनाम जमीनी हकीकत — क्या कानून सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है? मैंने जनपद सोनभद्र के ओबरा नगर स्थित तापी विद्युत परियोजना में कार्यरत श्रमिकों की समस्याओं के संदर्भ में IGRS पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। इस प्रक्रिया के दौरान जो अनुभव सामने आया, उसने केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि श्रमिक अधिकारों की संपूर्ण व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। भारत का संविधान और श्रम कानून स्पष्ट रूप से यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक श्रमिक को सम्मानजनक कार्य-परिस्थितियां, समय पर मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा (जैसे PF, EPF) और सुरक्षित कार्य वातावरण प्राप्त हो। इन अधिकारों के संरक्षण हेतु सख्त कानूनी प्रावधान भी बनाए गए हैं। किन्तु जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई देती है। ऐसा प्रतीत होता है कि व्यवस्था दो अलग-अलग स्तरों पर कार्य कर रही है— एक, जहां कानूनों का स्पष्ट और कठोर स्वरूप मौजूद है; दूसरा, जहां गरीब एवं श्रमिक वर्ग इन कानूनों के बावजूद लगातार शोषण और अनिश्चितता का सामना कर रहा है। तापी विद्युत परियोजना के संदर्भ में यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। मजदूरों द्वारा बार-बार अपनी समस्याओं को उठाने के बावजूद समाधान प्रायः “संवाद” और “समझौते” के दायरे में ही सीमित रह जाता है। कठोर और उदाहरणात्मक कार्रवाई का अभाव ही इस समस्या के निरंतर बने रहने का प्रमुख कारण प्रतीत होता है। यह भी एक महत्वपूर्ण तथ्य है कि वर्ष 2020 से अब तक लगभग 20–25 से अधिक प्रकरण श्रम विभाग की न्यायिक प्रक्रिया (श्रम न्यायालय) तक पहुंच चुके हैं। इसके बावजूद, लंबी अवधि बीत जाने के बाद भी यदि स्पष्ट न्यायिक परिणाम सामने नहीं आते, तो यह स्वाभाविक है कि श्रमिकों का विश्वास कमजोर हो और उल्लंघन करने वालों के हौसले मजबूत हों। श्रमिकों के सामने सामान्यतः दो ही विकल्प रह जाते हैं— या तो वे शिकायत कर किसी प्रकार के अस्थायी समाधान/समझौते की ओर बढ़ें, या फिर लंबी और जटिल न्यायिक प्रक्रिया में प्रवेश करें, जो आर्थिक और सामाजिक रूप से उनके लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण होती है। इसके साथ ही, परियोजना स्तर पर श्रमिकों के अधिकारों की निगरानी और संरक्षण के लिए जो अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, उनकी संवेदनशीलता और जवाबदेही भी एक महत्वपूर्ण प्रश्न बनकर सामने आती है। यदि यह स्तर कमजोर होता है, तो पूरी व्यवस्था का संतुलन प्रभावित होता है। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मेरा उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाना नहीं है, बल्कि एक ऐसी स्थिति को सामने लाना है जो लंबे समय से बनी हुई है और जिसके समाधान के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है। आशा है कि संबंधित विभाग इस विषय को गंभीरता से लेते हुए ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करेगा, जिससे श्रमिकों को उनके अधिकार केवल कागजों में नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन में भी प्राप्त हो सकें।

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  • अभी 2,3,4,5678 पूरे सेलो बंद शासन पावर लिमिटेड रिलायंस में अभी पूरे सेलो बंद जितने गाड़ी आई थी गाड़ी पूरे तरह से गाड़ी बंद कर दिये रिलायंस पावर प्लांट में शिवपहरि में जिला सिंगरौली 🥀🥀🥀 200गाड़ी चढ़ रही थी लोकर गाड़ी बंद कर दिये रिलायंस वाले 26 गाड़ी चढ़ रही हैं अंदर में 24 घंटे में 8 चकर कट्टा होता है एक बाहर से रिलायंस वाले अपने गाड़ी बाहर से मंगाए है आप देख रहे सोशल मीडिया पर 26 गाड़ी आईसर की आई थी
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    अभी 2,3,4,5678 पूरे सेलो बंद शासन पावर लिमिटेड रिलायंस में अभी पूरे सेलो बंद जितने गाड़ी आई थी गाड़ी पूरे तरह से गाड़ी बंद कर दिये रिलायंस पावर प्लांट में शिवपहरि में जिला सिंगरौली 🥀🥀🥀 200गाड़ी चढ़ रही थी लोकर गाड़ी बंद कर दिये रिलायंस वाले 26 गाड़ी चढ़ रही हैं अंदर में 24 घंटे में 8 चकर कट्टा होता है एक बाहर से रिलायंस वाले अपने गाड़ी बाहर से मंगाए है आप देख रहे सोशल मीडिया पर 26 गाड़ी आईसर की आई थी
    user_सिंगरौली,
    सिंगरौली,
    सिंगरौली नगर, सिंगरौली, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • Post by Singrauli Madhya Pradesh
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    Post by Singrauli Madhya Pradesh
    user_Singrauli Madhya Pradesh
    Singrauli Madhya Pradesh
    सिंगरौली नगर, सिंगरौली, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • चितरंगी | तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक के नाम पर महिला की अस्मत लूटने वाले शातिर आरोपी को चितरंगी पुलिस ने गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। आरोपी घटना के बाद से ही फरार था, जिस पर पुलिस अधीक्षक ने 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। बुधवार को पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी को उस वक्त दबोचा जब वह जमानत की सेटिंग करने अपने रिश्तेदार के घर आ रहा था। बीमारी ठीक करने के नाम पर बुलाया था घर। मामला फरवरी माह का है। फरियादिया ने 16 फरवरी 2026 को थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि तबीयत खराब होने के कारण पड़ोसियों ने उसे गांव गांगी निवासी नागेन्द्र धर द्विवेदी (47) के बारे में बताया था, जो झाड़-फूंक का काम करता है। आरोपी ने पहले महिला के घर आकर तंत्र-मंत्र किया, फिर अगले दिन 14 फरवरी को उसे अपने गांव गांगी बुलाया। वहां अंधेरे का फायदा उठाकर आरोपी ने झाड़-फूंक के बहाने महिला के साथ बलात्कार किया। राज्यों की सीमाएं बदल रहा था आरोपी पुलिस अधीक्षक मनीष खत्री और एएसपी सर्वप्रिय सिन्हा के निर्देशन में पुलिस की टीमें आरोपी की तलाश में जुटी थीं। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। वह मोबाइल का उपयोग नहीं कर रहा था और सीमावर्ती राज्यों में छिपा हुआ था। गंभीरता को देखते हुए एसपी ने आरोपी पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया था। मुखबिर की सूचना पर खैरा में घेराबंदी। एसडीओपी राहुल सैयाम की निगरानी में थाना प्रभारी सुधेश तिवारी को सूचना मिली कि आरोपी नागेन्द्र धर द्विवेदी अपने किसी करीबी से जमानत के सिलसिले में चर्चा करने ग्राम खैरा आने वाला है। पुलिस ने तत्काल टीम गठित कर घेराबंदी की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के विरुद्ध बीएनएस की धारा 87, 64(1), 76, 115(2) और एससी-एसटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया गया है। इनकी रही मुख्य भूमिका: इस कार्रवाई में निरीक्षक सुधेश तिवारी, उपनिरीक्षक आर.के. वर्मा, उमेश तिवारी, सउनि रमेश कोल, रमेश साकेत, राजेश मिश्रा, प्रधान आरक्षक कैलाश सिंह, आरक्षक मुकेश पाण्डेय, सुभाष पाल और अन्य टीम सदस्यों का विशेष योगदान रहा।
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    चितरंगी | तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक के नाम पर महिला की अस्मत लूटने वाले शातिर आरोपी को चितरंगी पुलिस ने गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। आरोपी घटना के बाद से ही फरार था, जिस पर पुलिस अधीक्षक ने 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। बुधवार को पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी को उस वक्त दबोचा जब वह जमानत की सेटिंग करने अपने रिश्तेदार के घर आ रहा था।
बीमारी ठीक करने के नाम पर बुलाया था घर।
मामला फरवरी माह का है। फरियादिया ने 16 फरवरी 2026 को थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि तबीयत खराब होने के कारण पड़ोसियों ने उसे गांव गांगी निवासी नागेन्द्र धर द्विवेदी (47) के बारे में बताया था, जो झाड़-फूंक का काम करता है। आरोपी ने पहले महिला के घर आकर तंत्र-मंत्र किया, फिर अगले दिन 14 फरवरी को उसे अपने गांव गांगी बुलाया। वहां अंधेरे का फायदा उठाकर आरोपी ने झाड़-फूंक के बहाने महिला के साथ बलात्कार किया।
राज्यों की सीमाएं बदल रहा था आरोपी
पुलिस अधीक्षक मनीष खत्री और एएसपी सर्वप्रिय सिन्हा के निर्देशन में पुलिस की टीमें आरोपी की तलाश में जुटी थीं। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। वह मोबाइल का उपयोग नहीं कर रहा था और सीमावर्ती राज्यों में छिपा हुआ था। गंभीरता को देखते हुए एसपी ने आरोपी पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया था।
मुखबिर की सूचना पर खैरा में घेराबंदी।
एसडीओपी राहुल सैयाम की निगरानी में थाना प्रभारी सुधेश तिवारी को सूचना मिली कि आरोपी नागेन्द्र धर द्विवेदी अपने किसी करीबी से जमानत के सिलसिले में चर्चा करने ग्राम खैरा आने वाला है। पुलिस ने तत्काल टीम गठित कर घेराबंदी की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के विरुद्ध बीएनएस की धारा 87, 64(1), 76, 115(2) और एससी-एसटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया गया है।
इनकी रही मुख्य भूमिका:
इस कार्रवाई में निरीक्षक सुधेश तिवारी, उपनिरीक्षक आर.के. वर्मा, उमेश तिवारी, सउनि रमेश कोल, रमेश साकेत, राजेश मिश्रा, प्रधान आरक्षक कैलाश सिंह, आरक्षक मुकेश पाण्डेय, सुभाष पाल और अन्य टीम सदस्यों का विशेष योगदान रहा।
    user_Mithilesh Kumar Yadav
    Mithilesh Kumar Yadav
    Newspaper publisher सिंगरौली, सिंगरौली, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • yeah road jaldi's Jersey
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    yeah road jaldi's Jersey
    user_Mo harun
    Mo harun
    देवसर, सिंगरौली, मध्य प्रदेश•
    20 hrs ago
  • मनीष कश्यप डिजिटल रिसर्च प्लेटफॉर्म (Manish Kashyap Digital Research Platform) के माध्यम से डिजिटल कौशल और सोशल मीडिया मैनेजमेंट सिखाया जा रहा है, जिसकी शुरुआत 23 मार्च 2026 से हुई है। इस केंद्र में युवाओं को 'डिजिटल सेना' के रूप में तैयार करने, कंटेंट क्रिएशन, वीडियो एडिटिंग और डिजिटल मार्केटिंग से संबंधित व्यावहारिक ज्ञान दिया जा रहा है, ताकि आम आदमी को सक्षम बनाया जा सके।  Facebook +3 मुख्य विवरण: उद्देश्य: युवाओं को आत्मनिर्भर बनाकर डिजिटल क्रांति से जोड़ना। कोर्स: डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया के सही इस्तेमाल और कंटेंट निर्माण में विशेषज्ञता। पंजीकरण: जानकारी के लिए Facebook या Instagram पर 9128111234, 7091721235 पर संपर्क किया जा सकता है।  Instagram अधिकतम रोजगार उन्मुख कौशल सीखने के लिए, क्या आप जानना चाहते हैं कि: क्या यह निःशुल्क है या इसके लिए कोई शुल्क (Fees) है? इस कोर्स की अवधि (Duration) कितनी है? क्या ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों क्लासेज उपलब्ध हैं?  11:09 Manish Kashyap Digital Research Platform से कैसे एक आम आदमी बन ...   Facebook·Manish Kasyap  5:16 यहीं से 23 मार्च को शुरू होगा मनीष कश्यप का डिजिटल क्लास। Join ...   Instagram·Manish Kasyap  8:44 मनीष कश्यप का Digital Sena की तैयारी शुरू... Exclusive Interview | Manish ...   YouTube·Bihar Tej Khabar मनीष कश्यप डिजिटल रिसर्च प्लेटफा‌ॅर्म के क्लास की 23-March-26 को होगी शुरुआत। आप भी बन सकते हैं फेमस। 20 Mar 2026 — मनीष कश्यप डिजिटल रिसर्च प्लेटफाॅर्म के क्लास की 23-March-26 को होगी शुरुआत। आप भी बन सकते हैं फेमस। बस ये काम करिए देश का सबसे ज्यादा विकास होगा। मनीष कश्यप,
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    मनीष कश्यप डिजिटल रिसर्च प्लेटफॉर्म (Manish Kashyap Digital Research Platform) के माध्यम से डिजिटल कौशल और सोशल मीडिया मैनेजमेंट सिखाया जा रहा है, जिसकी शुरुआत 23 मार्च 2026 से हुई है। इस केंद्र में युवाओं को 'डिजिटल सेना' के रूप में तैयार करने, कंटेंट क्रिएशन, वीडियो एडिटिंग और डिजिटल मार्केटिंग से संबंधित व्यावहारिक ज्ञान दिया जा रहा है, ताकि आम आदमी को सक्षम बनाया जा सके। 
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मुख्य विवरण:
उद्देश्य: युवाओं को आत्मनिर्भर बनाकर डिजिटल क्रांति से जोड़ना।
कोर्स: डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया के सही इस्तेमाल और कंटेंट निर्माण में विशेषज्ञता।
पंजीकरण: जानकारी के लिए Facebook या Instagram पर 9128111234, 7091721235 पर संपर्क किया जा सकता है। 
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अधिकतम रोजगार उन्मुख कौशल सीखने के लिए, क्या आप जानना चाहते हैं कि:
क्या यह निःशुल्क है या इसके लिए कोई शुल्क (Fees) है?
इस कोर्स की अवधि (Duration) कितनी है?
क्या ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों क्लासेज उपलब्ध हैं?

11:09
Manish Kashyap Digital Research Platform से कैसे एक आम आदमी बन ...


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5:16
यहीं से 23 मार्च को शुरू होगा मनीष कश्यप का डिजिटल क्लास। Join ...


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8:44
मनीष कश्यप का Digital Sena की तैयारी शुरू... Exclusive Interview | Manish ...


YouTube·Bihar Tej Khabar
मनीष कश्यप डिजिटल रिसर्च प्लेटफा‌ॅर्म के क्लास की 23-March-26 को होगी शुरुआत। आप भी बन सकते हैं फेमस।
20 Mar 2026 — मनीष कश्यप डिजिटल रिसर्च प्लेटफाॅर्म के क्लास की 23-March-26 को होगी शुरुआत। आप भी बन सकते हैं फेमस। बस ये काम करिए देश का सबसे ज्यादा विकास होगा। मनीष कश्यप,
    user_Ramashankar sharma
    Ramashankar sharma
    Voice of people गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    1 hr ago
  • देश में “सबसे ज्यादा रेप” दो तरह से देखा जाता है: 1) कुल मामलों (Total Cases) के हिसाब से: राजस्थान अक्सर सबसे ज्यादा रेप केस दर्ज करने वाला राज्य रहा है (NCRB रिपोर्ट के अनुसार)। इसके बाद उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों का नंबर आता है। 2) प्रति लाख आबादी (Rate) के हिसाब से: इसमें साल के हिसाब से बदलाव होता है, लेकिन राजस्थान और मध्य प्रदेश कई बार ऊपर रहते हैं। महत्वपूर्ण बातें: - बड़े राज्यों में आबादी ज्यादा होने से केस की संख्या भी ज्यादा दिखती है। - NCRB डेटा में सिर्फ दर्ज (reported) मामलों की गिनती होती है। - असली संख्या इससे ज्यादा भी हो सकती है क्योंकि हर मामला रिपोर्ट नहीं होता। निष्कर्ष: कुल संख्या में राजस्थान आगे रहता है, लेकिन यह समस्या पूरे देश की है, सिर्फ एक राज्य की नहीं।
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    देश में “सबसे ज्यादा रेप” दो तरह से देखा जाता है:
1) कुल मामलों (Total Cases) के हिसाब से:
राजस्थान अक्सर सबसे ज्यादा रेप केस दर्ज करने वाला राज्य रहा है (NCRB रिपोर्ट के अनुसार)।
इसके बाद उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों का नंबर आता है।
2) प्रति लाख आबादी (Rate) के हिसाब से:
इसमें साल के हिसाब से बदलाव होता है, लेकिन राजस्थान और मध्य प्रदेश कई बार ऊपर रहते हैं।
महत्वपूर्ण बातें:
- बड़े राज्यों में आबादी ज्यादा होने से केस की संख्या भी ज्यादा दिखती है।
- NCRB डेटा में सिर्फ दर्ज (reported) मामलों की गिनती होती है।
- असली संख्या इससे ज्यादा भी हो सकती है क्योंकि हर मामला रिपोर्ट नहीं होता।
निष्कर्ष:
कुल संख्या में राजस्थान आगे रहता है, लेकिन यह समस्या पूरे देश की है, सिर्फ एक राज्य की नहीं।
    user_Awaaz -e-Bharat
    Awaaz -e-Bharat
    Chand, Kaimur (Bhabua)•
    1 hr ago
  • भारत रत्न बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जयंती पर पुष्प अर्पित करते हुए अंबेडकर पार्क पिपरी में, इसके पहले विशाल शोभा यात्रा निकाली गई खाड़ पाथर बुद्ध भगवान के मंदिर से रेणुकूट का भ्रमण करते हुए शोभा यात्रा पिपरी अंबेडकर पार्क में एक सभा का आयोजन किया गया इसमें रेणुकूट पिपरी के सभी गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, बाबा साहेब के किए हुए समाज में अच्छे कार्यों को शिक्षा को ऊपर उठने के लिए अशिक्षित वर्ग को शिक्षा दिलाने के लिए लोगों ने अपना अपना उद्बोधन दिया
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    भारत रत्न बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जयंती पर पुष्प अर्पित करते हुए अंबेडकर पार्क पिपरी में, इसके पहले विशाल शोभा यात्रा निकाली गई खाड़ पाथर  बुद्ध भगवान के मंदिर से रेणुकूट का भ्रमण करते हुए शोभा यात्रा पिपरी अंबेडकर पार्क में एक सभा का आयोजन किया गया इसमें रेणुकूट पिपरी के सभी गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, बाबा साहेब के किए हुए समाज में अच्छे कार्यों को शिक्षा को ऊपर उठने के लिए अशिक्षित वर्ग को शिक्षा दिलाने के लिए लोगों ने अपना अपना उद्बोधन दिया
    user_संजय श्रीवास्तव ( ब्यूरो चीफ)
    संजय श्रीवास्तव ( ब्यूरो चीफ)
    पत्रकार Dudhi, Sonbhadra•
    3 hrs ago
  • 🔴 क्या सम्राट चौधरी पर हत्या का आरोप है? ➡️ सच्चाई: - सम्राट चौधरी पर हत्या का आरोप साबित नहीं हुआ है। - लेकिन राजनीतिक आरोप जरूर लगे थे। ➡️ आरोप किसने लगाया? - प्रशांत किशोर ने 2025 में आरोप लगाया था। - एक पुराने केस का जिक्र किया गया था। ➡️ सम्राट चौधरी का जवाब: - उन्होंने आरोप को पूरी तरह गलत बताया। - कहा कि कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया है। 🟢 वर्तमान स्थिति (2026): - सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री बन चुके हैं। - नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद उन्हें चुना गया। ⚠️ ध्यान देने वाली बात: - सोशल मीडिया पर चल रही कई बातें अधूरी या गलत हो सकती हैं। - आरोप लगना और दोषी साबित होना अलग बात है। 🧠 आसान भाषा में: - आरोप ≠ दोषी - कोर्ट का फैसला ही अंतिम माना जाता है।
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    🔴 क्या सम्राट चौधरी पर हत्या का आरोप है?
➡️ सच्चाई:
- सम्राट चौधरी पर हत्या का आरोप साबित नहीं हुआ है।
- लेकिन राजनीतिक आरोप जरूर लगे थे।
➡️ आरोप किसने लगाया?
- प्रशांत किशोर ने 2025 में आरोप लगाया था।
- एक पुराने केस का जिक्र किया गया था।
➡️ सम्राट चौधरी का जवाब:
- उन्होंने आरोप को पूरी तरह गलत बताया।
- कहा कि कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया है।
🟢 वर्तमान स्थिति (2026):
- सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री बन चुके हैं।
- नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद उन्हें चुना गया।
⚠️ ध्यान देने वाली बात:
- सोशल मीडिया पर चल रही कई बातें अधूरी या गलत हो सकती हैं।
- आरोप लगना और दोषी साबित होना अलग बात है।
🧠 आसान भाषा में:
- आरोप ≠ दोषी
- कोर्ट का फैसला ही अंतिम माना जाता है।
    user_Awaaz -e-Bharat
    Awaaz -e-Bharat
    Chand, Kaimur (Bhabua)•
    1 hr ago
  • Post by Patel Patel Singh
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    Post by Patel Patel Singh
    user_Patel Patel Singh
    Patel Patel Singh
    Mirzapur, Uttar Pradesh•
    1 hr ago
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