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बहुत दुखद घटना है कि हमारे गांव कोलवा में एक्सीडेंट हो गया है और वह आइडियल कंपनी

8 hrs ago
user_Me harishankar bais
Me harishankar bais
Farmer देवसर, सिंगरौली, मध्य प्रदेश•
8 hrs ago

बहुत दुखद घटना है कि हमारे गांव कोलवा में एक्सीडेंट हो गया है और वह आइडियल कंपनी

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • कागजों में पौष्टिक आहार, थाली में कच्ची दाल! बच्चों का पेट भरे या अधिकारियों की फाइल?"सिंगरौली/देवसर। सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर बच्चों को पौष्टिक मध्यान्ह भोजन देने का दावा करती है, लेकिन गोड़गवां स्व-सहायता समूह की हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। बच्चों की थाली में ऐसा भोजन परोसा जा रहा है जिसे देखकर लगता है कि दाल और चावल की रसोई में नहीं, सीधे थाली में ही "पकाई" की जा रही हो। तस्वीरें और वीडियो कई सवाल खड़े कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि न तो समुचित किचन की व्यवस्था है और न ही गैस की सुविधा, फिर आखिर बच्चों का भोजन कैसे तैयार हो रहा है? यदि यही हाल है तो "पोषण अभियान" कहीं "समझौता अभियान" तो नहीं बन गया? बच्चों को पौष्टिक भोजन देने की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर है, वे शायद यह भूल गए हैं कि अधपकी दाल और कच्चा चावल सिर्फ पेट नहीं, बच्चों के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिम्मेदार अधिकारी इन तस्वीरों को देखकर जागते हैं या फिर हमेशा की तरह फाइलों में सब कुछ "स्वादिष्ट एवं गुणवत्तापूर्ण" लिखकर मामला शांत कर दिया जाएगा।लगता है गोड़गवां में अब नया नियम लागू हो गया है—'पहले बच्चे दाल पकाएं, फिर दाल बच्चों को पकाए!'" कागजों में पौष्टिक आहार, थाली में कच्ची दाल! बच्चों का पेट भरे या अधिकारियों की फाइल?"सिंगरौली/देवसर। सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर बच्चों को पौष्टिक मध्यान्ह भोजन देने का दावा करती है, लेकिन गोड़गवां स्व-सहायता समूह की हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। बच्चों की थाली में ऐसा भोजन परोसा जा रहा है जिसे देखकर लगता है कि दाल और चावल की रसोई में नहीं, सीधे थाली में ही "पकाई" की जा रही हो। तस्वीरें और वीडियो कई सवाल खड़े कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि न तो समुचित किचन की व्यवस्था है और न ही गैस की सुविधा, फिर आखिर बच्चों का भोजन कैसे तैयार हो रहा है? यदि यही हाल है तो "पोषण अभियान" कहीं "समझौता अभियान" तो नहीं बन गया? बच्चों को पौष्टिक भोजन देने की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर है, वे शायद यह भूल गए हैं कि अधपकी दाल और कच्चा चावल सिर्फ पेट नहीं, बच्चों के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिम्मेदार अधिकारी इन तस्वीरों को देखकर जागते हैं या फिर हमेशा की तरह फाइलों में सब कुछ "स्वादिष्ट एवं गुणवत्तापूर्ण" लिखकर मामला शांत कर दिया जाएगा।लगता है गोड़गवां में अब नया नियम लागू हो गया है—'पहले बच्चे दाल पकाएं, फिर दाल बच्चों को पकाए!'"
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    कागजों में पौष्टिक आहार, थाली में कच्ची दाल! बच्चों का पेट भरे या अधिकारियों की फाइल?"सिंगरौली/देवसर। सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर बच्चों को पौष्टिक मध्यान्ह भोजन देने का दावा करती है, लेकिन गोड़गवां स्व-सहायता समूह की हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। बच्चों की थाली में ऐसा भोजन परोसा जा रहा है जिसे देखकर लगता है कि दाल और चावल की रसोई में नहीं, सीधे थाली में ही "पकाई" की जा रही हो।
तस्वीरें और वीडियो कई सवाल खड़े कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि न तो समुचित किचन की व्यवस्था है और न ही गैस की सुविधा, फिर आखिर बच्चों का भोजन कैसे तैयार हो रहा है? यदि यही हाल है तो "पोषण अभियान" कहीं "समझौता अभियान" तो नहीं बन गया?
बच्चों को पौष्टिक भोजन देने की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर है, वे शायद यह भूल गए हैं कि अधपकी दाल और कच्चा चावल सिर्फ पेट नहीं, बच्चों के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिम्मेदार अधिकारी इन तस्वीरों को देखकर जागते हैं या फिर हमेशा की तरह फाइलों में सब कुछ "स्वादिष्ट एवं गुणवत्तापूर्ण" लिखकर मामला शांत कर दिया जाएगा।लगता है गोड़गवां में अब नया नियम लागू हो गया है—'पहले बच्चे दाल पकाएं, फिर दाल बच्चों को पकाए!'"
कागजों में पौष्टिक आहार, थाली में कच्ची दाल! बच्चों का पेट भरे या अधिकारियों की फाइल?"सिंगरौली/देवसर। सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर बच्चों को पौष्टिक मध्यान्ह भोजन देने का दावा करती है, लेकिन गोड़गवां स्व-सहायता समूह की हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। बच्चों की थाली में ऐसा भोजन परोसा जा रहा है जिसे देखकर लगता है कि दाल और चावल की रसोई में नहीं, सीधे थाली में ही "पकाई" की जा रही हो।
तस्वीरें और वीडियो कई सवाल खड़े कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि न तो समुचित किचन की व्यवस्था है और न ही गैस की सुविधा, फिर आखिर बच्चों का भोजन कैसे तैयार हो रहा है? यदि यही हाल है तो "पोषण अभियान" कहीं "समझौता अभियान" तो नहीं बन गया?
बच्चों को पौष्टिक भोजन देने की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर है, वे शायद यह भूल गए हैं कि अधपकी दाल और कच्चा चावल सिर्फ पेट नहीं, बच्चों के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिम्मेदार अधिकारी इन तस्वीरों को देखकर जागते हैं या फिर हमेशा की तरह फाइलों में सब कुछ "स्वादिष्ट एवं गुणवत्तापूर्ण" लिखकर मामला शांत कर दिया जाएगा।लगता है गोड़गवां में अब नया नियम लागू हो गया है—'पहले बच्चे दाल पकाएं, फिर दाल बच्चों को पकाए!'"
    user_उपसंपादक जय प्रकाश द्विवेदी
    उपसंपादक जय प्रकाश द्विवेदी
    Local News Reporter देवसर, सिंगरौली, मध्य प्रदेश•
    35 min ago
  • juku patwari ka futa gussa. बीजेपी के नेताओं को लिया टारगेट में
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    juku patwari ka futa gussa. 

बीजेपी के नेताओं को लिया टारगेट में
    user_Journalist imran
    Journalist imran
    देवसर, सिंगरौली, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • 👉बाउंसर -अन्यूजुअल फिनॉमिनन👈 ✍️ अरविंद कुमार मिश्रा 🤳8889463039 2004 में मकरोहर, 2026 में गुजरात का मोरबी! -------------------------------------------------------------- मोरबी में उठती लहरों ने ,मकरोहर की यादें कर दीं ताजा तब तालाब उफना था, अब कुआं मचल रहा है (धरती के भीतर की हलचल, पानी का असामान्य व्यवहार और दो अलग-अलग घटनाएं ,क्या इनके पीछे छिपा है कोई भूगर्भीय संकेत?) सिंगरौली- गुजरात के मोरबी जिले के वीरपर्दा गांव में इन दिनों एक कुआं लोगों के कौतूहल और चर्चा का केंद्र बना हुआ है। खेत में बने एक कुएं का पानी बिना किसी दिखाई देने वाले बाहरी कारण के लगातार इस तरह हिलोरें मार रहा है, मानो उसमें समुद्र की लहरें उठ रही हों। घटना की जानकारी फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण इसे देखने पहुंच रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह कुआं वीरपर्दा निवासी प्रांजिवनभाई सदारिया के खेत में स्थित है। लगभग 30 फीट चौड़े और 18 फीट गहरे इस कुएं का निर्माण कुछ महीने पहले ही हुआ है। खास बात यह है कि आसपास के दूसरे कुओं का पानी सामान्य रूप से शांत है, जबकि इसी कुएं में लगातार हलचल दिखाई दे रही है। सवाल गुजरात के कुएं का, लेकिन याद आया सिंगरौली का तालाब मोरबी की इस घटना ने सिंगरौली जिले के मकरोहर गांव की लगभग 22 वर्ष पुरानी एक रहस्यमयी घटना की याद ताजा कर दी है। 26 दिसंबर 2004 की अर्धरात्रि में तत्कालीन सीधी जिले और वर्तमान सिंगरौली जिले के मकरोहर गांव स्थित एक सार्वजनिक एवं ऐतिहासिक तालाब में अचानक पानी असामान्य रूप से हिलोरें लेने लगा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पानी इतनी तेजी से उछल रहा था कि तालाब की मेंड़ की सीमा तक पहुंचकर बड़ी मात्रा में बाहर निकलने लगा। उस समय गांव में ऐसी स्थिति के लिए कोई स्पष्ट कारण दिखाई नहीं दे रहा था। अचानक तालाब के पानी का इस तरह उफनना ग्रामीणों के लिए किसी रहस्य से कम नहीं था। देखते ही देखते गांव में दहशत और कौतूहल दोनों का माहौल बन गया। और संयोग देखिए, तारीख थी 26 दिसंबर 2004 इस घटना को और भी असाधारण बनाने वाला संयोग यह था कि उसी दिन हिंद महासागर में इतिहास की सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं में से एक—2004 की सुनामी—का प्रकोप हुआ था। 26 दिसंबर 2004 को इंडोनेशिया के सुमात्रा के निकट समुद्र के भीतर लगभग 9.1–9.3 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। इसके बाद हिंद महासागर में उठी विशाल सुनामी लहरों ने भारत सहित कई देशों के तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई। भारत के तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल, पुडुचेरी और अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह सहित कई क्षेत्रों में इसका भयावह प्रभाव पड़ा। हजारों लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए। क्या मकरोहर के तालाब की हलचल का संबंध सुनामी से था? यहीं से कहानी का सबसे रोचक और महत्वपूर्ण सवाल सामने आता है। क्या समुद्र से दूर सैकड़ों किलोमीटर अंदर स्थित किसी तालाब के पानी में ऐसी हलचल भूकंपीय गतिविधि से पैदा हो सकती है? वैज्ञानिक दृष्टि से इसे सीधे सुनामी का प्रभाव घोषित करना उचित नहीं होगा। सुनामी मुख्यतः समुद्र में उत्पन्न होने वाली विशाल लहरों की घटना है। लेकिन बड़े भूकंप के दौरान उत्पन्न भूकंपीय तरंगें जमीन के भीतर दूर तक पहुंच सकती हैं और कुछ परिस्थितियों में कुओं, तालाबों तथा भूजल स्तर में असामान्य हलचल या परिवर्तन दिखाई दे सकते हैं। इसीलिए मकरोहर की घटना को केवल लोकविश्वास या संयोग मानकर खारिज करना भी उचित नहीं होगा—लेकिन उसे 2004 की सुनामी का प्रत्यक्ष प्रभाव बताने के लिए वैज्ञानिक प्रमाण आवश्यक होंगे। आज भी मौजूद हैं उस घटना के प्रत्यक्षदर्शी मकरोहर की घटना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वह केवल पुरानी कहानी बनकर समाप्त नहीं हुई। उस समय की घटना को अपनी आंखों से देखने वाले कई बुजुर्ग ग्रामीण आज भी मौजूद हैं। उनकी स्मृतियों में आज भी वह रात दर्ज है, जब तालाब का शांत पानी अचानक असामान्य रूप से हिलोरें लेने लगा था और ग्रामीणों के बीच भय का वातावरण पैदा हो गया था। समय के साथ घटना की चर्चा जरूर कम होती गई, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों की मौखिक गवाही आज भी उस रहस्यमयी घटनाक्रम की जीवित कड़ी बनी हुई है। मोरबी की घटना ने खोल दी शोध की एक खिड़की गुजरात के वीरपर्दा गांव की वर्तमान घटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक बार फिर यह सवाल सामने ला रही है कि भूमिगत भूगर्भीय गतिविधियां सतह पर मौजूद जलस्रोतों को किस तरह प्रभावित कर सकती हैं। यदि विशेषज्ञ मोरबी के कुएं में हो रही हलचल का वैज्ञानिक कारण निर्धारित कर पाते हैं, तो इससे मकरोहर जैसे पुराने घटनाक्रमों को समझने की दिशा में भी नई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं। संभावित कारणों में स्थानीय भूगर्भीय कंपन, भूमिगत जल का दबाव, चट्टानों के बीच गैस या हवा का संचरण, जलस्तर में दबाव परिवर्तन अथवा अन्य हाइड्रोजियोलॉजिकल प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं। हालांकि वास्तविक कारण जांच के बाद ही सामने आ सकता है। मकरोहर की घटना: रहस्य नहीं, शोध का विषय बने मकरोहर के उस पुराने तालाब की घटना को अब अंधविश्वास अथवा रहस्य की कहानी के रूप में देखने के बजाय स्थानीय भूगर्भीय इतिहास के एक संभावित महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में दर्ज किया जाना चाहिए। यदि उस समय के प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, घटना का समय, मौसम की स्थिति, तालाब का जलस्तर, आसपास के कुओं की स्थिति और 26 दिसंबर 2004 के भूकंपीय आंकड़ों को एक साथ रखकर अध्ययन किया जाए, तो शायद उस रात वास्तव में क्या हुआ था, इसकी वैज्ञानिक तस्वीर कुछ हद तक स्पष्ट हो सके। एक घटना गुजरात में, दूसरी सिंगरौली में—सवाल एक वीरपर्दा के कुएं में आज उठती लहरें लोगों को हैरान कर रही हैं और मकरोहर का तालाब 26 दिसंबर 2004 की उस रात की कहानी फिर याद दिला रहा है। दोनों घटनाओं के बीच सीधा वैज्ञानिक संबंध है—ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन दोनों घटनाएं एक महत्वपूर्ण सवाल जरूर छोड़ती हैं—“क्या धरती के भीतर होने वाली हलचल का संकेत कभी-कभी उसके ऊपर मौजूद शांत जल में भी दिखाई दे सकता है?” इस सवाल का जवाब लोककथाओं में नहीं, बल्कि भूगर्भशास्त्र, भूकंप विज्ञान और जल-विज्ञान के संयुक्त अध्ययन में तलाशने की जरूरत है। मोरबी की घटना ने जहां वर्तमान को चौंकाया है, वहीं मकरोहर की घटना ने अतीत के एक भूले-बिसरे अध्याय को फिर सामने ला खड़ा किया है। शायद अब समय आ गया है कि उस अध्याय को केवल “रहस्य” न माना जाए, बल्कि उसे वैज्ञानिक जांच और दस्तावेजीकरण का विषय बनाया जाए। ...........
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✍️ अरविंद कुमार मिश्रा 
🤳8889463039

2004 में मकरोहर, 2026 में गुजरात का मोरबी!
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मोरबी  में उठती लहरों ने ,मकरोहर की यादें कर दीं ताजा
 तब तालाब उफना था, अब कुआं मचल रहा है

               (धरती के भीतर की हलचल, पानी का असामान्य व्यवहार और दो अलग-अलग घटनाएं ,क्या इनके पीछे छिपा है कोई भूगर्भीय संकेत?)

सिंगरौली-
गुजरात के मोरबी जिले के वीरपर्दा गांव में इन दिनों एक कुआं लोगों के कौतूहल और चर्चा का केंद्र बना हुआ है। खेत में बने एक कुएं का पानी बिना किसी दिखाई देने वाले बाहरी कारण के लगातार इस तरह हिलोरें मार रहा है, मानो उसमें समुद्र की लहरें उठ रही हों। घटना की जानकारी फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण इसे देखने पहुंच रहे हैं।
बताया जा रहा है कि यह कुआं वीरपर्दा निवासी प्रांजिवनभाई सदारिया के खेत में स्थित है। लगभग 30 फीट चौड़े और 18 फीट गहरे इस कुएं का निर्माण कुछ महीने पहले ही हुआ है। खास बात यह है कि आसपास के दूसरे कुओं का पानी सामान्य रूप से शांत है, जबकि इसी कुएं में लगातार हलचल दिखाई दे रही है।

सवाल गुजरात के कुएं का, लेकिन याद आया सिंगरौली का तालाब

मोरबी की इस घटना ने सिंगरौली जिले के मकरोहर गांव की लगभग 22 वर्ष पुरानी एक रहस्यमयी घटना की याद ताजा कर दी है। 26 दिसंबर 2004 की अर्धरात्रि में तत्कालीन सीधी जिले और वर्तमान सिंगरौली जिले के मकरोहर गांव स्थित एक सार्वजनिक एवं ऐतिहासिक तालाब में अचानक पानी असामान्य रूप से हिलोरें लेने लगा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पानी इतनी तेजी से उछल रहा था कि तालाब की मेंड़ की सीमा तक पहुंचकर बड़ी मात्रा में बाहर निकलने लगा। उस समय गांव में ऐसी स्थिति के लिए कोई स्पष्ट कारण दिखाई नहीं दे रहा था। अचानक तालाब के पानी का इस तरह उफनना ग्रामीणों के लिए किसी रहस्य से कम नहीं था। देखते ही देखते गांव में दहशत और कौतूहल दोनों का माहौल बन गया।

और संयोग देखिए, तारीख थी 26 दिसंबर 2004

इस घटना को और भी असाधारण बनाने वाला संयोग यह था कि उसी दिन हिंद महासागर में इतिहास की सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं में से एक—2004 की सुनामी—का प्रकोप हुआ था। 26 दिसंबर 2004 को इंडोनेशिया के सुमात्रा के निकट समुद्र के भीतर लगभग 9.1–9.3 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। इसके बाद हिंद महासागर में उठी विशाल सुनामी लहरों ने भारत सहित कई देशों के तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई। भारत के तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल, पुडुचेरी और अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह सहित कई क्षेत्रों में इसका भयावह प्रभाव पड़ा। हजारों लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए।

क्या मकरोहर के तालाब की हलचल का संबंध सुनामी से था?
यहीं से कहानी का सबसे रोचक और महत्वपूर्ण सवाल सामने आता है। क्या समुद्र से दूर सैकड़ों किलोमीटर अंदर स्थित किसी तालाब के पानी में ऐसी हलचल भूकंपीय गतिविधि से पैदा हो सकती है? वैज्ञानिक दृष्टि से इसे सीधे सुनामी का प्रभाव घोषित करना उचित नहीं होगा। सुनामी मुख्यतः समुद्र में उत्पन्न होने वाली विशाल लहरों की घटना है। लेकिन बड़े भूकंप के दौरान उत्पन्न भूकंपीय तरंगें जमीन के भीतर दूर तक पहुंच सकती हैं और कुछ परिस्थितियों में कुओं, तालाबों तथा भूजल स्तर में असामान्य हलचल या परिवर्तन दिखाई दे सकते हैं। इसीलिए मकरोहर की घटना को केवल लोकविश्वास या संयोग मानकर खारिज करना भी उचित नहीं होगा—लेकिन उसे 2004 की सुनामी का प्रत्यक्ष प्रभाव बताने के लिए वैज्ञानिक प्रमाण आवश्यक होंगे।

आज भी मौजूद हैं उस घटना के प्रत्यक्षदर्शी

मकरोहर की घटना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वह केवल पुरानी कहानी बनकर समाप्त नहीं हुई। उस समय की घटना को अपनी आंखों से देखने वाले कई बुजुर्ग ग्रामीण आज भी मौजूद हैं। उनकी स्मृतियों में आज भी वह रात दर्ज है, जब तालाब का शांत पानी अचानक असामान्य रूप से हिलोरें लेने लगा था और ग्रामीणों के बीच भय का वातावरण पैदा हो गया था। समय के साथ घटना की चर्चा जरूर कम होती गई, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों की मौखिक गवाही आज भी उस रहस्यमयी घटनाक्रम की जीवित कड़ी बनी हुई है।

मोरबी की घटना ने खोल दी शोध की एक खिड़की

गुजरात के वीरपर्दा गांव की वर्तमान घटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक बार फिर यह सवाल सामने ला रही है कि भूमिगत भूगर्भीय गतिविधियां सतह पर मौजूद जलस्रोतों को किस तरह प्रभावित कर सकती हैं।
यदि विशेषज्ञ मोरबी के कुएं में हो रही हलचल का वैज्ञानिक कारण निर्धारित कर पाते हैं, तो इससे मकरोहर जैसे पुराने घटनाक्रमों को समझने की दिशा में भी नई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं। संभावित कारणों में स्थानीय भूगर्भीय कंपन, भूमिगत जल का दबाव, चट्टानों के बीच गैस या हवा का संचरण, जलस्तर में दबाव परिवर्तन अथवा अन्य हाइड्रोजियोलॉजिकल प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं। हालांकि वास्तविक कारण जांच के बाद ही सामने आ सकता है।

मकरोहर की घटना: रहस्य नहीं, शोध का विषय बने

मकरोहर के उस पुराने तालाब की घटना को अब अंधविश्वास अथवा रहस्य की कहानी के रूप में देखने के बजाय स्थानीय भूगर्भीय इतिहास के एक संभावित महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में दर्ज किया जाना चाहिए।
यदि उस समय के प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, घटना का समय, मौसम की स्थिति, तालाब का जलस्तर, आसपास के कुओं की स्थिति और 26 दिसंबर 2004 के भूकंपीय आंकड़ों को एक साथ रखकर अध्ययन किया जाए, तो शायद उस रात वास्तव में क्या हुआ था, इसकी वैज्ञानिक तस्वीर कुछ हद तक स्पष्ट हो सके।

एक घटना गुजरात में, दूसरी सिंगरौली में—सवाल एक

वीरपर्दा के कुएं में आज उठती लहरें लोगों को हैरान कर रही हैं और मकरोहर का तालाब 26 दिसंबर 2004 की उस रात की कहानी फिर याद दिला रहा है। दोनों घटनाओं के बीच सीधा वैज्ञानिक संबंध है—ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन दोनों घटनाएं एक महत्वपूर्ण सवाल जरूर छोड़ती हैं—“क्या धरती के भीतर होने वाली हलचल का संकेत कभी-कभी उसके ऊपर मौजूद शांत जल में भी दिखाई दे सकता है?” इस सवाल का जवाब लोककथाओं में नहीं, बल्कि भूगर्भशास्त्र, भूकंप विज्ञान और जल-विज्ञान के संयुक्त अध्ययन में तलाशने की जरूरत है।
मोरबी की घटना ने जहां वर्तमान को चौंकाया है, वहीं मकरोहर की घटना ने अतीत के एक भूले-बिसरे अध्याय को फिर सामने ला खड़ा किया है। शायद अब समय आ गया है कि उस अध्याय को केवल “रहस्य” न माना जाए, बल्कि उसे वैज्ञानिक जांच और दस्तावेजीकरण का विषय बनाया जाए।
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    user_Arvind Kumar Mishra
    Arvind Kumar Mishra
    Singrauli, Madhya Pradesh•
    8 hrs ago
  • सिंगरौली: सिंगरौली पुलिस एवं यातायात पुलिस द्वारा वाहन चेकिंग के दौरान अनधिकृत हूटर, बत्ती, ब्लैक फिल्म और स्टीकर हटवाए गए।
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    सिंगरौली: सिंगरौली पुलिस एवं यातायात पुलिस द्वारा वाहन चेकिंग के दौरान अनधिकृत हूटर, बत्ती, ब्लैक फिल्म और स्टीकर हटवाए गए।
    user_Amrendra Shukla पत्रकार
    Amrendra Shukla पत्रकार
    Local News Reporter सिंगरौली नगर, सिंगरौली, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • इतना बड़ा भ्रष्टाचार की रोड को जो दिया गया है विधानसभा 81 के अंतर्गत आता है देवसर जिला सिंगरौली मध्य प्रदेश हमारे गांव के राजन मेश्राम तक हमारी वीडियो पहुंच जानी चाहिए धन्यवाद
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    इतना बड़ा भ्रष्टाचार की रोड को जो दिया गया है
विधानसभा 81 के अंतर्गत आता है देवसर जिला सिंगरौली मध्य प्रदेश हमारे गांव के राजन मेश्राम तक हमारी वीडियो पहुंच जानी चाहिए धन्यवाद
    user_Me harishankar bais
    Me harishankar bais
    Farmer देवसर, सिंगरौली, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • बहुत दुखद घटना है कि हमारे गांव कोलवा में एक्सीडेंट हो गया है और वह आइडियल कंपनी
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    बहुत दुखद घटना है कि हमारे गांव कोलवा में एक्सीडेंट हो गया है और वह आइडियल कंपनी
    user_Me harishankar bais
    Me harishankar bais
    Farmer देवसर, सिंगरौली, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
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