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धनबाद के एसएनएमएमसीएच (SNMMCH) में एक बड़ी दुर्घटना टल गई, जब अस्पताल के वार्ड के एक हिस्से की छत गिर गई। इस घटना में एक मरीज घायल हो गया।
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धनबाद के एसएनएमएमसीएच (SNMMCH) में एक बड़ी दुर्घटना टल गई, जब अस्पताल के वार्ड के एक हिस्से की छत गिर गई। इस घटना में एक मरीज घायल हो गया।
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- झारखंड के धनबाद जिले के कतरास छाताबाद क्षेत्र में भू-धंसान का भयानक कहर देखने को मिला है। इस भयावह घटना में एक पूरा तालाब जमीन में समा गया है, जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों में गहरी दहशत फैल गई है।1
- तेलो दुर्गा मंदिर से बाबा अमरनाथ यात्रा के लिए 22 श्रद्धालुओं का एक जत्था रवाना हो गया। इस अवसर पर स्थानीय व्यवसाय संघ ने सभी अमरनाथ यात्रियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया।1
- धनबाद के निरसा स्थित लखीमाता कोलियरी में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया जब ड्यूटी के दौरान अटेंडेंस ऑफिस में एक बिना लाइसेंस वाले सूदखोर ने घुसकर एक ECL कर्मचारी को गाली दी और जान से मारने की धमकी दी। अटेंडेंस क्लर्क सुरेश कुमार श्रीवास्तव ने आरोपी अरविंद पासवान के खिलाफ निरसा पुलिस और ECL मैनेजमेंट में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। श्रीवास्तव ने आरोप लगाया है कि अरविंद ने सबल और नवल पासवान के साथ मिलकर ऑफिस में भय का माहौल पैदा किया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि अरविंद, जो कथित तौर पर ECL की कब्ज़ा की गई ज़मीन से अवैध रूप से पैसे उधार देने का धंधा चलाता है, पिछले छह महीनों से श्रीवास्तव को फोन पर और व्यक्तिगत रूप से लगातार धमका रहा है। वहीं, अरविंद पासवान ने अपने बचाव में एक पुराने पैसे के विवाद का हवाला दिया है। उसका दावा है कि उसके स्वर्गीय पिता बलराम पासवान ने पहले श्रीवास्तव को पैसे उधार दिए थे, और यह वर्तमान झगड़ा उसी अनसुलझे लेन-देन से जुड़ा है। इस घटना के बाद, श्रीवास्तव ने निष्पक्ष पुलिस जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और कोलियरी स्टाफ के लिए बेहतर सुरक्षा की मांग की है। फिलहाल, ECL मैनेजमेंट और निरसा पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अधिकारियों ने कहा है कि कार्यस्थल पर उत्पीड़न के आरोपों की गहन कानूनी जांच के माध्यम से पुष्टि की जाएगी।5
- जामताड़ा जिले के मिहिजाम अंचल क्षेत्र के जियाजोरी गांव में एक निर्माणाधीन पुलिया ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन गई है। संवेदक द्वारा पुलिया निर्माण के दौरान किसी भी तरह के डायवर्सन की व्यवस्था न किए जाने से स्कूली छात्राओं, स्थानीय ग्रामीणों और पंचायत भवन आने-जाने वाले लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति से नाराज ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है और प्रशासन से जल्द से जल्द एक वैकल्पिक रास्ते का निर्माण कराने की मांग की है।1
- धनबाद डीआरएम कार्यालय में आयोजित मंडल संसदीय समिति की बैठक में क्षेत्रीय रेल विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। इस बैठक की अध्यक्षता पलामू सांसद वीडी राम ने की। धनबाद सांसद ढुल्लु महतो ने इस दौरान सबसे प्रमुख मांग धनबाद को रेलवे जोन का दर्जा देने की उठाई। उन्होंने तर्क दिया कि देश के सर्वाधिक राजस्व और कोयला लदान देने वाले रेल मंडलों में शामिल होने के कारण, धनबाद को जोन का दर्जा मिलने से पूरे क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी। सांसद ढुल्लु महतो ने धनबाद को रेलवे जोन बनाने की मांग के अतिरिक्त, जम्मू जाने वाली ट्रेन को कटरा तक विस्तारित करने, गंगा-दामोदर एक्सप्रेस को पटना से आगे बक्सर तक चलाने, धनबाद-बक्सर नई ट्रेन शुरू करने और कई स्पेशल ट्रेनों को नियमित करने की मांग भी रेलवे प्रशासन के समक्ष रखी। वहीं, पलामू सांसद वीडी राम ने गया-शेरघाटी-इमामगंज रेल लाइन, ट्रेनों के ठहराव, विस्तार और यात्री सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। चतरा सांसद कालीचरण सिंह ने अपने क्षेत्र की दो प्रमुख रेल समस्याओं को प्रस्तुत किया, जबकि गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी ने भी रेल संपर्क, यात्री सुविधाओं और विकास कार्यों से संबंधित मुद्दों पर रेलवे अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया। रेलवे प्रशासन ने सभी सुझावों और मांगों पर नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सांसदों के संसदीय क्षेत्रों से जुड़े रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं के विस्तार, नई ट्रेनों के संचालन, ट्रेनों के ठहराव और मार्ग विस्तार की समीक्षा करना था। साथ ही लंबित रेल परियोजनाओं की प्रगति पर भी गहन चर्चा की गई। अब क्षेत्रीय जनता और सांसदों की नजरें रेलवे बोर्ड और मंत्रालय पर टिकी हैं कि इन महत्वपूर्ण मांगों पर कितना अमल किया जाता है।1
- ईसीएल के मुगमा क्षेत्र अंतर्गत निरसा थाना क्षेत्र में स्थित चापापुर आउटसोर्सिंग में बुधवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। ड्यूटी खत्म कर घर लौट रहा आउटसोर्सिंग कंपनी का एक कर्मी साइड पर चल रहे डोजर की चपेट में आ गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान सोनाबाद निवासी दिलदार खान के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, काम कर रहा डोजर अचानक अनियंत्रित हो गया और पहले दिलदार खान की बाइक को क्षतिग्रस्त किया, फिर उसके शरीर के ऊपर चढ़ गया, जिससे घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई। घटना की खबर फैलते ही परिजन और आसपास के लोग बड़ी संख्या में जमा हो गए। आक्रोशित लोगों ने कंपनी की कोयला ट्रांसपोर्टिंग और उत्पादन को ठप कर दिया और मुआवजे की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। स्थिति बिगड़ती देख कंपनी प्रबंधन ने अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया, जिसने किसी तरह स्थिति को नियंत्रण में लिया। फिलहाल कंपनी प्रबंधन मृतक के परिजनों के साथ मुआवजे और नियोजन को लेकर वार्ता में जुटा हुआ है। इस संबंध में मुखिया पुष्पा बाउरी, निरसा प्रखंड अध्यक्ष कांग्रेस संतोष रॉय और स्थानीय ग्रामीण निसार अहमद ने भी अपनी बात रखी।5
- एकीकृत बिहार के समय 7 जुलाई 1998 को हुए अटका नरसंहार की 28वीं बरसी मंगलवार को बगोदर के अटका स्थित पड़ाव मैदान में श्रद्धा और संकल्प के साथ मनाई गई। इस अवसर पर नरसंहार में जान गंवाने वाले तत्कालीन मुखिया स्व. मथुरा प्रसाद मंडल सहित सभी 10 दिवंगतों को पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में सरकार से पीड़ित परिवारों के आश्रितों को सरकारी नौकरी देने की मांग एक बार फिर प्रमुखता से उठाई गई। यह घटना आज भी क्षेत्र के इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्यायों में गिनी जाती है। श्रद्धांजलि सभा की शुरुआत अटका पड़ाव मैदान स्थित शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई, जिसमें सबसे पहले स्व. मथुरा प्रसाद मंडल की पत्नी शांति देवी ने पुष्प अर्पित किए। इसके बाद जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने श्रद्धासुमन चढ़ाए। इस दौरान 'दिवंगत अमर रहें' के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा और उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। बगोदर के पूर्व विधायक और राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य गौतम सागर राणा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि जिला परिषद उपाध्यक्ष छोटेलाल यादव, प्रमुख आशा राज, विधायक पुत्र रवि महतो और झामुमो नेता शत्रुध्न प्रसाद मंडल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सभा को संबोधित करते हुए गौतम सागर राणा ने अटका नरसंहार को क्षेत्र के इतिहास की अत्यंत दुखद और पीड़ादायक घटना बताया। उन्होंने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि घटना के इतने वर्षों बाद भी आश्रित परिवारों को नौकरी नहीं मिल पाई है। उन्होंने जोर दिया कि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और यदि देश को नक्सलवाद से मुक्त करना है, तो समाज में आर्थिक और सामाजिक असमानता को समाप्त कर समतामूलक व्यवस्था स्थापित करनी होगी। जिला परिषद उपाध्यक्ष छोटेलाल यादव ने भी सरकार से पूर्व की घोषणा के अनुरूप प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग दोहराई, और कहा कि सरकार को वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों की मांगों पर गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए। झामुमो नेता शत्रुध्न प्रसाद मंडल ने स्व. मथुरा प्रसाद मंडल को एक दूरदर्शी और जुझारू जननेता बताते हुए कहा कि यदि वे आज जीवित होते तो क्षेत्र के विकास की तस्वीर अलग होती, और उनकी कमी आज भी क्षेत्र के लोग गहराई से महसूस करते हैं। उल्लेखनीय है कि 7 जुलाई 1998 को अटका के दमौआ में हुए इस नरसंहार में तत्कालीन मुखिया स्व. मथुरा प्रसाद मंडल के साथ धुपाली महतो, बिहारी महतो, सीताराम महतो, रघुनाथ प्रसाद, मीरन प्रसाद, तुलसी महतो, दशरथ मंडल, जगरनाथ महतो और सरयू महतो की हत्या कर दी गई थी।1
- अचानक एक तालाब 'पाताल लोक' में समा गई है, जिसके कारण कई घरों में 'मौत की दरारें' पड़ने लगी हैं। इस घटना से इलाके में भारी तबाही का मंजर दिखाई दे रहा है।1