एकीकृत बिहार के समय 7 जुलाई 1998 को हुए अटका नरसंहार की 28वीं बरसी मंगलवार को बगोदर के अटका स्थित पड़ाव मैदान में श्रद्धा और संकल्प के साथ मनाई गई। इस अवसर पर नरसंहार में जान गंवाने वाले तत्कालीन मुखिया स्व. मथुरा प्रसाद मंडल सहित सभी 10 दिवंगतों को पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में सरकार से पीड़ित परिवारों के आश्रितों को सरकारी नौकरी देने की मांग एक बार फिर प्रमुखता से उठाई गई। यह घटना आज भी क्षेत्र के इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्यायों में गिनी जाती है। श्रद्धांजलि सभा की शुरुआत अटका पड़ाव मैदान स्थित शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई, जिसमें सबसे पहले स्व. मथुरा प्रसाद मंडल की पत्नी शांति देवी ने पुष्प अर्पित किए। इसके बाद जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने श्रद्धासुमन चढ़ाए। इस दौरान 'दिवंगत अमर रहें' के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा और उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। बगोदर के पूर्व विधायक और राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य गौतम सागर राणा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि जिला परिषद उपाध्यक्ष छोटेलाल यादव, प्रमुख आशा राज, विधायक पुत्र रवि महतो और झामुमो नेता शत्रुध्न प्रसाद मंडल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सभा को संबोधित करते हुए गौतम सागर राणा ने अटका नरसंहार को क्षेत्र के इतिहास की अत्यंत दुखद और पीड़ादायक घटना बताया। उन्होंने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि घटना के इतने वर्षों बाद भी आश्रित परिवारों को नौकरी नहीं मिल पाई है। उन्होंने जोर दिया कि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और यदि देश को नक्सलवाद से मुक्त करना है, तो समाज में आर्थिक और सामाजिक असमानता को समाप्त कर समतामूलक व्यवस्था स्थापित करनी होगी। जिला परिषद उपाध्यक्ष छोटेलाल यादव ने भी सरकार से पूर्व की घोषणा के अनुरूप प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग दोहराई, और कहा कि सरकार को वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों की मांगों पर गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए। झामुमो नेता शत्रुध्न प्रसाद मंडल ने स्व. मथुरा प्रसाद मंडल को एक दूरदर्शी और जुझारू जननेता बताते हुए कहा कि यदि वे आज जीवित होते तो क्षेत्र के विकास की तस्वीर अलग होती, और उनकी कमी आज भी क्षेत्र के लोग गहराई से महसूस करते हैं। उल्लेखनीय है कि 7 जुलाई 1998 को अटका के दमौआ में हुए इस नरसंहार में तत्कालीन मुखिया स्व. मथुरा प्रसाद मंडल के साथ धुपाली महतो, बिहारी महतो, सीताराम महतो, रघुनाथ प्रसाद, मीरन प्रसाद, तुलसी महतो, दशरथ मंडल, जगरनाथ महतो और सरयू महतो की हत्या कर दी गई थी।
एकीकृत बिहार के समय 7 जुलाई 1998 को हुए अटका नरसंहार की 28वीं बरसी मंगलवार को बगोदर के अटका स्थित पड़ाव मैदान में श्रद्धा और संकल्प के साथ मनाई गई। इस अवसर पर नरसंहार में जान गंवाने वाले तत्कालीन मुखिया स्व. मथुरा प्रसाद मंडल सहित सभी 10 दिवंगतों को पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में सरकार से पीड़ित परिवारों के आश्रितों को सरकारी नौकरी देने की मांग एक बार फिर प्रमुखता से उठाई गई। यह घटना आज भी क्षेत्र के इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्यायों में गिनी जाती है। श्रद्धांजलि सभा की शुरुआत अटका पड़ाव मैदान स्थित शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई, जिसमें सबसे पहले स्व. मथुरा प्रसाद मंडल की पत्नी शांति देवी ने पुष्प अर्पित किए। इसके बाद जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने श्रद्धासुमन चढ़ाए। इस दौरान 'दिवंगत अमर रहें' के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा और उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। बगोदर के पूर्व विधायक और राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य गौतम सागर राणा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि जिला परिषद उपाध्यक्ष छोटेलाल यादव, प्रमुख आशा राज, विधायक पुत्र रवि महतो और झामुमो नेता शत्रुध्न प्रसाद मंडल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सभा को संबोधित करते हुए गौतम सागर राणा ने अटका नरसंहार को क्षेत्र के इतिहास की अत्यंत दुखद और पीड़ादायक घटना बताया। उन्होंने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि घटना के इतने वर्षों बाद भी आश्रित परिवारों को नौकरी नहीं मिल पाई है। उन्होंने जोर दिया कि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और यदि देश को नक्सलवाद से मुक्त करना है, तो समाज में आर्थिक और सामाजिक असमानता को समाप्त कर समतामूलक व्यवस्था स्थापित करनी होगी। जिला परिषद उपाध्यक्ष छोटेलाल यादव ने भी सरकार से पूर्व की घोषणा के अनुरूप प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग दोहराई, और कहा कि सरकार को वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों की मांगों पर गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए। झामुमो नेता शत्रुध्न प्रसाद मंडल ने स्व. मथुरा प्रसाद मंडल को एक दूरदर्शी और जुझारू जननेता बताते हुए कहा कि यदि वे आज जीवित होते तो क्षेत्र के विकास की तस्वीर अलग होती, और उनकी कमी आज भी क्षेत्र के लोग गहराई से महसूस करते हैं। उल्लेखनीय है कि 7 जुलाई 1998 को अटका के दमौआ में हुए इस नरसंहार में तत्कालीन मुखिया स्व. मथुरा प्रसाद मंडल के साथ धुपाली महतो, बिहारी महतो, सीताराम महतो, रघुनाथ प्रसाद, मीरन प्रसाद, तुलसी महतो, दशरथ मंडल, जगरनाथ महतो और सरयू महतो की हत्या कर दी गई थी।
- एकीकृत बिहार के समय 7 जुलाई 1998 को हुए अटका नरसंहार की 28वीं बरसी मंगलवार को बगोदर के अटका स्थित पड़ाव मैदान में श्रद्धा और संकल्प के साथ मनाई गई। इस अवसर पर नरसंहार में जान गंवाने वाले तत्कालीन मुखिया स्व. मथुरा प्रसाद मंडल सहित सभी 10 दिवंगतों को पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में सरकार से पीड़ित परिवारों के आश्रितों को सरकारी नौकरी देने की मांग एक बार फिर प्रमुखता से उठाई गई। यह घटना आज भी क्षेत्र के इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्यायों में गिनी जाती है। श्रद्धांजलि सभा की शुरुआत अटका पड़ाव मैदान स्थित शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई, जिसमें सबसे पहले स्व. मथुरा प्रसाद मंडल की पत्नी शांति देवी ने पुष्प अर्पित किए। इसके बाद जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने श्रद्धासुमन चढ़ाए। इस दौरान 'दिवंगत अमर रहें' के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा और उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। बगोदर के पूर्व विधायक और राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य गौतम सागर राणा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि जिला परिषद उपाध्यक्ष छोटेलाल यादव, प्रमुख आशा राज, विधायक पुत्र रवि महतो और झामुमो नेता शत्रुध्न प्रसाद मंडल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सभा को संबोधित करते हुए गौतम सागर राणा ने अटका नरसंहार को क्षेत्र के इतिहास की अत्यंत दुखद और पीड़ादायक घटना बताया। उन्होंने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि घटना के इतने वर्षों बाद भी आश्रित परिवारों को नौकरी नहीं मिल पाई है। उन्होंने जोर दिया कि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और यदि देश को नक्सलवाद से मुक्त करना है, तो समाज में आर्थिक और सामाजिक असमानता को समाप्त कर समतामूलक व्यवस्था स्थापित करनी होगी। जिला परिषद उपाध्यक्ष छोटेलाल यादव ने भी सरकार से पूर्व की घोषणा के अनुरूप प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग दोहराई, और कहा कि सरकार को वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों की मांगों पर गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए। झामुमो नेता शत्रुध्न प्रसाद मंडल ने स्व. मथुरा प्रसाद मंडल को एक दूरदर्शी और जुझारू जननेता बताते हुए कहा कि यदि वे आज जीवित होते तो क्षेत्र के विकास की तस्वीर अलग होती, और उनकी कमी आज भी क्षेत्र के लोग गहराई से महसूस करते हैं। उल्लेखनीय है कि 7 जुलाई 1998 को अटका के दमौआ में हुए इस नरसंहार में तत्कालीन मुखिया स्व. मथुरा प्रसाद मंडल के साथ धुपाली महतो, बिहारी महतो, सीताराम महतो, रघुनाथ प्रसाद, मीरन प्रसाद, तुलसी महतो, दशरथ मंडल, जगरनाथ महतो और सरयू महतो की हत्या कर दी गई थी।1
- झारखंड के विष्णुगढ़ के चनों क्षेत्र में हुई एक घटना ने परियोजना की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, यहाँ एक अधूरी नहर पहली ही जोरदार बारिश में ढह गई है। इस घटना के बाद, यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या यह भ्रष्टाचार का खेल है जो उजागर हो गया है।1
- यह एक कटु सत्य है कि मनुष्य के जीवन के लिए खाना अत्यंत आवश्यक है, लेकिन इस महत्वपूर्ण अन्न को उगाने वाला किसान वर्ग आज भी गरीबी में जी रहा है। यह स्थिति समाज में एक गहरी विडंबना और चिंता का विषय है, जहाँ जीवन के सबसे मूलभूत स्रोत का प्रदाता ही सबसे अधिक अभावग्रस्त है।1
- तेलो दुर्गा मंदिर से बाबा अमरनाथ यात्रा के लिए 22 श्रद्धालुओं का एक जत्था रवाना हो गया। इस अवसर पर स्थानीय व्यवसाय संघ ने सभी अमरनाथ यात्रियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया।1
- झारखंड के छाताबाद में भू-धंसान की घटना को लेकर सियासत गरमा गई है। इस दौरान, पूर्व मंत्री जलेश्वर महतो पीड़ितों से मिलने पहुँचे। हालाँकि, स्थानीय लोगों ने उनका जमकर विरोध किया, जिसके कारण उन्हें नारेबाज़ी के बीच वापस लौटना पड़ा।1
- गिरिडीह जिले के धनवार नगर पंचायत अंतर्गत बड़ा चौक स्थित होटल डिस्कवरी में मंगलवार को पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने कथित देह व्यापार के एक रैकेट का भंडाफोड़ किया। गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस छापेमारी के दौरान पुलिस ने दो युवतियों और दो युवकों को आपत्तिजनक स्थिति में हिरासत में लिया, साथ ही मौके से कुछ आपत्तिजनक सामान भी बरामद किए गए। खोरीमहुआ एसडीपीओ अमरेंद्र कुमार ने बताया कि जांच में होटल में सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन पाया गया, जहाँ आने-जाने वाले लोगों का कोई रजिस्टर नहीं रखा जा रहा था। पुलिस ने होटल के मैनेजर प्रदीप साहू को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। जांच में सामने आया कि होटल का संचालन अनिल साव नामक व्यक्ति कर रहा था, जो छापेमारी की भनक लगते ही मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है। अनैतिक गतिविधियों की पुष्टि होने के बाद, प्रशासन ने मजिस्ट्रेट अभिषेक कुमार की उपस्थिति में मंगलवार देर शाम लगभग 8:30 बजे होटल डिस्कवरी को सील कर दिया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह होटल पहले भी इसी तरह की शिकायतों को लेकर विवादों में रहा है और इससे पहले भी इसमें दो बार छापेमारी हो चुकी है। लगातार मिल रही शिकायतों के मद्देनजर प्रशासन ने इस बार सख्त कार्रवाई करते हुए होटल को सील किया है। इस संयुक्त कार्रवाई में खोरीमहुआ एसडीपीओ अमरेंद्र कुमार, धनवार थाना प्रभारी ब्रजेश कुमार, धनवार बीडीओ धर्मेंद्र कुमार दास, महिला पुलिस बल और अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे। फिलहाल, पुलिस फरार संचालक अनिल साव की तलाश में जुटी है और पूरे मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच के आधार पर आगे आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।1
- बाघमारा हाईस्कूल के सामने बाघमारा मंडल भाजपा कार्यालय के निर्माण के लिए भूमि पूजन और आधारशिला रखने का कार्यक्रम संपन्न हुआ। यह अनुष्ठान बाघमारा के विधायक शत्रुघ्न महतो के कर-कमलों द्वारा विधिवत नारियल फोड़कर किया गया। इस अवसर पर विधायक ने कहा कि इस कार्यालय के खुलने से पार्टी कार्यकर्ता यहां बैठकर पार्टी के हितों के लिए विचार-विमर्श और मंथन कर सकेंगे। उनके अनुसार, इस कार्यालय के उद्घाटन से संगठन के प्रति कार्यकर्ताओं में नया जोश और ऊर्जा का संचार होगा। इस कार्यक्रम में पार्टी के मंडल महामंत्री बलराम चौहान, बच्चू राय, अशोक मिश्रा, राजू शर्मा, सत्यनारायण पांडे, अजीत पांडे, आदर्श गुप्ता, अशोक साव, गिरजा शंकर, सच्चू सिन्हा, जीतन भुईया, विपिन ठक्कर सहित कई अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।1
- गिरिडीह जिले के बगोदर थाना क्षेत्र अंतर्गत बालक-अलगडीहा सीमा पर स्थित चिहुंटिया गांव के समीप एक तालाब के किनारे अज्ञात महिला का शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। बताया जा रहा है कि स्थानीय ग्रामीणों ने तालाब के कम पानी वाले हिस्से में इस शव को देखा, जिसके तुरंत बाद उन्होंने बगोदर थाना पुलिस को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी राजेश कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे, जहाँ उन्होंने शव को अपने कब्जे में लिया और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। फिलहाल, मृत महिला की पहचान नहीं हो सकी है, और पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है ताकि शव मिलने के कारणों का पता लगाया जा सके।1