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*एसपी गोंडा पर भड़के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद* *एसपी से टेलीफोन पर बातचीत करते कैबिनेट मंत्री संजय निषाद बोले- 3 महीने से टॉर्चर किया जा रहा था और दरोगा पुलिस आपके बयान बदलवा रहे थे।*
अजीत मिश्रा (खोजी)
*एसपी गोंडा पर भड़के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद* *एसपी से टेलीफोन पर बातचीत करते कैबिनेट मंत्री संजय निषाद बोले- 3 महीने से टॉर्चर किया जा रहा था और दरोगा पुलिस आपके बयान बदलवा रहे थे।*
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- अयोध्या में गीतांजलि स्टूडियो की 5वीं वर्षगांठ, नए प्रीमियम प्रोडक्ट्स लॉन्च; ग्राहकों के लिए 50% तक की विशेष छूट मोनू अयोध्या गद्दोपुर चौराहा स्थित गीतांजलि स्टूडियो ने अपनी सफल यात्रा के पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर 5वीं वर्षगांठ धूमधाम से मनाई। इस खास मौके पर स्टूडियो की ओर से ग्राहकों के लिए विशेष ऑफर्स के साथ कई नए और प्रीमियम प्रोडक्ट्स भी लॉन्च किए गए हैं। गीतांजलि स्टूडियो के बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर मोहम्मद आरिफ व सैलून मैनेजर दीपक सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि पिछले पांच वर्षों के दौरान अयोध्या में स्टूडियो ने ग्राहकों के भरोसे और अपनी गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के दम पर एक अलग पहचान बनाई है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय पूरी टीम की मेहनत, बेहतर ऑपरेशनल गतिविधियों और प्रभावी मार्केटिंग को दिया।मोहम्मद आरिफ ने स्टूडियो की ओनर निहारिका मैम और पूरी टीम का आभार जताते हुए कहा कि उनके निरंतर सहयोग और समर्पण से गीतांजलि स्टूडियो आज अयोध्या में अपनी मजबूत पहचान बना सका है। उन्होंने पिछले पांच वर्षों से स्टूडियो से जुड़े सभी ग्राहकों और मेंबरशिप वैल्यू कार्ड का हिस्सा बनने वाले क्लाइंट्स का भी धन्यवाद किया। प्रीमियम ब्रांड्स और नए प्रोडक्ट्स की सुविधा 5वीं वर्षगांठ के अवसर पर ग्राहकों के लिए प्रीमियम ब्रांड्स की रेंज को और विस्तार दिया गया है। स्टूडियो में Kérastase को लॉन्च किया गया है, जबकि पुरुषों के लिए Kinekt के नए प्रोडक्ट्स भी उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा Thalgo और L'Oréal जैसे विश्वस्तरीय ब्रांड्स की सुविधाएं भी ग्राहकों को मिल रही हैं। वहीं, जल्द ही Redken को भी स्टूडियो की सेवाओं में शामिल किया जाएगा। रविवार तक मिलेंगे खास एनिवर्सरी ऑफर 5वीं वर्षगांठ के मौके पर ग्राहकों के लिए विशेष ऑफर्स भी रखे गए हैं। रविवार तक चलने वाले इन ऑफर्स में 30 से 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। मोहम्मद आरिफ ने अयोध्यावासियों से इन विशेष ऑफर्स का लाभ उठाने और गीतांजलि स्टूडियो की विश्वस्तरीय सेवाओं व प्रीमियम ब्रांड्स का अनुभव लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी ग्राहकों की जरूरत और पसंद के अनुरूप सेवाओं में लगातार नए बदलाव और विस्तार किए जाते रहेंगे।4
- गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं एवं अभिनंदन नई दिशा, नई ऊर्जा और मंगलमय जीवन का संदेश देता है गणेशोत्सव गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर समस्त देशवासियों, माताओं-बहनों एवं भाइयों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं अभिनंदन। विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता भगवान श्री गणेश सभी के जीवन से विघ्न-बाधाओं को दूर कर सुख, शांति, समृद्धि और सफलता प्रदान करें। गणेश चतुर्थी केवल धार्मिक आस्था का पर्व ही नहीं, बल्कि एकता, भाईचारे, सामाजिक सद्भाव और सकारात्मक सहभागिता का भी संदेश देती है। भगवान गणेश हमें ज्ञान, विवेक, विनम्रता और सद्बुद्धि के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। आइए, इस पावन पर्व पर हम सभी समाज में प्रेम और सद्भाव बनाए रखने, पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखने तथा जरूरतमंदों की सहायता करने का संकल्प लें। गणपति बप्पा मोरया! मंगलमूर्ति मोरया! मानवाधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण ऑर्गनाइजेशन रिपोर्टर – सूर्य प्रकाश पाण्डेय जी1
- बीकापुर तहसील में बंद पड़ा शौचालय , वादकारी जनता परेशान , सरकारी अफसर कब होंगे मेहरबान1
- देवेंद्र पाठक विवाद में बड़ा ट्विस्ट! दशरथ गद्दी के महंत बोले—‘एक साल से हमारा कोई संबंध नही अयोध्या कथावाचक एवं गायक देवेंद्र पाठक पर एक महिला द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर रामनगरी में चर्चाओं का दौर तेज है। इसी बीच दशरथ गद्दी के महंत बृजमोहन दास का बयान सामने आने से मामले ने नया मोड़ ले लिया है। महंत बृजमोहन दास ने स्पष्ट कहा कि देवेंद्र पाठक पहले उनके स्थान से जुड़े हुए थे, लेकिन करीब एक वर्ष से उनका स्थान से कोई संबंध नहीं है। महंत के मुताबिक, अब न तो उनसे बातचीत होती है और न ही देवेंद्र पाठक का वहां आना-जाना है। *“अपना अलग स्थान बना लिया है”* महंत बृजमोहन दास के अनुसार, देवेंद्र पाठक ने अयोध्या में अब अपना अलग स्थान बना लिया है और वर्तमान में उनका आवागमन वहीं रहता है। उन्होंने कहा कि देवेंद्र पाठक से जुड़े मौजूदा विवाद को लेकर उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोई जानकारी नहीं है। महंत ने पूरे मामले को पारिवारिक विषय बताते हुए कहा कि इसकी वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है। *2014 की शादी पर भी महंत का बयान* वहीं, वर्ष 2014 में देवेंद्र पाठक की शादी को लेकर महंत बृजमोहन दास ने कहा कि उस समय वह लोग शादी में शामिल हुए थे और शादी धूमधाम से हुई थी। विवाह के संबंध में उन्हें इतनी ही जानकारी होने की बात महंत ने कही। *अब सवालों के घेरे में कई पहलू* देवेंद्र पाठक पर लगाए गए आरोपों पर अलग-अलग दावे सामने आने के बीच दशरथ गद्दी के महंत का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। *अब सबसे बड़ा सवाल यही है* क्या आरोपों में लगाए गए दावों की जांच किसी निष्कर्ष तक पहुंचती है, या फिर यह मामला निजी और पारिवारिक विवाद तक ही सीमित रहता है?1
- सम्मनपुर थाना क्षेत्र में बुजुर्ग की आत्महत्या, बीमारी से परेशान होकर उठाया कदम, पुलिस जांच में जुटी।1
- *FIR के बाद डॉक्टर साहब की ‘कहानी’ वायरल, अब CCTV बनेगा असली हीरो!* *फोन से ‘मैनेजमेंट’ की कोशिश का आरोप, बात नहीं बनी तो वीडियो में पत्रकार पर आरोपों की बरसात—सच कौन बोल रहा, कैमरे की नजर बताएगी* अम्बेडकरनगर। अकबरपुर के टांडा रोड स्थित आरोग्य पाइल्स हॉस्पिटल इन दिनों इलाज से ज्यादा आरोप-प्रत्यारोप को लेकर चर्चा में है। मरीज के इलाज संबंधी आरोपों और पत्रकार के साथ कथित गाली-गलौज व मारपीट की खबर सामने आने के बाद डॉक्टर बी.के. अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आई है। इसके बाद मामले में एक नया मोड़ तब आया, जब डॉक्टर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वायरल वीडियो में डॉक्टर बी.के. अग्रवाल मरीज द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए पत्रकार पर भी गंभीर आरोप लगाते नजर आ रहे हैं। डॉक्टर की ओर से पत्रकार पर पैसे मांगने और कई लोगों के साथ अस्पताल पहुंचकर उपद्रव करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इनकी वास्तविकता जांच का विषय है। मामले में सबसे दिलचस्प सवाल यह है कि अगर अस्पताल में CCTV कैमरे लगे हैं तो फिर कैमरे की ‘गवाही’ क्यों न ली जाए? आखिर कैमरा न किसी के पक्ष में वोट देता है और न ही बयान रटता है—जो हुआ होगा, वही रिकॉर्ड हुआ होगा। *‘रटा-रटाया बयान’ या पूरा सच?* सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोगों का कहना है कि डॉक्टर का बयान बेहद तैयार किया हुआ प्रतीत होता है, जबकि दूसरी ओर डॉक्टर ने पत्रकार पर लगाए गए आरोपों को गंभीरता से सामने रखा है। ऐसे में फैसला सोशल मीडिया की अदालत में नहीं, बल्कि पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए। अगर घटना के समय का CCTV फुटेज सुरक्षित है और उसकी निष्पक्ष जांच होती है तो यह काफी हद तक स्पष्ट हो सकता है कि अस्पताल में वास्तव में कौन पहुंचा, कितने लोग मौजूद थे, क्या बातचीत हुई और कथित विवाद की शुरुआत कैसे हुई। *अब ‘वीडियो बनाम CCTV’ की लड़ाई!* फिलहाल मामला कुछ ऐसा नजर आ रहा है कि एक तरफ डॉक्टर का वायरल वीडियो है और दूसरी तरफ पत्रकार की शिकायत व एफआईआर। ऐसे में असली पटकथा शायद अस्पताल के CCTV कैमरे के पास सुरक्षित हो। अब देखना यह है कि जांच में CCTV की आंख खुलती है या फिर मामला बयानों की भूलभुलैया में ही घूमता रहता है। क्योंकि कैमरा अगर सच बोल पड़ा तो न डॉक्टर को रटा हुआ बयान याद करना पड़ेगा और न पत्रकार को अपनी कलम का हिसाब देना पड़ेगा। मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और कितने आरोप महज आरोप हैं। फिलहाल आरोग्य पाइल्स हॉस्पिटल का विवाद ‘इलाज’ से निकलकर ‘CCTV की अदालत’ तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। *FIR के बाद डॉक्टर साहब की ‘कहानी’ वायरल, अब CCTV बनेगा असली हीरो!* *फोन से ‘मैनेजमेंट’ की कोशिश का आरोप, बात नहीं बनी तो वीडियो में पत्रकार पर आरोपों की बरसात—सच कौन बोल रहा, कैमरे की नजर बताएगी* अम्बेडकरनगर। अकबरपुर के टांडा रोड स्थित आरोग्य पाइल्स हॉस्पिटल इन दिनों इलाज से ज्यादा आरोप-प्रत्यारोप को लेकर चर्चा में है। मरीज के इलाज संबंधी आरोपों और पत्रकार के साथ कथित गाली-गलौज व मारपीट की खबर सामने आने के बाद डॉक्टर बी.के. अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आई है। इसके बाद मामले में एक नया मोड़ तब आया, जब डॉक्टर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वायरल वीडियो में डॉक्टर बी.के. अग्रवाल मरीज द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए पत्रकार पर भी गंभीर आरोप लगाते नजर आ रहे हैं। डॉक्टर की ओर से पत्रकार पर पैसे मांगने और कई लोगों के साथ अस्पताल पहुंचकर उपद्रव करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इनकी वास्तविकता जांच का विषय है। मामले में सबसे दिलचस्प सवाल यह है कि अगर अस्पताल में CCTV कैमरे लगे हैं तो फिर कैमरे की ‘गवाही’ क्यों न ली जाए? आखिर कैमरा न किसी के पक्ष में वोट देता है और न ही बयान रटता है—जो हुआ होगा, वही रिकॉर्ड हुआ होगा। *‘रटा-रटाया बयान’ या पूरा सच?* सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोगों का कहना है कि डॉक्टर का बयान बेहद तैयार किया हुआ प्रतीत होता है, जबकि दूसरी ओर डॉक्टर ने पत्रकार पर लगाए गए आरोपों को गंभीरता से सामने रखा है। ऐसे में फैसला सोशल मीडिया की अदालत में नहीं, बल्कि पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए। अगर घटना के समय का CCTV फुटेज सुरक्षित है और उसकी निष्पक्ष जांच होती है तो यह काफी हद तक स्पष्ट हो सकता है कि अस्पताल में वास्तव में कौन पहुंचा, कितने लोग मौजूद थे, क्या बातचीत हुई और कथित विवाद की शुरुआत कैसे हुई। *अब ‘वीडियो बनाम CCTV’ की लड़ाई!* फिलहाल मामला कुछ ऐसा नजर आ रहा है कि एक तरफ डॉक्टर का वायरल वीडियो है और दूसरी तरफ पत्रकार की शिकायत व एफआईआर। ऐसे में असली पटकथा शायद अस्पताल के CCTV कैमरे के पास सुरक्षित हो। अब देखना यह है कि जांच में CCTV की आंख खुलती है या फिर मामला बयानों की भूलभुलैया में ही घूमता रहता है। क्योंकि कैमरा अगर सच बोल पड़ा तो न डॉक्टर को रटा हुआ बयान याद करना पड़ेगा और न पत्रकार को अपनी कलम का हिसाब देना पड़ेगा। मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और कितने आरोप महज आरोप हैं। फिलहाल आरोग्य पाइल्स हॉस्पिटल का विवाद ‘इलाज’ से निकलकर ‘CCTV की अदालत’ तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।1
- अयोध्या,सपा महानगर कमेटी ने कोतवाली नगर प्रभारी को हटाने की मांग की अयोध्या। समाजवादी पार्टी महानगर कमेटी ने महानगर अध्यक्ष श्याम कृष्ण श्रीवास्तव के नेतृत्व में सीओ सिटी के माध्यम से एसएसपी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में थाना कोतवाली नगर प्रभारी निरीक्षक मनोज शर्मा पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए। आरोप है कि बिना सुविधा शुल्क के थाने में कोई सुनवाई नहीं हो रही है और कोतवाली को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया गया है। सपा नेताओं ने मांग की कि प्रभारी निरीक्षक को तत्काल हटाया जाए और भविष्य में किसी थाने का प्रभार न दिया जाए। चेतावनी दी गई कि मांग पर कार्रवाई न हुई तो पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडे पवन के नेतृत्व में कोतवाली नगर का घेराव किया जाएगा।2
- यूजीसी कानून के विरोध में अयोध्या में पैदल मार्च, छह सूत्रीय मांगों को लेकर पीएम के नाम सौंपा ज्ञापन अयोध्या। यूजीसी कानून के विरोध और विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार को रामनगरी अयोध्या में भारतीय चाणक्य परिषद एवं श्री श्री परशुराम सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में पैदल मार्च निकाला गया। ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित कृपा निधान तिवारी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोगों ने गांधी पार्क से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च किया और सरकार के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम छह सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी कानून को वापस लेने के साथ ही आरक्षण व्यवस्था में आर्थिक आधार को लागू करने की मांग की। ज्ञापन में यूजीसी कानून की वापसी, आर्थिक आधार पर आरक्षण, सवर्ण आयोग का गठन, समान नागरिक संहिता लागू करने, एससी/एसटी कानून में संशोधन तथा भगवान परशुराम जयंती पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग प्रमुख रूप से शामिल रही। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि उनकी मांगें लंबे समय से उठाई जा रही हैं, लेकिन यदि सरकार ने इन पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो 24 अक्टूबर से पटना से दिल्ली तक पैदल यात्रा निकाली जाएगी और 2 नवंबर को संसद का घेराव किया जाएगा। पैदल मार्च के दौरान कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। आयोजकों ने कहा कि यह आंदोलन केवल ज्ञापन देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मांगों के समाधान के लिए चरणबद्ध तरीके से देशव्यापी आंदोलन चलाया जाएगा।3
- भगवान की लाठी में आवाज नहीं होती, लेकिन न्याय जरूर होता है मानवाधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण ऑर्गनाइजेशन रिपोर्टर – सूर्य प्रकाश पाण्डेय जी द्वारा आज के समय में इंसान को इंसान के साथ प्रेम, सम्मान और मानवता का व्यवहार करना चाहिए। किसी को जानबूझकर दुख देना, अपमानित करना या उसके अधिकारों का हनन करना कभी उचित नहीं है। कहा जाता है कि “भगवान की लाठी में आवाज नहीं होती, लेकिन जब चलती है तो इंसान को अपने कर्मों का एहसास जरूर करा देती है।” जीवन में यदि कोई व्यक्ति किसी को दुःख देता है, उसके साथ अन्याय करता है या उसकी भावनाओं को ठेस पहुँचाता है, तो उसे यह याद रखना चाहिए कि हर कर्म का परिणाम होता है। भले ही दुनिया की नजरों से कोई बात छिप जाए, लेकिन ईश्वर सब देख रहे हैं। इसलिए किसी कमजोर या मजबूर व्यक्ति को परेशान करने के बजाय उसके साथ इंसानियत और संवेदनशीलता से पेश आना चाहिए। हमें इंसान से नहीं, बल्कि अपने कर्मों और भगवान के न्याय से डरना चाहिए। ईश्वर की न्याय व्यवस्था में देर हो सकती है, लेकिन अन्याय नहीं। इसलिए जीवन में सदैव अच्छे कर्म करें, किसी का दिल न दुखाएँ और जरूरतमंद के साथ खड़े होकर मानवता का परिचय दें। संदेश: “किसी को इतना दुःख मत दो कि उसकी खामोशी भगवान तक पहुँच जाए, क्योंकि भगवान कब, कहाँ और किस रूप में न्याय करेंगे—यह कोई नहीं जानता।” मानवाधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण ऑर्गनाइजेशन रिपोर्टर – सूर्य प्रकाश पाण्डेय जी1