*FIR के बाद डॉक्टर साहब की ‘कहानी’ वायरल, अब CCTV बनेगा असली हीरो!* *फोन से ‘मैनेजमेंट’ की कोशिश का आरोप, बात नहीं बनी तो वीडियो में पत्रकार पर आरोपों की बरसात—सच कौन बोल रहा, कैमरे की नजर बताएगी* अम्बेडकरनगर। अकबरपुर के टांडा रोड स्थित आरोग्य पाइल्स हॉस्पिटल इन दिनों इलाज से ज्यादा आरोप-प्रत्यारोप को लेकर चर्चा में है। मरीज के इलाज संबंधी आरोपों और पत्रकार के साथ कथित गाली-गलौज व मारपीट की खबर सामने आने के बाद डॉक्टर बी.के. अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आई है। इसके बाद मामले में एक नया मोड़ तब आया, जब डॉक्टर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वायरल वीडियो में डॉक्टर बी.के. अग्रवाल मरीज द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए पत्रकार पर भी गंभीर आरोप लगाते नजर आ रहे हैं। डॉक्टर की ओर से पत्रकार पर पैसे मांगने और कई लोगों के साथ अस्पताल पहुंचकर उपद्रव करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इनकी वास्तविकता जांच का विषय है। मामले में सबसे दिलचस्प सवाल यह है कि अगर अस्पताल में CCTV कैमरे लगे हैं तो फिर कैमरे की ‘गवाही’ क्यों न ली जाए? आखिर कैमरा न किसी के पक्ष में वोट देता है और न ही बयान रटता है—जो हुआ होगा, वही रिकॉर्ड हुआ होगा। *‘रटा-रटाया बयान’ या पूरा सच?* सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोगों का कहना है कि डॉक्टर का बयान बेहद तैयार किया हुआ प्रतीत होता है, जबकि दूसरी ओर डॉक्टर ने पत्रकार पर लगाए गए आरोपों को गंभीरता से सामने रखा है। ऐसे में फैसला सोशल मीडिया की अदालत में नहीं, बल्कि पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए। अगर घटना के समय का CCTV फुटेज सुरक्षित है और उसकी निष्पक्ष जांच होती है तो यह काफी हद तक स्पष्ट हो सकता है कि अस्पताल में वास्तव में कौन पहुंचा, कितने लोग मौजूद थे, क्या बातचीत हुई और कथित विवाद की शुरुआत कैसे हुई। *अब ‘वीडियो बनाम CCTV’ की लड़ाई!* फिलहाल मामला कुछ ऐसा नजर आ रहा है कि एक तरफ डॉक्टर का वायरल वीडियो है और दूसरी तरफ पत्रकार की शिकायत व एफआईआर। ऐसे में असली पटकथा शायद अस्पताल के CCTV कैमरे के पास सुरक्षित हो। अब देखना यह है कि जांच में CCTV की आंख खुलती है या फिर मामला बयानों की भूलभुलैया में ही घूमता रहता है। क्योंकि कैमरा अगर सच बोल पड़ा तो न डॉक्टर को रटा हुआ बयान याद करना पड़ेगा और न पत्रकार को अपनी कलम का हिसाब देना पड़ेगा। मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और कितने आरोप महज आरोप हैं। फिलहाल आरोग्य पाइल्स हॉस्पिटल का विवाद ‘इलाज’ से निकलकर ‘CCTV की अदालत’ तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। *FIR के बाद डॉक्टर साहब की ‘कहानी’ वायरल, अब CCTV बनेगा असली हीरो!* *फोन से ‘मैनेजमेंट’ की कोशिश का आरोप, बात नहीं बनी तो वीडियो में पत्रकार पर आरोपों की बरसात—सच कौन बोल रहा, कैमरे की नजर बताएगी* अम्बेडकरनगर। अकबरपुर के टांडा रोड स्थित आरोग्य पाइल्स हॉस्पिटल इन दिनों इलाज से ज्यादा आरोप-प्रत्यारोप को लेकर चर्चा में है। मरीज के इलाज संबंधी आरोपों और पत्रकार के साथ कथित गाली-गलौज व मारपीट की खबर सामने आने के बाद डॉक्टर बी.के. अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आई है। इसके बाद मामले में एक नया मोड़ तब आया, जब डॉक्टर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वायरल वीडियो में डॉक्टर बी.के. अग्रवाल मरीज द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए पत्रकार पर भी गंभीर आरोप लगाते नजर आ रहे हैं। डॉक्टर की ओर से पत्रकार पर पैसे मांगने और कई लोगों के साथ अस्पताल पहुंचकर उपद्रव करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इनकी वास्तविकता जांच का विषय है। मामले में सबसे दिलचस्प सवाल यह है कि अगर अस्पताल में CCTV कैमरे लगे हैं तो फिर कैमरे की ‘गवाही’ क्यों न ली जाए? आखिर कैमरा न किसी के पक्ष में वोट देता है और न ही बयान रटता है—जो हुआ होगा, वही रिकॉर्ड हुआ होगा। *‘रटा-रटाया बयान’ या पूरा सच?* सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोगों का कहना है कि डॉक्टर का बयान बेहद तैयार किया हुआ प्रतीत होता है, जबकि दूसरी ओर डॉक्टर ने पत्रकार पर लगाए गए आरोपों को गंभीरता से सामने रखा है। ऐसे में फैसला सोशल मीडिया की अदालत में नहीं, बल्कि पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए। अगर घटना के समय का CCTV फुटेज सुरक्षित है और उसकी निष्पक्ष जांच होती है तो यह काफी हद तक स्पष्ट हो सकता है कि अस्पताल में वास्तव में कौन पहुंचा, कितने लोग मौजूद थे, क्या बातचीत हुई और कथित विवाद की शुरुआत कैसे हुई। *अब ‘वीडियो बनाम CCTV’ की लड़ाई!* फिलहाल मामला कुछ ऐसा नजर आ रहा है कि एक तरफ डॉक्टर का वायरल वीडियो है और दूसरी तरफ पत्रकार की शिकायत व एफआईआर। ऐसे में असली पटकथा शायद अस्पताल के CCTV कैमरे के पास सुरक्षित हो। अब देखना यह है कि जांच में CCTV की आंख खुलती है या फिर मामला बयानों की भूलभुलैया में ही घूमता रहता है। क्योंकि कैमरा अगर सच बोल पड़ा तो न डॉक्टर को रटा हुआ बयान याद करना पड़ेगा और न पत्रकार को अपनी कलम का हिसाब देना पड़ेगा। मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और कितने आरोप महज आरोप हैं। फिलहाल आरोग्य पाइल्स हॉस्पिटल का विवाद ‘इलाज’ से निकलकर ‘CCTV की अदालत’ तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।
*FIR के बाद डॉक्टर साहब की ‘कहानी’ वायरल, अब CCTV बनेगा असली हीरो!* *फोन से ‘मैनेजमेंट’ की कोशिश का आरोप, बात नहीं बनी तो वीडियो में पत्रकार पर आरोपों की बरसात—सच कौन बोल रहा, कैमरे की नजर बताएगी* अम्बेडकरनगर। अकबरपुर के टांडा रोड स्थित आरोग्य पाइल्स हॉस्पिटल इन दिनों इलाज से ज्यादा आरोप-प्रत्यारोप को लेकर चर्चा में है। मरीज के इलाज संबंधी आरोपों और पत्रकार के साथ कथित गाली-गलौज व मारपीट की खबर सामने आने के बाद डॉक्टर बी.के. अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आई है। इसके बाद मामले में एक नया मोड़ तब आया, जब डॉक्टर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वायरल वीडियो में डॉक्टर बी.के. अग्रवाल मरीज द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए पत्रकार पर भी गंभीर आरोप लगाते नजर आ रहे हैं। डॉक्टर की ओर से पत्रकार पर पैसे मांगने और कई लोगों के साथ अस्पताल पहुंचकर उपद्रव करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इनकी वास्तविकता जांच का विषय है। मामले में सबसे दिलचस्प सवाल यह है कि अगर अस्पताल में CCTV कैमरे लगे हैं तो फिर कैमरे की ‘गवाही’ क्यों न ली जाए? आखिर कैमरा न किसी के पक्ष में वोट देता है और न ही बयान रटता है—जो हुआ होगा, वही रिकॉर्ड हुआ होगा। *‘रटा-रटाया बयान’ या पूरा सच?* सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोगों का कहना है कि डॉक्टर का बयान बेहद तैयार किया हुआ प्रतीत होता है, जबकि दूसरी ओर डॉक्टर ने पत्रकार पर लगाए गए आरोपों को गंभीरता से सामने रखा है। ऐसे में फैसला सोशल मीडिया की अदालत में नहीं, बल्कि पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए। अगर घटना के समय का CCTV फुटेज सुरक्षित है और उसकी निष्पक्ष जांच होती है तो यह काफी हद तक स्पष्ट हो सकता है कि अस्पताल में वास्तव में कौन पहुंचा, कितने लोग मौजूद थे, क्या बातचीत हुई और कथित विवाद की शुरुआत कैसे हुई। *अब ‘वीडियो बनाम CCTV’ की लड़ाई!* फिलहाल मामला कुछ ऐसा नजर आ रहा है कि एक तरफ डॉक्टर का वायरल वीडियो है और दूसरी तरफ पत्रकार की शिकायत व एफआईआर। ऐसे में असली पटकथा शायद अस्पताल के CCTV कैमरे के पास सुरक्षित हो। अब देखना यह है कि जांच में CCTV की आंख खुलती है या फिर मामला बयानों की भूलभुलैया में ही घूमता रहता है। क्योंकि कैमरा अगर सच बोल पड़ा तो न डॉक्टर को रटा हुआ बयान याद करना पड़ेगा और न पत्रकार को अपनी कलम का हिसाब देना पड़ेगा। मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और कितने आरोप महज आरोप हैं। फिलहाल आरोग्य पाइल्स हॉस्पिटल का विवाद ‘इलाज’ से निकलकर ‘CCTV की अदालत’ तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। *FIR के बाद डॉक्टर साहब की ‘कहानी’ वायरल, अब CCTV बनेगा असली हीरो!* *फोन से ‘मैनेजमेंट’ की कोशिश का आरोप, बात नहीं बनी तो वीडियो में पत्रकार पर आरोपों की बरसात—सच कौन बोल रहा, कैमरे की नजर बताएगी* अम्बेडकरनगर। अकबरपुर के टांडा रोड स्थित आरोग्य पाइल्स हॉस्पिटल इन दिनों इलाज से ज्यादा आरोप-प्रत्यारोप को लेकर चर्चा में है। मरीज के इलाज संबंधी आरोपों और पत्रकार के साथ कथित गाली-गलौज व मारपीट की खबर सामने आने के बाद डॉक्टर बी.के. अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आई है। इसके बाद मामले में एक नया मोड़ तब आया, जब डॉक्टर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वायरल वीडियो में डॉक्टर बी.के. अग्रवाल मरीज द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए पत्रकार पर भी गंभीर आरोप लगाते नजर आ रहे हैं। डॉक्टर की ओर से पत्रकार पर पैसे मांगने और कई लोगों के साथ अस्पताल पहुंचकर उपद्रव करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इनकी वास्तविकता जांच का विषय है। मामले में सबसे दिलचस्प सवाल यह है कि अगर अस्पताल में CCTV कैमरे लगे हैं तो फिर कैमरे की ‘गवाही’ क्यों न ली जाए? आखिर कैमरा न किसी के पक्ष में वोट देता है और न ही बयान रटता है—जो हुआ होगा, वही रिकॉर्ड हुआ होगा। *‘रटा-रटाया बयान’ या पूरा सच?* सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोगों का कहना है कि डॉक्टर का बयान बेहद तैयार किया हुआ प्रतीत होता है, जबकि दूसरी ओर डॉक्टर ने पत्रकार पर लगाए गए आरोपों को गंभीरता से सामने रखा है। ऐसे में फैसला सोशल मीडिया की अदालत में नहीं, बल्कि पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए। अगर घटना के समय का CCTV फुटेज सुरक्षित है और उसकी निष्पक्ष जांच होती है तो यह काफी हद तक स्पष्ट हो सकता है कि अस्पताल में वास्तव में कौन पहुंचा, कितने लोग मौजूद थे, क्या बातचीत हुई और कथित विवाद की शुरुआत कैसे हुई। *अब ‘वीडियो बनाम CCTV’ की लड़ाई!* फिलहाल मामला कुछ ऐसा नजर आ रहा है कि एक तरफ डॉक्टर का वायरल वीडियो है और दूसरी तरफ पत्रकार की शिकायत व एफआईआर। ऐसे में असली पटकथा शायद अस्पताल के CCTV कैमरे के पास सुरक्षित हो। अब देखना यह है कि जांच में CCTV की आंख खुलती है या फिर मामला बयानों की भूलभुलैया में ही घूमता रहता है। क्योंकि कैमरा अगर सच बोल पड़ा तो न डॉक्टर को रटा हुआ बयान याद करना पड़ेगा और न पत्रकार को अपनी कलम का हिसाब देना पड़ेगा। मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और कितने आरोप महज आरोप हैं। फिलहाल आरोग्य पाइल्स हॉस्पिटल का विवाद ‘इलाज’ से निकलकर ‘CCTV की अदालत’ तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।
- सम्मनपुर थाना क्षेत्र में बुजुर्ग की आत्महत्या, बीमारी से परेशान होकर उठाया कदम, पुलिस जांच में जुटी।1
- *FIR के बाद डॉक्टर साहब की ‘कहानी’ वायरल, अब CCTV बनेगा असली हीरो!* *फोन से ‘मैनेजमेंट’ की कोशिश का आरोप, बात नहीं बनी तो वीडियो में पत्रकार पर आरोपों की बरसात—सच कौन बोल रहा, कैमरे की नजर बताएगी* अम्बेडकरनगर। अकबरपुर के टांडा रोड स्थित आरोग्य पाइल्स हॉस्पिटल इन दिनों इलाज से ज्यादा आरोप-प्रत्यारोप को लेकर चर्चा में है। मरीज के इलाज संबंधी आरोपों और पत्रकार के साथ कथित गाली-गलौज व मारपीट की खबर सामने आने के बाद डॉक्टर बी.के. अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आई है। इसके बाद मामले में एक नया मोड़ तब आया, जब डॉक्टर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वायरल वीडियो में डॉक्टर बी.के. अग्रवाल मरीज द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए पत्रकार पर भी गंभीर आरोप लगाते नजर आ रहे हैं। डॉक्टर की ओर से पत्रकार पर पैसे मांगने और कई लोगों के साथ अस्पताल पहुंचकर उपद्रव करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इनकी वास्तविकता जांच का विषय है। मामले में सबसे दिलचस्प सवाल यह है कि अगर अस्पताल में CCTV कैमरे लगे हैं तो फिर कैमरे की ‘गवाही’ क्यों न ली जाए? आखिर कैमरा न किसी के पक्ष में वोट देता है और न ही बयान रटता है—जो हुआ होगा, वही रिकॉर्ड हुआ होगा। *‘रटा-रटाया बयान’ या पूरा सच?* सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोगों का कहना है कि डॉक्टर का बयान बेहद तैयार किया हुआ प्रतीत होता है, जबकि दूसरी ओर डॉक्टर ने पत्रकार पर लगाए गए आरोपों को गंभीरता से सामने रखा है। ऐसे में फैसला सोशल मीडिया की अदालत में नहीं, बल्कि पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए। अगर घटना के समय का CCTV फुटेज सुरक्षित है और उसकी निष्पक्ष जांच होती है तो यह काफी हद तक स्पष्ट हो सकता है कि अस्पताल में वास्तव में कौन पहुंचा, कितने लोग मौजूद थे, क्या बातचीत हुई और कथित विवाद की शुरुआत कैसे हुई। *अब ‘वीडियो बनाम CCTV’ की लड़ाई!* फिलहाल मामला कुछ ऐसा नजर आ रहा है कि एक तरफ डॉक्टर का वायरल वीडियो है और दूसरी तरफ पत्रकार की शिकायत व एफआईआर। ऐसे में असली पटकथा शायद अस्पताल के CCTV कैमरे के पास सुरक्षित हो। अब देखना यह है कि जांच में CCTV की आंख खुलती है या फिर मामला बयानों की भूलभुलैया में ही घूमता रहता है। क्योंकि कैमरा अगर सच बोल पड़ा तो न डॉक्टर को रटा हुआ बयान याद करना पड़ेगा और न पत्रकार को अपनी कलम का हिसाब देना पड़ेगा। मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और कितने आरोप महज आरोप हैं। फिलहाल आरोग्य पाइल्स हॉस्पिटल का विवाद ‘इलाज’ से निकलकर ‘CCTV की अदालत’ तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। *FIR के बाद डॉक्टर साहब की ‘कहानी’ वायरल, अब CCTV बनेगा असली हीरो!* *फोन से ‘मैनेजमेंट’ की कोशिश का आरोप, बात नहीं बनी तो वीडियो में पत्रकार पर आरोपों की बरसात—सच कौन बोल रहा, कैमरे की नजर बताएगी* अम्बेडकरनगर। अकबरपुर के टांडा रोड स्थित आरोग्य पाइल्स हॉस्पिटल इन दिनों इलाज से ज्यादा आरोप-प्रत्यारोप को लेकर चर्चा में है। मरीज के इलाज संबंधी आरोपों और पत्रकार के साथ कथित गाली-गलौज व मारपीट की खबर सामने आने के बाद डॉक्टर बी.के. अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आई है। इसके बाद मामले में एक नया मोड़ तब आया, जब डॉक्टर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वायरल वीडियो में डॉक्टर बी.के. अग्रवाल मरीज द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए पत्रकार पर भी गंभीर आरोप लगाते नजर आ रहे हैं। डॉक्टर की ओर से पत्रकार पर पैसे मांगने और कई लोगों के साथ अस्पताल पहुंचकर उपद्रव करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इनकी वास्तविकता जांच का विषय है। मामले में सबसे दिलचस्प सवाल यह है कि अगर अस्पताल में CCTV कैमरे लगे हैं तो फिर कैमरे की ‘गवाही’ क्यों न ली जाए? आखिर कैमरा न किसी के पक्ष में वोट देता है और न ही बयान रटता है—जो हुआ होगा, वही रिकॉर्ड हुआ होगा। *‘रटा-रटाया बयान’ या पूरा सच?* सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोगों का कहना है कि डॉक्टर का बयान बेहद तैयार किया हुआ प्रतीत होता है, जबकि दूसरी ओर डॉक्टर ने पत्रकार पर लगाए गए आरोपों को गंभीरता से सामने रखा है। ऐसे में फैसला सोशल मीडिया की अदालत में नहीं, बल्कि पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए। अगर घटना के समय का CCTV फुटेज सुरक्षित है और उसकी निष्पक्ष जांच होती है तो यह काफी हद तक स्पष्ट हो सकता है कि अस्पताल में वास्तव में कौन पहुंचा, कितने लोग मौजूद थे, क्या बातचीत हुई और कथित विवाद की शुरुआत कैसे हुई। *अब ‘वीडियो बनाम CCTV’ की लड़ाई!* फिलहाल मामला कुछ ऐसा नजर आ रहा है कि एक तरफ डॉक्टर का वायरल वीडियो है और दूसरी तरफ पत्रकार की शिकायत व एफआईआर। ऐसे में असली पटकथा शायद अस्पताल के CCTV कैमरे के पास सुरक्षित हो। अब देखना यह है कि जांच में CCTV की आंख खुलती है या फिर मामला बयानों की भूलभुलैया में ही घूमता रहता है। क्योंकि कैमरा अगर सच बोल पड़ा तो न डॉक्टर को रटा हुआ बयान याद करना पड़ेगा और न पत्रकार को अपनी कलम का हिसाब देना पड़ेगा। मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और कितने आरोप महज आरोप हैं। फिलहाल आरोग्य पाइल्स हॉस्पिटल का विवाद ‘इलाज’ से निकलकर ‘CCTV की अदालत’ तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।1
- 📢 अंबेडकरनगर ब्रेकिंग न्यूज़ पुलिस लाइन में 30 वर्षीय सिपाही की मौत से मचा हड़कंप। कमरे में संदिग्ध परिस्थितियों में शव मिलने से परिवार में कोहराम मच गया। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। 🎙️ Bharat News 24 | ब्यूरो चीफ रामतिलक विश्वकर्मा #अंबेडकरनगर #AmbedkarNagar #BreakingNews #UPNews #PoliceNews #Akbarpur #CrimeNews #LatestNews #HindiNews #BharatNews24 #NewsUpdate #UttarPradesh #Police #ViralNews #LocalNews 📢 अंबेडकरनगर ब्रेकिंग न्यूज़ पुलिस लाइन में 30 वर्षीय सिपाही की मौत से मचा हड़कंप। कमरे में संदिग्ध परिस्थितियों में शव मिलने से परिवार में कोहराम मच गया। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। 🎙️ Bharat News 24 | ब्यूरो चीफ रामतिलक विश्वकर्मा #अंबेडकरनगर #AmbedkarNagar #BreakingNews #UPNews #PoliceNews #Akbarpur #CrimeNews #LatestNews #HindiNews #BharatNews24 #NewsUpdate #UttarPradesh #Police #ViralNews #LocalNews1
- अंबेडकर नगर में सिपाही की मौत से मचा हड़कंप, कमरे में मिला शव1
- एक बार फिर अंबेडकर नगर में बुलडोजर गरजते गरजते बच्चा पूरा मामला अंबेडकर नगर के बनगांव रोड स्थित परसम का है जहां पर चार बिस्सा जमीन नगर पालिका अकबरपुर का बताया जा रहा ह जब इसकी सूचना नगर पालिका अकबरपुर को मिली तो अपनी जमीन को मुक्त करने के लिए बुलडोजर की कार्रवाई सुनिश्चित की लेकिन वही अतिक्रमण करने वाले बुलडोजर पर भारी पड़े प्रशासन को खाली हाथ लौटना पड़ा अब देखने वाली बातें है नगर पालिका अकबरपुर अपनी जमीन को मुक्त कर पाती है या नहीं एक बार फिर अंबेडकर नगर में बुलडोजर गरजते गरजते बच्चा पूरा मामला अंबेडकर नगर के बनगांव रोड स्थित परसावां का है जहां पर चार बिस्सा जमीन नगर पालिका अकबरपुर का बताया जा रहा है जब इसकी सूचना नगर पालिका अकबरपुर को मिली तो अपनी जमीन को मुक्त करने के लिए बुलडोजर की कार्रवाई सुनिश्चित की लेकिन वही अतिक्रमण करने वाले बुलडोजर पर भारी पड़े प्रशासन को खाली हाथ लौटना पड़ा अब देखने वाली बातें है नगर पालिका अकबरपुर अपनी जमीन को मुक्त कर पाती है या नहीं1
- *हनुमान अंश के गायक सुनील लोधी का सीएम हाउस में हुआ सम्मान* *‘हनुमान अंश’ के गायक सुनील लोधी का सीएम हाउस में सम्मान* सीएम मोहन यादव ने बैठाकर सुने भजन, ताली बजाकर की सराहना; बोले—सुनील की आंखों का कराया जाएगा इलाज भोपाल। नीब करौली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ में अपनी मधुर आवाज से भजन गाकर लोगों के दिलों में खास जगह बनाने वाले बुंदेलखंड के दिव्यांग गायक सुनील लोधी को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सीएम हाउस में विशेष सम्मान दिया। सुनील लोधी की गायकी से प्रभावित मुख्यमंत्री ने उन्हें अपने पास बैठाकर उनके भजन सुने और तालियां बजाकर उनकी प्रतिभा की जमकर सराहना की। सुनील लोधी ने जब अपनी भावपूर्ण आवाज में भजन प्रस्तुत किया तो मुख्यमंत्री मोहन यादव भी मंत्रमुग्ध नजर आए। उन्होंने सुनील की प्रतिभा की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रतिभा किसी परिस्थिति की मोहताज नहीं होती। सुनील ने अपनी लगन, साधना और ईश्वर के प्रति आस्था से यह साबित किया है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद इंसान अपनी प्रतिभा के दम पर नई पहचान बना सकता है। मुख्यमंत्री ने सुनील लोधी की आंखों की समस्या को भी गंभीरता से लेते हुए उनके उपचार की पहल करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि सुनील की आंखों का इलाज कराया जाएगा, ताकि उन्हें बेहतर जीवन जीने और अपनी कला को आगे बढ़ाने का अवसर मिल सके। गौरतलब है कि बुंदेलखंड के रहने वाले सुनील लोधी को लोग उनकी भजन गायकी और अनोखी आवाज के लिए जानते हैं। नीब करौली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ में उनके द्वारा गाए गए भजनों ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई है। उनकी आवाज में भक्ति, भाव और समर्पण का ऐसा संगम देखने को मिलता है कि श्रोता भाव-विभोर हो उठते हैं। सीएम हाउस में मिले इस सम्मान को सुनील लोधी और उनके समर्थकों ने उनके जीवन का यादगार क्षण बताया। मुख्यमंत्री द्वारा उनकी प्रतिभा को सम्मान देने और आंखों के इलाज का आश्वासन दिए जाने से उनके परिवार और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है। मुख्यमंत्री का यह कदम न केवल एक प्रतिभाशाली कलाकार का सम्मान है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि समाज में संघर्ष कर अपनी पहचान बनाने वाली प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना हम सभी की जिम्मेदारी है1
- इकलौता पुत्र सिपाही फंदे से लटका - बुझ गया घर का चिराग - पुलिस प्रशासन में मचा हड़कंप- मातम का माहौल अंबेडकर नगर पुलिस लाइन में तैनात आरक्षी संदीप कुमार ने फंदे से लटक कर अपने जीवन को समाप्त कर लिया है । इस घटना के बाद अंबेडकर नगर पुलिस प्रशासन में जहां हड़कंप मच गया है वहीं परिजनों में कोहराम मचा हुआ है । पुलिस ने लाश को कब्जे में लेते हुए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है ।1
- 🚨 ब्रेकिंग न्यूज़ | अंबेडकरनगर ➡️ पुलिस लाइन में 30 वर्षीय सिपाही ने फांसी लगाकर जान दे दी। ➡️ शुक्रवार सुबह करीब साढ़े 5 बजे कमरे की खिड़की की ग्रिल से लटका मिला शव। ➡️ कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था, साथी के सूचना देने पर पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव बाहर निकाला। ➡️ मृतक सिपाही की पहचान मऊ निवासी संदीप के रूप में हुई, जो पुलिस लाइन में मेस मुंशी था। ➡️ कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला, आत्महत्या की वजह अभी स्पष्ट नहीं। ➡️ संदीप की शादी करीब 3 साल पहले हुई थी, डेढ़ साल की मासूम बेटी भी है। ➡️ शव देखते ही पत्नी रंजना और पिता रामप्यारे सदमे में बेहोश हो गए। ➡️ मौके पर पहुंचे एएसपी ने परिजनों को ढांढस बंधाते हुए कहा— “हिम्मत रखिए, हम आपके साथ हैं।” 📍 अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र, अंबेडकरनगर 🎙️ Bharat News 24 ब्यूरो चीफ — रामतिलक विश्वकर्मा 📞 9026253271 #AmbedkarNagar #BreakingNews #Police #Sipahi #Akbarpur #BharatNews24 #UPNews #LatestNews #NewsUpdate 🚨 ब्रेकिंग न्यूज़ | अंबेडकरनगर ➡️ पुलिस लाइन में 30 वर्षीय सिपाही ने फांसी लगाकर जान दे दी। ➡️ शुक्रवार सुबह करीब साढ़े 5 बजे कमरे की खिड़की की ग्रिल से लटका मिला शव। ➡️ कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था, साथी के सूचना देने पर पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव बाहर निकाला। ➡️ मृतक सिपाही की पहचान मऊ निवासी संदीप के रूप में हुई, जो पुलिस लाइन में मेस मुंशी था। ➡️ कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला, आत्महत्या की वजह अभी स्पष्ट नहीं। ➡️ संदीप की शादी करीब 3 साल पहले हुई थी, डेढ़ साल की मासूम बेटी भी है। ➡️ शव देखते ही पत्नी रंजना और पिता रामप्यारे सदमे में बेहोश हो गए। ➡️ मौके पर पहुंचे एएसपी ने परिजनों को ढांढस बंधाते हुए कहा— “हिम्मत रखिए, हम आपके साथ हैं।” 📍 अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र, अंबेडकरनगर 🎙️ Bharat News 24 ब्यूरो चीफ — रामतिलक विश्वकर्मा 📞 9026253271 #AmbedkarNagar #BreakingNews #Police #Sipahi #Akbarpur #BharatNews24 #UPNews #LatestNews #NewsUpdate1