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मोदी जी के मशीना नहीं ला

5 hrs ago
user_Sunil Gupta
Sunil Gupta
Local News Reporter सिहावल, सीधी, मध्य प्रदेश•
5 hrs ago

मोदी जी के मशीना नहीं ला

More news from Sidhi and nearby areas
  • मध्य प्रदेश सीधी जिला का कालीख कांड मैं एक तरफा कार्रवाई को लेकर आज तक शिव सैनिक जेल में बंद है। डॉक्टर खरे के ऊपर किसी प्रकार के आज तक प्रशासन एक्शन नहीं लिया जबकि कई मौतों का जिम्मेदार डॉक्टर खरे है 6 करोड़ 95 लाख घोटाले का भी जिम्मेदार डॉक्टर खरे जबकि उसके बारे में एसडीओपी जांच के लिए शिवसेना कार्यकर्ता समाज सेवी प्रदीप विश्वकर्मा द्वारा आवेदन दिया गया लेकिन आज तक सीधी जिले के ना तो न्याय व्यवस्था ना तो कार्यपालिका व्यवस्था एक्शन नहीं लिया जब के जिला कलेक्टर को भी आवेदन दिया गया था आउटसोर्स भर्ती घोटाले जैसे मामले को लेकर जिसमें ऑडियो भी वायरल हुई थी आज दिनांक तक उसमें भी ना तो माननीय मुख्यमंत्री महोदय जी एक्शन लिए ना तो जिला कलेक्टर आखिर सीधी जिले के जनता के साथ अत्याचार कब तक होता रहेगा क्या प्रशासनिक कर्मचारी इसी तरह से जनता का शोषण करते रहेंगे नंगा नाच नाचते रहेंगे जनता आवाज उठाने वाली जेल में बंद बैठेगी देश की जनता को दबाया जाएगा पूछती है मध्य प्रदेश सीधी जिला की आवाम
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    मध्य प्रदेश सीधी जिला का कालीख कांड मैं एक तरफा कार्रवाई को लेकर आज तक शिव सैनिक जेल में बंद है। डॉक्टर खरे के ऊपर किसी प्रकार के आज तक प्रशासन एक्शन नहीं लिया जबकि कई मौतों का जिम्मेदार डॉक्टर खरे है 6 करोड़ 95 लाख घोटाले का भी जिम्मेदार डॉक्टर खरे जबकि उसके बारे में एसडीओपी जांच के लिए शिवसेना कार्यकर्ता समाज सेवी प्रदीप विश्वकर्मा द्वारा आवेदन दिया गया लेकिन आज तक सीधी जिले के ना तो न्याय व्यवस्था ना तो कार्यपालिका व्यवस्था एक्शन नहीं लिया जब के जिला कलेक्टर को भी आवेदन दिया गया था आउटसोर्स भर्ती घोटाले जैसे मामले को लेकर जिसमें ऑडियो भी वायरल हुई थी आज दिनांक तक उसमें भी ना तो माननीय मुख्यमंत्री महोदय जी एक्शन लिए ना तो जिला कलेक्टर आखिर सीधी जिले के जनता के साथ अत्याचार कब तक होता रहेगा क्या प्रशासनिक कर्मचारी इसी तरह से जनता का शोषण करते रहेंगे नंगा नाच नाचते रहेंगे जनता आवाज उठाने वाली जेल में बंद बैठेगी देश की जनता को दबाया जाएगा पूछती है मध्य प्रदेश सीधी जिला की आवाम
    user_आदिवासी हरिजन ओरिजिनल विकास करता भारतीय संगठन मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़
    आदिवासी हरिजन ओरिजिनल विकास करता भारतीय संगठन मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़
    Samaj Sevak Gopadbanas, Sidhi•
    12 hrs ago
  • नीलगाय से किसानो की फसलें बर्बाद, किसान परेशान मेजा, प्रयागराज ‌।क्षेत्र के किसानों की मेहनत पर नीलगाय और आवारा मवेशी पानी फेर रहे हैं। खेतों में घुसकर नीलगाय के झुंड गेहूं की हरी-भरी फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति हो रही है। मेजा तहसील क्षेत्र के रामनगर, निवैया, पटीयनाथ राय, शिवपुरा, उंचडीह सहित तरहर क्षेत्र के परानीपुर रेपुरा, मटरा मुकुंदपुर, परवा, भभोरा और कनिगड़ा गांवों में नीलगाय का आतंक बना हुआ है। किसानों के अनुसार रात के समय खेतों में पहुंचकर नीलगाय फसलों को चट कर जाती हैं। दिन में खेत खाली होने पर भी फसलें सुरक्षित नहीं रह पा रही हैं। खेतों की रखवाली के दौरान नीलगाय किसानों की जान के लिए भी खतरा बन रही हैं। कुछ माह पूर्व इरका गांव के किसान राजाराम भारतीय खेत में घुसी नीलगाय को भगाने का प्रयास कर रहे थे, तभी नीलगाय ने हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। इलाज के बाद वह घर तो लौट आए, लेकिन अब भी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो सके हैं। किसानों का कहना है कि समस्या को लेकर कई बार प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। नीलगाय और आवारा मवेशियों से फसल और जान की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने की मांग की जा रही है।
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    नीलगाय से किसानो की फसलें बर्बाद, किसान परेशान
मेजा, प्रयागराज ‌।क्षेत्र के किसानों की मेहनत पर नीलगाय और आवारा मवेशी पानी फेर रहे हैं। खेतों में घुसकर नीलगाय के झुंड गेहूं की हरी-भरी फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति हो रही है।
मेजा तहसील क्षेत्र के रामनगर, निवैया, पटीयनाथ राय, शिवपुरा, उंचडीह सहित तरहर क्षेत्र के परानीपुर रेपुरा, मटरा मुकुंदपुर, परवा, भभोरा और कनिगड़ा गांवों में नीलगाय का आतंक बना हुआ है। किसानों के अनुसार रात के समय खेतों में पहुंचकर नीलगाय फसलों को चट कर जाती हैं। दिन में खेत खाली होने पर भी फसलें सुरक्षित नहीं रह पा रही हैं।
खेतों की रखवाली के दौरान नीलगाय किसानों की जान के लिए भी खतरा बन रही हैं। कुछ माह पूर्व इरका गांव के किसान राजाराम भारतीय खेत में घुसी नीलगाय को भगाने का प्रयास कर रहे थे, तभी नीलगाय ने हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। इलाज के बाद वह घर तो लौट आए, लेकिन अब भी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो सके हैं।
किसानों का कहना है कि समस्या को लेकर कई बार प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। नीलगाय और आवारा मवेशियों से फसल और जान की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने की मांग की जा रही है।
    user_Dhananjay Prajapati
    Dhananjay Prajapati
    Journalist Meja, Prayagraj•
    2 hrs ago
  • मिर्जापुर। जहाँ एक ओर पूरा मिर्जापुर मकर संक्रांति के पर्व की तैयारियों में जुटा हुआ है, वहीं दूसरी ओर शहर में शांति व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक घटना सामने आई है। मिर्जापुर कटरा कोतवाली से महज़ चंद कदमों की दूरी पर बीती रात करीब 11 बजे पतंग खरीदने को लेकर दुकानदार और ग्राहक के बीच जमकर मारपीट हो गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें साफ तौर पर देखा जा सकता है कि दुकानदारों द्वारा ग्राहक के साथ मारपीट की जा रही है। मारपीट के दौरान मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और राहगीरों की भीड़ इकट्ठा हो गई। सूचना मिलते ही कटरा कोतवाली पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करते हुए दोनों पक्षों को हिरासत में ले लिया। पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है। आखिर विवाद किस बात को लेकर हुआ और किसकी गलती थी, इसका खुलासा पुलिस पूछताछ के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल पुलिस ने शांति भंग न हो, इसके लिए इलाके में सतर्कता बढ़ा दी है।
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    मिर्जापुर।
जहाँ एक ओर पूरा मिर्जापुर मकर संक्रांति के पर्व की तैयारियों में जुटा हुआ है, वहीं दूसरी ओर शहर में शांति व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक घटना सामने आई है। मिर्जापुर कटरा कोतवाली से महज़ चंद कदमों की दूरी पर बीती रात करीब 11 बजे पतंग खरीदने को लेकर दुकानदार और ग्राहक के बीच जमकर मारपीट हो गई।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें साफ तौर पर देखा जा सकता है कि दुकानदारों द्वारा ग्राहक के साथ मारपीट की जा रही है। मारपीट के दौरान मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और राहगीरों की भीड़ इकट्ठा हो गई।
सूचना मिलते ही कटरा कोतवाली पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करते हुए दोनों पक्षों को हिरासत में ले लिया। पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है। आखिर विवाद किस बात को लेकर हुआ और किसकी गलती थी, इसका खुलासा पुलिस पूछताछ के बाद ही हो सकेगा।
फिलहाल पुलिस ने शांति भंग न हो, इसके लिए इलाके में सतर्कता बढ़ा दी है।
    user_Shriyam News Network
    Shriyam News Network
    Journalist मिर्जापुर, मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • Post by Vijay Bais
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    Post by Vijay Bais
    user_Vijay Bais
    Vijay Bais
    रामपुर नैकिन, सीधी, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • 💥बड़ी खबर💥 इंदौर से रीवा आ रही जय भवानी ट्रेवल्स की बस में लगी आग बस पूरी तरह जलकर हुई खाक। सभी यात्री सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। पर मौके पर अफरा तफरी मच गई। घटना का वीडियो भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार, बस का टायर फटने के बाद उसमें आग भड़क उठी। आग तेजी से फैली और देखते ही देखते पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। आग लगते ही बस में सवार यात्रियों में हड़कंप मच गया। ढाबा कर्मचारियों और बस स्टाफ की त्वरित मदद से सभी यात्रियों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। कुछ ही मिनटों में आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया और वह जलकर राख हो गई। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। रायसेन जिले के बम्हौरी ढाबा के पास देर रात हुई दुर्घटना।
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    💥बड़ी खबर💥
इंदौर से रीवा आ रही जय भवानी ट्रेवल्स की बस में लगी आग बस पूरी तरह जलकर हुई खाक।
सभी यात्री सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। पर मौके पर अफरा तफरी मच गई। घटना का वीडियो भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार, बस का टायर फटने के बाद उसमें आग भड़क उठी। आग तेजी से फैली और देखते ही देखते पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। आग लगते ही बस में सवार यात्रियों में हड़कंप मच गया। ढाबा कर्मचारियों और बस स्टाफ की त्वरित मदद से सभी यात्रियों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। कुछ ही मिनटों में आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया और वह जलकर राख हो गई। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। रायसेन जिले के बम्हौरी ढाबा के पास देर रात हुई दुर्घटना।
    user_शेखर तिवारी
    शेखर तिवारी
    Journalist Gurh, Rewa•
    5 hrs ago
  • Post by Somesh Upadhyay
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    Post by Somesh Upadhyay
    user_Somesh Upadhyay
    Somesh Upadhyay
    Taxi Driver मिर्जापुर, मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • समस्त जनता जनार्दन को सूचित किया जाता है कि इन नंबरों की आराजी ग्राम बंजारी तहसील गोपद बनास जिला सीधी अंतर्गत ना खरीदे । सिविल न्यायालय में विचाराधीन है। मेरे पितामह गलवल बढई को रीवा रियासत से मिली भूमि वर्ष 1922 -23 खसरा क्रमांक 319 जो गलबल के पिता धानुष बढई के नाम से था, सन वर्ष 1953 में धनुष तनय बंसी के मृत्यु के बात गलबल के नाम खसरा में आने लगा। 319 से सन् वर्ष 1974 75 बंदोबस्ती नंबर 280, 283, 284, से नवीन परिवर्तित नंबर 280टु0से778,779,780,781,771,772,776,777,782 बने हैं। 283टु0 का नवीन नंबर762 मध्य प्रदेश सड़क में अंश भाग है।284टु0से745,747,748,752,753,754 मूल नंबर लेकिन प्रतिवादी क्रमांक 54से78 प्रतिवादी क्रमांक चोरी छुपे हमारे पितामह के 5661 के रिकॉर्ड में नई स्याही से गोला मारकर अपने पितामह का नाम ठाकुर दिन अंकित कर दिया लेकिन सन् वर्ष1969, से 75 तक का रिकॉर्ड मेरे पितामाह गलबल के ही नाम रहा आया। सन् वर्ष 1974 तबीलियत सूची क्रमांक में प्रतिवादियों द्वारा सरपंच से मिली भगत कर मेरे पितामह की भूमि को कंतालिया कोल के भूमियों से मिश्रित कर अपने पिता ठाकुर दिन के नाम से सजारा तैयार कर कर भूमि हड़पने का साजिश किया गया लेकिन आदिवासी घूम होने के कारण से रामशरण गुप्ता पिता राम सलोने द्वारा विरोध करने से आदेश पंजी खारिज हो गई हो गई। उसके बावजूद फिर भी अधिकार अभिलेख कर्मचारियों से मिली भगत कर फर्जी अधिकार अभिलेख 1975 का तैयार करा लिया गया जिसकी जानकारी मेरे पूर्वजों को नहीं थी । प्रतिवादियों द्वारा मेरे भूमियों को आदिवासियों की भूमि से मिश्रित करवा दिया गया। और कई नंबरों को हमारे जमीन से मिश्रित कर नवीन नंबर बनाए गए जिसका पुराना बंदोबस्ती से नवीन बंदोबस्त के लिस्ट में दिखाया गया है।उसके बाद मेरे प्रकरण क्रमांक लंमवन्द के तहत ही तहसीलदार पटवारी से मिली भगत कर फिर से बैक डेट में नंबर नंबरों में बट्कंक डलवा दिया गया। जिसका रकबा 4 एकड़ 82 डेसिमल था लेकिन मेरे भूमि से आदिवासी की भूमि खसरा नंबर 318 और मेरे पितामह के क्रय सुधा भूमि को सम्मिलित करने के कारण से बढ़ते क्रम में हो गया जबकि हमें खसरा क्रमांक 319 से सन् वर्ष1922 23 के नक्शे के अनुसार ही भूमिया होनी चाहिए 1. यह की मेरे पितामह गलबल बढई द्वारा सन वर्ष 1953 में अनुबंध पत्र दिनांक 27 /12 / 1953 के अनुसार मिली भूमिया 264, 265, 266, 267 क्रय सुधा भूमि है जिसमें मेरा आज दिनांक भी बादी गण का पट्टा है। लेकिन कब्जा सभी आरजी में है। आदिवासी की भूमि छोड़कर नक्शे के अनुसार। खसरा क्रमांक 264 सन् वर्ष 19 22 23 से सन् वर्ष1974-75 बंदोबस्ती नंबर 212 टु0 213 टु0 से सन् 1993 94 में नवीन परिवर्तित नंबर696,695,694,671,702,697 बना है। खसरा क्रमांक 265सन् वर्ष 1922 23 से वर्ष 1974- 75 बंदोबस्ती नंबर 214टु0,215टु0 से सन् वर्ष 1993-94नवीन बंदोबस्त नंबर 698,701,693,681,691,692,699,700 बना है। खसरा क्रमांक 266 सन वर्ष 1922- 23 से बंदोबस्ती नंबर सन वर्ष 1974- 75 खसरा क्रमांक 216टु221टु0 से नवीन बंदोबस्त नंबर 688,689,690,756,757 बना है। खसरा क्रमांक 267 सन् वर्ष 1922- 23 से बंदोबस्ती नंबर सन् वर्ष 1974- 75 में खसरा क्रमांक 213टु0222टु0 से सन् वर्ष 1993-94 नवीन बंदोबस्त नंबर 703,704,744,749,750,751,755,760 बना है। लेकिन प्रतिवादी क्रमांक 21 से 31 तक के पूर्व जे फलवा धोबी द्वारा सन वर्ष 19 74 में जबरन कब्जा करने के नियत से अपना रिकॉर्ड चोरी छुपे तैयार कराया था जिसकी जानकारी मेरे पितामह गलबल बढई को हुई तो उन्होंने राजस्व अधिकारी के नाम मामला क्रमांक 3/अ /सन् 1973 -74 में आवेदन देकर उसको कब्जे से बेदखल कर दिया गया था उसके बावजूद भी फलवा धोबी के बारिश बहुत चतुर चालाक थे जिससे ठाकुर दिन बनी के बारिशों को अपने साथ मिलकर चोरी छुपे बंदोबस्त अधिकारियों से मिलकर सभी नंबरों को एक दूसरे के नंबरों में मिश्रण कराकर अपना नवीन खसरा नंबर तैयार करा लिया जिसकी जानकारी हमारे पूर्वज बाबा को नहीं थी। लेकिन जब प्रतिवादी क्रमांक 1 से 19 तक इन सभी प्रतिवादियों से इकट्ठा कर जबरन मेरी 696 नंबर आरजी का सीमांकन करने लगे दिनांक 28 /1/ 2022 को और मेरी फसल संपूर्ण नष्ट कर दिए जिसमें सभी प्रतिवादी एक जुट होकर जबरन लाठी डंडे लेकर खड़े थे ।जिसे मैं विरोध किया और अपना अनुबंध पत्र बेची टीप के अनुसार राजस्व निरीक्षक तहसीलदार महोदय के यहां आपत्ती किया जो आपत्ति स्वीकार हुई। और मेरे पक्ष में फैसला आया इसके बाद इनके द्वारा बेदखली की कार्यवाही धारा 250 के तहत आवेदन किया गया जिसका पराक्रम क्रमांक 0006/अ/-70/2023-24 फैसला मेरे पक्ष में यानी वादी गण के पक्ष में 4/ 3/2024 को आया। तब नवीन समस्त रिकॉर्ड 264,265, 266,2 67 का निकला गया उसमें प्रतिवादी क्रमांक 20 द्वारा रामानंद तनय धनुकधारी के नाम से फर्जी अभिलेख दर्ज कराया गया लेख आया जिसका खसरा 690 प्रविष्टि है जबकि क्रय सुदा भूमि में रामानंद का कोई अस्तित्व स्वामित्व नहीं होता।जिसमें स्पष्ट कूट रचित प्रदर्शित है। जबकि रामानंद पिता लोलर के नाम से क्रय सुदा भूमि में एक बटे दो का अपना हिस्सा चढ़ावा लिए हैं। सिर्फ गलबल के भाई होने के नाते से जबकि ऐसा कोई गलबल लोलर का हिस्सा बांट कहीं भी रिकॉर्ड में सम्मिलित नहीं पाया जाता। 2. यह की सन वर्ष 1922 23 खसरा नंबर 268 मध्य प्रदेश शासन की भूमि सन् वर्ष 1974 75 बंदोबस्ती नंबर 219टु0,220टु0,217/219टु0,218टु0 से नवीन बंदोबस्त नंबर 759,686,687,683,684,761 बना है। लेकिन 268 की आराजी अनुबंध पत्र अनुसार बेनी माधवराव पिता कामता राम ब्राह्मण के खाते से लगी हुई थी जो भूमि के सामने रोड से लगी हुई भूमि उसका भी जमा रसीद मेरे मेरे पितामह गलवल तनय धनुष बढई पवई को सन 1934 से से जमा रसीद अदा कर रहे थे। जिसके वजह से 268 मध्य प्रदेश शासन की भूमि में मेरे पितामह गलबल का कब्जा आधिपत बना रहा सन् वर्ष1969-70 मे मेरे पितामह गलबल के नाम से खसरा में दर्ज हो गया रकबा 1 एकड़ 40 डिसमिल लेकिन प्रतिवादियों द्वारा कोर्ट रचित तरीके से 1974 आदेश पंजी सूची में चोरी छुपे अधिकार अभिलेख कर्मचारियों से मिली भगत कर मेरे पितामह का रकबा में छेड़छाड़ करते हुए अपना कब्जा अधिपति 1 एकड़ 40 डिसमिल को छोड़कर दर्ज कराया गया लेकिन सन् वर्ष 1993-94 नवीन में मेरा रकबा 40 डिसमिल कर दिया गया । उसके बावजूद भी सभी प्रतिवादिगण तहसीलदार पटवारी से मिली भगत कर कई नंबरों में बट्कंक करवा दिया गया जो पुराना बंदोबस्ती वर्ष अधिकार अभिलेख नंबर हाल बंदोबस्ती नंबर , हेक्टर सूची में उल्लेख किया गया है।जबकि संपूर्ण भूमि मेरा आधिपत्य कब्जा आज दिनांक तक है। जब सभी प्रतिवादी एक जुट राय होकर दंडा लाठी लेकर खड़ा होने लगे और पूरे गांव मोहल्ले में शोहरत कर दिए कि यह जमीन मेरी है तब मुझे माननीय न्यायालय के समक्ष पेश होना पड़ा। संपर्क सूत्र 6260660937
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    समस्त जनता जनार्दन को सूचित किया जाता है कि इन नंबरों की आराजी ग्राम बंजारी तहसील गोपद बनास जिला सीधी अंतर्गत ना खरीदे । सिविल न्यायालय में विचाराधीन है। मेरे पितामह गलवल बढई को रीवा रियासत से मिली भूमि वर्ष 1922 -23 खसरा क्रमांक 319 जो गलबल के पिता धानुष बढई के नाम से था, सन वर्ष 1953 में धनुष तनय बंसी के मृत्यु के बात गलबल के नाम खसरा में आने लगा। 319 से सन् वर्ष 1974 75 बंदोबस्ती नंबर 280, 283, 284, से नवीन परिवर्तित नंबर 280टु0से778,779,780,781,771,772,776,777,782 बने हैं। 283टु0 का नवीन नंबर762 मध्य प्रदेश सड़क में अंश भाग है।284टु0से745,747,748,752,753,754 मूल नंबर लेकिन प्रतिवादी क्रमांक 54से78 प्रतिवादी क्रमांक चोरी छुपे हमारे पितामह के 5661 के रिकॉर्ड में नई स्याही से गोला मारकर अपने पितामह का नाम ठाकुर दिन अंकित कर दिया लेकिन सन् वर्ष1969, से 75 तक का रिकॉर्ड मेरे पितामाह गलबल के ही नाम रहा आया। सन् वर्ष 1974 तबीलियत सूची क्रमांक में प्रतिवादियों द्वारा सरपंच से मिली भगत कर मेरे पितामह की भूमि को कंतालिया कोल के भूमियों से मिश्रित कर अपने पिता ठाकुर दिन के नाम से सजारा तैयार कर कर भूमि हड़पने का साजिश किया गया लेकिन आदिवासी घूम होने के कारण से रामशरण गुप्ता पिता राम सलोने द्वारा विरोध करने से आदेश पंजी खारिज हो गई हो गई। उसके बावजूद फिर भी अधिकार अभिलेख कर्मचारियों से मिली भगत कर फर्जी अधिकार अभिलेख 1975 का तैयार करा लिया गया जिसकी जानकारी मेरे पूर्वजों को नहीं थी । प्रतिवादियों द्वारा मेरे भूमियों को आदिवासियों की भूमि से मिश्रित करवा दिया गया। और कई नंबरों को हमारे जमीन से मिश्रित कर नवीन नंबर बनाए गए जिसका पुराना बंदोबस्ती से नवीन बंदोबस्त के लिस्ट में दिखाया गया है।उसके बाद मेरे प्रकरण क्रमांक लंमवन्द के तहत ही तहसीलदार पटवारी से मिली भगत कर फिर से बैक डेट में नंबर नंबरों में बट्कंक डलवा दिया गया। जिसका रकबा 4 एकड़ 82 डेसिमल था लेकिन मेरे भूमि से आदिवासी की भूमि खसरा नंबर 318 और मेरे पितामह के क्रय सुधा  भूमि को सम्मिलित करने के कारण से बढ़ते क्रम में हो गया जबकि हमें खसरा क्रमांक 319 से सन् वर्ष1922 23 के नक्शे के अनुसार ही भूमिया होनी चाहिए 
1. यह की मेरे पितामह गलबल बढई द्वारा सन वर्ष 1953 में अनुबंध पत्र दिनांक 27 /12 / 1953 के अनुसार मिली भूमिया 264, 265, 266, 267 क्रय सुधा भूमि है जिसमें मेरा आज दिनांक भी बादी गण का पट्टा है। लेकिन कब्जा सभी आरजी में है। आदिवासी की भूमि छोड़कर नक्शे के अनुसार। खसरा क्रमांक 264 सन् वर्ष 19 22 23 से सन् वर्ष1974-75 बंदोबस्ती नंबर 212 टु0 213 टु0 से सन् 1993 94 में नवीन परिवर्तित नंबर696,695,694,671,702,697 बना है। खसरा क्रमांक 265सन् वर्ष 1922 23 से वर्ष 1974- 75 बंदोबस्ती नंबर 214टु0,215टु0 से सन् वर्ष 1993-94नवीन बंदोबस्त नंबर 698,701,693,681,691,692,699,700 बना है। खसरा क्रमांक 266 सन वर्ष 1922- 23 से बंदोबस्ती नंबर सन वर्ष 1974- 75 खसरा क्रमांक 216टु221टु0 से नवीन बंदोबस्त नंबर 688,689,690,756,757 बना है। खसरा क्रमांक 267 सन् वर्ष 1922- 23 से बंदोबस्ती नंबर सन् वर्ष 1974- 75 में खसरा क्रमांक 213टु0222टु0 से सन् वर्ष 1993-94 नवीन बंदोबस्त नंबर 703,704,744,749,750,751,755,760 बना है। लेकिन प्रतिवादी क्रमांक 21 से 31 तक के पूर्व जे फलवा धोबी द्वारा सन वर्ष 19 74 में जबरन कब्जा करने के नियत से अपना रिकॉर्ड चोरी छुपे तैयार कराया था जिसकी जानकारी मेरे पितामह गलबल बढई को हुई तो उन्होंने राजस्व अधिकारी के नाम मामला क्रमांक 3/अ /सन् 1973 -74 में आवेदन देकर उसको कब्जे से बेदखल कर दिया गया था उसके बावजूद भी फलवा धोबी के बारिश बहुत चतुर चालाक थे जिससे ठाकुर दिन बनी के बारिशों को अपने साथ मिलकर चोरी छुपे बंदोबस्त अधिकारियों से मिलकर सभी नंबरों को एक दूसरे के नंबरों में मिश्रण कराकर अपना नवीन खसरा नंबर तैयार करा लिया जिसकी जानकारी हमारे पूर्वज बाबा को नहीं थी। लेकिन जब प्रतिवादी क्रमांक 1 से 19 तक इन सभी प्रतिवादियों से इकट्ठा कर जबरन मेरी 696 नंबर आरजी का सीमांकन करने लगे दिनांक 28 /1/ 2022 को और मेरी फसल संपूर्ण नष्ट कर दिए जिसमें सभी प्रतिवादी एक जुट होकर जबरन लाठी डंडे लेकर खड़े थे ।जिसे मैं विरोध किया और अपना अनुबंध पत्र बेची टीप के अनुसार राजस्व निरीक्षक तहसीलदार महोदय के यहां आपत्ती किया जो आपत्ति स्वीकार हुई। और मेरे पक्ष में फैसला आया इसके बाद इनके द्वारा बेदखली की कार्यवाही धारा 250 के तहत आवेदन किया गया जिसका पराक्रम क्रमांक 0006/अ/-70/2023-24 फैसला मेरे पक्ष में यानी वादी गण के पक्ष में 4/ 3/2024 को आया। तब नवीन समस्त रिकॉर्ड 264,265, 266,2 67 का निकला गया उसमें प्रतिवादी क्रमांक 20 द्वारा रामानंद तनय धनुकधारी के नाम से फर्जी अभिलेख दर्ज कराया गया लेख आया जिसका खसरा 690 प्रविष्टि है जबकि क्रय सुदा भूमि में रामानंद का कोई अस्तित्व स्वामित्व नहीं होता।जिसमें स्पष्ट कूट रचित प्रदर्शित है। जबकि रामानंद पिता लोलर के नाम से क्रय सुदा भूमि में एक बटे दो का अपना हिस्सा चढ़ावा लिए हैं। सिर्फ गलबल के भाई होने के नाते से जबकि ऐसा कोई गलबल लोलर  का हिस्सा बांट कहीं भी रिकॉर्ड में सम्मिलित नहीं पाया जाता।
2. यह की सन वर्ष 1922 23 खसरा नंबर 268 मध्य प्रदेश शासन की भूमि सन् वर्ष 1974 75 बंदोबस्ती नंबर 219टु0,220टु0,217/219टु0,218टु0 से नवीन बंदोबस्त नंबर 759,686,687,683,684,761 बना है। लेकिन 268 की आराजी अनुबंध पत्र अनुसार बेनी माधवराव पिता कामता राम ब्राह्मण के खाते से लगी हुई थी जो भूमि के सामने रोड से लगी हुई भूमि उसका भी जमा रसीद मेरे मेरे पितामह गलवल तनय धनुष बढई पवई को सन 1934 से से जमा रसीद अदा कर रहे थे। जिसके वजह से 268 मध्य प्रदेश शासन की भूमि में मेरे पितामह गलबल का कब्जा आधिपत बना रहा सन् वर्ष1969-70 मे मेरे पितामह गलबल के नाम से खसरा में दर्ज हो गया रकबा 1 एकड़ 40 डिसमिल लेकिन प्रतिवादियों द्वारा कोर्ट रचित तरीके से 1974 आदेश पंजी सूची में चोरी छुपे अधिकार अभिलेख कर्मचारियों से मिली भगत कर मेरे पितामह का रकबा में छेड़छाड़ करते हुए अपना कब्जा अधिपति 1 एकड़ 40 डिसमिल को छोड़कर दर्ज कराया गया लेकिन सन् वर्ष 1993-94 नवीन  में मेरा रकबा 40 डिसमिल कर दिया गया । उसके बावजूद भी सभी प्रतिवादिगण तहसीलदार पटवारी से मिली भगत कर कई नंबरों में  बट्कंक करवा दिया गया जो पुराना बंदोबस्ती वर्ष अधिकार अभिलेख नंबर हाल बंदोबस्ती नंबर , हेक्टर सूची में उल्लेख किया गया है।जबकि संपूर्ण भूमि मेरा आधिपत्य कब्जा आज दिनांक तक है। जब सभी प्रतिवादी एक जुट राय होकर दंडा लाठी लेकर खड़ा होने लगे और पूरे गांव मोहल्ले में शोहरत कर दिए कि यह जमीन मेरी है तब मुझे माननीय न्यायालय के समक्ष पेश होना पड़ा। संपर्क सूत्र 6260660937
    user_आदिवासी हरिजन ओरिजिनल विकास करता भारतीय संगठन मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़
    आदिवासी हरिजन ओरिजिनल विकास करता भारतीय संगठन मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़
    Samaj Sevak Gopadbanas, Sidhi•
    13 hrs ago
  • for ceiling design ceiling mein ho raha hai
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    for ceiling design ceiling mein ho raha hai
    user_Pradeep Kumar viswkarma
    Pradeep Kumar viswkarma
    Painter मिर्जापुर, मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश•
    12 hrs ago
  • संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र में उम्मीद की उड़ान: सीधी के ठोंगा में दिखा गिद्धों का बड़ा समूह, अनुकूल होते पर्यावरण के संकेत सीधी जिले के मझौली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत ठोंगा में 6 और 11 जनवरी को गिद्धों का एक बड़ा समूह देखे जाने से क्षेत्र में उत्सुकता और उम्मीद का माहौल बन गया है। विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी इस दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों को ग्रामीणों ने अपने कैमरों में कैद किया, जिसके बाद वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों के बीच चर्चा तेज हो गई है। वर्षों बाद इस तरह से गिद्धों का झुंड दिखाई देना जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन की दृष्टि से एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। गिद्ध कत्थई और काले रंग के भारी कद के पक्षी होते हैं, जिनकी दृष्टि अत्यंत तेज होती है। शिकारी पक्षियों की तरह इनकी चोंच टेढ़ी और मजबूत होती है, हालांकि इनके पंजे उतने शक्तिशाली नहीं होते। ये झुंड में रहने वाले मुर्दाखोर पक्षी हैं, जो मृत पशुओं और सड़े-गले मांस को खाकर प्रकृति की सफाई में अहम भूमिका निभाते हैं। इसी कारण इन्हें “प्राकृतिक सफाईकर्मी” भी कहा जाता है। गिद्धों की आयु सामान्यतः 40 से 45 वर्ष तक होती है, लेकिन ये चार से छह साल की उम्र में ही प्रजनन योग्य हो पाते हैं। इनकी दृष्टि इंसानों से लगभग आठ गुना बेहतर मानी जाती है और यह खुले मैदान में चार मील दूर से भी शव देख सकते हैं। हालांकि बीते दो दशकों में गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसका मुख्य कारण पशुचिकित्सा में उपयोग होने वाली डिक्लोफेनिक दवा रही है, जो मृत पशुओं के मांस के साथ गिद्धों के शरीर में पहुंचकर उनकी किडनी फेल कर देती है। वर्ष 2008 में इस दवा पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद इसके दुष्प्रभाव लंबे समय तक देखने को मिले। इसके अलावा हाई लेवल बिजली टॉवर और तारों से टकराने के कारण भी गिद्धों का पलायन और मृत्यु हुई है
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    संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र में उम्मीद की उड़ान: सीधी के ठोंगा में दिखा गिद्धों का बड़ा समूह, अनुकूल होते पर्यावरण के संकेत
सीधी जिले के मझौली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत ठोंगा में 6 और 11 जनवरी को गिद्धों का एक बड़ा समूह देखे जाने से क्षेत्र में उत्सुकता और उम्मीद का माहौल बन गया है। विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी इस दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों को ग्रामीणों ने अपने कैमरों में कैद किया, जिसके बाद वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों के बीच चर्चा तेज हो गई है। वर्षों बाद इस तरह से गिद्धों का झुंड दिखाई देना जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन की दृष्टि से एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
गिद्ध कत्थई और काले रंग के भारी कद के पक्षी होते हैं, जिनकी दृष्टि अत्यंत तेज होती है। शिकारी पक्षियों की तरह इनकी चोंच टेढ़ी और मजबूत होती है, हालांकि इनके पंजे उतने शक्तिशाली नहीं होते। ये झुंड में रहने वाले मुर्दाखोर पक्षी हैं, जो मृत पशुओं और सड़े-गले मांस को खाकर प्रकृति की सफाई में अहम भूमिका निभाते हैं। इसी कारण इन्हें “प्राकृतिक सफाईकर्मी” भी कहा जाता है। गिद्धों की आयु सामान्यतः 40 से 45 वर्ष तक होती है, लेकिन ये चार से छह साल की उम्र में ही प्रजनन योग्य हो पाते हैं। इनकी दृष्टि इंसानों से लगभग आठ गुना बेहतर मानी जाती है और यह खुले मैदान में चार मील दूर से भी शव देख सकते हैं।
हालांकि बीते दो दशकों में गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसका मुख्य कारण पशुचिकित्सा में उपयोग होने वाली डिक्लोफेनिक दवा रही है, जो मृत पशुओं के मांस के साथ गिद्धों के शरीर में पहुंचकर उनकी किडनी फेल कर देती है। वर्ष 2008 में इस दवा पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद इसके दुष्प्रभाव लंबे समय तक देखने को मिले। इसके अलावा हाई लेवल बिजली टॉवर और तारों से टकराने के कारण भी गिद्धों का पलायन और मृत्यु हुई है
    user_शेखर तिवारी
    शेखर तिवारी
    Journalist Gurh, Rewa•
    21 hrs ago
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