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2 hrs ago
user_Vijay Bais
Vijay Bais
रामपुर नैकिन, सीधी, मध्य प्रदेश•
2 hrs ago
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More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • Post by Vijay Bais
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    Post by Vijay Bais
    user_Vijay Bais
    Vijay Bais
    रामपुर नैकिन, सीधी, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • 🙏🙏🙏🌲🌲🌻🌻🌲
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    🙏🙏🙏🌲🌲🌻🌻🌲
    user_Damodar kushwaha
    Damodar kushwaha
    Farmer Rampur Naikin, Sidhi•
    23 hrs ago
  • 💥बड़ी खबर💥 इंदौर से रीवा आ रही जय भवानी ट्रेवल्स की बस में लगी आग बस पूरी तरह जलकर हुई खाक। सभी यात्री सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। पर मौके पर अफरा तफरी मच गई। घटना का वीडियो भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार, बस का टायर फटने के बाद उसमें आग भड़क उठी। आग तेजी से फैली और देखते ही देखते पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। आग लगते ही बस में सवार यात्रियों में हड़कंप मच गया। ढाबा कर्मचारियों और बस स्टाफ की त्वरित मदद से सभी यात्रियों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। कुछ ही मिनटों में आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया और वह जलकर राख हो गई। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। रायसेन जिले के बम्हौरी ढाबा के पास देर रात हुई दुर्घटना।
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    💥बड़ी खबर💥
इंदौर से रीवा आ रही जय भवानी ट्रेवल्स की बस में लगी आग बस पूरी तरह जलकर हुई खाक।
सभी यात्री सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। पर मौके पर अफरा तफरी मच गई। घटना का वीडियो भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार, बस का टायर फटने के बाद उसमें आग भड़क उठी। आग तेजी से फैली और देखते ही देखते पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। आग लगते ही बस में सवार यात्रियों में हड़कंप मच गया। ढाबा कर्मचारियों और बस स्टाफ की त्वरित मदद से सभी यात्रियों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। कुछ ही मिनटों में आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया और वह जलकर राख हो गई। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। रायसेन जिले के बम्हौरी ढाबा के पास देर रात हुई दुर्घटना।
    user_शेखर तिवारी
    शेखर तिवारी
    Journalist Gurh, Rewa•
    5 hrs ago
  • चिरहुला नाथ स्वामी की कृपा सदैव बनी रहे 🙏🙏
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    चिरहुला नाथ स्वामी की कृपा सदैव बनी रहे 🙏🙏
    user_Deepesh Pandey Dist Chief Director ACFI Rewa
    Deepesh Pandey Dist Chief Director ACFI Rewa
    NGO Worker हुजूर नगर, रीवा, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • Post by Bablu Namdev
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    Post by Bablu Namdev
    user_Bablu Namdev
    Bablu Namdev
    Photographer Rewa, Madhya Pradesh•
    11 hrs ago
  • महूरछ में आम रास्ता बंद करने का आरोप | Prism Johnson Limited के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश | Rampur Baghelan
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    महूरछ में आम रास्ता बंद करने का आरोप | Prism Johnson Limited के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश | Rampur Baghelan
    user_Piyush kumar
    Piyush kumar
    Journalist रामपुर बघेलन, सतना, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • माननीय मुख्यमंत्री महोदय जी मध्य प्रदेश शासन भोपाल विषय, डॉक्टर एसबी खरे की आज से ज्यादा संपत, 6 करोड़ पंचांग में लाख जिला अस्पताल के अर्थव्यवस्था के लिए आए प्रोजेक्ट, सीधी जिला अस्पताल सीएमओ बबीता खरे द्वारा आउटसोर्स भरती घोटाले , ऑक्सीजन पाइप फटी होने कारण से शिव सैनिक की मौत की जांच कराए जाने बाबत। मनावर से निवेदन है कि सीधी जिले में डॉक्टर खरे द्वारा स्वास्थ्य व्यवस्था में सेंड मारी गई है जिसको लेकर कई बार जिला कलेक्टर को आवेदन देकर आवाज उठाई गई अस्पताल में कई मौतें हुई उनके परिजनों द्वारा आए दिन चौराहे पर धरना दिया जाता था अस्पताल के अर्थव्यवस्था के लिए 6 करोड़ 95 लख रुपए आया था जिसका भी हिसाब समाजसेवियों ने सूचना के तहत मांगा था जिसकी रंजिश को लेकर डॉक्टर खरे द्वारा जिला कलेक्टर को अपने अंदर में लेकर सरा केश क्लीन चिट कर दिया। इसके सबूत आज सिर्फ दफ्तर में बंद हो गए। जब किसी प्रकार के प्रशासन ने कार्यवाही नहीं की और शिव सैनिक की मृत्यु होने के कारण से शिव सैनिकों भाइयों ने काली स्याही डालकर डॉक्टर का विरोध किया उसे काली स्याही के चलते आज आठ शिव सैनिक जेल में बंद है। डॉक्टर खरे द्वारा जिला न्यायालय मजिस्ट्रेट में अपनी पहुंच बनाकर शिव सैनिकों की जमानत तो खारिज कर दी लेकिन मेरे द्वारा एसडीओपी जांच के लिए दिया गया आवेदन में किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं की गई मानने से निवेदन है कार्यवाही करने की कृपा करें। प्रार्थी समाजसेवी प्रदीप कुमार विश्वकर्मा मोबाइल नंबर 6260 660 937
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    माननीय मुख्यमंत्री महोदय जी मध्य प्रदेश शासन भोपाल
विषय, डॉक्टर एसबी खरे की आज से ज्यादा संपत, 6 करोड़ पंचांग में लाख जिला अस्पताल के अर्थव्यवस्था के लिए आए प्रोजेक्ट, सीधी जिला अस्पताल सीएमओ बबीता खरे द्वारा आउटसोर्स भरती घोटाले , ऑक्सीजन पाइप फटी होने कारण से शिव सैनिक की मौत की जांच कराए जाने बाबत। 
मनावर से निवेदन है कि सीधी जिले में डॉक्टर  खरे द्वारा स्वास्थ्य व्यवस्था में सेंड मारी गई है जिसको लेकर कई बार जिला कलेक्टर को आवेदन देकर आवाज उठाई गई अस्पताल में कई मौतें हुई उनके परिजनों द्वारा आए दिन चौराहे पर धरना दिया जाता था अस्पताल के अर्थव्यवस्था के लिए 6 करोड़ 95 लख रुपए आया था जिसका भी हिसाब समाजसेवियों ने सूचना के तहत मांगा था जिसकी रंजिश को लेकर डॉक्टर खरे द्वारा जिला कलेक्टर को अपने अंदर में लेकर सरा केश क्लीन चिट कर दिया। इसके सबूत आज सिर्फ दफ्तर में बंद हो गए। जब किसी प्रकार के प्रशासन ने कार्यवाही नहीं की और शिव सैनिक की मृत्यु होने के कारण से शिव सैनिकों भाइयों ने काली स्याही डालकर डॉक्टर का विरोध किया उसे काली स्याही के चलते आज आठ शिव सैनिक जेल में बंद है। डॉक्टर खरे द्वारा जिला न्यायालय मजिस्ट्रेट में अपनी पहुंच बनाकर शिव सैनिकों की जमानत तो खारिज कर दी लेकिन मेरे द्वारा एसडीओपी जांच के लिए दिया गया आवेदन में किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं की गई मानने से निवेदन है कार्यवाही करने की कृपा करें। 
प्रार्थी 
समाजसेवी 
प्रदीप कुमार विश्वकर्मा 
मोबाइल नंबर 6260 660 937
    user_आदिवासी हरिजन ओरिजिनल विकास करता भारतीय संगठन मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़
    आदिवासी हरिजन ओरिजिनल विकास करता भारतीय संगठन मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़
    Samaj Sevak Gopadbanas, Sidhi•
    11 hrs ago
  • संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र में उम्मीद की उड़ान: सीधी के ठोंगा में दिखा गिद्धों का बड़ा समूह, अनुकूल होते पर्यावरण के संकेत सीधी जिले के मझौली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत ठोंगा में 6 और 11 जनवरी को गिद्धों का एक बड़ा समूह देखे जाने से क्षेत्र में उत्सुकता और उम्मीद का माहौल बन गया है। विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी इस दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों को ग्रामीणों ने अपने कैमरों में कैद किया, जिसके बाद वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों के बीच चर्चा तेज हो गई है। वर्षों बाद इस तरह से गिद्धों का झुंड दिखाई देना जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन की दृष्टि से एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। गिद्ध कत्थई और काले रंग के भारी कद के पक्षी होते हैं, जिनकी दृष्टि अत्यंत तेज होती है। शिकारी पक्षियों की तरह इनकी चोंच टेढ़ी और मजबूत होती है, हालांकि इनके पंजे उतने शक्तिशाली नहीं होते। ये झुंड में रहने वाले मुर्दाखोर पक्षी हैं, जो मृत पशुओं और सड़े-गले मांस को खाकर प्रकृति की सफाई में अहम भूमिका निभाते हैं। इसी कारण इन्हें “प्राकृतिक सफाईकर्मी” भी कहा जाता है। गिद्धों की आयु सामान्यतः 40 से 45 वर्ष तक होती है, लेकिन ये चार से छह साल की उम्र में ही प्रजनन योग्य हो पाते हैं। इनकी दृष्टि इंसानों से लगभग आठ गुना बेहतर मानी जाती है और यह खुले मैदान में चार मील दूर से भी शव देख सकते हैं। हालांकि बीते दो दशकों में गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसका मुख्य कारण पशुचिकित्सा में उपयोग होने वाली डिक्लोफेनिक दवा रही है, जो मृत पशुओं के मांस के साथ गिद्धों के शरीर में पहुंचकर उनकी किडनी फेल कर देती है। वर्ष 2008 में इस दवा पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद इसके दुष्प्रभाव लंबे समय तक देखने को मिले। इसके अलावा हाई लेवल बिजली टॉवर और तारों से टकराने के कारण भी गिद्धों का पलायन और मृत्यु हुई है
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    संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र में उम्मीद की उड़ान: सीधी के ठोंगा में दिखा गिद्धों का बड़ा समूह, अनुकूल होते पर्यावरण के संकेत
सीधी जिले के मझौली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत ठोंगा में 6 और 11 जनवरी को गिद्धों का एक बड़ा समूह देखे जाने से क्षेत्र में उत्सुकता और उम्मीद का माहौल बन गया है। विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी इस दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों को ग्रामीणों ने अपने कैमरों में कैद किया, जिसके बाद वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों के बीच चर्चा तेज हो गई है। वर्षों बाद इस तरह से गिद्धों का झुंड दिखाई देना जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन की दृष्टि से एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
गिद्ध कत्थई और काले रंग के भारी कद के पक्षी होते हैं, जिनकी दृष्टि अत्यंत तेज होती है। शिकारी पक्षियों की तरह इनकी चोंच टेढ़ी और मजबूत होती है, हालांकि इनके पंजे उतने शक्तिशाली नहीं होते। ये झुंड में रहने वाले मुर्दाखोर पक्षी हैं, जो मृत पशुओं और सड़े-गले मांस को खाकर प्रकृति की सफाई में अहम भूमिका निभाते हैं। इसी कारण इन्हें “प्राकृतिक सफाईकर्मी” भी कहा जाता है। गिद्धों की आयु सामान्यतः 40 से 45 वर्ष तक होती है, लेकिन ये चार से छह साल की उम्र में ही प्रजनन योग्य हो पाते हैं। इनकी दृष्टि इंसानों से लगभग आठ गुना बेहतर मानी जाती है और यह खुले मैदान में चार मील दूर से भी शव देख सकते हैं।
हालांकि बीते दो दशकों में गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसका मुख्य कारण पशुचिकित्सा में उपयोग होने वाली डिक्लोफेनिक दवा रही है, जो मृत पशुओं के मांस के साथ गिद्धों के शरीर में पहुंचकर उनकी किडनी फेल कर देती है। वर्ष 2008 में इस दवा पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद इसके दुष्प्रभाव लंबे समय तक देखने को मिले। इसके अलावा हाई लेवल बिजली टॉवर और तारों से टकराने के कारण भी गिद्धों का पलायन और मृत्यु हुई है
    user_शेखर तिवारी
    शेखर तिवारी
    Journalist Gurh, Rewa•
    21 hrs ago
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