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बिहार में बाढ़ की वजह से अब इसे ऑनलाइन बनाया जाएगा।
Sarbjeet kumar
बिहार में बाढ़ की वजह से अब इसे ऑनलाइन बनाया जाएगा।
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- आरा के जयप्रकाश स्मारक, मुक्ताकाश मंच पर सिविल सोसायटी के तत्वावधान में सोमवार को एक दिवसीय सांकेतिक उपवास धरना आयोजित किया गया। यह उपवास जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता व शिक्षाविद् सोनम वांगचुक के साथ हुई अलोकतांत्रिक पुलिसिया कार्रवाई, शिक्षा की बदहाल स्थिति, लगातार हो रहे पेपर लीक तथा प्रशासनिक असंवेदनशीलता के खिलाफ किया गया। इस विरोध कार्यक्रम की शुरुआत लोकनायक जयप्रकाश की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए वरिष्ठ रंगकर्मी व सामाजिक कार्यकर्ता अशोक मानव और सामाजिक कार्यकर्ता विजय मेहता के उपवास के साथ हुई। इस दौरान उपस्थित वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। वक्ताओं के अनुसार, जनतांत्रिक मूल्यों की रक्षा, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर प्रभावी रोक और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करना समय की सबसे बड़ी मांग है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शिक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर आज समाज मौन रहा, तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य और अधिक संकट में पड़ सकता है। जनतंत्र और शिक्षा के सवाल पर आयोजित यह सांकेतिक उपवास संपन्न हो गया है और इसके विरोध में कल से धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।3
- आरा के पकड़ी स्थित पवन सिंह की गली में "चौबे जी जनरल एवं किराना स्टोर" का भव्य उद्घाटन संपन्न हो गया है। इस अवसर पर दुकान के संचालक गोविन्द चौबे ने क्षेत्रवासियों से एक बार सेवा का अवसर देने की अपील की है। उन्होंने ग्राहकों को पूरा भरोसा दिलाया है कि स्टोर पर दैनिक उपयोग की सभी किराना और जनरल सामग्री बेहद उचित और किफायती मूल्य पर उपलब्ध कराई जाएगी। ग्राहकों की सुविधा और विश्वास को प्राथमिकता देते हुए इस स्टोर ने घर बैठे सामान पहुंचाने के लिए तेज़ और सुविधाजनक होम डिलीवरी सेवा भी शुरू की है। "ग्राहक देवो भव" के संकल्प के साथ संचालित इस स्टोर से खरीदारी करने या होम डिलीवरी की सेवा का लाभ उठाने के लिए ग्राहक मोबाइल नंबर 7061491983 और 9905694905 पर संपर्क कर सकते हैं।1
- बिहार में लोगों से किसी भी तरह के बहकावे में न आने की अपील की गई है। नौकरी, रोजी और रोजगार से जुड़े अपने महत्वपूर्ण सवालों को लेकर किसी के झांसे में आने के बजाय, सीधे बड़े मंत्रियों के सामने इस मुद्दे को मजबूती से उठाने के लिए कहा गया है।1
- भोजपुर के आरा में जवानिया कटाव की समस्या को लेकर राकेश ओझा ने अपने प्रत्याशी से बातचीत की है। इस दौरान भाजपा की ओर से यह बात कही गई है कि गंगा जी कोई सिसियादेश लेकर नहीं आती हैं। इस पूरे मामले में '50k' का भी जिक्र किया गया है।1
- बिहार के भोजपुर जिले के आरा शहर में जल जमाव होने और सड़क पर बिजली के पोल खड़े होने की समस्या को लेकर नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुरेंद्र कुमार प्रसाद ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।1
- भोजपुर के आरा अंतर्गत पकड़ी स्थित पवन सिंह की गली में "चौबे जी जनरल एवं किराना स्टोर" का शुभ उद्घाटन संपन्न हो गया है। दुकान के संचालक गोविन्द चौबे ने क्षेत्र के लोगों से एक बार सेवा का अवसर देने की अपील की है। यहां दैनिक उपयोग की सभी किराना और जनरल सामग्री उचित मूल्य पर उपलब्ध कराई जा रही है, और ग्राहकों की सुविधा के लिए होम डिलीवरी सेवा भी शुरू की गई है। "ग्राहक देवो भव" के संकल्प के साथ यह स्टोर ग्राहकों की सेवा में सदैव तत्पर है, जिसके लिए 7061491983 और 9905694905 पर संपर्क किया जा सकता है।1
- भोजपुर जिले के आरा स्थित खेताड़ी मोहल्ला, जेल तालाब के KGN मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल में एक निःशुल्क मेगा हेल्थ कैंप का आयोजन किया गया। इस शिविर में सैकड़ों मरीजों ने पहुंचकर विशेषज्ञ डॉक्टरों से स्वास्थ्य परामर्श लिया और मुफ्त जांच सेवाओं का लाभ उठाया। शिविर के दौरान डॉ. नसरत इमाम और डॉ. एस. चंद्रा ने मरीजों की स्वास्थ्य जांच की और उन्हें उचित उपचार के साथ-साथ आवश्यक चिकित्सकीय सलाह दी। इसके साथ ही, मरीजों के लिए निःशुल्क रक्त जांच सहित अन्य स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध कराई गईं, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को सीधे तौर पर लाभ मिला। समाजहित में आयोजित इस तरह के स्वास्थ्य शिविरों को लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम माना गया है। इस सफल आयोजन के बाद लोगों से यह भी पूछा गया है कि क्या उनके क्षेत्रों में भी इसी प्रकार के निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाने चाहिए, और उन्हें अपनी राय कमेंट के माध्यम से साझा करने के लिए कहा गया है।1
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं। वे इतने युवा-विरोधी हैं कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तक नहीं ले सकते। देश में 152 पेपर लीक हुए हैं, जिससे 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित हैं। इसके बावजूद एक भी दोषी को सजा नहीं मिली है, बल्कि इसकी सजा सिर्फ मेहनती युवाओं को भुगतनी पड़ रही है। जब इन बच्चों ने शिक्षा से जुड़े अपने जायज़ सवाल उठाए, तो जवाब में उन्हें लाठी और हिरासत मिली। पेपर लीक करने वाले अपराधी आज़ाद घूम रहे हैं, जबकि वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्रों को घसीटा और पीटा जा रहा है। यह सरकार सिर्फ युवाओं को नाकाम ही नहीं कर रही, बल्कि उनपर टूट पड़ी है।1