Shuru
Apke Nagar Ki App…
बिहार के भोजपुर जिले के आरा शहर में जल जमाव होने और सड़क पर बिजली के पोल खड़े होने की समस्या को लेकर नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुरेंद्र कुमार प्रसाद ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
Sanjay srivastava
बिहार के भोजपुर जिले के आरा शहर में जल जमाव होने और सड़क पर बिजली के पोल खड़े होने की समस्या को लेकर नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुरेंद्र कुमार प्रसाद ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
More news from बिहार and nearby areas
- भोजपुर के आरा में ओम नमः शिवाय और जय शिव शंकर के पावन मंत्रों का अनवरत जाप किया गया है। इस पूरे जाप में केवल 'ओम नमः शिवाय', 'जय शिव शंकर' और 'ओम' के पवित्र नाम की श्रद्धापूर्वक बार-बार पुनरावृत्ति की गई है।1
- देश में 21 जुलाई 2026 से नए नियम लागू कर दिए गए हैं। एमएसजी न्यूज (MSG NEWS) द्वारा जारी मुख्य समाचारों के अनुसार, इस तारीख से एलपीजी (LPG), आईटीआर (ITR) और आधार से जुड़े क्षेत्रों में बड़े बदलाव किए गए हैं। इन महत्वपूर्ण बदलावों को लेकर आज की बड़ी और ताजा खबरों के लाइव अपडेट के रूप में जानकारी साझा की गई है।1
- भाकपा-माले, आइसा और इनौस के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर आरा में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी और पेपर लीक के खिलाफ एक विशाल आक्रोश मार्च निकाला गया। यह विशाल आक्रोश मार्च पूर्वी रेलवे गुमटी से शुरू होकर शहर के स्टेशन रोड, नवादा चौक, शिवगंज, गोपाली चौक और टाउन थाना होते हुए अम्बेडकर चौक पहुंचा, जहां यह एक विरोध सभा में तब्दील हो गया। इस प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, एनटीए (NTA) को भंग करने, पारदर्शी व जवाबदेह परीक्षा व्यवस्था लागू करने और पेपर लीक व परीक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार पर तुरंत रोक लगाने की मांग की। इसके साथ ही, पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को अनशन के दौरान गिरफ्तार किए जाने और दिल्ली में आंदोलनकारियों पर हुए बर्बर लाठीचार्ज के खिलाफ भी तीखा विरोध दर्ज कराया गया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि सोनम वांगचुक से बातचीत करने के बदले उन्हें हिरासत में क्यों लिया गया, और सीधे तौर पर 'मोदी-शाह जवाब दो' के नारे लगाए। सभा को संबोधित करते हुए भाकपा-माले केंद्रीय कमेटी सदस्य और जिला सचिव अभ्युदय ने कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर अनशन आंदोलन लगातार जारी है। पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक, आइसा अध्यक्ष नेहा सिंह, मनीष और आमीन की भूख हड़ताल को आज 22 दिन पूरे हो चुके हैं, जिसमें से सोनम वांगचुक को गिरफ्तार कर लिया गया है और आइसा के दो अनशनकारी अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर कान में तेल डाले बैठी है और आज तक सरकार का कोई भी प्रतिनिधि अनशनकारियों से वार्ता करने नहीं आया है।3
- आरा के पकड़ी स्थित पवन सिंह की गली में "चौबे जी जनरल एवं किराना स्टोर" का भव्य उद्घाटन संपन्न हो गया है। इस अवसर पर दुकान के संचालक गोविन्द चौबे ने क्षेत्रवासियों से एक बार सेवा का अवसर देने की अपील की है। उन्होंने ग्राहकों को पूरा भरोसा दिलाया है कि स्टोर पर दैनिक उपयोग की सभी किराना और जनरल सामग्री बेहद उचित और किफायती मूल्य पर उपलब्ध कराई जाएगी। ग्राहकों की सुविधा और विश्वास को प्राथमिकता देते हुए इस स्टोर ने घर बैठे सामान पहुंचाने के लिए तेज़ और सुविधाजनक होम डिलीवरी सेवा भी शुरू की है। "ग्राहक देवो भव" के संकल्प के साथ संचालित इस स्टोर से खरीदारी करने या होम डिलीवरी की सेवा का लाभ उठाने के लिए ग्राहक मोबाइल नंबर 7061491983 और 9905694905 पर संपर्क कर सकते हैं।1
- बिहार में लोगों से किसी भी तरह के बहकावे में न आने की अपील की गई है। नौकरी, रोजी और रोजगार से जुड़े अपने महत्वपूर्ण सवालों को लेकर किसी के झांसे में आने के बजाय, सीधे बड़े मंत्रियों के सामने इस मुद्दे को मजबूती से उठाने के लिए कहा गया है।1
- बिहार के भोजपुर जिले के आरा शहर में जल जमाव होने और सड़क पर बिजली के पोल खड़े होने की समस्या को लेकर नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुरेंद्र कुमार प्रसाद ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।1
- आरा के जयप्रकाश स्मारक, मुक्ताकाश मंच पर सोमवार को सिविल सोसायटी, आरा के तत्वावधान में एक दिवसीय सांकेतिक उपवास धरना आयोजित किया गया। यह आयोजन सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिक्षाविद् सोनम वांगचुक के साथ जंतर-मंतर पर हुई अलोकतांत्रिक पुलिसिया कार्रवाई, शिक्षा की बदहाल स्थिति, लगातार हो रहे पेपर लीक तथा प्रशासनिक असंवेदनशीलता के खिलाफ किया गया था। कार्यक्रम की शुरुआत लोकनायक जयप्रकाश की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई, जिसके बाद वरिष्ठ रंगकर्मी एवं सामाजिक कार्यकर्ता अशोक मानव और सामाजिक कार्यकर्ता विजय मेहता उपवास पर बैठे। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने चेताया कि यदि जनतांत्रिक मूल्यों की रक्षा, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक पर प्रभावी रोक के लिए समाज आज मौन रहा, तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संकट में पड़ जाएगा। जनतंत्र और शिक्षा के सवाल पर आयोजित यह सांकेतिक उपवास समाप्त हो गया है और कल से धरना-प्रदर्शन शुरू होगा।3
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं। वे इतने युवा-विरोधी हैं कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तक नहीं ले सकते। देश में 152 पेपर लीक हुए हैं, जिससे 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित हैं। इसके बावजूद एक भी दोषी को सजा नहीं मिली है, बल्कि इसकी सजा सिर्फ मेहनती युवाओं को भुगतनी पड़ रही है। जब इन बच्चों ने शिक्षा से जुड़े अपने जायज़ सवाल उठाए, तो जवाब में उन्हें लाठी और हिरासत मिली। पेपर लीक करने वाले अपराधी आज़ाद घूम रहे हैं, जबकि वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्रों को घसीटा और पीटा जा रहा है। यह सरकार सिर्फ युवाओं को नाकाम ही नहीं कर रही, बल्कि उनपर टूट पड़ी है।1