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ट्रेन की चपेट में आने से युवक की मौत
Journalist Asif khan KOTA City NEWS
ट्रेन की चपेट में आने से युवक की मौत
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- जॉइंट एंटरेंस एग्जामिनेशन (JEE) मेंस में 99.99 परसेंटाइल हासिल करने वाले कोटा के जुड़वां भाई चर्चा में हैं। एक ही शिफ्ट में परीक्षा देने वाले भाइयों का स्कोर भी सेम है। दोनों को 300 में से 285 नंबर मिले हैं।1
- आवर(झालावाड़) अफीम के खेतों में माँ काली की स्थापना, लच्छा बांधकर नक्का से लगाते हैं चीरा, नंगे पैर खेत में जाकर निकालते हैं अफीम अफीम के डोडों में चीरा लगाने का काम शुरू, शुभ मुहूर्त में हुई 'नाणा' की परंपरा काले सोने की खेती उगलने लगी अफीम। भवानीमंडी क्षेत्र में अफीम उत्पादक किसानों ने अपने खेतों में अफीम के डोडो में चीरा लगाकर अफीम निकालने का काम शुरू कर दिया है। डोडो की चिराई से पूर्व खेतों की मेड़ पर माँ कालिका की प्रतिमा स्थापना की गई। पूजापाठ के बाद अफीम के डोडों में चीरा लगाने का कार्य शुरू हो गया है। अफीम उत्पादक किसान अफीम की फसल को कितनी सावधानी से संजोकर उसे बड़ी करता है, इसका अंदाजा इसी बात से किया जा सकता है कि बुवाई के बाद किसान खेत के अंदर चम्पल, जूते तक पहनकर नहीं जाते है। पौधों की सुरक्षा के लिए खेत मे प्रत्येक पौधे को हवा एवं पक्षियों से बचाव के पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं। जहाँ खेत में पौधों को मजबूती से खड़ा रहने के लिए रस्सियां बांध कर सहारा दिया गया है। वही फसल में डोडे आने के बाद इन पर नशेड़ी तोते की नजर भी पड़ जाती है। ये तोते डोडो को कुतरकर फसल खराब कर देते हैं। इससे बचाव के लिए पूरी फसल को बारीक जाली से कवर किया गया है ताकि कोई भी पक्षी फसल को नुकसान नहीं पहुँचा सके। पौधों में डोडो के परिपक्व होने के बाद किसानों ने शुभ मुहर्त में धार्मिक विधि-विधान से मां काली की पूजा-अर्चना की इसके बाद अनुभवी किसानों द्वारा लुवाई एवं चिराई का कार्य प्रारंभ किया। किसानों का मानना है कि अच्छी पैदावार और सुख-समृद्धि की कामना से मां कालिका की पूजा कर डोडों पर चीरा लगाने की परंपरा है, जिसे स्थानीय भाषा में 'नाणा' कहा जाता है। अफीम उत्पादक पगारिया निवासी किसान अर्जुनसिंह भगत, शिवसिंह परमार आदि ने बताया कि नाणा से पूर्व काली माता की पूजा की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। डोडो से अफीम निकालने के लिए 'नक्का' नामक विशेष औजार से दोपहर बाद चीरा लगाया जाता है। अगले दिन सुबह दस बजे से पहले ही छरपलों से डोडो पर जमा अफीम का दूध एकत्र कर लिया जाता है। यह प्रक्रिया करीब पच्चीस दिनों तक चलती है। लुवाई-चिराई के बाद सूखे डोड़ों से पोस्तदाना निकाला जाता है। किसान शिवसिंह एवं अर्जुनसिंह भगत जी ने बताया कि अफीम के कई पौधें अज्ञात रोग की चपेट में आ गए हैं। इस रोग के चलते पौधे पीले पड़ गए हैं एवं डोडो के निचले हिस्से से दूध निकलने लगा है इस कारण पौधा एवं डोडा दोनों ही सुख गए हैं जिनसे अफीम का उत्पादन सम्भव नहीं है।1
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- अपने हमशक्ल नरेश सिंधी से मिलकर क्या बोले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा...1
- कोटा | शहर के श्रीनाथ पुरम क्षेत्र में आज बच्चों एवं वयस्कों के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा की शुरुआत हुई। Kota Child Development Centre and Physiotherapy Centre का विधिवत उद्घाटन सम्पन्न हुआ। यह सेंटर विशेष रूप से उन बच्चों के लिए वरदान साबित होगा जो ऑटिज़्म, ADHD (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर) जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। सेंटर में स्पीच डेवलपमेंट में कठिनाई झेल रहे बच्चों के लिए आधुनिक तकनीकों के माध्यम से स्पीच थेरेपी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं जो बच्चे उम्र के अनुसार बैठने, खड़े होने या चलने जैसी शारीरिक गतिविधियों में पिछड़ जाते हैं, उनके लिए भी विशेष तकनीकों द्वारा उपचार की व्यवस्था की गई है। इस केंद्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां बच्चों के साथ-साथ वयस्कों के लिए भी फिजियोथेरेपी सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। न्यूरोलॉजिकल, मस्कुलोस्केलेटल एवं अन्य शारीरिक समस्याओं से पीड़ित मरीजों को वैज्ञानिक और आधुनिक उपचार प्रदान किया जाएगा। सेंटर की स्थापना डॉ. निवेदिता यादव एवं लवकुश द्वारा की गई है। डॉ. निवेदिता यादव PT (BPT, MPT - न्यूरोलॉजी) में विशेषज्ञ हैं, जबकि लवकुश एक अनुभवी स्पीच थेरेपिस्ट हैं। केंद्र का उद्घाटन डॉक्टर रोहित कुमार गोरख के करकमलों द्वारा किया गया। उद्घाटन अवसर पर डॉक्टर रोहित ने कहा कि इस सेंटर का उद्देश्य कोटा और आसपास के क्षेत्रों के बच्चों एवं वयस्कों को सुलभ, गुणवत्तापूर्ण एवं वैज्ञानिक उपचार उपलब्ध कराना है, ताकि वे आत्मनिर्भर और बेहतर जीवन जी सकें। यह केंद्र निश्चित रूप से कोटा में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नई पहल के रूप में देखा जा रहा है।1
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