खर्रा खरीदी केन्द्र में नियमों की धज्जियां, देर रात तक हो रही गेहूं तौल! खर्रा खरीदी केन्द्र में अव्यवस्थाओं और अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार यहां देर रात तक गेहूं की तौल जारी है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि किसानों से ₹500 लेकर तौल के लिए नम्बर लगाया जा रहा है। आरोप यह भी है कि पूरे मामले में कृषि विभाग के SDO की मिलीभगत से इन गड़बड़ियों को संरक्षण मिल रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि केन्द्र संचालन में रिश्तेदारी निभाई जा रही है—ऑपरेटर के नाम पर कोई और, जबकि खरीदी का काम उसकी ननद द्वारा किया जा रहा है। इससे पूरे सिस्टम की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। किसानों का कहना है कि बिना पैसे दिए उनकी उपज की तौल नहीं हो रही, जिससे उन्हें मजबूरी में रिश्वत देनी पड़ रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कार्रवाई करता है या फिर ऐसे ही नियमों की अनदेखी होती रहेगी
खर्रा खरीदी केन्द्र में नियमों की धज्जियां, देर रात तक हो रही गेहूं तौल! खर्रा खरीदी केन्द्र में अव्यवस्थाओं और अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार यहां देर रात तक गेहूं की तौल जारी है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि किसानों से ₹500 लेकर तौल के लिए नम्बर लगाया जा रहा है। आरोप यह भी है कि पूरे मामले में कृषि विभाग के SDO की मिलीभगत से इन गड़बड़ियों को संरक्षण मिल रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि केन्द्र संचालन में रिश्तेदारी निभाई जा रही है—ऑपरेटर के नाम पर कोई और, जबकि खरीदी का काम उसकी ननद द्वारा किया जा रहा है। इससे पूरे सिस्टम की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। किसानों का कहना है कि बिना पैसे दिए उनकी उपज की तौल नहीं हो रही, जिससे उन्हें मजबूरी में रिश्वत देनी पड़ रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कार्रवाई करता है या फिर ऐसे ही नियमों की अनदेखी होती रहेगी
- खर्रा खरीदी केन्द्र में नियमों की धज्जियां, देर रात तक हो रही गेहूं तौल! खर्रा खरीदी केन्द्र में अव्यवस्थाओं और अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार यहां देर रात तक गेहूं की तौल जारी है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि किसानों से ₹500 लेकर तौल के लिए नम्बर लगाया जा रहा है। आरोप यह भी है कि पूरे मामले में कृषि विभाग के SDO की मिलीभगत से इन गड़बड़ियों को संरक्षण मिल रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि केन्द्र संचालन में रिश्तेदारी निभाई जा रही है—ऑपरेटर के नाम पर कोई और, जबकि खरीदी का काम उसकी ननद द्वारा किया जा रहा है। इससे पूरे सिस्टम की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। किसानों का कहना है कि बिना पैसे दिए उनकी उपज की तौल नहीं हो रही, जिससे उन्हें मजबूरी में रिश्वत देनी पड़ रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कार्रवाई करता है या फिर ऐसे ही नियमों की अनदेखी होती रहेगी1
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