हमीरपुर जिले के राठ विकासखंड परिसर में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित जन कल्याण शिविर और स्वास्थ्य मेला पूरी तरह से फ्लॉप साबित हुआ। प्रचार-प्रसार के अभाव के कारण न तो ग्रामीण और न ही कोई लाभार्थी शिविर में पहुंचे, जिसके परिणामस्वरूप खाली कुर्सियां, सूने स्टॉल और कुर्सी-टेबल पर सोते कर्मचारी ही शिविर की हकीकत बयां करते रहे। सुबह 10 बजे से शुरू होने वाले इस शिविर में दोपहर 12 बजे तक न तो अधिकारी पहुंचे और न ही जनता की उपस्थिति दर्ज की गई। विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉल वीरान पड़े थे। कुछ कर्मचारी कुर्सियों पर सोते दिखाई दिए, जबकि अन्य मोबाइल पर रील्स और गेम खेलकर समय बिताते रहे। कई स्थानों पर तो अधिकारी और कर्मचारी केवल सेल्फी और फोटो सेशन तक ही सीमित रहे। बताया जा रहा है कि लाखों की योजनाओं का प्रचार करने के उद्देश्य से लगाए गए इस मेले का खुद ही प्रचार नहीं किया गया, जिससे गांव-गांव तक मुनादी या सूचना न पहुंचने के कारण ग्रामीणों को शिविर की कोई जानकारी ही नहीं मिल पाई। नतीजतन, यह सरकारी मेला सिर्फ कागजी खानापूर्ति बनकर रह गया। स्वास्थ्य विभाग का स्टॉल भी खाली पड़ा था, जहां डॉक्टर तक नदारद थे। लाभार्थियों के लिए लगाई गईं सैकड़ों कुर्सियां पूरे दिन खाली रहीं। अधिकारी दोपहर बाद पहुंचे, लेकिन तब तक माहौल इतना सन्नाटे भरा हो चुका था कि वे भी कुछ देर बैठकर लौट गए। सरकारी योजनाओं के पंपलेट और फॉर्म टेबल पर ही धूल फांकते रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह शिविर सिर्फ फोटो खिंचवाने और रिपोर्ट भेजने के लिए लगाया गया था, और एक ग्रामीण ने कहा कि “जब जनता को पता ही नहीं चलेगा तो आएगी कैसे? यह सिर्फ कागजी खानापूर्ति है।” केंद्र सरकार की 12 साल की उपलब्धियां गिनाने वाला यह आयोजन खुद ही सवालों के घेरे में आ गया है। इस संबंध में खंड विकास अधिकारी से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
हमीरपुर जिले के राठ विकासखंड परिसर में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित जन कल्याण शिविर और स्वास्थ्य मेला पूरी तरह से फ्लॉप साबित हुआ। प्रचार-प्रसार के अभाव के कारण न तो ग्रामीण और न ही कोई लाभार्थी शिविर में पहुंचे, जिसके परिणामस्वरूप खाली कुर्सियां, सूने स्टॉल और कुर्सी-टेबल पर सोते कर्मचारी ही शिविर की हकीकत बयां करते रहे। सुबह 10 बजे से शुरू होने वाले इस शिविर में दोपहर 12 बजे तक न तो अधिकारी पहुंचे और न ही जनता की उपस्थिति दर्ज की गई। विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉल वीरान पड़े थे। कुछ कर्मचारी कुर्सियों पर सोते दिखाई दिए, जबकि अन्य मोबाइल पर रील्स और गेम खेलकर समय बिताते रहे। कई स्थानों पर तो अधिकारी और कर्मचारी केवल सेल्फी और फोटो सेशन तक ही सीमित रहे। बताया जा रहा है कि लाखों की योजनाओं का प्रचार करने के उद्देश्य से लगाए गए इस मेले का खुद ही प्रचार नहीं किया गया, जिससे गांव-गांव तक मुनादी या सूचना न पहुंचने के कारण ग्रामीणों को शिविर की कोई जानकारी ही नहीं मिल पाई। नतीजतन, यह सरकारी मेला सिर्फ कागजी खानापूर्ति बनकर रह गया। स्वास्थ्य विभाग का स्टॉल भी खाली पड़ा था, जहां डॉक्टर तक नदारद थे। लाभार्थियों के लिए लगाई गईं सैकड़ों कुर्सियां पूरे दिन खाली रहीं। अधिकारी दोपहर बाद पहुंचे, लेकिन तब तक माहौल इतना सन्नाटे भरा हो चुका था कि वे भी कुछ देर बैठकर लौट गए। सरकारी योजनाओं के पंपलेट और फॉर्म टेबल पर ही धूल फांकते रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह शिविर सिर्फ फोटो खिंचवाने और रिपोर्ट भेजने के लिए लगाया गया था, और एक ग्रामीण ने कहा कि “जब जनता को पता ही नहीं चलेगा तो आएगी कैसे? यह सिर्फ कागजी खानापूर्ति है।” केंद्र सरकार की 12 साल की उपलब्धियां गिनाने वाला यह आयोजन खुद ही सवालों के घेरे में आ गया है। इस संबंध में खंड विकास अधिकारी से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
- हमीरपुर जिले के राठ विकासखंड परिसर में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित जन कल्याण शिविर और स्वास्थ्य मेला पूरी तरह से फ्लॉप साबित हुआ। प्रचार-प्रसार के अभाव के कारण न तो ग्रामीण और न ही कोई लाभार्थी शिविर में पहुंचे, जिसके परिणामस्वरूप खाली कुर्सियां, सूने स्टॉल और कुर्सी-टेबल पर सोते कर्मचारी ही शिविर की हकीकत बयां करते रहे। सुबह 10 बजे से शुरू होने वाले इस शिविर में दोपहर 12 बजे तक न तो अधिकारी पहुंचे और न ही जनता की उपस्थिति दर्ज की गई। विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉल वीरान पड़े थे। कुछ कर्मचारी कुर्सियों पर सोते दिखाई दिए, जबकि अन्य मोबाइल पर रील्स और गेम खेलकर समय बिताते रहे। कई स्थानों पर तो अधिकारी और कर्मचारी केवल सेल्फी और फोटो सेशन तक ही सीमित रहे। बताया जा रहा है कि लाखों की योजनाओं का प्रचार करने के उद्देश्य से लगाए गए इस मेले का खुद ही प्रचार नहीं किया गया, जिससे गांव-गांव तक मुनादी या सूचना न पहुंचने के कारण ग्रामीणों को शिविर की कोई जानकारी ही नहीं मिल पाई। नतीजतन, यह सरकारी मेला सिर्फ कागजी खानापूर्ति बनकर रह गया। स्वास्थ्य विभाग का स्टॉल भी खाली पड़ा था, जहां डॉक्टर तक नदारद थे। लाभार्थियों के लिए लगाई गईं सैकड़ों कुर्सियां पूरे दिन खाली रहीं। अधिकारी दोपहर बाद पहुंचे, लेकिन तब तक माहौल इतना सन्नाटे भरा हो चुका था कि वे भी कुछ देर बैठकर लौट गए। सरकारी योजनाओं के पंपलेट और फॉर्म टेबल पर ही धूल फांकते रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह शिविर सिर्फ फोटो खिंचवाने और रिपोर्ट भेजने के लिए लगाया गया था, और एक ग्रामीण ने कहा कि “जब जनता को पता ही नहीं चलेगा तो आएगी कैसे? यह सिर्फ कागजी खानापूर्ति है।” केंद्र सरकार की 12 साल की उपलब्धियां गिनाने वाला यह आयोजन खुद ही सवालों के घेरे में आ गया है। इस संबंध में खंड विकास अधिकारी से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।1
- तुर्का लहचूरा जिला झांसी तहसील टहरौली ब्लॉक गुरसराय थाना फतेहपुर रिंकू लक्ष्कार तुर्का लहचूरा तुर्का लहचूरा4
- सोमवार को गुरसरांय थाना परिसर में आगामी मुहर्रम पर्व को सकुशल और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से एक शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता गरौठा के पुलिस क्षेत्राधिकारी पीयूष कुमार पाण्डेय ने की। इसमें थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह और सब इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह भदौरिया के साथ-साथ दोनों समुदायों के गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे। पुलिस क्षेत्राधिकारी पीयूष कुमार पाण्डेय ने उपस्थित लोगों से मुहर्रम पर्व को आपसी भाईचारे, शांति और सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ताजिया जुलूस और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। बैठक के दौरान मुहर्रम पर निकाले जाने वाले ताजियों के रूट और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में भी जानकारी ली गई। पाण्डेय ने विद्युत एवं सफाई व्यवस्था को लेकर संबंधित विभागों को समय पर सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के लिए आवश्यक निर्देश भी दिए। वहीं, थानाध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह ने भी लोगों से आपसी सहयोग और भाईचारे के साथ पर्व मनाने की अपील की। बैठक में मौजूद सभी लोगों ने प्रशासन को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया और त्योहार को शांतिपूर्ण वातावरण में मनाने का संकल्प लिया।1
- महोबा सदर कोतवाली क्षेत्र के दिसरापुर गांव में बीती रात जमीनी विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच संघर्ष हो गया। बातों ही बातों में यह विवाद मारपीट में बदल गया, जिसमें एक पक्ष के पांच लोग घायल हो गए। इस दौरान दोनों पक्षों में जमकर लाठी-डंडे चले। घटना के संबंध में दोनों ही पक्षों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।1
- उत्तर प्रदेश विकास के नए आयाम लगातार स्थापित कर रहा है, जहाँ प्रदेश की आर्थिक, औद्योगिक और आधारभूत संरचना को मजबूती देने की दिशा में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां सामने आई हैं। इसमें सबसे बड़ी खबर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) से जुड़ी है, जहाँ से व्यावसायिक उड़ानों का संचालन शुरू हो गया है। पहली इंडिगो फ्लाइट के साथ एयरपोर्ट ने औपचारिक रूप से अपनी सेवाएं शुरू की हैं, जिससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित पूरे प्रदेश में व्यापार, पर्यटन और निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद है। खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित उद्योगों में भी उत्तर प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार की नीतियों और बढ़ते औद्योगिक निवेश के परिणामस्वरूप प्रदेश देश के प्रमुख निवेश गंतव्यों में शामिल हो चुका है। विभिन्न क्षेत्रों में बड़े निवेश प्रस्तावों के आने से रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं। निवेशकों की बढ़ती रुचि और बेहतर कानून-व्यवस्था के कारण उत्तर प्रदेश उद्योग जगत की पहली पसंद बनता जा रहा है। सरकार का दावा है कि इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेस-वे, एयरपोर्ट और औद्योगिक कॉरिडोर परियोजनाएं प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भी राहत भरी खबर है, क्योंकि विभिन्न विभागों में भर्ती प्रक्रियाओं को तेज करने की दिशा में प्रयास जारी हैं, जिससे लाखों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश विकास, निवेश, रोजगार और आधुनिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।1
- समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भाजपा मंत्री संजय सिंह गंगावार के विवादित बयान 'जालीबाज टोपी' पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। इस बयान को लेकर समाजवादी कार्यकर्त्ता भड़क उठे हैं। एक प्रेस वार्ता के दौरान समाजवादी पार्टी के दीपराज गुर्जर ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के दस साल के कार्यकाल में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) आरक्षण की भारी लूट हुई है। इस प्रेसवार्ता में भाजपा की कथित 'घोटालेबाज नीतियों' का भी खुलासा किया गया।1
- उरई (जालौन) स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय में एक प्रेस वार्ता के दौरान समाजवादी कार्यकर्त्ता भाजपा मंत्री संजय सिंह गंगावार के विवादित बयान 'जालीबाज टोपी' पर भड़क उठे। इस अवसर पर समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष दीपराज गुर्जर ने भाजपा सरकार के 10 साल के शासनकाल में PDA आरक्षण की भारी लूट का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के 10 साल में आरक्षण का बहुत बड़ा घोटाला हुआ है, जिसमें PDA आरक्षण सीटों पर विभिन्न विभागों में हुई भर्तियों में कुल 11,514 पदों की लूट की गई है। दीपराज गुर्जर ने बताया कि भाजपा सरकार की 10 साल की अवधि में विभिन्न विभागों में 22 परीक्षाएं प्रभावित हुईं और उनमें 11,514 पदों पर धांधली की गई, जिसके उन्होंने आंकड़े भी प्रस्तुत किए। उन्होंने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि 2019 में 69,000 शिक्षक भर्ती में 7,933 पदों की, वन और वन्य जीव रक्षक भर्ती में 88 पदों की, 2021 में बांदा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी भर्ती में 5 पदों की, एडेड जूनियर हाई स्कूल मास्टर और हेड मास्टर भर्ती में 547 पदों की, 2023 में ग्राम पंचायत अधिकारी भर्ती में 232 पदों की, नेत्र परीक्षण अधिकारी भर्ती में 47 पदों की, यूपीएसएससी कनिष्क सहायक लिपिक भर्ती में 300 पदों की और प्रवर्तन कांस्टेबल भर्ती में 34 पदों पर लूट हुई। सांसद नारायण दास अहिरवार ने बताया कि 2024 में लखीमपुर कोऑपरेटिव बैंक भर्ती में 8 पदों पर, यूपीएससी आशुलिपिक भर्ती में 37 पदों पर और यूपीएससी कृषि प्राविधिक सहायक भर्ती में 434 पदों पर लूट हुई। इसी क्रम में, पूर्व मंत्री श्रीराम पाल ने कहा कि वर्ष 2025 में लेखपाल भर्ती में 960 पदों पर, पशु चिकित्सक भर्ती में 81 पदों पर, स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी भर्ती में 55 पदों पर, चिकित्सा अधिकारी आयुर्वेद में 54 पदों पर और चिकित्सा अधिकारी होम्योपैथिक में 2 पदों पर लूट हुई। वहीं, पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेंद्र यादव ने वर्ष 2026 में अमीन, नीलामी कर्ता भर्ती में 19 पदों पर, लिपिक सह टंकड भर्ती में 9 पदों पर, सहायक कोषागार लेखाकार भर्ती में 58 पदों पर, अधिशासी अधिकारी भर्ती में 13 पदों पर, सहायक चकबंदी अधिकारी भर्ती में 10 पदों पर और कृषि प्राविधिक सहायक भर्ती में 588 पदों पर लूट का आरोप लगाया। समाजवादी कुसुम सक्सेना ने कुल 11,514 PDA पदों की लूट की बात को दोहराया, जबकि प्रदेश सचिव वीरेंद्र सिंह यादव ने 2019 की 69,000 शिक्षक भर्ती को सबसे बड़ा घोटाला बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा की 10 साल की सरकार में उत्तर प्रदेश में PDA के आरक्षण पर हमला किया गया है। रश्मि पाल ने भाजपा सरकार को संविधान विरोधी बताते हुए आरोप लगाया कि वह बाबा साहब के संविधान को धीरे-धीरे कमजोर करने की साजिश कर रही है। अन्य समाजवादी नेताओं का कहना था कि अब PDA के लोग इस आरक्षण घोटाले को जान चुके हैं और जब-जब जनमानस की समस्याओं को लेकर आवाज उठाई गई, भाजपा सरकार ने उन पर मुकदमे दर्ज किए। समाजवादी नेताओं ने घोषणा की कि वे आने वाले विधानसभा चुनाव 2027 में भाजपा को प्रदेश से हटाकर समाजवादी पार्टी की सरकार बनाएंगे। उनका कहना है कि तभी आरक्षण की लूट करने वालों की जांच होगी और उन्हें जेल के अंदर भेजा जाएगा। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष दीपराज गुर्जर, सांसद नारायण दास अहिरवार, पूर्व मंत्री श्रीराम पाल, पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेंद्र बजरिया, जमालुद्दीन, पूर्व चेयरमैन मान सिंह वर्मा, वीरेंद्र सिंह यादव, समर सिंह चौहान, अजहर बेग, दीपू त्रिपाठी, ज्ञानू निरंजन, जीवन प्रताप वाल्मीकि, महेंद्र कठेरिया, भानू राजपूत, विवेक यादव, महेश सर द्विवेदी, महेश चंद्र विश्वकर्मा, परमात्मा शरण फौजी, वेद प्रकाश यादव, इमरान उल्ला, कुसुम सक्सेना, रश्मि पाल, रामेंद्र त्रिपाठी, राहुल पिरौना, पंकज दीक्षित, शैलेंद्र श्रीवास, सलमान सिद्दीकी, महेश शिरोमणि, बबलू अहिरवार, गुलाब जाटव, सुनील पाल, कमलेश राठौर, प्रताप सिंह यादव, दशरथ सिंह पाल, जीनू कोरी, आंसू पाल, प्रमोद औंता, बब्बू राजा और देवेंद्र चौधरी आदि सहित कई अन्य नेता व कार्यकर्त्ता उपस्थित रहे।1
- रिंकू लक्ष्कार तुर्का लहचूरा जिला झांसी तहसील टहरौली ब्लॉक गुरसराय थाना फतेहपुर Gorakhpur2