ककोलत जलप्रपात में ओवरलोडिंग का खतरा, पर्यटक खुद दे रहे हादसों को न्योता ककोलत जलप्रपात क्षेत्र में इन दिनों पर्यटकों की भारी भीड़ देखी जा रही है, लेकिन इसके साथ ही गंभीर लापरवाही भी सामने आ रही है। छोटी गाड़ियों में क्षमता से कई गुना अधिक लोगों को बैठाकर ले जाया जा रहा है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है। स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जहां एक गाड़ी में सामान्यतः 8 लोगों की सीट क्षमता होती है, वहीं इन वाहनों में 15 से 20 लोगों को ठूंस-ठूंस कर बैठाया जा रहा है। इतना ही नहीं, कई यात्री गाड़ी के किनारों और छत पर भी बैठकर सफर कर रहे हैं। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि वाहन पूरी तरह अनियंत्रित स्थिति में हैं, और थोड़ी सी चूक बड़े हादसे का कारण बन सकती है। यह स्थिति खासकर पहाड़ी और घुमावदार रास्तों में और भी खतरनाक हो जाती है। स्थानीय प्रशासन की ओर से अब तक इस पर सख्त कार्रवाई न होने से लोगों में नाराज़गी भी देखी जा रही है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो कोई बड़ा हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
ककोलत जलप्रपात में ओवरलोडिंग का खतरा, पर्यटक खुद दे रहे हादसों को न्योता ककोलत जलप्रपात क्षेत्र में इन दिनों पर्यटकों की भारी भीड़ देखी जा रही है, लेकिन इसके साथ ही गंभीर लापरवाही भी सामने आ रही है। छोटी गाड़ियों में क्षमता से कई गुना अधिक लोगों को बैठाकर ले जाया जा रहा है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है। स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों
के अनुसार, जहां एक गाड़ी में सामान्यतः 8 लोगों की सीट क्षमता होती है, वहीं इन वाहनों में 15 से 20 लोगों को ठूंस-ठूंस कर बैठाया जा रहा है। इतना ही नहीं, कई यात्री गाड़ी के किनारों और छत पर भी बैठकर सफर कर रहे हैं। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि वाहन पूरी तरह अनियंत्रित स्थिति में हैं, और थोड़ी सी
चूक बड़े हादसे का कारण बन सकती है। यह स्थिति खासकर पहाड़ी और घुमावदार रास्तों में और भी खतरनाक हो जाती है। स्थानीय प्रशासन की ओर से अब तक इस पर सख्त कार्रवाई न होने से लोगों में नाराज़गी भी देखी जा रही है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो कोई बड़ा हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
- ककोलत जलप्रपात क्षेत्र में इन दिनों पर्यटकों की भारी भीड़ देखी जा रही है, लेकिन इसके साथ ही गंभीर लापरवाही भी सामने आ रही है। छोटी गाड़ियों में क्षमता से कई गुना अधिक लोगों को बैठाकर ले जाया जा रहा है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है। स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जहां एक गाड़ी में सामान्यतः 8 लोगों की सीट क्षमता होती है, वहीं इन वाहनों में 15 से 20 लोगों को ठूंस-ठूंस कर बैठाया जा रहा है। इतना ही नहीं, कई यात्री गाड़ी के किनारों और छत पर भी बैठकर सफर कर रहे हैं। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि वाहन पूरी तरह अनियंत्रित स्थिति में हैं, और थोड़ी सी चूक बड़े हादसे का कारण बन सकती है। यह स्थिति खासकर पहाड़ी और घुमावदार रास्तों में और भी खतरनाक हो जाती है। स्थानीय प्रशासन की ओर से अब तक इस पर सख्त कार्रवाई न होने से लोगों में नाराज़गी भी देखी जा रही है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो कोई बड़ा हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता।3
- राजगीर मलमास मेला में गरीब दुकानदारों के साथ भेदभाव का आरोप, सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाए सवाल संजय वर्मा राजगीर स्थित प्रसिद्ध मलमास मेला, जो हर तीन वर्ष पर राजगीर कुंड के पास आयोजित होता है, देश-विदेश में अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता के लिए जाना जाता है। इस मेले में लाखों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं, जहां उनकी सुविधाओं और पसंद का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस बार भी मेले का टेंडर करोड़ों रुपये में पारित हुआ है और बड़ी संख्या में दुकानदार इसमें अपनी दुकान लगाने के लिए उत्सुक हैं। लेकिन स्थानीय गरीब दुकानदारों ने आरोप लगाया है कि मेले के दौरान उन्हें जबरन हटाकर उनकी जगह पैसे वाले बाहरी दुकानदारों को दी जा रही है। दुकानदारों का कहना है कि वे वर्षों से यहां अपनी दुकान लगाते आ रहे हैं, लेकिन मलमास मेले के समय प्रशासन द्वारा उन्हें हटाकर सिर्फ एक महीने के लिए अमीर व्यापारियों को प्राथमिकता दी जाती है। इसे उन्होंने अन्यायपूर्ण और भेदभावपूर्ण करार दिया है। इस मुद्दे पर दुकानदारों ने दिल्ली से आए स्वतंत्र विचारक एवं समाजसेवी विजय प्रधान से मुलाकात की और अपनी समस्याएं रखीं। विजय प्रधान ने मौके पर पहुंचकर प्रभावित दुकानदारों से बातचीत की और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि यदि दुकानदारों के आरोप सही हैं, तो यह प्रशासनिक स्तर पर गंभीर मामला है। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं न कहीं व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का दायित्व है कि गरीब, वंचित और स्थानीय दुकानदारों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करे। स्थानीय दुकानदारों ने बिहार सरकार और प्रशासन से मांग की है कि उनके साथ हो रहे कथित भेदभाव को रोका जाए और उन्हें भी मेले में दुकान लगाने का समान अवसर दिया जाए। उल्लेखनीय है कि मलमास मेला को राष्ट्रीय मेला घोषित करने की मांग भी लंबे समय से उठती रही है। ऐसे में इस तरह के विवाद प्रशासन के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं।1
- Post by Chandu Yadav1
- बिहार :नवादा खबर बिहार के कश्मीर कहे जाने वाला नवादा जिला के गोविंदपुर के तहत ककोलत जलप्रपात में सैलानिया का काफी भीड़ उमड़ रहे हैं। समाजसेवी ए आर अरबाज ने बताया कि यहां गर्मी के मौसम में हरेक दिन हजारों सैलानियों ककोलत जलप्रपात में ठंडा झरना का लुफ्त उठाने के लिए पहुंच रहे हैं । नेशनल हाईवे 82 गया जी की ओर से वजीरगंज तुंगी, मंझवे , जमुआवां होते हुए मंझवे में सीतामढ़ी मोड़ से महूगांय जरहिया पुल। ,चांदनी मोड़ ,दौलतपुर पुल , फतेहपुर , रजहत, अकबरपुर ,थाली मोड़ से होते हुए ककोलत जाने का मुख्य मार्ग है । आपको बता दे की मंझवे में सीतामढ़ी मोड़ पर ककोलत जाने का प्रवेश द्वार नहीं रहने के कारण सैलानिया लोग नेशनल हाईवे 82 से सीधे हिसुआ -नवादा पहुंच जाते हैं । मंझवे से हिसुआ नवादा फतेहपुर अकबरपुर थाली मोड़ से ककोलत 80 किलोमीटर दूरी पड़ता है। जबकि मंझवे सीतामढ़ी मोड़ से ककोलत 50 किलो मीटर दूरी पड़ता है । नवादा जिला पदाधिकारी व पर्यटन विभाग के पदाधिकारी से मंझवे में सीतामढ़ी मोड़ पर प्रवेश द्वार निर्माण करने की मांग की गई है ।2
- Post by Sunil Kumar journalist1
- Halk puja Hanuman chalisa sangrah you are1
- LPG nahin milane ka rang Kaisa Kaisa birthday3
- sir toilet ke pass ka pani Tanki vhi tute gaya hai ise samshya ka samadhan kare2