मध्यप्रदेश के सिलवानी में एक नए सिविल अस्पताल के निर्माण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि 9 करोड़ रुपये की लागत से एक भव्य इमारत तो खड़ी कर दी गई है, लेकिन यह केवल ऊपरी दिखावा है, जहाँ 'लिपाई-पुताई' के खेल के तहत खोखले सिस्टम की दरारों को छुपाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि मरीजों को आज भी असली इलाज नसीब नहीं हो रहा है। इस नई इमारत को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जिसमें पूछा जा रहा है कि क्या यह सिलवानी का नया सिविल अस्पताल है या मरीजों को सीधे भोपाल रवाना करने वाला एक नया 'वीआईपी रेफरल सेंटर' बन गया है। आरोप है कि इमारत बन गई है, पर इसके अंदर इलाज करने के लिए डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। जनता की मांग है कि उन्हें ईंट-गारे का भव्य दिखावा नहीं, बल्कि मरीजों के लिए वास्तविक उपचार सुविधाएँ मिलें। इसके साथ ही, वीआईपी उद्घाटन की जल्दबाजी में दीवारों की दरारों को छुपाने के प्रयासों पर भी सवाल उठाए गए हैं, जो इस 'खोखले सिस्टम' की सच्चाई को उजागर करता है।
मध्यप्रदेश के सिलवानी में एक नए सिविल अस्पताल के निर्माण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि 9 करोड़ रुपये की लागत से एक भव्य इमारत तो खड़ी कर दी गई है, लेकिन यह केवल ऊपरी दिखावा है, जहाँ 'लिपाई-पुताई' के खेल के तहत खोखले सिस्टम की दरारों को छुपाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि मरीजों को आज भी असली इलाज नसीब नहीं हो रहा है। इस नई इमारत को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जिसमें पूछा जा रहा है कि क्या यह सिलवानी का नया सिविल अस्पताल है या मरीजों को सीधे भोपाल रवाना करने वाला एक नया 'वीआईपी रेफरल सेंटर' बन गया है। आरोप है कि इमारत बन गई है, पर इसके अंदर इलाज करने के लिए डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। जनता की मांग है कि उन्हें ईंट-गारे का भव्य दिखावा नहीं, बल्कि मरीजों के लिए वास्तविक उपचार सुविधाएँ मिलें। इसके साथ ही, वीआईपी उद्घाटन की जल्दबाजी में दीवारों की दरारों को छुपाने के प्रयासों पर भी सवाल उठाए गए हैं, जो इस 'खोखले सिस्टम' की सच्चाई को उजागर करता है।
- अयोध्या के राम मंदिर में हुई चोरी के एक मामले को लेकर स्वामी अविमुक्तेशनंद ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। इस संबंध में उन्होंने जो कुछ कहा है, उसे सुनने के लिए श्रोताओं से आह्वान किया गया है। यह पूरा प्रसंग 'जय शिया राम' के उद्घोष के साथ समाप्त होता है।1
- मध्य प्रदेश के सागर जिले अंतर्गत केसली में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मुख्य आतिथ्य में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में लाड़ली बहना योजना के तहत लाड़ली बहनों के बैंक खातों में राशि का अंतरण किया गया। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण भी किया।1
- मध्य प्रदेश के विदिशा रेलवे स्टेशन पर नर्मदापुरम जाने वाले यात्रियों की भारी भीड़ देखी गई। यह भीड़ कल अमावस्या होने के कारण उमड़ी है, जिसके चलते विदिशा से नर्मदापुरम की ओर जाने वाली सभी रेलगाड़ियों में अत्यधिक यात्री थे और भारी भीड़ दर्ज की गई।1
- इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) और फोगसी सागर शाखा ने चिकित्सा क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान और अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यशाला PICSEP (Programme for Inculcating Culture of Scientific Enquiry and Pursuit) के अंतर्गत आयोजित की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य चिकित्सकों, चिकित्सा शिक्षकों, निजी प्रैक्टिशनरों और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा और अनुसंधान की संस्कृति को विकसित करना था। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, अहमदाबाद के डॉ. सुनील ताम्बवेकर ने साक्ष्य-आधारित चिकित्सा (Evidence-Based Medicine) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक चिकित्सा में केवल रोगों का उपचार ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नवीन शोधों और वैज्ञानिक तथ्यों को समझकर उन्हें व्यवहार में लागू करना भी आवश्यक है। कार्यशाला में शोध विषय चयन, अध्ययन डिज़ाइन, डेटा विश्लेषण, बायोस्टैटिस्टिक्स, वैज्ञानिक लेखन, शोध पत्र प्रकाशन तथा अनुसंधान नैतिकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत जानकारी प्रदान की। फोगसी सागर अध्यक्ष डॉ. ज्योति चौहान ने बताया कि कार्यशाला से प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर मिला कि कैसे एक सामान्य चिकित्सीय प्रश्न को वैज्ञानिक अध्ययन में परिवर्तित कर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए योगदान दिया जा सकता है। वहीं, आईएमए अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने अनुसंधान को न केवल ज्ञान के विस्तार का माध्यम बताया, बल्कि रोगियों को बेहतर एवं प्रमाण-आधारित उपचार उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण साधन भी करार दिया। उन्होंने स्थानीय स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर किए जाने वाले शोधों की आवश्यकता पर भी बल दिया। इस कार्यशाला ने विभिन्न विशेषज्ञताओं के चिकित्सकों को एक साझा मंच प्रदान किया, जहाँ उन्होंने अपने अनुभव साझा किए और सहयोगात्मक शोध परियोजनाओं की संभावनाओं पर चर्चा की। इसके अतिरिक्त, युवा चिकित्सकों और शोधार्थियों को अनुभवी विशेषज्ञों से प्रत्यक्ष मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। आयोजकों के अनुसार, आईएमए और फोगसी सागर शाखा की यह पहल चिकित्सा क्षेत्र में अनुसंधान संस्कृति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो चिकित्सकों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने तथा चिकित्सा विज्ञान में सार्थक योगदान देने के लिए प्रेरित करेगी।1
- मध्यप्रदेश के सिलवानी में एक नए सिविल अस्पताल के निर्माण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि 9 करोड़ रुपये की लागत से एक भव्य इमारत तो खड़ी कर दी गई है, लेकिन यह केवल ऊपरी दिखावा है, जहाँ 'लिपाई-पुताई' के खेल के तहत खोखले सिस्टम की दरारों को छुपाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि मरीजों को आज भी असली इलाज नसीब नहीं हो रहा है। इस नई इमारत को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जिसमें पूछा जा रहा है कि क्या यह सिलवानी का नया सिविल अस्पताल है या मरीजों को सीधे भोपाल रवाना करने वाला एक नया 'वीआईपी रेफरल सेंटर' बन गया है। आरोप है कि इमारत बन गई है, पर इसके अंदर इलाज करने के लिए डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। जनता की मांग है कि उन्हें ईंट-गारे का भव्य दिखावा नहीं, बल्कि मरीजों के लिए वास्तविक उपचार सुविधाएँ मिलें। इसके साथ ही, वीआईपी उद्घाटन की जल्दबाजी में दीवारों की दरारों को छुपाने के प्रयासों पर भी सवाल उठाए गए हैं, जो इस 'खोखले सिस्टम' की सच्चाई को उजागर करता है।1
- नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा में एक दर्दनाक हादसा हो गया, जहाँ एक डंपर की टक्कर से बाइक सवार की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना से स्थानीय ग्रामीणों में भारी गुस्सा भड़क उठा, जिसके बाद उन्होंने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन करते हुए चक्काजाम कर दिया।1
- सागर के जिला मलेरिया कार्यालय में कार्यरत बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता (MPW) श्री सुशील कुमार यादव को उनकी 30 वर्षों की नि:स्वार्थ मानव सेवा और 111 बार रक्तदान के लिए 'रक्तवीर योद्धा सम्मान-2026' से नवाजा गया है। विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर, उन्हें यह सम्मान सागर संभाग के सबसे बड़े जीवनदाता के रूप में प्रदान किया गया, जिन्होंने अब तक 333 से अधिक जिंदगियां बचाने में मदद की है। श्री यादव ने 1996 में 25 वर्ष की आयु में अपने रक्तदान का सफर शुरू किया था, जब उन्होंने जिला अस्पताल में एक गर्भवती महिला को आपातकालीन स्थिति में खून देकर उसकी और नवजात शिशु की जान बचाई थी। इसी घटना ने उनके जीवन का संकल्प निर्धारित किया। अपनी शासकीय ड्यूटी के बाद, उनका पूरा समय मरीजों की सेवा में बीतता है, चाहे वे थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे हों, डेंगू-मलेरिया के मरीज हों या सड़क हादसे के घायल। रात के 2 बजे भी उनका फोन बजने पर वे तुरंत साइकिल या बस से अस्पताल पहुंच जाते हैं। उन्होंने व्यक्त किया कि जब किसी तड़पते मरीज की मां फोन पर 'बेटा बचा लो' कहती है, तो उनकी सारी थकान दूर हो जाती है और रक्तदान से मिलने वाला सुकून किसी पूजा-पाठ से कम नहीं है। इस ऐतिहासिक सम्मान समारोह में, सागर संभाग के 4 शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारियों—क्षेत्रीय संचालक डॉ. नीना गिडियन/डॉ. जितेंद्र सिंह, CMHO डॉ. जी.पी. आर्या, जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. देवेश पटेरिया और ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. महेश जैन ने संयुक्त रूप से उनके प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर किए और उन्हें समाज का 'दानवीर कर्ण' बताया। प्रशासकीय अधिकारी श्री राकेश भारद्वाज और मध्य प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष श्री राम कुमार तिवारी ने बताया कि श्री यादव ने सागर के अलावा भोपाल, इंदौर और उज्जैन में भी आपातकाल में 'O पॉजिटिव' रक्त देकर कई मरीजों की जान बचाई है। कोरोना काल में उन्होंने प्लाज्मा भी डोनेट किया था। 55 वर्ष की आयु में भी पूरी तरह फिट श्री सुशील यादव ने युवाओं को संदेश दिया कि नियमित रक्तदान से शरीर में नया खून बनता है और इससे हार्ट अटैक का खतरा 30 प्रतिशत तक कम हो जाता है, जिसकी पुष्टि ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. महेश जैन ने भी की। 111 बार रक्तदान के बाद भी श्री यादव का अगला लक्ष्य 200 बार रक्तदान का आंकड़ा छूना है, ताकि नई पीढ़ी इससे प्रेरित हो सके। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों के अनुसार वे 65 वर्ष की आयु तक रक्तदान कर सकते हैं और अभी उनके पास 10 साल बाकी हैं। इस अवसर पर जूनियर मलेरिया अधिकारी विशाखा रोहित, अब्दुल रशीद, रोहित नगरिया, बसंत श्रीवास्तव, संदीप विश्वकर्मा, सूरज पटेल, सतीश वेद, अभिषेक यादव, सुमित विश्वकर्मा और बलराम सहित स्वास्थ्य विभाग के अनेक अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।2
- रायसेन में आज रात करीब 11 बजे एक दुखद घटना में, रायसेन निवासी साहिल खान की बिजली का करंट लगने से मृत्यु हो गई। यह घटना भोपाल रोड पर स्थित बाबा पीर फतेह उल्लाह साहब की मजार के पास हुई, जहाँ साहिल खान एक बिजली के डीपी (वितरण ट्रांसफार्मर) के तारों से छेड़छाड़ कर रहे थे। करंट लगने के बाद उन्हें तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।1