बिना सूचना ड्यूटी से गायब रहना बना शगल, हाजिरी रजिस्टर पर पहले ही चढ़ा दिया 4 दिन का CL बहादुरपुर CHC में स्वास्थ्य व्यवस्था 'बीमार', डेंटल हाइजिनिस्ट की मनमानी के आगे सिस्टम लाचार! अजीत मिश्रा (खोजी) बस्ती/बहादुरपुर। जनपद के स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात कुछ कर्मचारी सरकारी तंत्र को अपनी जागीर समझने लगे हैं। ताज़ा मामला बहादुरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) का है, जहाँ तैनात डेंटल हाइजिनिस्ट हरीश कुमार गुप्ता की कार्यशैली विभागीय अनुशासन की धज्जियां उड़ा रही है। साहब की मनमानी ऐसी है कि उन्हें न तो उच्चाधिकारियों का खौफ है और न ही जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी का अहसास। रजिस्टर पर खेल: एडवांस में भर दी छुट्टियाँ मीडिया टीम द्वारा की गई पड़ताल में डेंटल हाइजिनिस्ट के कारनामों की जो पोल खुली है, वह चौंकाने वाली है। हरीश कुमार गुप्ता ने उपस्थिति रजिस्टर पर खेल करते हुए पहले से ही 4 दिनों का आकस्मिक अवकाश (CL) दर्ज कर दिया है। जबकि नियमानुसार, कोई भी सरकारी कर्मचारी एक साथ अधिकतम 3 दिनों का ही CL ले सकता है। 4 दिनों का एडवांस अवकाश चढ़ाना न सिर्फ नियम विरुद्ध है, बल्कि यह विभाग की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े करता है। अधीक्षक को खबर नहीं, साहब हैं 'बेलाम' जानकारी के अनुसार, हरीश कुमार गुप्ता बीते बुधवार को बिना किसी सूचना के ड्यूटी से गायब थे। शनिवार को उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन सोमवार से फिर नदारद हो गए। हद तो तब हो गई जब CHC अधीक्षक पवन वर्मा को इस गायब होने की भनक तक नहीं थी। जब मीडिया टीम ने उनसे फोन पर संपर्क किया, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें कर्मचारी के ड्यूटी से गायब रहने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। विभागीय कार्रवाई की तैयारी अधीक्षक पवन वर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने बताया कि गायब डेंटल हाइजिनिस्ट को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया जा रहा है। यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं मिला, तो उनके विरुद्ध कठोर विभागीय कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।
बिना सूचना ड्यूटी से गायब रहना बना शगल, हाजिरी रजिस्टर पर पहले ही चढ़ा दिया 4 दिन का CL बहादुरपुर CHC में स्वास्थ्य व्यवस्था 'बीमार', डेंटल हाइजिनिस्ट की मनमानी के आगे सिस्टम लाचार! अजीत मिश्रा (खोजी) बस्ती/बहादुरपुर। जनपद के स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात कुछ कर्मचारी सरकारी तंत्र को अपनी जागीर समझने लगे हैं। ताज़ा मामला बहादुरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) का है, जहाँ तैनात डेंटल हाइजिनिस्ट हरीश कुमार गुप्ता की कार्यशैली विभागीय अनुशासन की धज्जियां उड़ा रही है। साहब की मनमानी ऐसी है कि उन्हें न तो उच्चाधिकारियों का खौफ है और न ही जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी का अहसास। रजिस्टर पर खेल: एडवांस में भर दी छुट्टियाँ मीडिया टीम द्वारा की गई पड़ताल में डेंटल हाइजिनिस्ट के कारनामों की जो पोल खुली है, वह चौंकाने वाली है। हरीश कुमार गुप्ता ने उपस्थिति रजिस्टर पर खेल करते हुए पहले से ही 4 दिनों का आकस्मिक अवकाश (CL) दर्ज कर दिया है। जबकि नियमानुसार, कोई भी सरकारी कर्मचारी एक साथ अधिकतम 3 दिनों का ही CL ले सकता है। 4 दिनों का एडवांस अवकाश चढ़ाना न सिर्फ नियम विरुद्ध है, बल्कि यह विभाग की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े करता है। अधीक्षक को खबर नहीं, साहब हैं 'बेलाम' जानकारी के अनुसार, हरीश कुमार गुप्ता बीते बुधवार को बिना किसी सूचना के ड्यूटी से गायब थे। शनिवार को उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन सोमवार से फिर नदारद हो गए। हद तो तब हो गई जब CHC अधीक्षक पवन वर्मा को इस गायब होने की भनक तक नहीं थी। जब मीडिया टीम ने उनसे फोन पर संपर्क किया, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें कर्मचारी के ड्यूटी से गायब रहने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। विभागीय कार्रवाई की तैयारी अधीक्षक पवन वर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने बताया कि गायब डेंटल हाइजिनिस्ट को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया जा रहा है। यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं मिला, तो उनके विरुद्ध कठोर विभागीय कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।
- बस्ती मंडल ब्यूरो रिपोर्ट: भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा बस्ती: खाकी के हक पर 'खादी' का डाका; पुलिस चौकी की जमीन डकार गए रसूखदार! लेखपाल और राजस्व निरीक्षक की जुगलबंदी ने सरकारी बंजर को बनाया निजी जागीर, भाकियू ने खोला मोर्चा बस्ती। जनपद में भ्रष्टाचार का एक ऐसा नंगा नाच सामने आया है, जहाँ कानून के रखवालों के लिए प्रस्तावित जमीन को ही भू-माफियाओं ने निगल लिया। तहसील प्रशासन और राजस्व विभाग की मिलीभगत से सरकारी बंजर भूमि, जो पुलिस चौकी के लिए आरक्षित थी, उस पर प्रधान पति और उनके सिपहसालारों ने अवैध तरीके से महल खड़ा कर दिया है। मामला उजागर होते ही प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। फर्जीवाड़े का 'मास्टरप्लान': मुर्दे के नाम पर खेल हैरतअंगेज बात यह है कि इस करोड़ों की जमीन को ठिकाने लगाने के लिए बकायदा 'कूटरचित' जाल बुना गया। आरोप है कि तत्कालीन लेखपाल और पूर्व राजस्व निरीक्षक के संरक्षण में जुगुरता देवी नामक महिला के नाम पर फर्जी तरीके से पट्टा करा दिया गया। गौरतलब है कि जुगुरता देवी के पास पहले से ही लाखों की संपत्ति और मकान मौजूद था, फिर भी नियमों को ताक पर रखकर यह खेल खेला गया। हद तो तब हो गई जब जुगुरता देवी की मृत्यु के बाद वर्तमान प्रधान पूजा देवी के पति इंद्र कुमार चौधरी और उनके सहयोगी दुर्गा प्रसाद अग्रहरि ने उस जमीन पर कब्जा कर लिया और आनन-फानन में मकान खड़ा कर उसे किराए पर चढ़ाकर अपनी तिजोरियां भरनी शुरू कर दीं। करोड़ों का वारा-न्यारा, रक्षक ही बने भक्षक भारतीय किसान यूनियन के जिला उपाध्यक्ष उमेष गोस्वामी ने इस पूरे प्रकरण पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सीधे तौर पर लेखपाल और पूर्व राजस्व निरीक्षक को इस 'जमीन घोटाले' का मुख्य सूत्रधार बताया है। गोस्वामी का आरोप है कि सरकारी तंत्र के इन पुर्जों ने चंद पैसों की खातिर सरकार की ही जमीन का सौदा कर दिया। जिस जमीन पर पुलिस चौकी बननी थी, आज वहाँ भू-माफियाओं का अवैध साम्राज्य खड़ा है। भाकियू की चेतावनी: 'चलेगा बुलडोजर, तभी मिलेगा न्याय' भाकियू नेता उमेश गोस्वामी ने दो टूक शब्दों में शासन-प्रशासन को चेतावनी दी है। उन्होंने मांग की है कि इस अवैध निर्माण को तत्काल बुलडोजर से ध्वस्त कर जमीन को वापस सरकारी कब्जे में लिया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर भ्रष्ट अधिकारियों और कब्जाधारकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो संगठन बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होगा। ब्यूरो रिपोर्ट: अजीत मिश्रा (खोजी) बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश1
- 🚨 ब्रेकिंग न्यूज़ 🚨 कोतवाली खलीलाबाद के टेमा चौराहे के पास बोलेरो में लगी भीषण आग, एक युवक गंभीर रूप से झुलसा टेमा चौराहे के पास उस समय हड़कंप मच गया जब एक डीसीएम से टक्कर के बाद चलती बोलेरो गाड़ी में अचानक भीषण आग लग गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गाड़ी में सवार सभी लोग खलीलाबाद से बस्ती एक शादी समारोह से वापस आ रहे थे । सूत्र के अनुसार सभी बुलेरो सवार खलीलाबाद के बताए जा रहे हैं। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों की मदद से किसी तरह घायलों को बाहर निकाला गया। सभी घायलों को तत्काल एंबुलेंस की सहायता से बस्ती सदर अस्पताल भेजा गया। बताया जा रहा है कि घायलों में एक युवक मनोज की हालत बेहद गंभीर है। वह आग की चपेट में आने से बुरी तरह झुलस गया, उसके शरीर का आधा हिस्सा आग से प्रभावित हुआ है। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। फिलहाल घटना के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है, लेकिन प्रारंभिक आशंका शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी की जताई जा रही है।2
- संतकबीरनगर। पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने पुलिस लाइन स्थित जीर्णोद्धारित पुलिस कैंटीन का फीता काटकर उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कैंटीन का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं एवं वस्तुओं की गुणवत्ता का जायजा लिया। उद्घाटन के बाद पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पुलिस बल की कार्यक्षमता उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। ड्यूटी की व्यस्तता के बीच कर्मियों को आवश्यक सुविधाएं सहजता से उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि यह कैंटीन पुलिस कर्मियों और उनके परिवारों के लिए उपयोगी साबित होगी। उन्होंने बताया कि कैंटीन का मुख्य उद्देश्य पुलिस कर्मियों एवं उनके परिजनों को रियायती दरों पर उच्च गुणवत्ता की दैनिक उपयोग की वस्तुएं एवं खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है। जीर्णोद्धार के बाद कैंटीन को आधुनिक रूप दिया गया है। इसमें सामानों के बेहतर रख-रखाव के लिए रैक, बैठने की समुचित व्यवस्था तथा डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। पुलिस अधीक्षक ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि कैंटीन में उपलब्ध वस्तुओं की गुणवत्ता और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि कर्मियों को बेहतर सेवाएं मिल सकें। #SantKabirNagar #PoliceNews #UPPolice #SandeepKumarMeena #PoliceCanteen #Inauguration #PublicService #PoliceWelfare #DigitalIndia #GoodGovernance #NewsUpdate #hindinewsupdate #liveuponenews2
- *थाना मेंहदावल अन्तर्गत सोनवरसा रोडवेज बस स्टैंड के पास दो पक्षों के मध्य मारपीट की घटना घटित होने व पुलिस द्वारा कृत कार्यवाही के सम्बन्ध में क्षेत्राधिकारी मेंहदावल द्वारा दी गयी जानकारी1
- पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना द्वारा पुलिस लाइन संतकबीरनगर के परिसर में स्थित जीर्णोद्धार कराए गए पुलिस कैंटीन का फीता काटकर उद्घाटन किया गया तथा कैंटीन का निरीक्षण किया और वहां उपलब्ध सुविधाओं एवं गुणवत्ता का जायजा लिया । उद्घाटन के उपरांत पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पुलिस बल की कार्यक्षमता उनके मानसिक और शारीरिक कल्याण पर निर्भर करती है। ड्यूटी की व्यस्तता के बीच पुलिस कर्मियों को बुनियादी सुविधाएं आसानी से मिल सकें, इसके लिए पुलिस प्रशासन सदैव प्रयासरत है । यह कैंटीन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है । उद्देश्य पुलिस कर्मियों और उनके परिवारों के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए, उन्हें रियायती दरों पर उच्च गुणवत्ता वाली दैनिक उपयोगी वस्तुएं और खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना । सुविधाएं जीर्णोद्धार के पश्चात कैंटीन को आधुनिक स्वरूप दिया गया है। इसमें सामानों के रख-रखाव के लिए बेहतर रैक, बैठने की समुचित व्यवस्था और डिजिटल भुगतान की सुविधा सुनिश्चित की गई है । गुणवत्ता पर जोर उद्घाटन के दौरान पुलिस अधीक्षक ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि कैंटीन में सामानों की शुद्धता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए ।4
- Post by 24News उत्तर प्रदेश1
- Post by रवि चन्द्र पत्रकार1
- अजीत मिश्रा (खोजी) साहब की चाय पर सक्रिय, पर 'जहरीले' पनीर पर मौन: क्या फूड विभाग का ईमान बिक चुका है? ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश) "रामा स्वीट हाउस की दबंगई: 'जो उखाड़ना है उखाड़ लो', आखिर किसका संरक्षण है मिलावटखोरों को?" "साहब की गाड़ी आती है, हिस्सा लेती है और निकल जाती है... बस्ती में फूड विभाग बना 'वसूली विभाग'!" "नकली पनीर की मंडी बना चिलमा बाजार: मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बाद क्या जागेगा कुंभकर्णी प्रशासन?" "बस्ती: अखिलेश यादव को चाय पिलाने वाले की जांच, लेकिन नकली सामान बेचने वालों को खुली छूट क्यों?" "रामा स्वीट हाउस की तीन दुकानों पर मिलावट का खेल, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने से मचा हड़कंप।" बस्ती। उत्तर प्रदेश का खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (FSDA) इन दिनों अपनी कार्यशैली को लेकर कम और अपनी 'खास' सक्रियता को लेकर ज्यादा चर्चा में है। ताज़ा मामला विभाग के दोहरे चरित्र को उजागर करता है। एक तरफ विभाग उस शख्स की जांच करने में पूरी ताकत झोंक देता है जिसने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को चाय पिलाई थी, वहीं दूसरी तरफ बस्ती जिले के चिलमा बाजार में खुलेआम बिक रहा 'सफेद जहर' यानी नकली पनीर विभाग को दिखाई नहीं दे रहा। दुबौलिया: 'कमीशन' के खेल में दांव पर जनता की जान दुबौलिया थाना क्षेत्र के चिलमा बाजार से लगातार नकली पनीर और मिलावटी सामान की बिक्री की खबरें आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि फूड विभाग की गाड़ी जब इलाके में आती है, तो हड़कंप मचने के बजाय एक 'सेट खेल' शुरू होता है। गाड़ी देखते ही दुकानें कुछ देर के लिए बंद होती हैं, कथित तौर पर 'हिस्सा' पहुँचता है और फिर गाड़ी रफूचक्कर हो जाती है। इसके बाद मिलावट का काला कारोबार फिर से सरपट दौड़ने लगता है। "फूड विभाग को मिलता रहे अपना हिस्सा, भाड़ में जाए जनता" — यह जुमला आज चिलमा बाजार के हर आम आदमी की जुबान पर है। रामा स्वीट हाउस: बेखौफ मिलावटखोरी और गुंडागर्दी चिलमा बाजार स्थित रामा स्वीट हाउस और इसकी संचालित तीनों शाखाएं इस समय शिकायतों के केंद्र में हैं। दबंगई का आलम: एक माह पहले जब एक जागरूक ग्राहक ने खराब सामान की शिकायत की, तो दुकानदार ने सुधार करने के बजाय धमकी दी— "जाओ जांच करा लो, जो उखाड़ना हो उखाड़ लेना।" * सोशल मीडिया पर वायरल: कल फिर एक ग्राहक को नकली पनीर थमा दिया गया। पीड़ित ने जब इसका विरोध किया और वीडियो सोशल मीडिया पर डाला, तो वह वायरल हो गया। दुकानदार की इस बेखौफी से साफ है कि उसे विभाग के 'आशीर्वाद' पर पूरा भरोसा है। पोर्टल पर पहुंची शिकायत, क्या जागेगा प्रशासन? थक-हारकर पीड़ित ग्राहक ने अब मुख्यमंत्री पोर्टल पर नकली पनीर और मिलावटी सामान की लिखित शिकायत दर्ज कराई है। अब सवाल यह उठता है कि: क्या विभाग केवल राजनीतिक रसूख वाले मामलों में ही अपनी फुर्ती दिखाएगा? क्या चिलमा बाजार के बच्चों और आम जनता की जान की कीमत विभाग के 'हिस्से' से कम है? क्या रामा स्वीट हाउस जैसे संस्थानों पर नकेल कसी जाएगी या फिर 'हिस्सा' बढ़ाकर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा? निष्कर्ष: जनता अब तमाशा देख रही है। अगर मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बाद भी चिलमा बाजार में नकली पनीर की बिक्री बंद नहीं हुई और रामा स्वीट हाउस के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि बस्ती का फूड विभाग मिलावटखोरों का संरक्षक बन चुका है।1