उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद अंतर्गत नैमिषारण्य थाना क्षेत्र के रामपुर खेवटा गांव में एक प्रेमी युगल के शव एक ही दुपट्टे में लटके मिलने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। शनिवार सुबह करीब 9 बजे गांव के बाहर एक आम के पेड़ से लटके मिले इन शवों की पहचान गांव निवासी प्रियवंश पुत्र रामू और रजनी पुत्री मलखान के रूप में हुई है, जिनके बीच प्रेम संबंध बताया जा रहा है। अधिकारियों द्वारा जारी बयान में बताया गया है कि यह प्रेमी युगल शुक्रवार देर रात से लापता था। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल पर आम के पेड़ में दोनों के शव एक ही दुपट्टे के दो फंदों के सहारे लटके मिले, साथ ही बिंदी, सिंदूर और अन्य श्रृंगार सामग्री भी बरामद हुई है, जिसके कारण इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद अंतर्गत नैमिषारण्य थाना क्षेत्र के रामपुर खेवटा गांव में एक प्रेमी युगल के शव एक ही दुपट्टे में लटके मिलने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। शनिवार सुबह करीब 9 बजे गांव के बाहर एक आम के पेड़ से लटके मिले इन शवों की पहचान गांव निवासी प्रियवंश पुत्र रामू और रजनी पुत्री मलखान के रूप में हुई है, जिनके बीच प्रेम संबंध बताया जा रहा है। अधिकारियों द्वारा जारी बयान में बताया गया है कि यह प्रेमी युगल शुक्रवार देर रात से लापता था। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल पर आम के पेड़ में दोनों के शव एक ही दुपट्टे के दो फंदों के सहारे लटके मिले, साथ ही बिंदी, सिंदूर और अन्य श्रृंगार सामग्री भी बरामद हुई है, जिसके कारण इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
- उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद अंतर्गत नैमिषारण्य थाना क्षेत्र के रामपुर खेवटा गांव में एक प्रेमी युगल के शव एक ही दुपट्टे में लटके मिलने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। शनिवार सुबह करीब 9 बजे गांव के बाहर एक आम के पेड़ से लटके मिले इन शवों की पहचान गांव निवासी प्रियवंश पुत्र रामू और रजनी पुत्री मलखान के रूप में हुई है, जिनके बीच प्रेम संबंध बताया जा रहा है। अधिकारियों द्वारा जारी बयान में बताया गया है कि यह प्रेमी युगल शुक्रवार देर रात से लापता था। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल पर आम के पेड़ में दोनों के शव एक ही दुपट्टे के दो फंदों के सहारे लटके मिले, साथ ही बिंदी, सिंदूर और अन्य श्रृंगार सामग्री भी बरामद हुई है, जिसके कारण इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।2
- सीतापुर जिले के ग्रामीण क्षेत्र के नरहरियापुर गाँव, पोस्ट तिहार में, नाले पर पत्थर न बिछाए जाने के कारण प्रतिदिन दुर्घटनाएँ हो रही हैं। यह समस्या लगातार बनी हुई है और आए दिन अप्रिय घटनाओं का कारण बन रही है।1
- जनपद सीतापुर के कोतवाली लहरपुर क्षेत्र में चोरों ने एक होटल को निशाना बनाया है। चोरों ने ताला काटकर चोरी की वारदात को अंजाम दिया, जिसके बाद पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।1
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के हुगली स्थित तारकेश्वर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की तेईसवीं किस्त सीधे किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित की। इस महत्वपूर्ण अवसर पर, लखीमपुर खीरी जिले के मितौली विकासखंड सभागार में इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दिखाया गया, जिसे क्षेत्र के किसानों ने बड़ी संख्या में देखा और सुना। कार्यक्रम के दौरान, एडीओ नैमिष यादव ने मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों को पुष्पगुच्छ व स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। एडीओ पंचायत प्रमोद कुमार ने किसानों को संबोधित करते हुए उन्हें अन्नदाता बताया और इस बात पर जोर दिया कि किसानों के सम्मान व उनकी खेती को सुचारु रूप से चलाने में मदद के लिए हर वर्ष 6000 रुपये दिए जाते हैं। उन्होंने सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी किसानों के साथ साझा की। इसी कड़ी में, एडीओ कृषि नैमिष यादव ने सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी और उपस्थित किसानों को सम्मानित करते हुए कहा कि ऐसी योजनाएं किसानों को समृद्ध और सुखी बनाने में सहायक होंगी। इस पूरे कार्यक्रम का संचालन बीटी कृषि हरजेश कुमार ने कुशलतापूर्वक किया। इस आयोजन में मंडल अध्यक्ष कस्ता कौशल बाजपेई, अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला अध्यक्ष समसाद अली, भाजपा मीडिया प्रभारी सुरेश शुक्ल, संदीप वर्मा, मुदित दीक्षित सहित मितौली क्षेत्र के कई सम्मानित किसान मौजूद रहे।3
- प्रदेश सरकार द्वारा लागू की जा रही ई-पंजीकरण (ई-रजिस्ट्री) व्यवस्था के विरोध में शनिवार को सीतापुर में बैनामा लेखक, स्टांप विक्रेता, मुंशी और कंप्यूटर ऑपरेटरों ने मोर्चा खोल दिया। रजिस्ट्री कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों ने धरना देकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और नई व्यवस्था को तुरंत वापस लेने की मांग की। धरने पर बैठे बैनामा लेखकों और स्टांप विक्रेताओं का आरोप है कि ई-पंजीकरण प्रणाली लागू होने से उनका रोजगार पूरी तरह छिन जाएगा। उनके अनुसार, ऑनलाइन प्रक्रिया हजारों लोगों के सामने बेरोजगारी का संकट खड़ा कर देगी जो वर्षों से इस कार्य से जुड़े हैं। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि सरकार को डिजिटल व्यवस्था लाने से पहले उन लोगों के भविष्य की चिंता करनी चाहिए, और इस नई प्रणाली से आम लोगों को भी तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इसी मुद्दे को लेकर प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस अनिश्चितकालीन धरने के चलते सीतापुर रजिस्ट्री कार्यालय का कामकाज पूरी तरह प्रभावित रहा, जिससे अपने दस्तावेजों संबंधी कार्यों के लिए आए लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी और उन्हें इंतजार करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और भी तेज किया जाएगा तथा पूरे प्रदेश में एक व्यापक संघर्ष छेड़ा जाएगा। धरना स्थल से नेताओं और कर्मचारियों ने एक स्वर में 'रोजगार बचाओ, ई-रजिस्ट्री वापस लो' का नारा बुलंद किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक यह अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।2
- मंच पर उन छात्रों के पोस्टर लगाए गए, जिन्होंने आत्महत्या कर ली थी, जिसके साथ ही शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई। इसी संबंध में, दीपके ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने आत्महत्या करने वाले नीट (NEET) छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की है।1
- सीतापुर के ग्रामीण क्षेत्र में नालों पर पत्थरों की मौजूदगी के कारण और पानी न भरने की समस्या के चलते आए दिन विभिन्न घटनाएँ हो रही हैं। यह स्थिति स्थानीय निवासियों के लिए लगातार परेशानियों का सबब बन रही है।1
- सीतापुर की भार्गव कॉलोनी में स्थानीय निवासियों के लिए स्थिति बेहद खराब हो गई है, जहाँ मुख्य मार्ग अब एक 'गंदे नाले' में तब्दील हो गया है। इन नरकीय हालात के कारण लोगों का घरों से पैदल निकलना तक मुश्किल हो गया है। विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गंदे पानी के बीच से होकर गुजरने के कारण लोग संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।1