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फर्रुखाबाद ब्यूरो रिपोर्ट राजपुर ब्लॉक के कुतलूपुर कुबेरपुर और कुसमापुर गांव को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग पर बाढ़ से टूटी पुलिया और सड़क का निर्माण कार्य शुरू हो गया है
द कहर न्यूज़ एजेंसी
फर्रुखाबाद ब्यूरो रिपोर्ट राजपुर ब्लॉक के कुतलूपुर कुबेरपुर और कुसमापुर गांव को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग पर बाढ़ से टूटी पुलिया और सड़क का निर्माण कार्य शुरू हो गया है
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- फर्रुखाबाद। कस्बा अमृतपुर में बदायूं मार्ग से मंत्री जी के आवास तक जाने वाली मुख्य सड़क की हालत बद से बदतर हो चुकी है। लगभग 700 मीटर लंबी इस सड़क पर अनेकों गहरे गड्ढे बने हुए हैं, जिनमें नालों का पानी भरा रहता है। इसके चलते आने-जाने वाले लोगों और वाहनों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार को इस सड़क की बदहाली उस समय फिर सामने आ गई जब एक वाहन गहरे गड्ढे में फंस गया। काफी देर तक मशक्कत के बाद वाहन को बाहर निकाला जा सका। इस घटना से स्थानीय लोगों में रोष व्याप्त है और उन्होंने जल्द सड़क निर्माण की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर जलभराव बने रहने से न केवल आवागमन बाधित हो रहा है, बल्कि इससे संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। गंदे पानी के कारण आसपास के लोग, खासकर बच्चे, बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। सड़क के किनारे घनी आबादी होने के कारण स्कूली बच्चों को भी स्कूल आने-जाने में काफी परेशानी होती है। बताया जाता है कि इस सड़क के निर्माण को लेकर जिला पंचायत सदस्य अजय कुमार सिंह चौहान उर्फ लल्ला भैया द्वारा तहसील दिवस में जिलाधिकारी फर्रुखाबाद को पत्र दिया गया था। साथ ही विभिन्न समाचार पत्रों में भी इस समस्या को प्रमुखता से उठाया गया, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सूत्रों के अनुसार, यह सड़क मंडी समिति के अंतर्गत आती है। मंडी समिति द्वारा लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को पत्र भेजा गया था, लेकिन विभागीय प्रक्रिया में मामला उलझा हुआ है, जिससे सड़क की मरम्मत अब तक नहीं हो सकी है। पत्रकारों द्वारा मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार गौड़ को भी सड़क की बदहाल स्थिति से अवगत कराया गया है। बावजूद इसके, समस्या जस की तस बनी हुई है और क्षेत्रवासी प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।3
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- फर्रुखाबाद, 08 अप्रैल (बुधवार)। विकास खंड राजेपुर के पूर्व माध्यमिक संविलियन विद्यालय कुम्हरौर में बुधवार को खंड शिक्षा अधिकारियों की टीम ने निरीक्षण कर विभिन्न अनियमितताओं की जांच की। यह जांच बेसिक शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर कराई गई, जिसमें प्रधानाचार्य आशीष पर कोविड काल के दौरान धन निकासी और छात्रों की उपस्थिति अधिक दर्शाने के आरोपों की पड़ताल की गई। खंड शिक्षा अधिकारी नवाबगंज अमर सिंह राणा एवं शमशाबाद के बीरेंद्र सिंह पटेल शिकायत कर्ता गजेंद्र सिंह पुत्र राजेंद्र सिंह, मृदुल कुमार, प्रिया रानी की शिकायत पर सुबह विद्यालय पहुंचे और ग्रामीणों व शिक्षकों की मौजूदगी में अभिलेखों की गहन जांच की। अधिकारियों ने बताया कि कोविड अवधि में खर्च किए गए धन और विद्यार्थियों की उपस्थिति को लेकर शिकायत मिली थी, जिसकी जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट शीघ्र ही बेसिक शिक्षा अधिकारी को सौंपी जाएगी। निरीक्षण के दौरान विद्यालय की स्थिति पर अधिकारियों ने गहरी चिंता जताई। उन्होंने पाया कि कम्पोजिट ग्रांट मिलने के बावजूद विद्यालय में समुचित विकास कार्य नहीं कराए गए। यहां तक कि ग्रीन बोर्ड भी व्यवस्थित नहीं मिले। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जर्जर भवन में आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों को बैठाया जा रहा है, जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता है। इस संबंध में आंगनबाड़ी कार्यकत्री रामबेटी और सहायिका हंसमुखी ने बताया कि केंद्र भवन तो बना है, लेकिन उसमें खिड़की-दरवाजे नहीं लगे हैं, जिससे मजबूरन बच्चों को विद्यालय में बैठाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि केंद्र पर 60 बच्चे पंजीकृत हैं, जिनमें से 30 बच्चे बुधवार को उपस्थित रहे। विद्यालय परिसर में करीब चार जर्जर भवन लंबे समय से खड़े हैं, जिन पर ‘जर्जर’ लिखा होने के बावजूद विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इन भवनों के आसपास गंदगी और झाड़ियों का अंबार लगा है, जिससे बच्चों के बीमार होने का खतरा भी बना हुआ है। नीलामी प्रक्रिया को लेकर भी लापरवाही सामने आई है। बताया गया कि भवनों की वास्तविक कीमत से अधिक, लगभग 6 लाख रुपये की नीलामी राशि निर्धारित कर दी गई, जिसके चलते अब तक कोई भी भवन नीलाम नहीं हो सका। यही कारण है कि यह विद्यालय विकास खंड के सबसे बदहाल स्कूलों में गिना जा रहा है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और विद्यालय की स्थिति सुधारने के लिए उचित कदम उठाए4