कैमूर/बिहार, जर्जर भवन में खतरे के साए में काम करने को मजबूर महिला कर्मी: समेकित बाल विकास परियोजना कार्यालय का हाल बेहाल, छत से टपकता है पानी कैमूर। मोहनियां स्थित समेकित बाल विकास परियोजना कार्यालय की जर्जर इमारत में कार्यरत महिला कर्मियों को इन दिनों हर समय हादसे का डर सता रहा है। भवन की छत और दीवारों का प्लास्टर लगातार उखड़कर गिर रहा है। वहीं बारिश के दौरान छत से पानी टपकने के कारण कार्यालय का कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। वही कर्मचारियों के अनुसार, कई बार प्लास्टर के भारी टुकड़े टेबल-कुर्सियों के आसपास गिर चुके हैं। ऐसे में किसी भी समय गंभीर हादसा होने की आशंका बनी हुई है। मानसून के दौरान कमरों में पानी जमा होने से सरकारी फाइलों और जरूरी दस्तावेजों के भी खराब होने का खतरा बना हुआ है। वही महिला कर्मियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि जर्जर भवन की समस्या को लेकर कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दी गई है। बताया गया कि प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) द्वारा कार्यालय का निरीक्षण भी किया गया, लेकिन अब तक स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है। इस संबंध में प्रभारी सीडीपीओ प्रिया कुमारी ने भवन की स्थिति बेहद खराब होने की बात स्वीकार की। उन्होंने बताया कि भवन को लेकर विभागीय स्तर पर कई बार पत्राचार किया गया है और जिला पदाधिकारी को भी इसकी जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि वैकल्पिक भवन की व्यवस्था होते ही कार्यालय को दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया जाएगा। वहीं महिला पर्यवेक्षिका प्रतिमा कुमारी, कुंता देवी तथा आंगनबाड़ी सेविका शकीला खातून सहित अन्य कर्मियों ने भी जर्जर भवन की समस्या को लेकर चिंता जताई है। अब सवाल यह उठता है कि प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था होने तक कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है। जर्जर भवन में लगातार काम करना कर्मचारियों के लिए जोखिम भरा बना हुआ है। ऐसे में कार्यालय को जल्द सुरक्षित भवन में स्थानांतरित किए जाने की मांग जोर पकड़ रही है।
कैमूर/बिहार, जर्जर भवन में खतरे के साए में काम करने को मजबूर महिला कर्मी: समेकित बाल विकास परियोजना कार्यालय का हाल बेहाल, छत से टपकता है पानी कैमूर। मोहनियां स्थित समेकित बाल विकास परियोजना कार्यालय की जर्जर इमारत में कार्यरत महिला कर्मियों को इन दिनों हर समय हादसे का डर सता रहा है। भवन की छत और दीवारों का प्लास्टर लगातार उखड़कर गिर रहा है। वहीं बारिश के दौरान छत से पानी टपकने के कारण कार्यालय का कामकाज भी प्रभावित हो रहा
है। वही कर्मचारियों के अनुसार, कई बार प्लास्टर के भारी टुकड़े टेबल-कुर्सियों के आसपास गिर चुके हैं। ऐसे में किसी भी समय गंभीर हादसा होने की आशंका बनी हुई है। मानसून के दौरान कमरों में पानी जमा होने से सरकारी फाइलों और जरूरी दस्तावेजों के भी खराब होने का खतरा बना हुआ है। वही महिला कर्मियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि जर्जर भवन की समस्या को लेकर कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दी गई है। बताया गया कि
प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) द्वारा कार्यालय का निरीक्षण भी किया गया, लेकिन अब तक स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है। इस संबंध में प्रभारी सीडीपीओ प्रिया कुमारी ने भवन की स्थिति बेहद खराब होने की बात स्वीकार की। उन्होंने बताया कि भवन को लेकर विभागीय स्तर पर कई बार पत्राचार किया गया है और जिला पदाधिकारी को भी इसकी जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि वैकल्पिक भवन की व्यवस्था होते ही कार्यालय को दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया
जाएगा। वहीं महिला पर्यवेक्षिका प्रतिमा कुमारी, कुंता देवी तथा आंगनबाड़ी सेविका शकीला खातून सहित अन्य कर्मियों ने भी जर्जर भवन की समस्या को लेकर चिंता जताई है। अब सवाल यह उठता है कि प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था होने तक कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है। जर्जर भवन में लगातार काम करना कर्मचारियों के लिए जोखिम भरा बना हुआ है। ऐसे में कार्यालय को जल्द सुरक्षित भवन में स्थानांतरित किए जाने की मांग जोर पकड़ रही है।
- कैमूर/बिहार, जर्जर भवन में खतरे के साए में काम करने को मजबूर महिला कर्मी: समेकित बाल विकास परियोजना कार्यालय का हाल बेहाल, छत से टपकता है पानी कैमूर। मोहनियां स्थित समेकित बाल विकास परियोजना कार्यालय की जर्जर इमारत में कार्यरत महिला कर्मियों को इन दिनों हर समय हादसे का डर सता रहा है। भवन की छत और दीवारों का प्लास्टर लगातार उखड़कर गिर रहा है। वहीं बारिश के दौरान छत से पानी टपकने के कारण कार्यालय का कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। वही कर्मचारियों के अनुसार, कई बार प्लास्टर के भारी टुकड़े टेबल-कुर्सियों के आसपास गिर चुके हैं। ऐसे में किसी भी समय गंभीर हादसा होने की आशंका बनी हुई है। मानसून के दौरान कमरों में पानी जमा होने से सरकारी फाइलों और जरूरी दस्तावेजों के भी खराब होने का खतरा बना हुआ है। वही महिला कर्मियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि जर्जर भवन की समस्या को लेकर कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दी गई है। बताया गया कि प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) द्वारा कार्यालय का निरीक्षण भी किया गया, लेकिन अब तक स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है। इस संबंध में प्रभारी सीडीपीओ प्रिया कुमारी ने भवन की स्थिति बेहद खराब होने की बात स्वीकार की। उन्होंने बताया कि भवन को लेकर विभागीय स्तर पर कई बार पत्राचार किया गया है और जिला पदाधिकारी को भी इसकी जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि वैकल्पिक भवन की व्यवस्था होते ही कार्यालय को दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया जाएगा। वहीं महिला पर्यवेक्षिका प्रतिमा कुमारी, कुंता देवी तथा आंगनबाड़ी सेविका शकीला खातून सहित अन्य कर्मियों ने भी जर्जर भवन की समस्या को लेकर चिंता जताई है। अब सवाल यह उठता है कि प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था होने तक कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है। जर्जर भवन में लगातार काम करना कर्मचारियों के लिए जोखिम भरा बना हुआ है। ऐसे में कार्यालय को जल्द सुरक्षित भवन में स्थानांतरित किए जाने की मांग जोर पकड़ रही है।4
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- Bihar Dustbin Ghotala #healthminister #BiharNews #biharyouth #awaazebharat1
- *वर्षों से जलमग्न है ग्राम–पोरा, मरीजों को खटिया पर टांगकर ले जाने की मजबूरी!* 📍 जिला -रोहतास अंचल - चेनारी खुर्माबाद पंचायत के ग्राम–पोरा में पिछले लगभग 10 वर्षों से जलजमाव की गंभीर समस्या बनी हुई है। गाँव की सड़कें पानी में डूबी रहने के कारण ग्रामीणों का सामान्य आवागमन तक बाधित है। *वर्षों से जलमग्न है ग्राम–पोरा, मरीजों को खटिया पर टांगकर ले जाने की मजबूरी!* 📍 जिला -रोहतास अंचल - चेनारी खुर्माबाद पंचायत के ग्राम–पोरा में पिछले लगभग 10 वर्षों से जलजमाव की गंभीर समस्या बनी हुई है। गाँव की सड़कें पानी में डूबी रहने के कारण ग्रामीणों का सामान्य आवागमन तक बाधित है। 😢 हालात इतने गंभीर हैं कि बीमार मरीजों को खटिया पर टांगकर पानी के बीच से ले जाने की मजबूरी है। वहीं स्कूली बच्चों का विद्यालय जाना भी लंबे समय से प्रभावित है। 10 वर्षों से समस्या जस की तस है। आखिर कब जागेगा प्रशासन? यह सिर्फ सड़क और जलजमाव की समस्या नहीं है, बल्कि ग्रामीणों के जीवन, स्वास्थ्य और बच्चों के भविष्य का सवाल है। 🙏 प्रशासन से मांग है कि ग्राम–पोरा में तत्काल जलनिकासी और स्थायी सड़क निर्माण की व्यवस्था कर ग्रामीणों को इस नारकीय स्थिति से मुक्ति दिलाई जाए।1
- Photography School की ओर से चकिया में धूमधाम से मनाया गया विश्व छायांकन दिवस चकिया (चंदौली)। विश्व छायांकन दिवस के अवसर पर Photography School की ओर से 19 अगस्त को चाकिया स्थित सम्राट लॉन में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में चंदौली, मिर्जापुर, सोनभद्र और वाराणसी जनपदों से आए 100 से अधिक फोटोग्राफर एवं चित्रकार बंधुओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके बाद अतिथियों ने उपस्थित फोटोग्राफर एवं छायाकार बंधुओं को विश्व छायांकन दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में चकिया थाना अध्यक्ष अर्जुन सिंह के साथ डॉ. कुंदन समेत अन्य मुख्य अतिथि मौजूद रहे। इस दौरान थाना अध्यक्ष अर्जुन सिंह ने 100 से अधिक छायाकार बंधुओं को संबोधित करते हुए कहा कि “ पुलिस से पहले फोटोग्राफी है।” उन्होंने कहा कि किसी भी घटना को समाज के सामने वास्तविक रूप में प्रस्तुत करने में फोटोग्राफर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। थाना अध्यक्ष ने कहा कि एक तस्वीर कई बार पूरी घटना की कहानी बयां कर देती है। फोटोग्राफर अपने कैमरे के माध्यम से घटनाओं, सामाजिक गतिविधियों और यादगार पलों को सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। आज के डिजिटल दौर में फोटोग्राफी का महत्व और भी बढ़ गया है। कार्यक्रम में चार जनपदों से पहुंचे फोटोग्राफरों ने एक-दूसरे को विश्व छायांकन दिवस की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान फोटोग्राफी के बदलते स्वरूप, आधुनिक तकनीक और छायाकारों की भूमिका पर भी चर्चा हुई। Photography School की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में चार जनपदों के फोटोग्राफरों की एकजुटता और बड़ी संख्या में सहभागिता देखने को मिली। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी मुख्य अतिथियों, फोटोग्राफर एवं चित्रकार बंधुओं का आभार व्यक्त किया। विश्व छायांकन दिवस के इस आयोजन ने चकिया में फोटोग्राफी के क्षेत्र से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाने के साथ ही उनके कार्य और योगदान को सम्मान देने का संदेश दिया।2
- *चन्दौली में छात्रों का प्रदर्शन, प्रधानाचार्य निलंबन की मांग*4