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हसपुरा पुलिस 70 लीटर देशी शराब के साथ धंधेबाज को गिरफ्तार किया
Prem Singh
हसपुरा पुलिस 70 लीटर देशी शराब के साथ धंधेबाज को गिरफ्तार किया
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- अरवल जिला के प्रखंड परिसर में धरना प्रदर्शन किया गया ।यह धारणा प्रदर्शन भारत मुक्ति मोर्चा के जिला अध्यक्ष राकेश कुमार जी के नृत्वा में किया गया। बामसेफ एवं भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अधिवेशन पर प्रशासन द्वारा लगाई गई रोक ने देश के लोकतांत्रिक और संवैधानिक ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह अधिवेशन पूरी तरह शांतिपूर्ण, संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से आयोजित किया जाना था, जिसकी सभी कानूनी प्रक्रियाएं समय से पूरी कर ली गई थीं। इसके बावजूद राजनीतिक दबाव में प्रशासन द्वारा अधिवेशन की अनुमति रद्द किया जाना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, 19(1)(b) शांतिपूर्ण सभा का अधिकार, 19(1)(c) संगठन बनाने का अधिकार तथा अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार प्रत्येक नागरिक को प्रदान करता है। ऐसे में किसी सामाजिक-वैचारिक संगठन के राष्ट्रीय अधिवेशन को रोकना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। यह अधिवेशन ओबीसी, एससी, एसटी एवं मूलनिवासी समाज से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक एवं सामाजिक न्याय के मुद्दों पर चर्चा के लिए आयोजित किया जा रहा था। जाति आधारित जनगणना जैसे संवेदनशील मुद्दे को दबाने की कोशिशें लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत हैं। डॉ. बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने कहा था कि “मौलिक अधिकार तब तक अर्थहीन हैं, जब तक उनके संरक्षण के उपाय न हों।” आज वही मौलिक अधिकार खतरे में दिखाई दे रहे हैं। भारत मुक्ति मोर्चा प्रशासन एवं सरकार से मांग करता है कि— 1. बामसेफ एवं भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अधिवेशन की अनुमति तत्काल प्रभाव से बहाल की जाए। 2. अधिवेशन में शामिल होने वाले कार्यकर्ताओं एवं संगठनों को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई की जाए। 3. भविष्य में किसी भी संगठन के संवैधानिक, सामाजिक व वैचारिक कार्यक्रमों को राजनीतिक दबाव में रोकने की परंपरा समाप्त की जाए। 4. ओबीसी की जाति आधारित जनगणना के मुद्दे को दबाने की साजिशों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। 5. संविधान के संरक्षक के रूप में महामहिम राष्ट्रपति महोदय अनुच्छेद 356 के तहत आवश्यक संवैधानिक हस्तक्षेप करें। यदि इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो भारत मुक्ति मोर्चा, बामसेफ एवं सहयोगी संगठन देशव्यापी, शांतिपूर्ण और चरणबद्ध जनआंदोलन को और व्यापक रूप देंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। यह लड़ाई किसी व्यक्ति या संगठन की नहीं, बल्कि संविधान, लोकतंत्र और बहुजन समाज के अधिकारों की रक्षा की है।1
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