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धनबाद जिले के कतरास में महज एक घंटे की बारिश से पूरा इलाका डूब गया है। इस गंभीर जलजमाव ने नगर निगम की बदहाली और उसकी तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है। इसे लेकर कांग्रेस का गुस्सा फूट पड़ा है और पार्टी ने नगर निगम का घेराव करने की सीधी चेतावनी दी है।
जनता न्यूज़ 24
धनबाद जिले के कतरास में महज एक घंटे की बारिश से पूरा इलाका डूब गया है। इस गंभीर जलजमाव ने नगर निगम की बदहाली और उसकी तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है। इसे लेकर कांग्रेस का गुस्सा फूट पड़ा है और पार्टी ने नगर निगम का घेराव करने की सीधी चेतावनी दी है।
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- सोमवार को धनबाद के रणधीर वर्मा चौक स्थित धरना स्थल पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। 'छात्र-युवा आक्रोश दिवस' के बैनर तले इस प्रदर्शन का आयोजन भाकपा (माले), जनता श्रमिक संघ और झारखंड कोयलारी मजदूर यूनियन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। धरने को संबोधित करते हुए झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन, एरिया-7 के सचिव मिथुन यादव ने कहा कि पहले भूख हड़ताल करने वालों की मांगों पर सरकार ध्यान देती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के मुद्दों को लेकर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा हटाया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि देश में विभिन्न अनियमितताओं के बावजूद केंद्र सरकार मौन बनी हुई है। भाकपा (माले) के सदस्य हलधर महतो ने कहा कि सोनम वांगचुक के समर्थन और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में आंदोलन चल रहा है और धनबाद का यह प्रदर्शन उसी कड़ी का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार हो रही पेपर लीक जैसी घटनाओं से छात्रों और युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, छात्रों के हितों की रक्षा करने तथा उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की।1
- झारखंड के धनबाद जिले के कतरास में जलजमाव की गंभीर समस्या को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है, जहां विधायक खुद सड़क पर धरने पर बैठ गए हैं। इस दौरान नगर निगम प्रशासन को कड़ा अल्टीमेटम दिया गया है और पूरे मामले में मेयर संजीव सिंह सीधे निशाने पर आ गए हैं। कतरास में जलजमाव और स्थानीय मुद्दों को लेकर भाजपा और शत्रुघ्न महतो की ओर से तीखा विरोध जताया जा रहा है। मेयर संजीव सिंह के खिलाफ सीधा मोर्चा खोलते हुए नगर निगम को सख्त चेतावनी दी गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में इस विरोध प्रदर्शन को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है।1
- धनबाद जिले के कतरास में बारिश लोगों के लिए भारी मुसीबत बनकर आई है, जहां सड़कों पर हुए जलजमाव ने नगर निगम की पोल खोलकर रख दी है। इस बदहाली के कारण छोटे-छोटे स्कूली बच्चे गंदे पानी के बीच से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। नगर निगम के इस रवैये से तंग आकर कतरास की आक्रोशित जनता ने सड़क पर उतरकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है।1
- धनबाद के नवाडीह और विनोद बिहारी चौक के बीच स्थित करोड़ों की लागत से बनी 8 लेन मुख्य सड़क पहली ही बारिश में बदहाल हो गई है। जगह-जगह जलभराव और गड्ढों के कारण यह मार्ग पूरी तरह से जानलेवा बन चुका है, जिससे राहगीरों और वाहन चालक दुर्घटना की आशंका से डरे हुए हैं। नवाडीह और विनोद बिहारी चौक से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर सड़क पर बरसात के बाद भारी जलजमाव हो गया है। सड़क पर बने गहरे गड्ढों के कारण दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को आवागमन में भारी परेशानी हो रही है। तेज रफ्तार से गुजरने वाले वाहनों के बीच यह जलभराव कभी भी किसी बड़े हादसे का सबब बन सकता है। स्थानीय लोगों ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता और इसके रखरखाव पर गंभीर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि संबंधित विभाग और प्रशासन को इस गंभीर समस्या के बारे में कई बार अवगत कराया गया, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए, सड़क की तत्काल मरम्मत कराई जाए और नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए ताकि कोई बड़ा हादसा न हो।1
- धनबाद के समग्र विकास की मांगों को लेकर धनबाद विकास मंच की एक महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न हुई है। इस बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी 22 जुलाई 2026 को धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर एक दिवसीय शांतिपूर्ण धरना आयोजित किया जाएगा। धनबाद विकास मंच ने स्पष्ट किया है कि यह एक पूर्णतः गैर-राजनीतिक मंच है और यह आंदोलन किसी दल विशेष का नहीं, बल्कि पूरे धनबाद के विकास का एक जनआंदोलन है। इस आंदोलन में शामिल होने के लिए सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संस्थाओं, व्यापारिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, युवाओं, महिलाओं और आम नागरिकों को खुला आमंत्रण दिया गया है। इस महाआंदोलन के तहत क्षेत्र के विकास के लिए कई प्रमुख मांगें उठाई गई हैं। रेलवे सुविधाओं के विस्तार के लिए धनबाद-मुंबई और रांची-धनबाद-कटिहार के लिए दैनिक ट्रेन सेवा शुरू करने, धनबाद-पटना एवं धनबाद-वाराणसी वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने के साथ-साथ सिलीगुड़ी, बेंगलुरु, दिल्ली और चेन्नई के लिए भी ट्रेनें देने की मांग की गई है। स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तोपचांची क्षेत्र में धनबाद एयरपोर्ट का शीघ्र निर्माण कराने, एम्स की तर्ज पर आधुनिक अस्पताल और अत्याधुनिक ट्रॉमा सेंटर की स्थापना करने, सेंट्रल हॉस्पिटल को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाने तथा सदर अस्पताल को मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित करने की मांग रखी गई है। रोजगार, उद्योग और शहरी विकास को लेकर भी मंच ने विस्तृत मांगें प्रस्तुत की हैं। इनमें हाईटेक स्किल सेंटर और कपड़ा उद्योग की स्थापना, आईटी पार्क को तुरंत चालू करने, कोयला आधारित उद्योगों के संरक्षण, आउटसोर्सिंग कंपनी द्वारा कृत्रिम पहाड़ों का समतलीकरण कराने और धनबाद में सोलर प्लांट स्थापित करने की मांग शामिल है। इसके अलावा IIT-ISM के एक्सटेंशन कार्य में तेजी लाने, धनबाद में अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम बनाने, रिंग रोड परियोजना का अविलंब समाधान व निर्माण कराने और टीसीएस द्वारा तैयार Comprehensive Mobility Plan को तत्काल लागू करने की मांग की गई है। मंच का स्पष्ट संदेश है कि देश की ऊर्जा राजधानी धनबाद को अब विकास की नई पहचान मिलनी चाहिए और "कोयले की राजधानी अब बने विकास की राजधानी" के नारे के साथ लोगों से इस धरने में जुड़कर अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की गई है।1
- धनबाद के फुसबंगला गुलजार मुहल्ला में नगर निगम अब 'नरक निगम' बन चुका है। KCNTVINDIA की ग्राउंड रिपोर्टिंग के अनुसार, इस इलाके में हालात बेहद खराब हैं और नगर निगम पूरी तरह से नरक में तब्दील हो गया है।1
- धनबाद के कतरास में सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग को लेकर तीखा आक्रोश जताया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर लचर सफाई व्यवस्था से नाराज होकर सीधे तौर पर नगर निगम को होश में आने की चेतावनी दी गई है। लोगों की स्पष्ट मांग है कि कतरास क्षेत्र की पूरी सफाई व्यवस्था को जल्द से जल्द सुधारा जाए और नगर निगम अपनी लापरवाही बंद करे।1
- धनबाद के बीबीएमकेयू लॉ कॉलेज में पढ़ाई न होने के कारण छात्र परेशान हैं। छात्रों का कहना है कि वे बहुत दूर से कॉलेज आते हैं, लेकिन वहां पढ़ाई नहीं होती है। इसके अलावा, वहां के शिक्षक भी बिल्कुल एंड टाइम पर आते हैं। साथ ही, कॉलेज में छात्रों के लिए एक अच्छा कैंटीन भी उपलब्ध नहीं है।1