पानीपत के उप मंडल इसराना के अंतर्गत आने वाले गांव अहर के सीएचसी में डॉक्टरों की आपसी बहस का खामियाजा सीधे तौर पर मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। दवाई लेने पहुंचे मरीजों को ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ द्वारा दवाइयां नहीं दी जा रही हैं। दरअसल, दवाई बांटने वाला स्टाफ बिना पर्ची के दवाई देने को तैयार नहीं है और अस्पताल में कोई भी पर्ची लिखने के लिए तैयार नहीं था। डॉक्टरों की इस आपसी खींचतान के कारण कई बुजुर्ग महिलाएं और पुरुष लंबी लाइनों में खड़े रहे, लेकिन उन्हें दवाई नहीं मिल सकी। इस क्षेत्र के आसपास के 10 से 15 गांवों के लिए यह सीएचसी ही चिकित्सा सुविधा के नाम पर एकमात्र अस्पताल है। आसपास कोई भी निजी अस्पताल न होने और पानीपत की दूरी 40 किलोमीटर होने के कारण लोग मजबूरी में अहर सीएचसी आते हैं। इस पूरी अव्यवस्था पर हरियाणा सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। एक तरफ जहां सरकार सभी को दवाइयां उपलब्ध कराने का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ अस्पताल का स्टाफ सरकार की इन तमाम आशाओं पर पानी फेर रहा है।
पानीपत के उप मंडल इसराना के अंतर्गत आने वाले गांव अहर के सीएचसी में डॉक्टरों की आपसी बहस का खामियाजा सीधे तौर पर मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। दवाई लेने पहुंचे मरीजों को ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ द्वारा दवाइयां नहीं दी जा रही हैं। दरअसल, दवाई बांटने वाला स्टाफ बिना पर्ची के दवाई देने को तैयार नहीं है और अस्पताल में कोई भी पर्ची लिखने के लिए तैयार नहीं था। डॉक्टरों की इस आपसी खींचतान के कारण कई बुजुर्ग महिलाएं और पुरुष लंबी लाइनों में खड़े रहे, लेकिन उन्हें दवाई नहीं मिल सकी। इस क्षेत्र के आसपास के 10 से 15 गांवों के लिए यह सीएचसी ही चिकित्सा सुविधा के नाम पर एकमात्र अस्पताल है। आसपास कोई भी निजी अस्पताल न होने और पानीपत की दूरी 40 किलोमीटर होने के कारण लोग मजबूरी में अहर सीएचसी आते हैं। इस पूरी अव्यवस्था पर हरियाणा सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। एक तरफ जहां सरकार सभी को दवाइयां उपलब्ध कराने का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ अस्पताल का स्टाफ सरकार की इन तमाम आशाओं पर पानी फेर रहा है।
- पानीपत के उप मंडल इसराना के अंतर्गत आने वाले गांव अहर के सीएचसी में डॉक्टरों की आपसी बहस का खामियाजा सीधे तौर पर मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। दवाई लेने पहुंचे मरीजों को ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ द्वारा दवाइयां नहीं दी जा रही हैं। दरअसल, दवाई बांटने वाला स्टाफ बिना पर्ची के दवाई देने को तैयार नहीं है और अस्पताल में कोई भी पर्ची लिखने के लिए तैयार नहीं था। डॉक्टरों की इस आपसी खींचतान के कारण कई बुजुर्ग महिलाएं और पुरुष लंबी लाइनों में खड़े रहे, लेकिन उन्हें दवाई नहीं मिल सकी। इस क्षेत्र के आसपास के 10 से 15 गांवों के लिए यह सीएचसी ही चिकित्सा सुविधा के नाम पर एकमात्र अस्पताल है। आसपास कोई भी निजी अस्पताल न होने और पानीपत की दूरी 40 किलोमीटर होने के कारण लोग मजबूरी में अहर सीएचसी आते हैं। इस पूरी अव्यवस्था पर हरियाणा सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। एक तरफ जहां सरकार सभी को दवाइयां उपलब्ध कराने का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ अस्पताल का स्टाफ सरकार की इन तमाम आशाओं पर पानी फेर रहा है।1
- हरियाणा के करनाल जिले के घरौंडा में अब यह बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या पार्षदों को अपने वार्ड के काम करवाने के लिए भी धरने पर बैठना पड़ेगा? यहां बीजेपी का एक वार्ड पार्षद खुद धरने पर बैठ गया है, जिसके बाद पार्षद ने कैमरे के सामने आकर अपनी बात रखी है।1
- भारतीय रेलवे की एसी (AC) कोच में मिलने वाली सुविधाएं अब यात्रियों की सुविधा से ज्यादा चोरी की वजह से चर्चा में आ गई हैं। पिछले चार वर्षों के दौरान ट्रेनों से 1 करोड़ 27 लाख से अधिक बेडशीट, कंबल, तौलिये और तकिये के कवर गायब हो चुके हैं। इस बड़े पैमाने पर हुई चोरी के कारण बेडरोल उपलब्ध कराने वाले ठेकेदारों को 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। रेलवे की ओर से यात्रियों को आरामदायक सफर देने के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली ये सुविधाएं कुछ लोगों द्वारा अपने निजी इस्तेमाल के लिए साथ ले जाई जा रही हैं। चोरी की इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए अब रेलवे प्रशासन सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।1
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरियाणा के जींद से हाइड्रोजन ट्रेन की हरी झंडी दिखाकर शुरुआत करेंगे। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए पूरा हरियाणा पूरी तरह से तैयार है।1
- बागपत के धनौरा सिल्वर नगर में पानी की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है। यहाँ पानी का बहुत बुरा हाल है और स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि पानी लोगों के घरों के भीतर तक घुस रहा है।1
- रोहतक का गोहाना अड्डा अब पूरी तरह से अतिक्रमण का अड्डा बन चुका है। यहां 10-10 फुट तक कब्जा जमा लिया गया है, जिसके कारण इस जगह पर हर दिन भीषण जाम लग रहा है।1
- रोहतक में एक महिला दुकानदार द्वारा सिटी थाना पुलिस पर लगाए गए कथित मारपीट के आरोपों के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस ने महिला द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया है। इस पूरे मामले में एमएलआर (MLR) रिपोर्ट को आधार बनाया गया है, जिसके बाद पुलिस का कहना है कि महिला को लगी चोटें ताज़ा नहीं हैं। पुलिस ने इसे खुद को बदनाम करने की एक साजिश करार दिया है।1