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भारतीय किसान यूनियन महासचिव उत्तर प्रदेश
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- ग्रामीण भारत बंद,के आह्वान , जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सड़क पर उतरे किसान और मजदूर । विद्युत अधिनियम 2025 और मनरेगा में बदलाव को लेकर फूटा गुस्सा; उपजिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन । जानसठ । केंद्र सरकार की कथित कॉर्पोरेट समर्थक नीतियों और मजदूर-किसान विरोधी फैसलों के खिलाफ आज देशभर के श्रम संगठनों और किसान यूनियनों 'ग्रामीण भारत बंद' के आह्वान पर व्यापक हड़ताल का निर्णय लिया इसी कड़ी में जानसठ तहसील मुख्यालय पर विभिन्न संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया और उपजिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। ' मनरेगा की बहाली और निजीकरण पर रोक' की गूंज।। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार तानाशाही रवैया अपनाते हुए गरीबों के हक पर हमला कर रही है। वक्ताओं ने कहा कि कृषि कानूनों की तर्ज पर अब मनरेगा को समाप्त कर 'वी.बी.जी. रामजी' जैसी नई योजनाएं थोपी जा रही हैं, जो ग्रामीण मजदूरों के अस्तित्व के लिए खतरा है। इसके साथ ही, विद्युत अधिनियम 2025 को तत्काल रद्द करने की मांग की गई,। प्रदर्शन के दौरान संगठनों ने अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से रखा,और उन्होंने बताया कि किसानों की फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी दर्जा दिया जाए। श्रम कानूनों को समाप्त कर लागू किए गए लेबर कोड को रद्द कर पुराने लेबर कोर्ट बहाल किए जाएं। आंगनबाड़ी कार्यकत्री, सहायिका, आशा वर्कर्स और भोजन माताओं के वेतन में सम्मानजनक वृद्धि की जाए। खेती को बर्बाद कर रहे आवारा पशुओं पर तत्काल रोक लगाई जाए। किसानों के अधिकारों का हनन करने वाले बीज अधिनियम को वापस लिया जाए। तानाशाही के खिलाफ एकजुटता का आह्वान यूनियन नेताओं ने कहा कि श्रम कानूनों को बदलकर मजदूरों से यूनियन बनाने का हक छीना जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन जनविरोधी नीतियों को वापस नहीं लिया, तो यह आंदोलन और भी उग्र होगा। प्रदर्शन के दौरान भारी संख्या में खेत मजदूर, किसान और विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि आज की यह हड़ताल केवल सांकेतिक नहीं, बल्कि सरकार को एक बड़ी चेतावनी है।इस दौरान मुख्य रूप से श्यामवीर राठी, चौधरी अनिल कुमार, घसीटू सिंह, मोहम्मद सलीम, सुनीता देवी, पूनम , भारती पूनम आशा आदि बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष मौजूद रहे।1
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