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बाँदा जिलाधिकारी के निर्देशों के क्रम में, अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग पर प्रभावी नियंत्रण के लिए गठित टास्क फोर्स ने 29.05.2026 को विभिन्न स्थानों पर औचक जाँच की। इस अभियान के तहत उपखनिजों से लदे लगभग 1120 वाहनों की सघनता से जाँच की गई। जाँच के दौरान, 15 वाहन ऐसे पाए गए जिनमें या तो परिवहन प्रपत्र नहीं थे या उनमें अंकित मात्रा से अधिक उपखनिज लोड था। इनमें से 5 वाहनों को संबंधित थानों की सुपुर्दगी में दिया गया, जबकि 10 वाहनों का ऑनलाइन चालान किया गया। इन पकड़े गए वाहनों से कुल ₹6.40 लाख का शमन शुल्क वसूल किया गया। इसके अतिरिक्त, 19 वाहन बिना नंबर प्लेट के पाए गए, जिनमें से 16 का ऑनलाइन चालान किया गया और 3 वाहनों को संबंधित थानों की सुपुर्दगी में दिया गया। इन वाहनों से ₹0.01 लाख का शमन शुल्क भी वसूला गया। उक्त कार्यवाही के अलावा, जनपद बांदा की तहसील नरैनी के ग्राम पनगरा में संचालित उपखनिज गिट्टी/पत्थर के 2 खनन पट्टों का भी निरीक्षण किया गया।

7 hrs ago
user_Surash Sahu
Surash Sahu
बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
7 hrs ago
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बाँदा जिलाधिकारी के निर्देशों के क्रम में, अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग पर प्रभावी नियंत्रण के लिए गठित टास्क फोर्स ने 29.05.2026 को विभिन्न स्थानों पर औचक जाँच की। इस अभियान के तहत उपखनिजों से लदे लगभग 1120 वाहनों की सघनता से जाँच की गई। जाँच के दौरान, 15 वाहन ऐसे पाए गए जिनमें या तो परिवहन प्रपत्र नहीं थे या उनमें अंकित मात्रा से अधिक उपखनिज लोड था। इनमें से 5 वाहनों को संबंधित थानों की सुपुर्दगी में दिया गया, जबकि 10 वाहनों का ऑनलाइन चालान किया गया। इन पकड़े गए वाहनों से कुल ₹6.40 लाख का शमन शुल्क वसूल किया गया। इसके अतिरिक्त, 19 वाहन बिना नंबर प्लेट के पाए गए, जिनमें से 16 का ऑनलाइन चालान किया गया और 3 वाहनों को संबंधित थानों की सुपुर्दगी में दिया गया। इन वाहनों से ₹0.01 लाख का शमन शुल्क भी वसूला गया। उक्त कार्यवाही के अलावा, जनपद बांदा की तहसील नरैनी के ग्राम पनगरा में संचालित उपखनिज गिट्टी/पत्थर के 2 खनन पट्टों का भी निरीक्षण किया गया।

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  • बांदा पुलिस अधीक्षक कार्यालय में मंगलवार को क्षेत्राधिकारी राजवीर सिंह गौर का विदाई समारोह आयोजित किया गया। अधिवर्षता आयु पूरी करने के बाद सेवानिवृत्त हुए सीओ गौर ने पुलिस विभाग में 42 साल की लंबी और बेदाग सेवा प्रदान की थी, जिसे विभाग के लिए एक मिसाल बताया गया। पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने इस अवसर पर सीओ राजवीर सिंह गौर के कार्यकाल की प्रशंसा की। एसपी बंसल ने उनके सुखद, स्वस्थ जीवन और दीर्घायु की कामना करते हुए शुभकामनाएँ दीं। राजवीर सिंह गौर मूल रूप से कानपुर देहात के निवासी हैं और 1984 में उत्तर प्रदेश पुलिस में भर्ती हुए थे। अपने 42 साल के सेवाकाल में, उन्होंने पुलिस उपाधीक्षक के रूप में एंटी नारकोटिक्स फोर्स लखनऊ, मुख्यमंत्री सुरक्षा, जनपद फर्रुखाबाद और बांदा में अपनी सेवाएँ दीं। विदाई समारोह में समस्त क्षेत्राधिकारीगण, प्रतिसार निरीक्षक बांदा और पुलिस कार्यालय के अन्य अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। सभी ने सीओ गौर को फूल-मालाओं से सम्मानित कर भावभीनी विदाई दी।
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    बांदा पुलिस अधीक्षक कार्यालय में मंगलवार को क्षेत्राधिकारी राजवीर सिंह गौर का विदाई समारोह आयोजित किया गया। अधिवर्षता आयु पूरी करने के बाद सेवानिवृत्त हुए सीओ गौर ने पुलिस विभाग में 42 साल की लंबी और बेदाग सेवा प्रदान की थी, जिसे विभाग के लिए एक मिसाल बताया गया।

पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने इस अवसर पर सीओ राजवीर सिंह गौर के कार्यकाल की प्रशंसा की। एसपी बंसल ने उनके सुखद, स्वस्थ जीवन और दीर्घायु की कामना करते हुए शुभकामनाएँ दीं।

राजवीर सिंह गौर मूल रूप से कानपुर देहात के निवासी हैं और 1984 में उत्तर प्रदेश पुलिस में भर्ती हुए थे। अपने 42 साल के सेवाकाल में, उन्होंने पुलिस उपाधीक्षक के रूप में एंटी नारकोटिक्स फोर्स लखनऊ, मुख्यमंत्री सुरक्षा, जनपद फर्रुखाबाद और बांदा में अपनी सेवाएँ दीं।

विदाई समारोह में समस्त क्षेत्राधिकारीगण, प्रतिसार निरीक्षक बांदा और पुलिस कार्यालय के अन्य अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। सभी ने सीओ गौर को फूल-मालाओं से सम्मानित कर भावभीनी विदाई दी।
    user_Altmush Husain
    Altmush Husain
    बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • बाँदा शहर के बाबा तालाब मोहल्ले निवासी जगदीश सिंह यादव ने अपने घर में हुई लाखों की चोरी की घटना के खुलासे और चोरी गए सामान की बरामदगी की मांग को लेकर अधिकारियों को प्रार्थना पत्र सौंपा है। पीड़ित के अनुसार, यह घटना 5 मई 2026 की रात को हुई थी, जब वह अपने परिवार के साथ शुकुल कुआं स्थित श्रीराम पैलेस में अपनी भतीजी के विवाह समारोह में शामिल होने गए थे। रात करीब 11:29 बजे उनके छोटे पुत्र उदय और भतीजे संदीप ने घर लौटने पर देखा कि मुख्य गेट का ताला टूटा हुआ था और अज्ञात चोरों ने कमरों व अलमारी के ताले तोड़कर चोरी को अंजाम दिया था। घटना की जानकारी मिलते ही जगदीश सिंह यादव ने तत्काल कोतवाली नगर पुलिस और पुलिस हेल्पलाइन को सूचित किया। सूचना के लगभग एक घंटे बाद मण्डी समिति पुलिस चौकी से पुलिस टीम मौके पर पहुंची और फिंगर प्रिंट सहित आवश्यक जांच-पड़ताल की गई। हालांकि, कई दिन बीत जाने के बाद भी इस लाखों की चोरी का खुलासा नहीं हो सका है, जिससे पीड़ित निराश है। पीड़ित का आरोप है कि 25 मई 2026 को पुलिस द्वारा कुछ संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था, और उनका मानना है कि इन गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों का चोरी की घटना से संबंध हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि घटना से लगभग 15 दिन पहले कुछ लोग उनके घर में पुताई का काम कर रहे थे, जिनके पास घर के अंदर और बाहर की पूरी जानकारी थी। अपने प्रार्थना पत्र में, पीड़ित ने मांग की है कि घटना के समय उनके घर के आसपास सक्रिय मोबाइल नंबरों और संदिग्ध गतिविधियों की जांच की जाए, जिससे चोरी का खुलासा हो सके। जगदीश सिंह यादव ने अधिकारियों को एफआईआर और चोरी गए सामान की सूची भी उपलब्ध कराते हुए मामले की निष्पक्ष जांच, चोरी गए सामान की बरामदगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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    बाँदा शहर के बाबा तालाब मोहल्ले निवासी जगदीश सिंह यादव ने अपने घर में हुई लाखों की चोरी की घटना के खुलासे और चोरी गए सामान की बरामदगी की मांग को लेकर अधिकारियों को प्रार्थना पत्र सौंपा है। पीड़ित के अनुसार, यह घटना 5 मई 2026 की रात को हुई थी, जब वह अपने परिवार के साथ शुकुल कुआं स्थित श्रीराम पैलेस में अपनी भतीजी के विवाह समारोह में शामिल होने गए थे। रात करीब 11:29 बजे उनके छोटे पुत्र उदय और भतीजे संदीप ने घर लौटने पर देखा कि मुख्य गेट का ताला टूटा हुआ था और अज्ञात चोरों ने कमरों व अलमारी के ताले तोड़कर चोरी को अंजाम दिया था।

घटना की जानकारी मिलते ही जगदीश सिंह यादव ने तत्काल कोतवाली नगर पुलिस और पुलिस हेल्पलाइन को सूचित किया। सूचना के लगभग एक घंटे बाद मण्डी समिति पुलिस चौकी से पुलिस टीम मौके पर पहुंची और फिंगर प्रिंट सहित आवश्यक जांच-पड़ताल की गई। हालांकि, कई दिन बीत जाने के बाद भी इस लाखों की चोरी का खुलासा नहीं हो सका है, जिससे पीड़ित निराश है।

पीड़ित का आरोप है कि 25 मई 2026 को पुलिस द्वारा कुछ संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था, और उनका मानना है कि इन गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों का चोरी की घटना से संबंध हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि घटना से लगभग 15 दिन पहले कुछ लोग उनके घर में पुताई का काम कर रहे थे, जिनके पास घर के अंदर और बाहर की पूरी जानकारी थी। अपने प्रार्थना पत्र में, पीड़ित ने मांग की है कि घटना के समय उनके घर के आसपास सक्रिय मोबाइल नंबरों और संदिग्ध गतिविधियों की जांच की जाए, जिससे चोरी का खुलासा हो सके। जगदीश सिंह यादव ने अधिकारियों को एफआईआर और चोरी गए सामान की सूची भी उपलब्ध कराते हुए मामले की निष्पक्ष जांच, चोरी गए सामान की बरामदगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
    user_Surash Sahu
    Surash Sahu
    बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
  • हमीरपुर के सुमेरपुर में पिछले तीन दिनों से लगातार बाधित बिजली आपूर्ति से नाराज़ ग्रामीणों ने सोमवार को सुमेरपुर पावर हाउस पहुंचकर ज़ोरदार प्रदर्शन किया। उमस भरी गर्मी में बिजली न मिलने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते उन्होंने बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और पावर हाउस का घेराव भी किया। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों और क्षेत्र पंचायत सदस्य की बिजली विभाग के जेई से तीखी बहस भी हुई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायतें करने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है। सूचना मिलने पर थाना प्रभारी योगेश तिवारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर शांत कराया। वहीं, बिजली विभाग के अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि आंधी-तूफान के कारण कई स्थानों पर फाल्ट आने से बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि फाल्ट को दुरुस्त करने का काम जारी है और जल्द ही बिजली व्यवस्था सामान्य कर दी जाएगी।
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    हमीरपुर के सुमेरपुर में पिछले तीन दिनों से लगातार बाधित बिजली आपूर्ति से नाराज़ ग्रामीणों ने सोमवार को सुमेरपुर पावर हाउस पहुंचकर ज़ोरदार प्रदर्शन किया। उमस भरी गर्मी में बिजली न मिलने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते उन्होंने बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और पावर हाउस का घेराव भी किया।

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों और क्षेत्र पंचायत सदस्य की बिजली विभाग के जेई से तीखी बहस भी हुई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायतें करने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है।

सूचना मिलने पर थाना प्रभारी योगेश तिवारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर शांत कराया। वहीं, बिजली विभाग के अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि आंधी-तूफान के कारण कई स्थानों पर फाल्ट आने से बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि फाल्ट को दुरुस्त करने का काम जारी है और जल्द ही बिजली व्यवस्था सामान्य कर दी जाएगी।
    user_ISLAM
    ISLAM
    Local News Reporter मौदहा, हमीरपुर, उत्तर प्रदेश•
    34 min ago
  • हमीरपुर जिले की मौदहा तहसील में बीते 28-29 मई की रात आई तेज आंधी, तूफान और बारिश ने बिजली व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस दैवीय आपदा के कारण ग्राम मांचा, सिलौली और कम्हरिया सहित कई गांवों में करीब 45 से 50 विद्युत पोल क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे पिछले दो दिनों से इन क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप पड़ी है। बिजली न होने से ग्रामीणों को पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मांचा निवासी ग्रामीण जीशान अली के अनुसार, गांवों के भीतर और बाहर कई बिजली खंभे टूटकर गिर गए हैं, जिससे पूरे ग्रामीण फीडर की आपूर्ति बाधित हो गई है। भीषण गर्मी के बीच बिजली की अनुपलब्धता ने पेयजल संकट को गहरा दिया है और लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इस विकट स्थिति के मद्देनजर, शनिवार को ग्रामीणों ने नायब तहसीलदार महेन्द्र गुप्ता को एक शिकायती पत्र सौंपा। उन्होंने प्रशासन से तत्काल क्षतिग्रस्त विद्युत पोलों को बदलवाने और क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बहाल करने की पुरजोर मांग की। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि लंबे समय से बिजली न मिलने के कारण घरेलू कार्यों के साथ-साथ पशुपालकों और किसानों को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस दौरान जीशान अली, इमरान, आरिफ अली, नाजिम अली, कमर उद्दीन और मुजझीर अली सहित अन्य ग्रामीणों ने शीघ्र प्रशासनिक कार्रवाई कर राहत प्रदान करने का आग्रह किया।
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    हमीरपुर जिले की मौदहा तहसील में बीते 28-29 मई की रात आई तेज आंधी, तूफान और बारिश ने बिजली व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस दैवीय आपदा के कारण ग्राम मांचा, सिलौली और कम्हरिया सहित कई गांवों में करीब 45 से 50 विद्युत पोल क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे पिछले दो दिनों से इन क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप पड़ी है।

बिजली न होने से ग्रामीणों को पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मांचा निवासी ग्रामीण जीशान अली के अनुसार, गांवों के भीतर और बाहर कई बिजली खंभे टूटकर गिर गए हैं, जिससे पूरे ग्रामीण फीडर की आपूर्ति बाधित हो गई है। भीषण गर्मी के बीच बिजली की अनुपलब्धता ने पेयजल संकट को गहरा दिया है और लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

इस विकट स्थिति के मद्देनजर, शनिवार को ग्रामीणों ने नायब तहसीलदार महेन्द्र गुप्ता को एक शिकायती पत्र सौंपा। उन्होंने प्रशासन से तत्काल क्षतिग्रस्त विद्युत पोलों को बदलवाने और क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बहाल करने की पुरजोर मांग की। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि लंबे समय से बिजली न मिलने के कारण घरेलू कार्यों के साथ-साथ पशुपालकों और किसानों को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस दौरान जीशान अली, इमरान, आरिफ अली, नाजिम अली, कमर उद्दीन और मुजझीर अली सहित अन्य ग्रामीणों ने शीघ्र प्रशासनिक कार्रवाई कर राहत प्रदान करने का आग्रह किया।
    user_Raj kumar जिला ब्यूरो चीफ
    Raj kumar जिला ब्यूरो चीफ
    मौदहा, हमीरपुर, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • ग्राम मरका में विकास कार्यों और साफ-सफाई व्यवस्था की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है, जहाँ ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत के सचिव और प्रधान की मिलीभगत के कारण कार्यों में भारी अनियमितताएँ और लापरवाही देखी जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, गाँव की नालियाँ गंदगी से भरी पड़ी हैं और नियमित सफाई न होने से दुर्गंध तथा बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। सड़कों एवं सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी का अंबार लगा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। गाँव के विकास के नाम पर योजनाएँ केवल कागजों में दिखाई जाती हैं, जबकि धरातल पर कार्य अधूरे या नाम मात्र के नजर आते हैं। इसके अलावा, ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में कूड़ा प्रबंधन और स्वच्छता के लिए बनवाया गया RRC केंद्र (कचरा प्रबंधन केंद्र) प्रधान द्वारा तुड़वा दिया गया है, जिससे शासन की स्वच्छता योजनाओं और सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में आने वाले विकास बजट एवं योजनाओं का सही उपयोग नहीं हो रहा है, और उनकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती, जिससे साफ-सफाई जैसी मूलभूत व्यवस्था तक प्रभावित हो चुकी है और आम जनमानस को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम मरका की जनता अब प्रशासन से मांग करती है कि ग्राम पंचायत के विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, साफ-सफाई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से सुधारा जाए, पंचायत में हो रही लापरवाही एवं अनियमितताओं पर उचित कार्रवाई की जाए, और गाँव के विकास कार्यों को पारदर्शिता के साथ पूर्ण कराया जाए। जनता स्पष्ट करती है कि वे जागरूक हैं और अपने अधिकारों की आवाज उठाना जानती हैं, यह जोर देते हुए कि “गाँव का विकास और स्वच्छता केवल कागज़ों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देना चाहिए।”
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    ग्राम मरका में विकास कार्यों और साफ-सफाई व्यवस्था की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है, जहाँ ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत के सचिव और प्रधान की मिलीभगत के कारण कार्यों में भारी अनियमितताएँ और लापरवाही देखी जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, गाँव की नालियाँ गंदगी से भरी पड़ी हैं और नियमित सफाई न होने से दुर्गंध तथा बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। सड़कों एवं सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी का अंबार लगा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। गाँव के विकास के नाम पर योजनाएँ केवल कागजों में दिखाई जाती हैं, जबकि धरातल पर कार्य अधूरे या नाम मात्र के नजर आते हैं।

इसके अलावा, ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में कूड़ा प्रबंधन और स्वच्छता के लिए बनवाया गया RRC केंद्र (कचरा प्रबंधन केंद्र) प्रधान द्वारा तुड़वा दिया गया है, जिससे शासन की स्वच्छता योजनाओं और सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में आने वाले विकास बजट एवं योजनाओं का सही उपयोग नहीं हो रहा है, और उनकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती, जिससे साफ-सफाई जैसी मूलभूत व्यवस्था तक प्रभावित हो चुकी है और आम जनमानस को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्राम मरका की जनता अब प्रशासन से मांग करती है कि ग्राम पंचायत के विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, साफ-सफाई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से सुधारा जाए, पंचायत में हो रही लापरवाही एवं अनियमितताओं पर उचित कार्रवाई की जाए, और गाँव के विकास कार्यों को पारदर्शिता के साथ पूर्ण कराया जाए। जनता स्पष्ट करती है कि वे जागरूक हैं और अपने अधिकारों की आवाज उठाना जानती हैं, यह जोर देते हुए कि “गाँव का विकास और स्वच्छता केवल कागज़ों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देना चाहिए।”
    user_Abhay
    Abhay
    बबेरू, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    12 hrs ago
  • बांदा शहर के प्राचीन छावी तालाब में हजारों मछलियों के अचानक मरने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। तालाब की सतह पर बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां तैरती दिखाई देने के बाद स्थानीय लोगों ने तत्काल प्रशासन को इसकी सूचना दी। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि तालाब का पानी दूषित होने या भीषण गर्मी के बाद हुई बारिश से जल में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाने के कारण मछलियों की मौत हुई हो सकती है। हालांकि, मछलियों के मरने के वास्तविक कारणों का पता जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चल पाएगा। मछलियों के सड़ने से उठ रही दुर्गंध के कारण आसपास के लोगों में संक्रामक बीमारी फैलने की आशंका बढ़ गई है, जिससे उनमें दहशत का माहौल है। जानकारी मिलते ही संबंधित विभाग के अधिकारियों को मामले से अवगत कराया गया। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मरी हुई मछलियों को जल्द हटाने और पानी की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है, ताकि किसी प्रकार की बीमारी फैलने की संभावना को रोका जा सके। गौरतलब है कि हाल के दिनों में बुंदेलखंड क्षेत्र भीषण गर्मी की चपेट में रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक तापमान, जल स्तर में कमी और पानी में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा घटने से मछलियों की सामूहिक मौत की घटनाएं सामने आती रहती हैं। फिलहाल, प्रशासन द्वारा मामले की जांच कराए जाने और आवश्यक कदम उठाए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।
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    बांदा शहर के प्राचीन छावी तालाब में हजारों मछलियों के अचानक मरने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। तालाब की सतह पर बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां तैरती दिखाई देने के बाद स्थानीय लोगों ने तत्काल प्रशासन को इसकी सूचना दी।

स्थानीय नागरिकों का मानना है कि तालाब का पानी दूषित होने या भीषण गर्मी के बाद हुई बारिश से जल में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाने के कारण मछलियों की मौत हुई हो सकती है। हालांकि, मछलियों के मरने के वास्तविक कारणों का पता जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चल पाएगा।

मछलियों के सड़ने से उठ रही दुर्गंध के कारण आसपास के लोगों में संक्रामक बीमारी फैलने की आशंका बढ़ गई है, जिससे उनमें दहशत का माहौल है। जानकारी मिलते ही संबंधित विभाग के अधिकारियों को मामले से अवगत कराया गया। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मरी हुई मछलियों को जल्द हटाने और पानी की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है, ताकि किसी प्रकार की बीमारी फैलने की संभावना को रोका जा सके।

गौरतलब है कि हाल के दिनों में बुंदेलखंड क्षेत्र भीषण गर्मी की चपेट में रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक तापमान, जल स्तर में कमी और पानी में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा घटने से मछलियों की सामूहिक मौत की घटनाएं सामने आती रहती हैं। फिलहाल, प्रशासन द्वारा मामले की जांच कराए जाने और आवश्यक कदम उठाए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।
    user_Shrikant Shrivastav
    Shrikant Shrivastav
    पत्रकार Banda, Uttar Pradesh•
    7 hrs ago
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