ग्राम मरका में विकास कार्यों और साफ-सफाई व्यवस्था की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है, जहाँ ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत के सचिव और प्रधान की मिलीभगत के कारण कार्यों में भारी अनियमितताएँ और लापरवाही देखी जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, गाँव की नालियाँ गंदगी से भरी पड़ी हैं और नियमित सफाई न होने से दुर्गंध तथा बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। सड़कों एवं सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी का अंबार लगा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। गाँव के विकास के नाम पर योजनाएँ केवल कागजों में दिखाई जाती हैं, जबकि धरातल पर कार्य अधूरे या नाम मात्र के नजर आते हैं। इसके अलावा, ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में कूड़ा प्रबंधन और स्वच्छता के लिए बनवाया गया RRC केंद्र (कचरा प्रबंधन केंद्र) प्रधान द्वारा तुड़वा दिया गया है, जिससे शासन की स्वच्छता योजनाओं और सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में आने वाले विकास बजट एवं योजनाओं का सही उपयोग नहीं हो रहा है, और उनकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती, जिससे साफ-सफाई जैसी मूलभूत व्यवस्था तक प्रभावित हो चुकी है और आम जनमानस को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम मरका की जनता अब प्रशासन से मांग करती है कि ग्राम पंचायत के विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, साफ-सफाई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से सुधारा जाए, पंचायत में हो रही लापरवाही एवं अनियमितताओं पर उचित कार्रवाई की जाए, और गाँव के विकास कार्यों को पारदर्शिता के साथ पूर्ण कराया जाए। जनता स्पष्ट करती है कि वे जागरूक हैं और अपने अधिकारों की आवाज उठाना जानती हैं, यह जोर देते हुए कि “गाँव का विकास और स्वच्छता केवल कागज़ों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देना चाहिए।”
ग्राम मरका में विकास कार्यों और साफ-सफाई व्यवस्था की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है, जहाँ ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत के सचिव और प्रधान की मिलीभगत के कारण कार्यों में भारी अनियमितताएँ और लापरवाही देखी जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, गाँव की नालियाँ गंदगी से भरी पड़ी हैं और नियमित सफाई न होने से दुर्गंध तथा बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। सड़कों एवं सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी का अंबार लगा है,
लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। गाँव के विकास के नाम पर योजनाएँ केवल कागजों में दिखाई जाती हैं, जबकि धरातल पर कार्य अधूरे या नाम मात्र के नजर आते हैं। इसके अलावा, ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में कूड़ा प्रबंधन और स्वच्छता के लिए बनवाया गया RRC केंद्र (कचरा प्रबंधन केंद्र) प्रधान द्वारा तुड़वा दिया गया है, जिससे शासन की स्वच्छता योजनाओं और सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल
खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में आने वाले विकास बजट एवं योजनाओं का सही उपयोग नहीं हो रहा है, और उनकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती, जिससे साफ-सफाई जैसी मूलभूत व्यवस्था तक प्रभावित हो चुकी है और आम जनमानस को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम मरका की जनता अब प्रशासन से मांग करती है कि ग्राम पंचायत
के विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, साफ-सफाई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से सुधारा जाए, पंचायत में हो रही लापरवाही एवं अनियमितताओं पर उचित कार्रवाई की जाए, और गाँव के विकास कार्यों को पारदर्शिता के साथ पूर्ण कराया जाए। जनता स्पष्ट करती है कि वे जागरूक हैं और अपने अधिकारों की आवाज उठाना जानती हैं, यह जोर देते हुए कि “गाँव का विकास और स्वच्छता केवल कागज़ों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देना चाहिए।”
- ग्राम मरका में विकास कार्यों और साफ-सफाई व्यवस्था की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है, जहाँ ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत के सचिव और प्रधान की मिलीभगत के कारण कार्यों में भारी अनियमितताएँ और लापरवाही देखी जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, गाँव की नालियाँ गंदगी से भरी पड़ी हैं और नियमित सफाई न होने से दुर्गंध तथा बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। सड़कों एवं सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी का अंबार लगा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। गाँव के विकास के नाम पर योजनाएँ केवल कागजों में दिखाई जाती हैं, जबकि धरातल पर कार्य अधूरे या नाम मात्र के नजर आते हैं। इसके अलावा, ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में कूड़ा प्रबंधन और स्वच्छता के लिए बनवाया गया RRC केंद्र (कचरा प्रबंधन केंद्र) प्रधान द्वारा तुड़वा दिया गया है, जिससे शासन की स्वच्छता योजनाओं और सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में आने वाले विकास बजट एवं योजनाओं का सही उपयोग नहीं हो रहा है, और उनकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती, जिससे साफ-सफाई जैसी मूलभूत व्यवस्था तक प्रभावित हो चुकी है और आम जनमानस को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम मरका की जनता अब प्रशासन से मांग करती है कि ग्राम पंचायत के विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, साफ-सफाई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से सुधारा जाए, पंचायत में हो रही लापरवाही एवं अनियमितताओं पर उचित कार्रवाई की जाए, और गाँव के विकास कार्यों को पारदर्शिता के साथ पूर्ण कराया जाए। जनता स्पष्ट करती है कि वे जागरूक हैं और अपने अधिकारों की आवाज उठाना जानती हैं, यह जोर देते हुए कि “गाँव का विकास और स्वच्छता केवल कागज़ों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देना चाहिए।”4
- बाँदा शहर के बाबा तालाब मोहल्ले निवासी जगदीश सिंह यादव ने अपने घर में हुई लाखों की चोरी की घटना के खुलासे और चोरी गए सामान की बरामदगी की मांग को लेकर अधिकारियों को प्रार्थना पत्र सौंपा है। पीड़ित के अनुसार, यह घटना 5 मई 2026 की रात को हुई थी, जब वह अपने परिवार के साथ शुकुल कुआं स्थित श्रीराम पैलेस में अपनी भतीजी के विवाह समारोह में शामिल होने गए थे। रात करीब 11:29 बजे उनके छोटे पुत्र उदय और भतीजे संदीप ने घर लौटने पर देखा कि मुख्य गेट का ताला टूटा हुआ था और अज्ञात चोरों ने कमरों व अलमारी के ताले तोड़कर चोरी को अंजाम दिया था। घटना की जानकारी मिलते ही जगदीश सिंह यादव ने तत्काल कोतवाली नगर पुलिस और पुलिस हेल्पलाइन को सूचित किया। सूचना के लगभग एक घंटे बाद मण्डी समिति पुलिस चौकी से पुलिस टीम मौके पर पहुंची और फिंगर प्रिंट सहित आवश्यक जांच-पड़ताल की गई। हालांकि, कई दिन बीत जाने के बाद भी इस लाखों की चोरी का खुलासा नहीं हो सका है, जिससे पीड़ित निराश है। पीड़ित का आरोप है कि 25 मई 2026 को पुलिस द्वारा कुछ संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था, और उनका मानना है कि इन गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों का चोरी की घटना से संबंध हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि घटना से लगभग 15 दिन पहले कुछ लोग उनके घर में पुताई का काम कर रहे थे, जिनके पास घर के अंदर और बाहर की पूरी जानकारी थी। अपने प्रार्थना पत्र में, पीड़ित ने मांग की है कि घटना के समय उनके घर के आसपास सक्रिय मोबाइल नंबरों और संदिग्ध गतिविधियों की जांच की जाए, जिससे चोरी का खुलासा हो सके। जगदीश सिंह यादव ने अधिकारियों को एफआईआर और चोरी गए सामान की सूची भी उपलब्ध कराते हुए मामले की निष्पक्ष जांच, चोरी गए सामान की बरामदगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।3
- बांदा जनपद के मुरवल गांव में आए भीषण तूफान ने एक किसान की उम्मीदों पर ऐसा प्रहार किया है कि उसकी पूरी सिंचाई व्यवस्था पलभर में ठप हो गई है। गांव निवासी शिरोमण निषाद पुत्र छंगू निषाद के ट्यूबवेल पर प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान योजना (पीएम-कुसुम) वर्ष 2024-25 के अंतर्गत लगाया गया सोलर सिस्टम तेज आंधी की चपेट में आकर बुरी तरह टूट गया। सरकार ने यह सौर ऊर्जा संयंत्र किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और डीजल-पेट्रोल के बढ़ते खर्च से राहत देने के उद्देश्य से अनुदान के जरिए स्थापित कराया था। हालाँकि, जिस सोलर पैनल से खेतों में हरियाली और घरों तक पानी पहुंचना था, वही अब टूटकर बेजान पड़ा है। तूफान की रफ्तार इतनी भयावह थी कि लोहे के ढांचे तक हिल गए और सोलर पैनल चकनाचूर हो गए, जिससे किसान की सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह धराशायी हो गई। ग्रामीण अंचलों में खेती केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि पूरे परिवार की सांसों का सहारा होती है। ऐसे में सिंचाई का रुकना केवल तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि फसल के भविष्य पर एक गंभीर संकट का संकेत है। खेतों के सूखने से किसान की मेहनत, बीज और सभी उम्मीदों पर पानी फिर सकता है। इसके अतिरिक्त, ट्यूबवेल बंद होने से गांव में पेयजल संकट की आशंका भी गहराने लगी है। पीड़ित किसान ने प्रशासन और संबंधित विभाग से तत्काल आर्थिक सहायता और शीघ्र मरम्मत की मांग की है। अब देखना यह होगा कि प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे इस किसान तक राहत कितनी तेजी से पहुंचती है, क्योंकि किसान के लिए हर गुजरता दिन उसकी फसल की उम्र को कम कर रहा है।1
- फतेहपुर जिले के लिए अगले 24 घंटे भारी रहने वाले हैं, जहाँ मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है। 'सचेत ऐप' से मिली जानकारी के अनुसार, इन अगले 24 घंटों में 80-90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने, गरज-चमक के साथ बारिश होने और ओलावृष्टि होने की प्रबल संभावना है। इसी के मद्देनजर जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स ने जिले के लोगों से अपील की है कि वे खराब मौसम में बिना किसी जरूरी काम के घर से बाहर न निकलें। साथ ही, पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े न होने की भी सलाह दी गई है। जिला प्रशासन इस स्थिति को लेकर पूरी तरह से अलर्ट पर है।1
- आज जहां कुछ लोग अपनी जेब भरने की होड़ में लगे रहते हैं, वहीं कुछ समाजसेवी अपनी मानवता की मिसाल पेश कर लोगों का दिल जीत रहे हैं। इसी क्रम में, इकारी और रमवा रेलवे क्रॉसिंग पुल के पास, समाजसेवी नौशाद अहमद ने तपती धूप में राहगीरों को रोक-रोककर शरबत पिलाया और उनकी दुआएं लीं। आजाद समाज पार्टी भीम आर्मी के एक सच्चे सिपाही के तौर पर नौशाद अहमद लगातार लोगों के बीच अपनी जगह बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। आजाद समाज पार्टी भीम आर्मी के इन्हीं सच्चे सिपाहियों ने इस सराहनीय कार्य के जरिए राहगीरों को गर्मी से राहत दिलाई।1
- चित्रकूट में भरतदास बनाम रैपुरा दरोगा विवाद गहरा गया है, जहाँ भरतदास का रैपुरा थाने में तैनात एसआई रामकुमार दुबे के साथ बातचीत का एक ऑडियो सामने आया है। इस ऑडियो में भरतदास द्वारा दरोगा को अपशब्द कहे जाने का आरोप है। इसके अलावा, ऑडियो के अंत में भरतदास एक महिला, जो वन विभाग की अध्यक्ष बताई जा रही हैं, उनके बारे में भी टिप्पणी करते हुए सुने जा रहे हैं, जिससे उनकी इज्जत पर सवाल उठाए जा रहे हैं। पोस्ट में आरोप लगाया गया है कि यदि चित्रकूट पुलिस कानूनी रूप से चाहे तो इस ऑडियो में मौजूद पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर भरतदास के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है, यहाँ तक कि उन्हें पचास लाठियां मार सकती है। हालांकि, ऐसा होने की संभावना से इनकार किया गया है, क्योंकि भरतदास की मुलाकात योगी आदित्यनाथ जी से हो चुकी है। UP Police और MYogiAdityanath को टैग करते हुए पोस्ट में कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने भरतदास की झूठी बातों में आकर चित्रकूट पुलिस और महिलाओं को पूरी तरह से कमजोर कर दिया है, जिससे भरतदास द्वारा पुलिस और महिलाओं के प्रति किए गए अपमान पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।1
- जिला उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष सत्य प्रकाश सर्राफ ने एक प्रेसवार्ता के दौरान विधान परिषद में व्यापारियों के प्रतिनिधित्व की मांग उठाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस प्रकार शिक्षक और स्नातक कोटे से विधान परिषद सदस्य (MLC) चुने जाते हैं, उसी तर्ज पर व्यापारियों को भी विधान परिषद में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।1
- जनपद बांदा में बीती रात करीब 2 बजे आए तेज आंधी-तूफान और बारिश ने भारी तबाही मचाई है, जिससे जिले में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली तेज हवाओं की चपेट में आने से दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि आकाशीय बिजली गिरने से एक बकरी की भी जान चली गई। मृतकों में मरका थाना क्षेत्र के ग्राम मऊ निवासी 65 वर्षीय कैलाश शामिल हैं, जिनकी मौत आंधी-तूफान के दौरान घर में सो रहे होने पर ईंट और टीनशेड गिरने से हुई। वहीं, मटौंध थाना क्षेत्र के मोहन पुरवा गांव की पुनिया की मौत तब हुई जब वह तूफान के बाद फैला सामान समेट रही थीं और अचानक उनके ऊपर स्लैब गिर गई। तूफान से बिजली विभाग को भी बड़ा नुकसान हुआ है, जिसके तहत करीब 1100 बिजली पोल टूट गए और 125 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हो गए। इसके अतिरिक्त, ट्रांसमिशन लाइन के 5 बड़े टावर ग्रामीण क्षेत्रों में गिर गए हैं। बबेरू क्षेत्र के 12 बिजली घर प्रभावित हुए हैं, जिससे लगभग 110 गांवों की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है। जल शक्ति मिशन की 2 परियोजनाएं भी इस तूफान से प्रभावित हुई हैं। बिजली विभाग के चीफ इंजीनियर के अनुसार, युद्ध स्तर पर मरम्मत कार्य जारी है और लगभग आधे टूटे पोल लगाए जा चुके हैं। विभाग ने शाम तक करीब 90 प्रतिशत बिजली आपूर्ति बहाल करने का दावा किया है, हालांकि अधिकारियों ने स्वीकार किया कि कुछ गांवों में बिजली बहाल होने में अधिक समय लग सकता है। इस अचानक आए भारी तूफान से लोग भय और दहशत के माहौल में रात बिताने को मजबूर हुए और सुबह तक स्थिति सामान्य नहीं हो पाई थी। प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है।3