चित्रकूट में भरतदास बनाम रैपुरा दरोगा विवाद गहरा गया है, जहाँ भरतदास का रैपुरा थाने में तैनात एसआई रामकुमार दुबे के साथ बातचीत का एक ऑडियो सामने आया है। इस ऑडियो में भरतदास द्वारा दरोगा को अपशब्द कहे जाने का आरोप है। इसके अलावा, ऑडियो के अंत में भरतदास एक महिला, जो वन विभाग की अध्यक्ष बताई जा रही हैं, उनके बारे में भी टिप्पणी करते हुए सुने जा रहे हैं, जिससे उनकी इज्जत पर सवाल उठाए जा रहे हैं। पोस्ट में आरोप लगाया गया है कि यदि चित्रकूट पुलिस कानूनी रूप से चाहे तो इस ऑडियो में मौजूद पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर भरतदास के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है, यहाँ तक कि उन्हें पचास लाठियां मार सकती है। हालांकि, ऐसा होने की संभावना से इनकार किया गया है, क्योंकि भरतदास की मुलाकात योगी आदित्यनाथ जी से हो चुकी है। UP Police और MYogiAdityanath को टैग करते हुए पोस्ट में कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने भरतदास की झूठी बातों में आकर चित्रकूट पुलिस और महिलाओं को पूरी तरह से कमजोर कर दिया है, जिससे भरतदास द्वारा पुलिस और महिलाओं के प्रति किए गए अपमान पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
चित्रकूट में भरतदास बनाम रैपुरा दरोगा विवाद गहरा गया है, जहाँ भरतदास का रैपुरा थाने में तैनात एसआई रामकुमार दुबे के साथ बातचीत का एक ऑडियो सामने आया है। इस ऑडियो में भरतदास द्वारा दरोगा को अपशब्द कहे जाने का आरोप है। इसके अलावा, ऑडियो के अंत में भरतदास एक महिला, जो वन विभाग की अध्यक्ष बताई जा रही हैं, उनके बारे में भी टिप्पणी करते हुए सुने जा रहे हैं, जिससे उनकी इज्जत पर सवाल उठाए जा रहे हैं। पोस्ट में आरोप लगाया गया है कि यदि चित्रकूट पुलिस कानूनी रूप से चाहे तो इस ऑडियो में मौजूद पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर भरतदास के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है, यहाँ तक कि उन्हें पचास लाठियां मार सकती है। हालांकि, ऐसा होने की संभावना से इनकार किया गया है, क्योंकि भरतदास की मुलाकात योगी आदित्यनाथ जी से हो चुकी है। UP Police और MYogiAdityanath को टैग करते हुए पोस्ट में कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने भरतदास की झूठी बातों में आकर चित्रकूट पुलिस और महिलाओं को पूरी तरह से कमजोर कर दिया है, जिससे भरतदास द्वारा पुलिस और महिलाओं के प्रति किए गए अपमान पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
- चित्रकूट में भरतदास बनाम रैपुरा दरोगा विवाद गहरा गया है, जहाँ भरतदास का रैपुरा थाने में तैनात एसआई रामकुमार दुबे के साथ बातचीत का एक ऑडियो सामने आया है। इस ऑडियो में भरतदास द्वारा दरोगा को अपशब्द कहे जाने का आरोप है। इसके अलावा, ऑडियो के अंत में भरतदास एक महिला, जो वन विभाग की अध्यक्ष बताई जा रही हैं, उनके बारे में भी टिप्पणी करते हुए सुने जा रहे हैं, जिससे उनकी इज्जत पर सवाल उठाए जा रहे हैं। पोस्ट में आरोप लगाया गया है कि यदि चित्रकूट पुलिस कानूनी रूप से चाहे तो इस ऑडियो में मौजूद पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर भरतदास के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है, यहाँ तक कि उन्हें पचास लाठियां मार सकती है। हालांकि, ऐसा होने की संभावना से इनकार किया गया है, क्योंकि भरतदास की मुलाकात योगी आदित्यनाथ जी से हो चुकी है। UP Police और MYogiAdityanath को टैग करते हुए पोस्ट में कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने भरतदास की झूठी बातों में आकर चित्रकूट पुलिस और महिलाओं को पूरी तरह से कमजोर कर दिया है, जिससे भरतदास द्वारा पुलिस और महिलाओं के प्रति किए गए अपमान पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।1
- वाले राम चौबे चतुर्वेदी के अन्तिम चरण में घट बंधन कार्य क्रम1
- उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के अतर्रा में देर रात करीब 1 बजे जोरदार बारिश और तूफान दर्ज किया गया।1
- ग्राम मरका में विकास कार्यों और साफ-सफाई व्यवस्था की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है, जहाँ ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत के सचिव और प्रधान की मिलीभगत के कारण कार्यों में भारी अनियमितताएँ और लापरवाही देखी जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, गाँव की नालियाँ गंदगी से भरी पड़ी हैं और नियमित सफाई न होने से दुर्गंध तथा बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। सड़कों एवं सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी का अंबार लगा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। गाँव के विकास के नाम पर योजनाएँ केवल कागजों में दिखाई जाती हैं, जबकि धरातल पर कार्य अधूरे या नाम मात्र के नजर आते हैं। इसके अलावा, ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में कूड़ा प्रबंधन और स्वच्छता के लिए बनवाया गया RRC केंद्र (कचरा प्रबंधन केंद्र) प्रधान द्वारा तुड़वा दिया गया है, जिससे शासन की स्वच्छता योजनाओं और सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में आने वाले विकास बजट एवं योजनाओं का सही उपयोग नहीं हो रहा है, और उनकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती, जिससे साफ-सफाई जैसी मूलभूत व्यवस्था तक प्रभावित हो चुकी है और आम जनमानस को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम मरका की जनता अब प्रशासन से मांग करती है कि ग्राम पंचायत के विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, साफ-सफाई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से सुधारा जाए, पंचायत में हो रही लापरवाही एवं अनियमितताओं पर उचित कार्रवाई की जाए, और गाँव के विकास कार्यों को पारदर्शिता के साथ पूर्ण कराया जाए। जनता स्पष्ट करती है कि वे जागरूक हैं और अपने अधिकारों की आवाज उठाना जानती हैं, यह जोर देते हुए कि “गाँव का विकास और स्वच्छता केवल कागज़ों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देना चाहिए।”4
- कौशांबी में टेवां से ओसा होते हुए मंझनपुर तक बनाए गए राम वन गमन मार्ग (NH-731A) का निर्माण होने के कुछ ही महीनों बाद इसकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ गए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बनी इस आरसीसी सड़क पर दरारें उभरने लगी हैं, जिससे इसके निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। जिस सड़क को वर्षों तक मजबूत रहने और यातायात का भार सहने के लिए बनाया गया था, वह शुरुआती चरण में ही कमजोर होती दिख रही है। सड़क पर आई ये दरारें केवल तकनीकी खामी नहीं हैं, बल्कि पूरे निर्माण तंत्र की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं। यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी नई सड़क इतनी जल्दी क्यों क्षतिग्रस्त हो रही है। क्या निर्माण सामग्री मानकों के अनुरूप नहीं थी, क्या गुणवत्ता की जांच केवल कागजों तक ही सीमित रही, या फिर निर्माण कार्य में जल्दबाजी और लापरवाही बरती गई? जनता इन सवालों के जवाब जानना चाहती है। विडंबना यह है कि विकास कार्यों के नाम पर जनता के करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जब ऐसी परियोजनाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं तो जिम्मेदारी तय करने वाला कोई नजर नहीं आता। यदि सड़क का यह हाल कुछ ही महीनों में है, तो आने वाले वर्षों में इसकी स्थिति क्या होगी, इसका अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि भविष्य में मरम्मत और पुनर्निर्माण के नाम पर सरकारी धन फिर खर्च किया जाएगा, जबकि मूल निर्माण की गुणवत्ता पर कभी गंभीरता से सवाल नहीं उठाए जाएंगे। यह मुद्दा केवल सड़क में आई दरारों तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग, निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही और सरकारी निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता से भी जुड़ा है। जनता यह जानना चाहती है कि इस सड़क के निर्माण में कितनी लागत आई, निर्माण किस ठेकेदार द्वारा कराया गया और कार्य की गुणवत्ता की जांच किन अधिकारियों ने की थी। यदि सड़क समय से पहले क्षतिग्रस्त हो रही है, तो उसकी जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। ऐसे में, पूरे निर्माण कार्य की एक स्वतंत्र और उच्च स्तरीय तकनीकी जांच की आवश्यकता है। सड़क की गुणवत्ता, उपयोग की गई सामग्री, निर्माण प्रक्रिया और भुगतान से संबंधित सभी पहलुओं की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए, और यदि किसी स्तर पर लापरवाही, मानकों की अनदेखी या वित्तीय अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित ठेकेदार, अभियंताओं और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। यह केवल एक सड़क का नहीं, बल्कि जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये का सवाल है।1
- जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) के तत्वावधान में 9 जून 2026 को मध्य प्रदेश के जिला मुख्यालय सतना में क्रांतिसूर्य धरती आबा बिरसा मुंडा जी के 126वें शहादत दिवस पर एक विशाल “बिरसा मुंडा क्रांति महासम्मेलन” का आयोजन होने जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, यह केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि आदिवासी अस्मिता, युवा शक्ति और सामाजिक एकता का एक महाआंदोलन है। इस सम्मेलन का उद्देश्य युवाओं की ताकत को उजागर करना है, जो संघर्ष, संगठन और जागरूकता की नई पहचान बन चुके हैं। इस ऐतिहासिक आयोजन में मान. एडवोकेट लोकेश मुजाल्दा जी, जो जयस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। मान. रवि कुमार कोल जी, संभागीय उपाध्यक्ष, रीवा, अध्यक्षता करेंगे, जबकि मान. पवन डावर जी, मान. जीवन ठाकुर जी, और मान. बाबूलाल बघेल जी विशिष्ट उपस्थिति दर्ज कराएंगे। यह महासम्मेलन टाउनहॉल, सेमरिया चौराहा, बस स्टैंड के पास, सतना (म.प्र.) में होगा। पुष्पेन्द्र कोल द्वारा सभी मातृशक्ति, युवा साथियों, छात्र साथियों एवं समस्त सगा जनों से निवेदन किया गया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस ऐतिहासिक महासम्मेलन को सफल बनाएं, जो आदिवासी समाज में युवा शक्ति और एकता का प्रतीक बनेगा।1
- चौबे/चतुर्वेदी परिवार में वाले राम चौबे के अंतिम संस्कार के उपरांत 'नहा वन' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम परिवार के सदस्यों द्वारा दिवंगत वाले राम चौबे के अंतिम संस्कार से जुड़ी रस्म के तौर पर सम्पन्न हुआ।1
- जबलपुर के कटंगी बाइपास पर स्थित होटल सुकून में हुए एक बड़े विवाद ने पूरे शहर में चर्चा छेड़ दी है। मिली जानकारी के अनुसार, इस मामले में एक "बड़ा खुलासा" हुआ है, जहाँ कमरे का दरवाज़ा खुलते ही ज़ोरदार "बवाल" मच गया। इस पूरे घटनाक्रम में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कार्रवाई की है। बताया गया है कि होटल में कुछ लोग बिना किसी एंट्री के ठहरे हुए थे, जो इस विवाद का कारण बना। पुलिस ने भी इस मामले की जांच शुरू कर दी है, और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर दी गई है।1