logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

कौशांबी में टेवां से ओसा होते हुए मंझनपुर तक बनाए गए राम वन गमन मार्ग (NH-731A) का निर्माण होने के कुछ ही महीनों बाद इसकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ गए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बनी इस आरसीसी सड़क पर दरारें उभरने लगी हैं, जिससे इसके निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। जिस सड़क को वर्षों तक मजबूत रहने और यातायात का भार सहने के लिए बनाया गया था, वह शुरुआती चरण में ही कमजोर होती दिख रही है। सड़क पर आई ये दरारें केवल तकनीकी खामी नहीं हैं, बल्कि पूरे निर्माण तंत्र की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं। यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी नई सड़क इतनी जल्दी क्यों क्षतिग्रस्त हो रही है। क्या निर्माण सामग्री मानकों के अनुरूप नहीं थी, क्या गुणवत्ता की जांच केवल कागजों तक ही सीमित रही, या फिर निर्माण कार्य में जल्दबाजी और लापरवाही बरती गई? जनता इन सवालों के जवाब जानना चाहती है। विडंबना यह है कि विकास कार्यों के नाम पर जनता के करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जब ऐसी परियोजनाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं तो जिम्मेदारी तय करने वाला कोई नजर नहीं आता। यदि सड़क का यह हाल कुछ ही महीनों में है, तो आने वाले वर्षों में इसकी स्थिति क्या होगी, इसका अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि भविष्य में मरम्मत और पुनर्निर्माण के नाम पर सरकारी धन फिर खर्च किया जाएगा, जबकि मूल निर्माण की गुणवत्ता पर कभी गंभीरता से सवाल नहीं उठाए जाएंगे। यह मुद्दा केवल सड़क में आई दरारों तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग, निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही और सरकारी निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता से भी जुड़ा है। जनता यह जानना चाहती है कि इस सड़क के निर्माण में कितनी लागत आई, निर्माण किस ठेकेदार द्वारा कराया गया और कार्य की गुणवत्ता की जांच किन अधिकारियों ने की थी। यदि सड़क समय से पहले क्षतिग्रस्त हो रही है, तो उसकी जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। ऐसे में, पूरे निर्माण कार्य की एक स्वतंत्र और उच्च स्तरीय तकनीकी जांच की आवश्यकता है। सड़क की गुणवत्ता, उपयोग की गई सामग्री, निर्माण प्रक्रिया और भुगतान से संबंधित सभी पहलुओं की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए, और यदि किसी स्तर पर लापरवाही, मानकों की अनदेखी या वित्तीय अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित ठेकेदार, अभियंताओं और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। यह केवल एक सड़क का नहीं, बल्कि जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये का सवाल है।

4 hrs ago
user_पत्रकार एस. चौरसिया
पत्रकार एस. चौरसिया
Local News Reporter मंझनपुर, कौशाम्बी, उत्तर प्रदेश•
4 hrs ago

कौशांबी में टेवां से ओसा होते हुए मंझनपुर तक बनाए गए राम वन गमन मार्ग (NH-731A) का निर्माण होने के कुछ ही महीनों बाद इसकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ गए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बनी इस आरसीसी सड़क पर दरारें उभरने लगी हैं, जिससे इसके निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। जिस सड़क को वर्षों तक मजबूत रहने और यातायात का भार सहने के लिए बनाया गया था, वह शुरुआती चरण में ही कमजोर होती दिख रही है। सड़क पर आई ये दरारें केवल तकनीकी खामी नहीं हैं, बल्कि पूरे निर्माण तंत्र की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं। यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी नई सड़क इतनी जल्दी क्यों क्षतिग्रस्त हो रही है। क्या निर्माण सामग्री मानकों के अनुरूप नहीं थी, क्या गुणवत्ता की जांच केवल कागजों तक ही सीमित रही, या फिर निर्माण कार्य में जल्दबाजी और लापरवाही बरती गई? जनता इन सवालों के जवाब जानना चाहती है। विडंबना यह है कि विकास कार्यों के नाम पर जनता के करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जब ऐसी परियोजनाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं तो जिम्मेदारी तय करने वाला कोई नजर नहीं आता। यदि सड़क का यह हाल कुछ ही महीनों में है, तो आने वाले वर्षों में इसकी स्थिति क्या होगी, इसका अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि भविष्य में मरम्मत और पुनर्निर्माण के नाम पर सरकारी धन फिर खर्च किया जाएगा, जबकि मूल निर्माण की गुणवत्ता पर कभी गंभीरता से सवाल नहीं उठाए जाएंगे। यह मुद्दा केवल सड़क में आई दरारों तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग, निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही और सरकारी निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता से भी जुड़ा है। जनता यह जानना चाहती है कि इस सड़क के निर्माण में कितनी लागत आई, निर्माण किस ठेकेदार द्वारा कराया गया और कार्य की गुणवत्ता की जांच किन अधिकारियों ने की थी। यदि सड़क समय से पहले क्षतिग्रस्त हो रही है, तो उसकी जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। ऐसे में, पूरे निर्माण कार्य की एक स्वतंत्र और उच्च स्तरीय तकनीकी जांच की आवश्यकता है। सड़क की गुणवत्ता, उपयोग की गई सामग्री, निर्माण प्रक्रिया और भुगतान से संबंधित सभी पहलुओं की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए, और यदि किसी स्तर पर लापरवाही, मानकों की अनदेखी या वित्तीय अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित ठेकेदार, अभियंताओं और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। यह केवल एक सड़क का नहीं, बल्कि जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये का सवाल है।

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • कौशाम्बी जिले के सराय अकिल थाना क्षेत्र के अंतर्गत खिजिरपुर कैलई उर्फ इमली गांव में शुक्रवार शाम एक महिला की गला घोंटकर हत्या कर दी गई। मृतक महिला की पहचान मनीता देवी के रूप में हुई है, जो दशरथ लाल की पत्नी थीं। घटना के समय मनीता देवी अपने पति को गोडा में खाना देने जा रही थीं। कथित तौर पर अज्ञात लोगों ने उनका गला दबाकर हत्या कर दी। परिजनों ने इस घटना के लिए अज्ञात व्यक्तियों पर हत्या का आरोप लगाया है। परिजनों द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने इस मामले का अनावरण करने और दोषियों को पकड़ने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया है।
    1
    कौशाम्बी जिले के सराय अकिल थाना क्षेत्र के अंतर्गत खिजिरपुर कैलई उर्फ इमली गांव में शुक्रवार शाम एक महिला की गला घोंटकर हत्या कर दी गई। मृतक महिला की पहचान मनीता देवी के रूप में हुई है, जो दशरथ लाल की पत्नी थीं। घटना के समय मनीता देवी अपने पति को गोडा में खाना देने जा रही थीं।

कथित तौर पर अज्ञात लोगों ने उनका गला दबाकर हत्या कर दी। परिजनों ने इस घटना के लिए अज्ञात व्यक्तियों पर हत्या का आरोप लगाया है। परिजनों द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने इस मामले का अनावरण करने और दोषियों को पकड़ने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया है।
    user_Journalist Shubham Pandey
    Journalist Shubham Pandey
    Local News Reporter मंझनपुर, कौशाम्बी, उत्तर प्रदेश•
    34 min ago
  • कौशांबी में टेवां से ओसा होते हुए मंझनपुर तक बनाए गए राम वन गमन मार्ग (NH-731A) का निर्माण होने के कुछ ही महीनों बाद इसकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ गए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बनी इस आरसीसी सड़क पर दरारें उभरने लगी हैं, जिससे इसके निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। जिस सड़क को वर्षों तक मजबूत रहने और यातायात का भार सहने के लिए बनाया गया था, वह शुरुआती चरण में ही कमजोर होती दिख रही है। सड़क पर आई ये दरारें केवल तकनीकी खामी नहीं हैं, बल्कि पूरे निर्माण तंत्र की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं। यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी नई सड़क इतनी जल्दी क्यों क्षतिग्रस्त हो रही है। क्या निर्माण सामग्री मानकों के अनुरूप नहीं थी, क्या गुणवत्ता की जांच केवल कागजों तक ही सीमित रही, या फिर निर्माण कार्य में जल्दबाजी और लापरवाही बरती गई? जनता इन सवालों के जवाब जानना चाहती है। विडंबना यह है कि विकास कार्यों के नाम पर जनता के करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जब ऐसी परियोजनाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं तो जिम्मेदारी तय करने वाला कोई नजर नहीं आता। यदि सड़क का यह हाल कुछ ही महीनों में है, तो आने वाले वर्षों में इसकी स्थिति क्या होगी, इसका अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि भविष्य में मरम्मत और पुनर्निर्माण के नाम पर सरकारी धन फिर खर्च किया जाएगा, जबकि मूल निर्माण की गुणवत्ता पर कभी गंभीरता से सवाल नहीं उठाए जाएंगे। यह मुद्दा केवल सड़क में आई दरारों तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग, निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही और सरकारी निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता से भी जुड़ा है। जनता यह जानना चाहती है कि इस सड़क के निर्माण में कितनी लागत आई, निर्माण किस ठेकेदार द्वारा कराया गया और कार्य की गुणवत्ता की जांच किन अधिकारियों ने की थी। यदि सड़क समय से पहले क्षतिग्रस्त हो रही है, तो उसकी जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। ऐसे में, पूरे निर्माण कार्य की एक स्वतंत्र और उच्च स्तरीय तकनीकी जांच की आवश्यकता है। सड़क की गुणवत्ता, उपयोग की गई सामग्री, निर्माण प्रक्रिया और भुगतान से संबंधित सभी पहलुओं की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए, और यदि किसी स्तर पर लापरवाही, मानकों की अनदेखी या वित्तीय अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित ठेकेदार, अभियंताओं और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। यह केवल एक सड़क का नहीं, बल्कि जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये का सवाल है।
    1
    कौशांबी में टेवां से ओसा होते हुए मंझनपुर तक बनाए गए राम वन गमन मार्ग (NH-731A) का निर्माण होने के कुछ ही महीनों बाद इसकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ गए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बनी इस आरसीसी सड़क पर दरारें उभरने लगी हैं, जिससे इसके निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। जिस सड़क को वर्षों तक मजबूत रहने और यातायात का भार सहने के लिए बनाया गया था, वह शुरुआती चरण में ही कमजोर होती दिख रही है।

सड़क पर आई ये दरारें केवल तकनीकी खामी नहीं हैं, बल्कि पूरे निर्माण तंत्र की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं। यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी नई सड़क इतनी जल्दी क्यों क्षतिग्रस्त हो रही है। क्या निर्माण सामग्री मानकों के अनुरूप नहीं थी, क्या गुणवत्ता की जांच केवल कागजों तक ही सीमित रही, या फिर निर्माण कार्य में जल्दबाजी और लापरवाही बरती गई? जनता इन सवालों के जवाब जानना चाहती है।

विडंबना यह है कि विकास कार्यों के नाम पर जनता के करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जब ऐसी परियोजनाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं तो जिम्मेदारी तय करने वाला कोई नजर नहीं आता। यदि सड़क का यह हाल कुछ ही महीनों में है, तो आने वाले वर्षों में इसकी स्थिति क्या होगी, इसका अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि भविष्य में मरम्मत और पुनर्निर्माण के नाम पर सरकारी धन फिर खर्च किया जाएगा, जबकि मूल निर्माण की गुणवत्ता पर कभी गंभीरता से सवाल नहीं उठाए जाएंगे।

यह मुद्दा केवल सड़क में आई दरारों तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग, निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही और सरकारी निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता से भी जुड़ा है। जनता यह जानना चाहती है कि इस सड़क के निर्माण में कितनी लागत आई, निर्माण किस ठेकेदार द्वारा कराया गया और कार्य की गुणवत्ता की जांच किन अधिकारियों ने की थी। यदि सड़क समय से पहले क्षतिग्रस्त हो रही है, तो उसकी जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। ऐसे में, पूरे निर्माण कार्य की एक स्वतंत्र और उच्च स्तरीय तकनीकी जांच की आवश्यकता है। सड़क की गुणवत्ता, उपयोग की गई सामग्री, निर्माण प्रक्रिया और भुगतान से संबंधित सभी पहलुओं की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए, और यदि किसी स्तर पर लापरवाही, मानकों की अनदेखी या वित्तीय अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित ठेकेदार, अभियंताओं और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। यह केवल एक सड़क का नहीं, बल्कि जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये का सवाल है।
    user_पत्रकार एस. चौरसिया
    पत्रकार एस. चौरसिया
    Local News Reporter मंझनपुर, कौशाम्बी, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • कौशांबी के मनौरी बाजार में 29 मई को एक वृहद भंडारे का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। यह आयोजन नवनिर्मित मंदिर में भगवान शिव जी की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर किया गया था। मनौरी बाजार के व्यापारियों और ग्रामवासियों द्वारा किए गए इस भव्य कार्यक्रम के दौरान शिव बारात भी निकाली गई। ग्राम प्रधान कुबेर केसरवानी ने इस अवसर पर कहा कि यह नवनिर्मित मंदिर सभी ग्रामवासियों की देन है और सभी का सहयोग अतुलनीय रहा। यह नवनिर्मित मंदिर चरवा रोड पर मनौरी ट्रांसफार्मर के पीछे स्थित है।
    1
    कौशांबी के मनौरी बाजार में 29 मई को एक वृहद भंडारे का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। यह आयोजन नवनिर्मित मंदिर में भगवान शिव जी की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर किया गया था। मनौरी बाजार के व्यापारियों और ग्रामवासियों द्वारा किए गए इस भव्य कार्यक्रम के दौरान शिव बारात भी निकाली गई। ग्राम प्रधान कुबेर केसरवानी ने इस अवसर पर कहा कि यह नवनिर्मित मंदिर सभी ग्रामवासियों की देन है और सभी का सहयोग अतुलनीय रहा। यह नवनिर्मित मंदिर चरवा रोड पर मनौरी ट्रांसफार्मर के पीछे स्थित है।
    user_जर्नलिस्ट सुनील साहू PRIME 18 NEWS वैधयत ख़बर
    जर्नलिस्ट सुनील साहू PRIME 18 NEWS वैधयत ख़बर
    रिपोर्टर मंझनपुर, कौशाम्बी, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • मूल पोस्ट में तीखे शब्दों में कहा गया है कि देश को लूटने वाले डकैत अपना काम करके भाग निकले हैं, जबकि देश का 'चौकीदार' इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सोता रहा। यह टिप्पणी इस बात पर जोर देती है कि देश में हुई कथित लूटपाट और गंभीर क्षति के समय चौकीदार पूरी तरह से निष्क्रिय रहा।
    1
    मूल पोस्ट में तीखे शब्दों में कहा गया है कि देश को लूटने वाले डकैत अपना काम करके भाग निकले हैं, जबकि देश का 'चौकीदार' इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सोता रहा। यह टिप्पणी इस बात पर जोर देती है कि देश में हुई कथित लूटपाट और गंभीर क्षति के समय चौकीदार पूरी तरह से निष्क्रिय रहा।
    user_Hemraj Maurya
    Hemraj Maurya
    सिराथू, कौशाम्बी, उत्तर प्रदेश•
    56 min ago
  • कौशाम्बी जिले के सराय अकिल थाना क्षेत्र अंतर्गत खिजिरपुर कैलई उर्फ इमली गांव में शुक्रवार शाम एक महिला की गला घोंटकर हत्या कर दी गई। मनीता देवी पत्नी दशरथ लाल अपने पति को गोडा में खाना देने जा रही थीं, तभी अज्ञात लोगों ने कथित तौर पर उनकी गला दबाकर हत्या कर दी। परिजनों ने इस घटना में अज्ञात लोगों पर हत्या का आरोप लगाया है। परिजनों की तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुकदमा पंजीकृत कर लिया है और मामले का अनावरण करने के लिए एक टीम का गठन किया गया है।
    1
    कौशाम्बी जिले के सराय अकिल थाना क्षेत्र अंतर्गत खिजिरपुर कैलई उर्फ इमली गांव में शुक्रवार शाम एक महिला की गला घोंटकर हत्या कर दी गई। मनीता देवी पत्नी दशरथ लाल अपने पति को गोडा में खाना देने जा रही थीं, तभी अज्ञात लोगों ने कथित तौर पर उनकी गला दबाकर हत्या कर दी।

परिजनों ने इस घटना में अज्ञात लोगों पर हत्या का आरोप लगाया है। परिजनों की तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुकदमा पंजीकृत कर लिया है और मामले का अनावरण करने के लिए एक टीम का गठन किया गया है।
    user_D.D.NEWS UTTER PRADESH
    D.D.NEWS UTTER PRADESH
    Journalist सिराथू, कौशाम्बी, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जनपद के सिराथू ब्लॉक अंतर्गत पल्टीपुर अंदावाँ गांव में बीती रात आए तेज़ आंधी-तूफान ने एक गरीब परिवार का आशियाना उजाड़ दिया। गुंजा सोनकर के परिवार की झोपड़ी पूरी तरह से धराशायी हो गई है, जिससे घर में रखा राशन, कपड़े और अन्य ज़रूरी सामान मलबे में दब गए। एक मासूम बेटी ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई है, “डीएम साहब, हमारी झोपड़ी टूट गई... हमें नया घर दिलवा दीजिए।” इस घटना के बाद से परिवार के घर का चूल्हा शुक्रवार सुबह से नहीं जला है, और मासूम बच्चे इस भीषण गर्मी में खुले आसमान के नीचे रहने तथा भूखे पेट दिन बिताने को मजबूर हैं। यह स्थिति तब है जब सरकार द्वारा हर गरीब को पक्का मकान देने के दावे किए जाते हैं, लेकिन यह पीड़ित परिवार आज भी सुरक्षित छत की आस में है। जिलाधिकारी कौशाम्बी से विनम्र अनुरोध किया गया है कि वे इस पीड़ित परिवार को तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध कराएं और सरकारी आवास योजना का लाभ दिलाकर उनके सिर पर छत का इंतज़ाम करें। इस पीड़ित परिवार की आवाज़ प्रशासन तक पहुंचाने के लिए पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करने की अपील भी की गई है।
    1
    उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जनपद के सिराथू ब्लॉक अंतर्गत पल्टीपुर अंदावाँ गांव में बीती रात आए तेज़ आंधी-तूफान ने एक गरीब परिवार का आशियाना उजाड़ दिया। गुंजा सोनकर के परिवार की झोपड़ी पूरी तरह से धराशायी हो गई है, जिससे घर में रखा राशन, कपड़े और अन्य ज़रूरी सामान मलबे में दब गए। एक मासूम बेटी ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई है, “डीएम साहब, हमारी झोपड़ी टूट गई... हमें नया घर दिलवा दीजिए।”

इस घटना के बाद से परिवार के घर का चूल्हा शुक्रवार सुबह से नहीं जला है, और मासूम बच्चे इस भीषण गर्मी में खुले आसमान के नीचे रहने तथा भूखे पेट दिन बिताने को मजबूर हैं। यह स्थिति तब है जब सरकार द्वारा हर गरीब को पक्का मकान देने के दावे किए जाते हैं, लेकिन यह पीड़ित परिवार आज भी सुरक्षित छत की आस में है।

जिलाधिकारी कौशाम्बी से विनम्र अनुरोध किया गया है कि वे इस पीड़ित परिवार को तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध कराएं और सरकारी आवास योजना का लाभ दिलाकर उनके सिर पर छत का इंतज़ाम करें। इस पीड़ित परिवार की आवाज़ प्रशासन तक पहुंचाने के लिए पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करने की अपील भी की गई है।
    user_प्रदुम कुमार मीडिया कौशाम्बी
    प्रदुम कुमार मीडिया कौशाम्बी
    सिराथू, कौशाम्बी, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • प्रयागराज में एक चौराहे पर बीच सड़क गोलीबारी की घटना सामने आई है, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। इस फायरिंग के बाद, स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया।
    1
    प्रयागराज में एक चौराहे पर बीच सड़क गोलीबारी की घटना सामने आई है, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। इस फायरिंग के बाद, स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया।
    user_कौशाम्बी एक्सप्रेस न्यूज
    कौशाम्बी एक्सप्रेस न्यूज
    सिराथू, कौशाम्बी, उत्तर प्रदेश•
    53 min ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.