चरखी दादरी में वीरवार को बकरीद की नमाज अदा होने के बाद एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल देखने को मिली, जहाँ गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की लंबे समय से चली आ रही मांग फिर से उठी। चिड़िया रोड स्थित मस्जिद में नमाज के बाद, सामाजिक कार्यकर्ता संजय रामफल ने मुस्लिम समुदाय के लोगों की मौजूदगी में देश में सांप्रदायिक सौहार्द और सांस्कृतिक सम्मान को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष शपथ दिलाई। इस अवसर पर मौलवी स्वालुहीन ने बल दिया कि इस्लाम वतन की संस्कृति, परंपराओं और पड़ोसियों की भावनाओं का सम्मान करना सिखाता है, और गाय करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है, जिसे राष्ट्रीय पशु का दर्जा मिलने से आपसी भाईचारा, मोहब्बत और सांप्रदायिक सौहार्द मजबूत होगा। उन्होंने बकरीद के मुकद्दस मौके पर इस नेक पहल का हिस्सा बनने पर खुशी जताई। संजय रामफल ने नमाजियों को संबोधित करते हुए देश के सांस्कृतिक व धार्मिक महत्व को रेखांकित किया और गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह मांग केवल किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि विभिन्न राजनीतिक दलों और मुस्लिम धर्मगुरुओं सहित तमाम सामाजिक व धार्मिक संगठनों की रही है। रामफल के अनुसार, गाय देश की संस्कृति और पहचान से गहराई से जुड़ी है, और बकरीद के पावन अवसर पर मुस्लिम भाइयों द्वारा ली गई यह शपथ साबित करती है कि भारत का हर नागरिक देश के सांस्कृतिक मूल्यों का सम्मान करता है। इस पहल का समाज के सभी वर्गों ने समर्थन किया, जो देश की गंगा-जमुनी तहजीब को दर्शाता है। वहाँ मौजूद लोगों ने देश की सांस्कृतिक विरासत के सम्मान और जीव दया के संकल्प के साथ इस मांग का पुरजोर समर्थन करने की शपथ ली। इस पहल की सभी ने सराहना की और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात सरकार तक पहुँचाने का संकल्प लिया। इस मौके पर सरीफ, तहजीब, रफीक, हमराज, सुमेर, शरीफ प्रधान, मौलवी मदीना मस्जिद, अब्बास मिस्त्री और मुस्लिम कार्यकारिणी सदस्य भी मौजूद रहे।
चरखी दादरी में वीरवार को बकरीद की नमाज अदा होने के बाद एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल देखने को मिली, जहाँ गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की लंबे समय से चली आ रही मांग फिर से उठी। चिड़िया रोड स्थित मस्जिद में नमाज के बाद, सामाजिक कार्यकर्ता संजय रामफल ने मुस्लिम समुदाय के लोगों की मौजूदगी में देश में सांप्रदायिक सौहार्द और सांस्कृतिक सम्मान को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष शपथ दिलाई। इस अवसर पर मौलवी स्वालुहीन ने बल
दिया कि इस्लाम वतन की संस्कृति, परंपराओं और पड़ोसियों की भावनाओं का सम्मान करना सिखाता है, और गाय करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है, जिसे राष्ट्रीय पशु का दर्जा मिलने से आपसी भाईचारा, मोहब्बत और सांप्रदायिक सौहार्द मजबूत होगा। उन्होंने बकरीद के मुकद्दस मौके पर इस नेक पहल का हिस्सा बनने पर खुशी जताई। संजय रामफल ने नमाजियों को संबोधित करते हुए देश के सांस्कृतिक व धार्मिक महत्व को रेखांकित किया और गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिए जाने
की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह मांग केवल किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि विभिन्न राजनीतिक दलों और मुस्लिम धर्मगुरुओं सहित तमाम सामाजिक व धार्मिक संगठनों की रही है। रामफल के अनुसार, गाय देश की संस्कृति और पहचान से गहराई से जुड़ी है, और बकरीद के पावन अवसर पर मुस्लिम भाइयों द्वारा ली गई यह शपथ साबित करती है कि भारत का हर नागरिक देश के सांस्कृतिक मूल्यों का सम्मान करता है। इस पहल का समाज के सभी
वर्गों ने समर्थन किया, जो देश की गंगा-जमुनी तहजीब को दर्शाता है। वहाँ मौजूद लोगों ने देश की सांस्कृतिक विरासत के सम्मान और जीव दया के संकल्प के साथ इस मांग का पुरजोर समर्थन करने की शपथ ली। इस पहल की सभी ने सराहना की और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात सरकार तक पहुँचाने का संकल्प लिया। इस मौके पर सरीफ, तहजीब, रफीक, हमराज, सुमेर, शरीफ प्रधान, मौलवी मदीना मस्जिद, अब्बास मिस्त्री और मुस्लिम कार्यकारिणी सदस्य भी मौजूद रहे।
- चरखी दादरी में वीरवार को बकरीद की नमाज अदा होने के बाद एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल देखने को मिली, जहाँ गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की लंबे समय से चली आ रही मांग फिर से उठी। चिड़िया रोड स्थित मस्जिद में नमाज के बाद, सामाजिक कार्यकर्ता संजय रामफल ने मुस्लिम समुदाय के लोगों की मौजूदगी में देश में सांप्रदायिक सौहार्द और सांस्कृतिक सम्मान को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष शपथ दिलाई। इस अवसर पर मौलवी स्वालुहीन ने बल दिया कि इस्लाम वतन की संस्कृति, परंपराओं और पड़ोसियों की भावनाओं का सम्मान करना सिखाता है, और गाय करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है, जिसे राष्ट्रीय पशु का दर्जा मिलने से आपसी भाईचारा, मोहब्बत और सांप्रदायिक सौहार्द मजबूत होगा। उन्होंने बकरीद के मुकद्दस मौके पर इस नेक पहल का हिस्सा बनने पर खुशी जताई। संजय रामफल ने नमाजियों को संबोधित करते हुए देश के सांस्कृतिक व धार्मिक महत्व को रेखांकित किया और गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह मांग केवल किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि विभिन्न राजनीतिक दलों और मुस्लिम धर्मगुरुओं सहित तमाम सामाजिक व धार्मिक संगठनों की रही है। रामफल के अनुसार, गाय देश की संस्कृति और पहचान से गहराई से जुड़ी है, और बकरीद के पावन अवसर पर मुस्लिम भाइयों द्वारा ली गई यह शपथ साबित करती है कि भारत का हर नागरिक देश के सांस्कृतिक मूल्यों का सम्मान करता है। इस पहल का समाज के सभी वर्गों ने समर्थन किया, जो देश की गंगा-जमुनी तहजीब को दर्शाता है। वहाँ मौजूद लोगों ने देश की सांस्कृतिक विरासत के सम्मान और जीव दया के संकल्प के साथ इस मांग का पुरजोर समर्थन करने की शपथ ली। इस पहल की सभी ने सराहना की और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात सरकार तक पहुँचाने का संकल्प लिया। इस मौके पर सरीफ, तहजीब, रफीक, हमराज, सुमेर, शरीफ प्रधान, मौलवी मदीना मस्जिद, अब्बास मिस्त्री और मुस्लिम कार्यकारिणी सदस्य भी मौजूद रहे।4
- हरियाणा के चरखी दादरी में पार्षदों ने राज्य की कानून-व्यवस्था और शासन पर गंभीर सवाल उठाते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान, पार्षदों ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री, सांसदों और विधायकों को 'पंगु' करार दिया, यह प्रश्न करते हुए कि क्या वास्तव में सरकार खट्टर ही चला रहे हैं। यह आरोप हरियाणा में कथित जंगलराज, बढ़ते अपराध और गैंगस्टर द्वारा वसूली की घटनाओं के संदर्भ में लगाया गया, जिससे प्रदेश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की गई।1
- हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड, भिवानी के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. पवन शर्मा के सम्मान में गुरुवार को पंडित सीताराम शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय, भिवानी में एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शिक्षा जगत, सामाजिक संगठनों, शिक्षक संगठनों और विभिन्न संस्थाओं से जुड़े लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। समारोह के दौरान वक्ताओं ने प्रोफेसर डॉ. पवन शर्मा द्वारा शिक्षा क्षेत्र में दिए गए उल्लेखनीय योगदान की जमकर सराहना की। उनके प्रयासों से बोर्ड परीक्षाओं में पारदर्शिता आई और शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार हुए। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि उनके कार्यकाल में हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की कार्यप्रणाली को नई दिशा मिली और विद्यार्थियों के हित में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। स्कूल कैडर लेक्चरर एसोसिएशन हरियाणा और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में, आयोजकों ने डॉ. पवन शर्मा को स्मृति चिन्ह और सम्मान-पत्र भेंट कर सम्मानित किया। यह समारोह तालियों, स्वागत नारों और सम्मान गीतों से गूंज उठा। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा के क्षेत्र में ईमानदार, दूरदर्शी और मजबूत नेतृत्व की हमेशा आवश्यकता होती है, और प्रोफेसर डॉ. पवन शर्मा ने अपने कार्यकाल में सकारात्मक सोच व प्रभावी प्रशासनिक क्षमता के बल पर शिक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रमाण दिया। गौरतलब है कि हाल के महीनों में हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड से जुड़े कई मुद्दों और शिक्षा सुधारों को लेकर प्रोफेसर डॉ. पवन शर्मा तथा बोर्ड प्रशासन लगातार चर्चाओं में रहे हैं। यह कार्यक्रम शिक्षा प्रेमियों, अध्यापकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शहर के गणमान्य लोगों की उल्लेखनीय उपस्थिति के साथ उत्साहपूर्ण माहौल में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।1
- भिवानी में प्रो. डॉ. पवन शर्मा के सम्मान में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षा जगत की कई बड़ी हस्तियाँ शामिल हुईं। इस अवसर पर डॉ. पवन शर्मा ने शिक्षा को समाज की सबसे बड़ी ताकत बताया और युवाओं को बेहतर शिक्षा प्रदान करने को सबसे बड़ी जिम्मेदारी करार दिया। समारोह में उपस्थित वक्ताओं ने शिक्षा के क्षेत्र में डॉ. पवन शर्मा के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनका कार्य प्रेरणादायक रहा है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल पेश करता है।1
- भिवानी में सोना और चांदी के दामों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इन कीमतों में आ रहे इस बदलाव के पीछे के 'बड़े राज' बृज लाल सर्राफ ने उजागर किए हैं।1
- भिवानी से पूर्व बीजेपी जिला अध्यक्ष रहे शंकर धूपड़ को हरियाणा बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (HBSE) का चैयरमैन नियुक्त किया गया है।1
- भिवानी जिले के देवसर गांव में हाल ही में चुने गए सरपंच और सात पंचों ने अपने पदों की शपथ ली। इस कार्यक्रम के दौरान नवनिर्वाचित सरपंच और सभी सात पंचों को विधिवत रूप से शपथ दिलाई गई।1
- Post by PPT News1