पीला मोजेक से सोयाबीन तबाह, किसान परेशान—विज्ञापनों में किसान कल्याण और खेतों में किसान बेहाल : प्रवीण धौलपुरे बैरसिया। बैरसिया विधानसभा क्षेत्र के सूरजपुरा, आमल्या, उमरिया, बाबूखेड़ी सहित आसपास के गांवों में सोयाबीन की खड़ी फसल पर पीला मोजेक बीमारी के प्रकोप से किसान गंभीर संकट में हैं। किसानों की महीनों की मेहनत खेतों में बर्बाद हो रही है, लेकिन प्रशासन और कृषि विभाग की ओर से अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है। इसी गंभीर समस्या को लेकर आज किसानों के साथ एसडीएम कार्यालय बैरसिया पहुंचकर ज्ञापन सौंपा गया और प्रशासन के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, जिला कलेक्टर, भोपाल सांसद आलोक शर्मा, क्षेत्रीय विधायक विष्णु खत्री सहित संबंधित जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों तक किसानों की समस्या पहुंचाई गई। प्रवीण धौलपुरे ने कहा कि किसानों की शिकायत बेहद गंभीर है। खेतों में सोयाबीन की फसल लगातार पीली पड़ रही है और कई किसानों की फसल पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है। इसके बावजूद अभी तक व्यापक स्तर पर फसल नुकसान का सर्वे शुरू नहीं किया गया है। किसान पटवारी, तहसीलदार और कृषि विभाग के कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। धौलपुरे ने कहा कि क्षेत्रीय विधायक विष्णु खत्री को भी किसानों की इस गंभीर समस्या का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। जब उनके विधानसभा क्षेत्र के किसान अपनी खड़ी फसल बर्बाद होने की शिकायत कर रहे हैं, तब किसानों की आवाज को प्रशासन और सरकार तक मजबूती से पहुंचाना जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यह केवल बैरसिया के कुछ गांवों की समस्या नहीं है। बैरसिया राजधानी भोपाल से लगा हुआ ग्रामीण क्षेत्र है। यदि राजधानी से सटे क्षेत्र के किसानों की यह स्थिति है, तो प्रदेश के दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। सरकार को इसे एक गंभीर कृषि संकट के रूप में लेना चाहिए। प्रवीण धौलपुरे ने देश के कृषि मंत्री एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी मांग की कि वे मध्यप्रदेश में सोयाबीन की फसल को हो रहे नुकसान का तत्काल संज्ञान लें। प्रदेश के कृषि मंत्री और मुख्यमंत्री को भी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देकर प्रभावित गांवों में तत्काल सर्वे एवं राहत की कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। धौलपुरे ने कहा कि सरकार एक ओर अपने विज्ञापनों में किसान कल्याण और किसानों की खुशहाली के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन दूसरी ओर किसान की आंखों के सामने उसकी खड़ी फसल बर्बाद हो रही है और उसे अपनी समस्या बताने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब खेत में किसान परेशान है, तो विज्ञापनों में किसान कल्याण आखिर किसका हो रहा है? किसानों की प्रमुख मांगें प्रवीण धौलपुरे ने प्रशासन और सरकार से मांग की कि— 1. सूरजपुरा, आमल्या, उमरिया, बाबूखेड़ी सहित बैरसिया क्षेत्र के सभी प्रभावित गांवों में तत्काल गांव-गांव फसल सर्वे कराया जाए। 2. पीला मोजेक बीमारी से सोयाबीन की फसल को हुए नुकसान का वास्तविक, निष्पक्ष और पारदर्शी आकलन किया जाए। 3. जिन किसानों की फसल प्रभावित अथवा पूरी तरह बर्बाद हुई है, उन्हें नियमानुसार उचित मुआवजा एवं राहत राशि उपलब्ध कराई जाए। 4. जिन किसानों की KCC नहीं हुई है, उन्हें केवल इस आधार पर राहत से वंचित न किया जाए। ऐसे किसानों की भी अलग से पहचान कर फसल नुकसान का सर्वे कराया जाए और पात्रता के अनुसार मुआवजा दिया जाए। 5. पटवारी, तहसीलदार और कृषि विभाग के अधिकारियों को प्रभावित गांवों में जाकर मौके पर फसल की स्थिति देखने तथा तत्काल रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए जाएं। 6. कृषि विभाग की विशेषज्ञ टीम गांव-गांव भेजी जाए, ताकि बीमारी के कारणों का वैज्ञानिक परीक्षण हो और किसानों को फसल बचाने के लिए आवश्यक सलाह एवं सहायता उपलब्ध कराई जा सके। 7. सर्वे की प्रक्रिया को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए, बल्कि वास्तविक खेतों में पहुंचकर नुकसान का आकलन किया जाए। प्रवीण धौलपुरे ने कहा कि किसान केवल मुआवजा नहीं मांग रहा, वह अपनी मेहनत और अपनी आजीविका बचाने की मांग कर रहा है। सोयाबीन की फसल का नुकसान सीधे तौर पर किसान परिवार की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करेगा। इसका असर बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च, कृषि ऋण की अदायगी और अगले कृषि सीजन की तैयारी तक पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को किसान के संकट को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय मानवीय और आर्थिक संकट के रूप में देखना चाहिए। समय पर सर्वे और राहत नहीं मिली तो किसानों की परेशानी और बढ़ेगी। प्रवीण धौलपुरे ने कहा कि आज किसानों ने एसडीएम बैरसिया के माध्यम से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाई है। अब सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह इस ज्ञापन को केवल एक कागज बनाकर न रखे, बल्कि तत्काल कार्रवाई करे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसानों की फसल का सर्वे, नुकसान का सही आकलन और उचित मुआवजा हमारी प्रमुख मांग है। खेत में किसान की फसल बर्बाद हो रही है और सरकार विज्ञापनों में किसान को खुशहाल बता रही है—यह विरोधाभास अब नहीं चलेगा। प्रवीण धौलपुरे ने कहा कि किसानों को उनका हक और उचित मुआवजा दिलाने के लिए कांग्रेस किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है। यदि सरकार ने समय रहते किसानों की समस्या का समाधान नहीं किया तो किसानों के हक में संघर्ष को और व्यापक किया जाएगा। सर्वे कराओ। नुकसान का आकलन कराओ। किसानों को उचित मुआवजा दिलाओ। किसानों की आवाज दबेगी नहीं, संघर्ष रुकेगा नहीं। ✊🌾 प्रवीण धौलपुरे प्रदेश प्रवक्ता, मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी
पीला मोजेक से सोयाबीन तबाह, किसान परेशान—विज्ञापनों में किसान कल्याण और खेतों में किसान बेहाल : प्रवीण धौलपुरे बैरसिया। बैरसिया विधानसभा क्षेत्र के सूरजपुरा, आमल्या, उमरिया, बाबूखेड़ी सहित आसपास के गांवों में सोयाबीन की खड़ी फसल पर पीला मोजेक बीमारी के प्रकोप से किसान गंभीर संकट में हैं। किसानों की महीनों की मेहनत खेतों में बर्बाद हो रही है, लेकिन प्रशासन और कृषि विभाग की ओर से अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है। इसी गंभीर समस्या को लेकर आज किसानों के साथ एसडीएम कार्यालय बैरसिया पहुंचकर ज्ञापन सौंपा गया और प्रशासन के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, जिला कलेक्टर, भोपाल सांसद आलोक शर्मा, क्षेत्रीय विधायक विष्णु खत्री सहित संबंधित जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों तक किसानों की समस्या पहुंचाई गई। प्रवीण धौलपुरे ने कहा कि किसानों की शिकायत बेहद गंभीर है। खेतों में सोयाबीन की फसल लगातार पीली पड़ रही है और कई किसानों की फसल पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है। इसके बावजूद अभी तक व्यापक स्तर पर फसल नुकसान का सर्वे शुरू नहीं किया गया है। किसान पटवारी, तहसीलदार और कृषि विभाग के कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। धौलपुरे ने कहा कि क्षेत्रीय विधायक विष्णु खत्री को भी किसानों की इस गंभीर समस्या का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। जब उनके विधानसभा क्षेत्र के किसान अपनी खड़ी फसल बर्बाद होने की शिकायत कर रहे हैं, तब किसानों की आवाज को प्रशासन और सरकार तक मजबूती से पहुंचाना जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यह केवल बैरसिया के कुछ गांवों की समस्या नहीं है। बैरसिया राजधानी भोपाल से लगा हुआ ग्रामीण क्षेत्र है। यदि राजधानी से सटे क्षेत्र के किसानों की यह स्थिति है, तो प्रदेश के दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। सरकार को इसे एक गंभीर कृषि संकट के रूप में लेना चाहिए। प्रवीण धौलपुरे ने देश के कृषि मंत्री एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी मांग की कि वे मध्यप्रदेश में सोयाबीन की फसल को हो रहे नुकसान का तत्काल संज्ञान लें। प्रदेश के कृषि मंत्री और मुख्यमंत्री को भी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देकर प्रभावित गांवों में तत्काल सर्वे एवं राहत की कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। धौलपुरे ने कहा कि सरकार एक ओर अपने विज्ञापनों में किसान कल्याण और किसानों की खुशहाली के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन दूसरी ओर किसान की आंखों के सामने उसकी खड़ी फसल बर्बाद हो रही है और उसे अपनी समस्या बताने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब खेत में किसान परेशान है, तो विज्ञापनों में किसान कल्याण आखिर किसका हो रहा है? किसानों की प्रमुख मांगें प्रवीण धौलपुरे ने प्रशासन और सरकार से मांग की कि— 1. सूरजपुरा, आमल्या, उमरिया, बाबूखेड़ी सहित बैरसिया क्षेत्र के सभी प्रभावित गांवों में तत्काल गांव-गांव फसल सर्वे कराया जाए। 2. पीला मोजेक बीमारी से सोयाबीन की फसल को हुए नुकसान का वास्तविक, निष्पक्ष और पारदर्शी आकलन किया जाए। 3. जिन किसानों की फसल प्रभावित अथवा पूरी तरह बर्बाद हुई है, उन्हें नियमानुसार उचित मुआवजा एवं राहत राशि उपलब्ध कराई जाए। 4. जिन किसानों की KCC नहीं हुई है, उन्हें केवल इस आधार पर राहत से वंचित न किया जाए। ऐसे किसानों की भी अलग से पहचान कर फसल नुकसान का सर्वे कराया जाए और पात्रता के अनुसार मुआवजा दिया जाए। 5. पटवारी, तहसीलदार और कृषि विभाग के अधिकारियों को प्रभावित गांवों में जाकर मौके पर फसल की स्थिति देखने तथा तत्काल रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए जाएं। 6. कृषि विभाग की विशेषज्ञ टीम गांव-गांव भेजी जाए, ताकि बीमारी के कारणों का वैज्ञानिक परीक्षण हो और किसानों को फसल बचाने के लिए आवश्यक सलाह एवं सहायता उपलब्ध कराई जा सके। 7. सर्वे की प्रक्रिया को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए, बल्कि वास्तविक खेतों में पहुंचकर नुकसान का आकलन किया जाए। प्रवीण धौलपुरे ने कहा कि किसान केवल मुआवजा नहीं मांग रहा, वह अपनी मेहनत और अपनी आजीविका बचाने की मांग कर रहा है। सोयाबीन की फसल का नुकसान सीधे तौर पर किसान परिवार की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करेगा। इसका असर बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च, कृषि ऋण की अदायगी और अगले कृषि सीजन की तैयारी तक पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को किसान के संकट को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय मानवीय और आर्थिक संकट के रूप में देखना चाहिए। समय पर सर्वे और राहत नहीं मिली तो किसानों की परेशानी और बढ़ेगी। प्रवीण धौलपुरे ने कहा कि आज किसानों ने एसडीएम बैरसिया के माध्यम से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाई है। अब सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह इस ज्ञापन को केवल एक कागज बनाकर न रखे, बल्कि तत्काल कार्रवाई करे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसानों की फसल का सर्वे, नुकसान का सही आकलन और उचित मुआवजा हमारी प्रमुख मांग है। खेत में किसान की फसल बर्बाद हो रही है और सरकार विज्ञापनों में किसान को खुशहाल बता रही है—यह विरोधाभास अब नहीं चलेगा। प्रवीण धौलपुरे ने कहा कि किसानों को उनका हक और उचित मुआवजा दिलाने के लिए कांग्रेस किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है। यदि सरकार ने समय रहते किसानों की समस्या का समाधान नहीं किया तो किसानों के हक में संघर्ष को और व्यापक किया जाएगा। सर्वे कराओ। नुकसान का आकलन कराओ। किसानों को उचित मुआवजा दिलाओ। किसानों की आवाज दबेगी नहीं, संघर्ष रुकेगा नहीं। ✊🌾 प्रवीण धौलपुरे प्रदेश प्रवक्ता, मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी
- *घायल किसान को ठेले पर लेकर भोपाल पहुंचे परिजन अब दिल्ली जाने की चेतावनी* भोपाल। सीहोर जिले के श्यामपुर तहसील के ग्राम बड़वेली निवासी किसान सतीश मेवाड़ा विद्युत करंट की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। न्याय की मांग को लेकर मंगलवार को उनके पिता प्रहलाद सिंह मेवाड़ा घायल बेटे को हाथ ठेले पर लेकर भोपाल संभागायुक्त कार्यालय पहुंचे। पीड़ित परिवार और किसानों ने डिप्टी कमिश्नर भारती देवी मिश्रा को ज्ञापन सौंपकर मामले में शीघ्र कार्रवाई की मांग की। अधिकारियों ने महिला आयोग के निर्देश के अनुसार अपने स्तर पर जांच दल गठित कर जांच कराने का आश्वासन दिया। परिवार और किसानों का आरोप है कि दो माह से लगातार न्याय की गुहार लगाने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली है। उनकी मांग है कि जिम्मेदार विद्युत अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए, घायल किसान को 25 लाख रुपये मुआवजा और सरकारी नौकरी दी जाए। पीड़ित किसान के पिता ने चेतावनी दी कि यदि भोपाल से भी न्याय नहीं मिला तो वे अपने घायल बेटे को इसी हाथ ठेले पर लेकर दिल्ली जाएंगे और जंतर-मंतर होते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से न्याय की गुहार लगाएंगे। किसानों ने मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन और धरना-प्रदर्शन तेज करने की भी चेतावनी दी है।1
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- आज #इंदौर में नर्सिंग छात्राओं ने मुलाकात कर अपनी समस्याओं से अवगत करवाया! लाड़लियों की समस्याओं को प्राथमिकता से सरकार तक पहुंचाया और यह विश्वास भी दिलाया कि युवाओं से जुड़ी हर मांग में कांग्रेस साथ खड़ी है! @rshuklabjp1
- Bhopal MLA Arif Masood visited the protest by GMC interns and extended his support to their demands.1
- Gulshan bhi ab to Bina na lagta Hai har EK apna begana lagta hai welcome to Mohabbat Ras Na Aayi Shayar Gangadhar Malajpure1
- मातृ प्रेम और आस्था का पावन पर्व — बछ बारस ,श्रीमती बबीता परमार, नगर पालिका अध्यक्ष शुजालपुर 🙏 मातृ प्रेम और आस्था का पावन पर्व — बछ बारस 🐄🌸 श्रीमती बबीता परमार, नगर पालिका अध्यक्ष शुजालपुर ने गौ माता एवं बछड़े का पूजन कर भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त किया। सभी माताओं को बछ बारस की हार्दिक शुभकामनाएँ। 🙏 #बछबारस #गोवत्सद्वादशी #गौमाता #शुजालपुर #बबीता_परमार #श्रीकृष्ण #आस्था #सनातन1
- पीला मोजेक से सोयाबीन तबाह, किसान परेशान—विज्ञापनों में किसान कल्याण और खेतों में किसान बेहाल : प्रवीण धौलपुरे बैरसिया। बैरसिया विधानसभा क्षेत्र के सूरजपुरा, आमल्या, उमरिया, बाबूखेड़ी सहित आसपास के गांवों में सोयाबीन की खड़ी फसल पर पीला मोजेक बीमारी के प्रकोप से किसान गंभीर संकट में हैं। किसानों की महीनों की मेहनत खेतों में बर्बाद हो रही है, लेकिन प्रशासन और कृषि विभाग की ओर से अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है। इसी गंभीर समस्या को लेकर आज किसानों के साथ एसडीएम कार्यालय बैरसिया पहुंचकर ज्ञापन सौंपा गया और प्रशासन के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, जिला कलेक्टर, भोपाल सांसद आलोक शर्मा, क्षेत्रीय विधायक विष्णु खत्री सहित संबंधित जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों तक किसानों की समस्या पहुंचाई गई। प्रवीण धौलपुरे ने कहा कि किसानों की शिकायत बेहद गंभीर है। खेतों में सोयाबीन की फसल लगातार पीली पड़ रही है और कई किसानों की फसल पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है। इसके बावजूद अभी तक व्यापक स्तर पर फसल नुकसान का सर्वे शुरू नहीं किया गया है। किसान पटवारी, तहसीलदार और कृषि विभाग के कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। धौलपुरे ने कहा कि क्षेत्रीय विधायक विष्णु खत्री को भी किसानों की इस गंभीर समस्या का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। जब उनके विधानसभा क्षेत्र के किसान अपनी खड़ी फसल बर्बाद होने की शिकायत कर रहे हैं, तब किसानों की आवाज को प्रशासन और सरकार तक मजबूती से पहुंचाना जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यह केवल बैरसिया के कुछ गांवों की समस्या नहीं है। बैरसिया राजधानी भोपाल से लगा हुआ ग्रामीण क्षेत्र है। यदि राजधानी से सटे क्षेत्र के किसानों की यह स्थिति है, तो प्रदेश के दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। सरकार को इसे एक गंभीर कृषि संकट के रूप में लेना चाहिए। प्रवीण धौलपुरे ने देश के कृषि मंत्री एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी मांग की कि वे मध्यप्रदेश में सोयाबीन की फसल को हो रहे नुकसान का तत्काल संज्ञान लें। प्रदेश के कृषि मंत्री और मुख्यमंत्री को भी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देकर प्रभावित गांवों में तत्काल सर्वे एवं राहत की कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। धौलपुरे ने कहा कि सरकार एक ओर अपने विज्ञापनों में किसान कल्याण और किसानों की खुशहाली के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन दूसरी ओर किसान की आंखों के सामने उसकी खड़ी फसल बर्बाद हो रही है और उसे अपनी समस्या बताने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब खेत में किसान परेशान है, तो विज्ञापनों में किसान कल्याण आखिर किसका हो रहा है? किसानों की प्रमुख मांगें प्रवीण धौलपुरे ने प्रशासन और सरकार से मांग की कि— 1. सूरजपुरा, आमल्या, उमरिया, बाबूखेड़ी सहित बैरसिया क्षेत्र के सभी प्रभावित गांवों में तत्काल गांव-गांव फसल सर्वे कराया जाए। 2. पीला मोजेक बीमारी से सोयाबीन की फसल को हुए नुकसान का वास्तविक, निष्पक्ष और पारदर्शी आकलन किया जाए। 3. जिन किसानों की फसल प्रभावित अथवा पूरी तरह बर्बाद हुई है, उन्हें नियमानुसार उचित मुआवजा एवं राहत राशि उपलब्ध कराई जाए। 4. जिन किसानों की KCC नहीं हुई है, उन्हें केवल इस आधार पर राहत से वंचित न किया जाए। ऐसे किसानों की भी अलग से पहचान कर फसल नुकसान का सर्वे कराया जाए और पात्रता के अनुसार मुआवजा दिया जाए। 5. पटवारी, तहसीलदार और कृषि विभाग के अधिकारियों को प्रभावित गांवों में जाकर मौके पर फसल की स्थिति देखने तथा तत्काल रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए जाएं। 6. कृषि विभाग की विशेषज्ञ टीम गांव-गांव भेजी जाए, ताकि बीमारी के कारणों का वैज्ञानिक परीक्षण हो और किसानों को फसल बचाने के लिए आवश्यक सलाह एवं सहायता उपलब्ध कराई जा सके। 7. सर्वे की प्रक्रिया को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए, बल्कि वास्तविक खेतों में पहुंचकर नुकसान का आकलन किया जाए। प्रवीण धौलपुरे ने कहा कि किसान केवल मुआवजा नहीं मांग रहा, वह अपनी मेहनत और अपनी आजीविका बचाने की मांग कर रहा है। सोयाबीन की फसल का नुकसान सीधे तौर पर किसान परिवार की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करेगा। इसका असर बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च, कृषि ऋण की अदायगी और अगले कृषि सीजन की तैयारी तक पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को किसान के संकट को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय मानवीय और आर्थिक संकट के रूप में देखना चाहिए। समय पर सर्वे और राहत नहीं मिली तो किसानों की परेशानी और बढ़ेगी। प्रवीण धौलपुरे ने कहा कि आज किसानों ने एसडीएम बैरसिया के माध्यम से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाई है। अब सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह इस ज्ञापन को केवल एक कागज बनाकर न रखे, बल्कि तत्काल कार्रवाई करे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसानों की फसल का सर्वे, नुकसान का सही आकलन और उचित मुआवजा हमारी प्रमुख मांग है। खेत में किसान की फसल बर्बाद हो रही है और सरकार विज्ञापनों में किसान को खुशहाल बता रही है—यह विरोधाभास अब नहीं चलेगा। प्रवीण धौलपुरे ने कहा कि किसानों को उनका हक और उचित मुआवजा दिलाने के लिए कांग्रेस किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है। यदि सरकार ने समय रहते किसानों की समस्या का समाधान नहीं किया तो किसानों के हक में संघर्ष को और व्यापक किया जाएगा। सर्वे कराओ। नुकसान का आकलन कराओ। किसानों को उचित मुआवजा दिलाओ। किसानों की आवाज दबेगी नहीं, संघर्ष रुकेगा नहीं। ✊🌾 प्रवीण धौलपुरे प्रदेश प्रवक्ता, मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी1