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बलरामपुर में अवैध ऑटो संचालन से बस मालिकों में आक्रोश, कई शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं, आंदोलन की चेतावनी बलरामपुर में अवैध ऑटो संचालन से बस मालिकों में आक्रोश, कई शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं, आंदोलन की चेतावनी बलरामपुर। जिले में अवैध रूप से संचालित हो रहे ऑटो के कारण बस संचालकों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। बस मालिकों का आरोप है कि कई बार प्रशासन से शिकायत करने के बावजूद आज तक इस समस्या पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। लगातार अनदेखी से नाराज बस मालिकों ने अब आंदोलन की चेतावनी दे दी है। बस संचालकों के अनुसार जिले के कई मार्गों पर बसों के आगे-आगे चार से पांच ऑटो दादागीरी से चलाए जा रहे हैं। ये ऑटो बस स्टैंड और निर्धारित स्टॉप से पहले ही सवारियां भर लेते हैं, जिससे बसों में यात्रियों की संख्या कम हो जाती है। इस कारण बस मालिकों को प्रतिदिन हजारों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। बस मालिकों का कहना है कि अधिकांश ऑटो तीन सवारी (3-सीटर) के रूप में पंजीकृत हैं, लेकिन उनमें अवैध रूप से 10 सीटें लगाकर 15 से 17 यात्रियों को बैठाकर चलाया जा रहा है। इस तरह का संचालन पूरी तरह नियमों के खिलाफ है और इससे किसी भी समय बड़ी दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है। आरोप यह भी है कि कई ऑटो चालकों के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं है और न ही उनके पास वाहन से संबंधित पूरे दस्तावेज होते हैं। बस संचालकों ने बताया कि कई बार ऑटो चालक बसों को ओवरटेक करते हुए लापरवाही से वाहन चलाते हैं, जिससे सड़क पर दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है। जब बस स्टाफ इन चालकों को नियमों का पालन करने के लिए कहता है तो वे गाली-गलौज और मारपीट पर उतर आते हैं। उन्होंने बताया कि पहले भी वाड्रफनगर में विजय बस के स्टाफ के साथ खुलेआम चौक पर मारपीट की घटना हो चुकी है। इस दौरान बस स्टाफ को लात-घूंसों और जूतों से मारा गया था, जिसकी शिकायत वाड्रफनगर चौकी में दर्ज कराई गई थी। इसके बावजूद ऑटो चालकों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। बस मालिकों ने बताया कि एक बस को चलाने में हर महीने लाखों रुपये का खर्च आता है। इसमें बस की किस्त, कर्मचारियों का वेतन, लेबर भुगतान, टैक्स और बीमा जैसी कई जिम्मेदारियां शामिल हैं। लेकिन अवैध ऑटो संचालन के कारण बसों में यात्रियों की संख्या घट गई है, जिससे कई बार डीजल का खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाता है। स्थिति यह हो गई है कि कंडक्टर और ड्राइवर भी इन रूटों पर बस चलाने से कतराने लगे हैं, क्योंकि उन्हें पर्याप्त आमदनी नहीं मिल रही है। इससे बस संचालकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। बस मालिकों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध रूप से चल रहे ऑटो के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और परिवहन व्यवस्था को नियमों के तहत संचालित किया जाए। उनका कहना है कि ऑटो चालकों के लिए भी व्यवस्थित व्यवस्था बनाई जाए, ताकि वे भी नियमों के तहत अपना काम कर सकें और बस संचालकों को भी नुकसान न उठाना पड़े। बस संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे मजबूर होकर अपनी बसों को एसडीएम कार्यालय के सामने खड़ा कर प्रदर्शन करेंगे। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो जिले में परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

7 hrs ago
user_Balrampur
Balrampur
Local News Reporter बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
7 hrs ago

बलरामपुर में अवैध ऑटो संचालन से बस मालिकों में आक्रोश, कई शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं, आंदोलन की चेतावनी बलरामपुर में अवैध ऑटो संचालन से बस मालिकों में आक्रोश, कई शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं, आंदोलन की चेतावनी बलरामपुर। जिले में अवैध रूप से संचालित हो रहे ऑटो के कारण बस संचालकों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। बस मालिकों का आरोप है कि कई बार प्रशासन से शिकायत करने के बावजूद आज तक इस समस्या पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। लगातार अनदेखी से नाराज बस मालिकों ने अब आंदोलन की चेतावनी दे दी है। बस संचालकों के अनुसार जिले के कई मार्गों पर बसों के आगे-आगे चार से पांच ऑटो दादागीरी से चलाए जा रहे हैं। ये ऑटो बस स्टैंड और निर्धारित स्टॉप से पहले ही सवारियां भर लेते हैं, जिससे बसों में यात्रियों की संख्या कम हो जाती है। इस कारण बस मालिकों को प्रतिदिन हजारों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। बस मालिकों का कहना है कि अधिकांश ऑटो तीन सवारी (3-सीटर) के रूप में पंजीकृत हैं, लेकिन उनमें अवैध रूप से 10 सीटें लगाकर 15 से 17 यात्रियों को बैठाकर चलाया जा रहा है। इस तरह का संचालन पूरी तरह नियमों के खिलाफ है और इससे किसी भी समय बड़ी दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है। आरोप यह भी है कि कई ऑटो चालकों के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं है और न ही उनके पास वाहन से संबंधित पूरे दस्तावेज होते हैं। बस संचालकों ने बताया कि कई बार ऑटो चालक बसों को ओवरटेक करते हुए लापरवाही से वाहन चलाते हैं, जिससे सड़क पर दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है। जब बस स्टाफ इन चालकों को नियमों का पालन करने के लिए कहता है तो वे गाली-गलौज और मारपीट पर उतर आते हैं। उन्होंने बताया कि पहले भी वाड्रफनगर में विजय बस के स्टाफ के साथ खुलेआम चौक पर मारपीट की घटना हो चुकी है। इस दौरान बस स्टाफ को लात-घूंसों और जूतों से मारा गया था, जिसकी शिकायत वाड्रफनगर चौकी में दर्ज कराई गई थी। इसके बावजूद ऑटो चालकों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। बस मालिकों ने बताया कि एक बस को चलाने में हर महीने लाखों रुपये का खर्च आता है। इसमें बस की किस्त, कर्मचारियों का वेतन, लेबर भुगतान, टैक्स और बीमा जैसी कई जिम्मेदारियां शामिल हैं। लेकिन अवैध ऑटो संचालन के कारण बसों में यात्रियों की संख्या घट गई है, जिससे कई बार डीजल का खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाता है। स्थिति यह हो गई है कि कंडक्टर और ड्राइवर भी इन रूटों पर बस चलाने से कतराने लगे हैं, क्योंकि उन्हें पर्याप्त आमदनी नहीं मिल रही है। इससे बस संचालकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। बस मालिकों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध रूप से चल रहे ऑटो के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और परिवहन व्यवस्था को नियमों के तहत संचालित किया जाए। उनका कहना है कि ऑटो चालकों के लिए भी व्यवस्थित व्यवस्था बनाई जाए, ताकि वे भी नियमों के तहत अपना काम कर सकें और बस संचालकों को भी नुकसान न उठाना पड़े। बस संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे मजबूर होकर अपनी बसों को एसडीएम कार्यालय के सामने खड़ा कर प्रदर्शन करेंगे। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो जिले में परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

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  • जिले के शंकरगढ़ तहसील ग्राम पंचायत जामापानि से 3 किलो मीटर पर स्थित लंगडापाठ देवी मन्दिर है जहाँ भक्तों की ताता लगी रहती है वही मुख्य पुजारी रविंद्र यादव का मीडिया से बात करते हुए बताये कि यह जो देवी माँ मूर्ति वह प्राचीन है वर्षों पहले गाय चरने वाला वसुदेव पांडो को देवी ने दर्शन दिया था तब से यहा भक्त पूजा अर्चना करते आ रहे हैं आपको बता दे कि यह मन्दिर पहुँच विहीन जगह पर है जिससे भक्त काफी मसक्त के बाद पहुँच पाते हैं यहाँ रोड पानी की विशेष कमी है वही भोला प्रसाद यादव ने बताया कि क्षेत्रीय विधायक उद्देशवरी पैकरा ने पानी को लेकर पहल किये है। बाइट- रविंद्र यादव मुख्य पुजारी बाइट- भोला प्रसाद यादव भाजपा obc मोर्चा अध्यक्ष शंकरगढ़
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    जिले के शंकरगढ़ तहसील ग्राम पंचायत जामापानि से 3 किलो मीटर पर स्थित लंगडापाठ देवी मन्दिर है जहाँ भक्तों की ताता लगी रहती है वही मुख्य पुजारी रविंद्र यादव का मीडिया से बात करते हुए बताये कि यह जो देवी माँ मूर्ति वह प्राचीन है वर्षों पहले गाय चरने वाला वसुदेव पांडो को देवी ने दर्शन दिया था तब से यहा भक्त पूजा अर्चना करते आ रहे हैं आपको बता दे कि यह मन्दिर पहुँच विहीन जगह पर है जिससे भक्त काफी मसक्त के बाद पहुँच पाते हैं यहाँ रोड पानी की विशेष कमी है वही भोला प्रसाद यादव ने बताया कि क्षेत्रीय विधायक उद्देशवरी पैकरा ने पानी को लेकर पहल किये है। 
बाइट- रविंद्र यादव मुख्य पुजारी 
बाइट- भोला प्रसाद यादव भाजपा obc मोर्चा अध्यक्ष शंकरगढ़
    user_Vijay Singh
    Vijay Singh
    बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    32 min ago
  • जिला बलरामपुर रामानुजगंज लोकेशन........... बलरामपुर एंकर....छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से भ्रष्टाचार की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सिस्टम की पारदिर्शता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला जनपद पंचायत शंकरगढ़ के आमगांव का है, जहाँ विकास के नाम पर सरकारी खजाने में ऐसी सेंध लगाई गई कि नाली निर्माण की राशि तो साल 2023-24 में ही निकाल ली गई, लेकिन जमीन पर नाली का एक कंक्रीट तक नहीं बिछा। ​ बीओ1...ग्रामीणों को जब सूचना मिली कि जिस नाली का वे वर्षों से इंतजार कर रहे हैं, उसका पैसा कागजों में पहले ही 'हजम' किया जा चुका है, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों ने सीधे जनपद पंचायत CEO से इसकी लिखित शिकायत कर दी। बीओ02..हैरानी की बात तो यह है कि जैसे ही जांच की आंच सचिव तक पहुँचने लगी, पंचायत में 'जादुई सक्रियता' आ गई। जो काम 3 साल से रुका था, शिकायत होते ही रातों-रात गांव में बालू और गिट्टी गिरनी शुरू हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि यह निर्माण सिर्फ भ्रष्टाचार को छिपाने की एक नाकाम कोशिश है। बाइट ग्रामीण
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    जिला बलरामपुर रामानुजगंज 
लोकेशन........... बलरामपुर 
एंकर....छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से भ्रष्टाचार की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सिस्टम की पारदिर्शता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला जनपद पंचायत शंकरगढ़ के आमगांव का है, जहाँ विकास के नाम पर सरकारी खजाने में ऐसी सेंध लगाई गई कि नाली निर्माण की राशि तो साल 2023-24 में ही निकाल ली गई, लेकिन जमीन पर नाली का एक कंक्रीट तक नहीं बिछा।
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बीओ1...ग्रामीणों को जब सूचना मिली कि जिस नाली का वे वर्षों से इंतजार कर रहे हैं, उसका पैसा कागजों में पहले ही 'हजम' किया जा चुका है, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों ने सीधे जनपद पंचायत CEO से इसकी लिखित शिकायत कर दी।
बीओ02..हैरानी की बात तो यह है कि जैसे ही जांच की आंच सचिव तक पहुँचने लगी, पंचायत में 'जादुई सक्रियता' आ गई। जो काम 3 साल से रुका था, शिकायत होते ही रातों-रात गांव में बालू और गिट्टी गिरनी शुरू हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि यह निर्माण सिर्फ भ्रष्टाचार को छिपाने की एक नाकाम कोशिश है।
बाइट ग्रामीण
    user_Ali Khan
    Ali Khan
    बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    1 hr ago
  • बता दे कि इस पूरे मामले में चोरी करने वाले युवक और उसके पिता को गंभीर चोट आई है जिसके बाद अंबिकापुर इलाज के लिए रेफर किया गया है।
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    बता दे कि इस पूरे मामले में चोरी करने वाले युवक और उसके पिता को गंभीर चोट आई है जिसके बाद अंबिकापुर इलाज के लिए रेफर किया गया है।
    user_Ghanshyam soni
    Ghanshyam soni
    बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    3 hrs ago
  • बलरामपुर में अवैध ऑटो संचालन से बस मालिकों में आक्रोश, कई शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं, आंदोलन की चेतावनी बलरामपुर। जिले में अवैध रूप से संचालित हो रहे ऑटो के कारण बस संचालकों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। बस मालिकों का आरोप है कि कई बार प्रशासन से शिकायत करने के बावजूद आज तक इस समस्या पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। लगातार अनदेखी से नाराज बस मालिकों ने अब आंदोलन की चेतावनी दे दी है। बस संचालकों के अनुसार जिले के कई मार्गों पर बसों के आगे-आगे चार से पांच ऑटो दादागीरी से चलाए जा रहे हैं। ये ऑटो बस स्टैंड और निर्धारित स्टॉप से पहले ही सवारियां भर लेते हैं, जिससे बसों में यात्रियों की संख्या कम हो जाती है। इस कारण बस मालिकों को प्रतिदिन हजारों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। बस मालिकों का कहना है कि अधिकांश ऑटो तीन सवारी (3-सीटर) के रूप में पंजीकृत हैं, लेकिन उनमें अवैध रूप से 10 सीटें लगाकर 15 से 17 यात्रियों को बैठाकर चलाया जा रहा है। इस तरह का संचालन पूरी तरह नियमों के खिलाफ है और इससे किसी भी समय बड़ी दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है। आरोप यह भी है कि कई ऑटो चालकों के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं है और न ही उनके पास वाहन से संबंधित पूरे दस्तावेज होते हैं। बस संचालकों ने बताया कि कई बार ऑटो चालक बसों को ओवरटेक करते हुए लापरवाही से वाहन चलाते हैं, जिससे सड़क पर दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है। जब बस स्टाफ इन चालकों को नियमों का पालन करने के लिए कहता है तो वे गाली-गलौज और मारपीट पर उतर आते हैं। उन्होंने बताया कि पहले भी वाड्रफनगर में विजय बस के स्टाफ के साथ खुलेआम चौक पर मारपीट की घटना हो चुकी है। इस दौरान बस स्टाफ को लात-घूंसों और जूतों से मारा गया था, जिसकी शिकायत वाड्रफनगर चौकी में दर्ज कराई गई थी। इसके बावजूद ऑटो चालकों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। बस मालिकों ने बताया कि एक बस को चलाने में हर महीने लाखों रुपये का खर्च आता है। इसमें बस की किस्त, कर्मचारियों का वेतन, लेबर भुगतान, टैक्स और बीमा जैसी कई जिम्मेदारियां शामिल हैं। लेकिन अवैध ऑटो संचालन के कारण बसों में यात्रियों की संख्या घट गई है, जिससे कई बार डीजल का खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाता है। स्थिति यह हो गई है कि कंडक्टर और ड्राइवर भी इन रूटों पर बस चलाने से कतराने लगे हैं, क्योंकि उन्हें पर्याप्त आमदनी नहीं मिल रही है। इससे बस संचालकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। बस मालिकों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध रूप से चल रहे ऑटो के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और परिवहन व्यवस्था को नियमों के तहत संचालित किया जाए। उनका कहना है कि ऑटो चालकों के लिए भी व्यवस्थित व्यवस्था बनाई जाए, ताकि वे भी नियमों के तहत अपना काम कर सकें और बस संचालकों को भी नुकसान न उठाना पड़े। बस संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे मजबूर होकर अपनी बसों को एसडीएम कार्यालय के सामने खड़ा कर प्रदर्शन करेंगे। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो जिले में परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
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    बलरामपुर में अवैध ऑटो संचालन से बस मालिकों में आक्रोश, कई शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं, आंदोलन की चेतावनी
बलरामपुर। जिले में अवैध रूप से संचालित हो रहे ऑटो के कारण बस संचालकों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। बस मालिकों का आरोप है कि कई बार प्रशासन से शिकायत करने के बावजूद आज तक इस समस्या पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। लगातार अनदेखी से नाराज बस मालिकों ने अब आंदोलन की चेतावनी दे दी है।
बस संचालकों के अनुसार जिले के कई मार्गों पर बसों के आगे-आगे चार से पांच ऑटो दादागीरी से चलाए जा रहे हैं। ये ऑटो बस स्टैंड और निर्धारित स्टॉप से पहले ही सवारियां भर लेते हैं, जिससे बसों में यात्रियों की संख्या कम हो जाती है। इस कारण बस मालिकों को प्रतिदिन हजारों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बस मालिकों का कहना है कि अधिकांश ऑटो तीन सवारी (3-सीटर) के रूप में पंजीकृत हैं, लेकिन उनमें अवैध रूप से 10 सीटें लगाकर 15 से 17 यात्रियों को बैठाकर चलाया जा रहा है। इस तरह का संचालन पूरी तरह नियमों के खिलाफ है और इससे किसी भी समय बड़ी दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है। आरोप यह भी है कि कई ऑटो चालकों के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं है और न ही उनके पास वाहन से संबंधित पूरे दस्तावेज होते हैं।
बस संचालकों ने बताया कि कई बार ऑटो चालक बसों को ओवरटेक करते हुए लापरवाही से वाहन चलाते हैं, जिससे सड़क पर दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है। जब बस स्टाफ इन चालकों को नियमों का पालन करने के लिए कहता है तो वे गाली-गलौज और मारपीट पर उतर आते हैं।
उन्होंने बताया कि पहले भी वाड्रफनगर में विजय बस के स्टाफ के साथ खुलेआम चौक पर मारपीट की घटना हो चुकी है। इस दौरान बस स्टाफ को लात-घूंसों और जूतों से मारा गया था, जिसकी शिकायत वाड्रफनगर चौकी में दर्ज कराई गई थी। इसके बावजूद ऑटो चालकों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
बस मालिकों ने बताया कि एक बस को चलाने में हर महीने लाखों रुपये का खर्च आता है। इसमें बस की किस्त, कर्मचारियों का वेतन, लेबर भुगतान, टैक्स और बीमा जैसी कई जिम्मेदारियां शामिल हैं। लेकिन अवैध ऑटो संचालन के कारण बसों में यात्रियों की संख्या घट गई है, जिससे कई बार डीजल का खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाता है।
स्थिति यह हो गई है कि कंडक्टर और ड्राइवर भी इन रूटों पर बस चलाने से कतराने लगे हैं, क्योंकि उन्हें पर्याप्त आमदनी नहीं मिल रही है। इससे बस संचालकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
बस मालिकों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध रूप से चल रहे ऑटो के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और परिवहन व्यवस्था को नियमों के तहत संचालित किया जाए। उनका कहना है कि ऑटो चालकों के लिए भी व्यवस्थित व्यवस्था बनाई जाए, ताकि वे भी नियमों के तहत अपना काम कर सकें और बस संचालकों को भी नुकसान न उठाना पड़े।
बस संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे मजबूर होकर अपनी बसों को एसडीएम कार्यालय के सामने खड़ा कर प्रदर्शन करेंगे। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो जिले में परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
    user_Balrampur
    Balrampur
    Local News Reporter बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    7 hrs ago
  • मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, आपके विधानसभा क्षेत्र के इस हैवान पर कारवाई कब तक? महर्षि सांदीपनि वेद विद्या संस्थान में मासूमों पर यह अत्याचार अक्षम्य है! यदि अब भी आप और आपकी सरकार कार्रवाई नहीं करे तो मान लीजिएगा कि संवेदना और साहस दोनों समाप्त हो चुके हैं! एक मासूम को तालिबानी सजा देने वाले इस व्यक्ति की तुरंत गिरफ्तारी होना चाहिए!
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    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, आपके विधानसभा क्षेत्र के इस हैवान पर कारवाई कब तक? महर्षि सांदीपनि वेद विद्या संस्थान में मासूमों पर यह अत्याचार अक्षम्य है! यदि अब भी आप और आपकी सरकार कार्रवाई नहीं करे तो मान लीजिएगा कि संवेदना और साहस दोनों समाप्त हो चुके हैं! एक मासूम को तालिबानी सजा देने वाले इस व्यक्ति की तुरंत गिरफ्तारी होना चाहिए!
    user_Raghav Sony official
    Raghav Sony official
    बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    21 hrs ago
  • बलरामपुर ब्रेकिंग चोरी करने के शक में एक युवक को दी गई तालिबानी सजा ग्रामीणों ने मिलकर एक युवक की जमकर की पिटाई सिर के बाल के कुछ हिस्से भी छिले गए ,कपड़े भी फाड़े गए पिटाई के बाद युवक को आई है गंभीर चोट शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के डूमरपानी गांव की घटना सरसों और करीब 300 रुपए नगदी चोरी करने का था युवक पर आरोप जांच में जुटी पुलिस की टीम।
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    बलरामपुर ब्रेकिंग 
चोरी करने के शक में एक युवक को दी गई  तालिबानी सजा 
ग्रामीणों ने मिलकर एक युवक की जमकर की पिटाई
सिर के बाल के कुछ हिस्से भी छिले गए ,कपड़े भी फाड़े गए
पिटाई के बाद युवक को आई है गंभीर चोट
शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के डूमरपानी गांव की घटना
सरसों और करीब 300 रुपए नगदी चोरी करने का था युवक पर आरोप
जांच में जुटी पुलिस की टीम।
    user_Mr Dayashankar Yadav
    Mr Dayashankar Yadav
    Local News Reporter शंकरगढ़, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    21 hrs ago
  • सरहुल - सरहुल झारखंड का प्रमुख पर्व है जो मुख्य रूप से चैत्र माह में साल (सखुआ) के पेड़ों में नए फूल आने की खुशी में मनाया जाता है। एवं यह त्यौहार प्राकृतिक के प्रति आभार नई फसल के स्वागत वर्षा की भविष्यवाणी और आदिवासी संस्कृति की रक्षा के लिए मनाया जाता है।
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    सरहुल - सरहुल झारखंड का प्रमुख पर्व है जो मुख्य रूप से चैत्र माह में साल (सखुआ) के पेड़ों में नए फूल आने की खुशी में मनाया जाता है। एवं यह त्यौहार प्राकृतिक के प्रति आभार नई फसल के स्वागत वर्षा की भविष्यवाणी और आदिवासी संस्कृति की रक्षा के लिए मनाया जाता है।
    user_Varta_by_anup
    Varta_by_anup
    Youth organisation चिनिया, गढ़वा, झारखंड•
    4 hrs ago
  • भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा 'विकास': शंकरगढ़ में पुलिया निर्माण में धांधली की इंतहा, जिम्मेदार मौन! ​बलरामपुर जनपद शंकरगढ़ छत्तीसगढ़ सरकार भले ही प्रदेश में विकास की गंगा बहाने के दावे करे, लेकिन धरातल पर बिचौलिए और भ्रष्ट तंत्र उन दावों की हवा निकाल रहे हैं। ताजा मामला जनपद पंचायत शंकरगढ़ के ग्राम पंचायत पटना भंडारपरा का है, जहां पुलिया निर्माण के नाम पर सरकारी पैसे का बंदरबांट और गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ सरेआम जारी है। ​लापरवाही और भ्रष्टाचार का 'लाइव' खेल ​भंडारपरा में चल रहा पुलिया निर्माण भ्रष्टाचार की जीती-जागती तस्वीर पेश कर रहा है। निर्माण स्थल पर नियमों की धज्जियां कुछ इस कदर उड़ाई जा रही हैं: ​घटिया सामग्री का उपयोग: सीमेंट की मात्रा नाममात्र है और बालू की अधिकता। 30 mm गिट्टी का उपयोग मानकों के विपरीत बेहद कम मात्रा में किया जा रहा है। ​तकनीकी खामियां: कंक्रीट सेट करने के लिए वाइब्रेटर तक का इस्तेमाल नहीं हो रहा, जिससे पुलिया की मजबूती पर बड़ा सवाल खड़ा होता है। ​नदारद सूचना पटल: नियमतः निर्माण स्थल पर योजना की लागत और विवरण का बोर्ड होना अनिवार्य है, लेकिन यहां ठेकेदार ने इसे लगाना भी जरूरी नहीं समझा। ताकि जनता को लागत और काम की असलियत पता न चल सके। ​बाल श्रम का अपराध: सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यहां नाबालिक बच्चों से काम कराया जा रहा है, जो कानूनन अपराध है। ​अधिकारियों की चुप्पी: मिलीभगत या मजबूरी? ​ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि यह सारा खेल जनपद सीईओ, इंजीनियर, सरपंच और ठेकेदार की मिलीभगत से चल रहा है। उच्च अधिकारियों को इसकी भनक न हो, यह मुमकिन नहीं लगता। ऐसा प्रतीत होता है कि "कानून का अंगूठा भ्रष्टाचार को सलाम" कर रहा है। बिचौलिए अपनी जेबें गरम करने के चक्कर में ग्रामीणों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं की बलि चढ़ा रहे हैं। ​जनता का सवाल: आखिर कब होगी कार्रवाई? ​ग्रामीणों में इस घटिया निर्माण को लेकर भारी आक्रोश है। सवाल यह उठता है कि जब काम की गुणवत्ता इतनी निम्न स्तर की है, तो इंजीनियर इसे पास कैसे कर रहे हैं? क्या उच्च अधिकारी एसी कमरों से बाहर निकलकर इस जमीनी भ्रष्टाचार की जांच करेंगे या फिर कागजों पर ही विकास का पुल तैयार कर दिया जाएगा
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    भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा 'विकास': शंकरगढ़ में पुलिया निर्माण में धांधली की इंतहा, जिम्मेदार मौन!
​बलरामपुर जनपद शंकरगढ़ छत्तीसगढ़ सरकार भले ही प्रदेश में विकास की गंगा बहाने के दावे करे, लेकिन धरातल पर बिचौलिए और भ्रष्ट तंत्र उन दावों की हवा निकाल रहे हैं। ताजा मामला जनपद पंचायत शंकरगढ़ के ग्राम पंचायत पटना भंडारपरा का है, जहां पुलिया निर्माण के नाम पर सरकारी पैसे का बंदरबांट और गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ सरेआम जारी है।
​लापरवाही और भ्रष्टाचार का 'लाइव' खेल
​भंडारपरा में चल रहा पुलिया निर्माण भ्रष्टाचार की जीती-जागती तस्वीर पेश कर रहा है। निर्माण स्थल पर नियमों की धज्जियां कुछ इस कदर उड़ाई जा रही हैं:
​घटिया सामग्री का उपयोग: सीमेंट की मात्रा नाममात्र है और बालू की अधिकता। 30 mm गिट्टी का उपयोग मानकों के विपरीत बेहद कम मात्रा में किया जा रहा है।
​तकनीकी खामियां: कंक्रीट सेट करने के लिए वाइब्रेटर तक का इस्तेमाल नहीं हो रहा, जिससे पुलिया की मजबूती पर बड़ा सवाल खड़ा होता है।
​नदारद सूचना पटल: नियमतः निर्माण स्थल पर योजना की लागत और विवरण का बोर्ड होना अनिवार्य है, लेकिन यहां ठेकेदार ने इसे लगाना भी जरूरी नहीं समझा। ताकि जनता को लागत और काम की असलियत पता न चल सके।
​बाल श्रम का अपराध: सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यहां नाबालिक बच्चों से काम कराया जा रहा है, जो कानूनन अपराध है।
​अधिकारियों की चुप्पी: मिलीभगत या मजबूरी?
​ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि यह सारा खेल जनपद सीईओ, इंजीनियर, सरपंच और ठेकेदार की मिलीभगत से चल रहा है। उच्च अधिकारियों को इसकी भनक न हो, यह मुमकिन नहीं लगता। ऐसा प्रतीत होता है कि "कानून का अंगूठा भ्रष्टाचार को सलाम" कर रहा है। बिचौलिए अपनी जेबें गरम करने के चक्कर में ग्रामीणों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं की बलि चढ़ा रहे हैं।
​जनता का सवाल: आखिर कब होगी कार्रवाई?
​ग्रामीणों में इस घटिया निर्माण को लेकर भारी आक्रोश है। सवाल यह उठता है कि जब काम की गुणवत्ता इतनी निम्न स्तर की है, तो इंजीनियर इसे पास कैसे कर रहे हैं? क्या उच्च अधिकारी एसी कमरों से बाहर निकलकर इस जमीनी भ्रष्टाचार की जांच करेंगे या फिर कागजों पर ही विकास का पुल तैयार कर दिया जाएगा
    user_Ali Khan
    Ali Khan
    बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    2 hrs ago
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