पश्चिम बंगाल के सोनारपुर के कमराबाद इलाके में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हमला हुआ है। वे शनिवार शाम को चुनाव के बाद हुई हिंसा के एक मृतक कार्यकर्ता के घर उनसे मिलने पहुंचे थे। इसी दौरान, वहां पहले से मौजूद प्रदर्शनकारियों ने अभिषेक बनर्जी पर कच्चे अंडे फेंके और उनके साथ मारपीट की। स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें तुरंत हेलमेट पहनाकर सुरक्षा घेरे में वहां से सुरक्षित बाहर निकाला। इस घटना के दौरान उनके कपड़े फाड़ दिए गए, पत्थर और अंडे भी फेंके गए, जिससे उन्होंने हेलमेट पहनकर अपनी जान बचाई। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर दो मोटरसाइकिलें भी फेंक दीं, जिससे वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। यह घटना कमराबाद में हुई, जहां अभिषेक बनर्जी अपनी कार छोड़कर बाइक से इलाके में प्रवेश कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने उन्हें पीड़ित के घर से कुछ सौ मीटर पहले ही रोक लिया और "चोर-चोर" के नारे लगाने शुरू कर दिए। लोगों में अभिषेक बनर्जी के प्रति भारी गुस्सा देखा गया, जिसका कारण इलाके की बेहद खराब सड़कें और पानी की सप्लाई व्यवस्था बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, लगभग एक किलोमीटर तक सड़क की स्थिति बहुत खराब है और बारिश में पानी भर जाता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री रहते हुए भी कई बार सड़कों को ठीक करने और पानी की समस्या सुधारने के लिए गुजारिशें की गईं, आवेदन दिए गए, लेकिन उनकी समस्याओं पर कभी ध्यान नहीं दिया गया। लोगों का कहना था कि "जितना पैसा आया, सब खा लिया" और 15 साल से सत्ता में रहने के बावजूद इलाके का विकास क्यों नहीं हुआ, इसी को लेकर वे गुस्से में थे। कुछ स्थानीय लोगों ने खुद को किसी पार्टी का नहीं, बल्कि मजदूर बताया जो अपनी समस्याओं से परेशान हैं। इस हमले के बाद अभिषेक बनर्जी ने सीधे विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने इसे "बीजेपी द्वारा पूरी तरह से प्रायोजित" हमला बताते हुए मीडिया से कहा कि यह "इनके लोकतंत्र का असली नमूना" है। उन्होंने मौके पर पुलिस की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाया। इस घटना के बाद पूरे सोनारपुर इलाके में भारी राजनीतिक तनाव पैदा हो गया है। टीएमसी जहां इसे विपक्षी दल की "सोची-समझी साजिश" करार दे रही है, वहीं दूसरी तरफ से इसे "स्थानीय लोगों का गुस्सा" बताया जा रहा है। फिलहाल, इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और दोनों पार्टियों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
पश्चिम बंगाल के सोनारपुर के कमराबाद इलाके में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हमला हुआ है। वे शनिवार शाम को चुनाव के बाद हुई हिंसा के एक मृतक कार्यकर्ता के घर उनसे मिलने पहुंचे थे। इसी दौरान, वहां पहले से मौजूद प्रदर्शनकारियों ने अभिषेक बनर्जी पर कच्चे अंडे फेंके और उनके साथ मारपीट की। स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें तुरंत हेलमेट पहनाकर सुरक्षा घेरे में वहां से सुरक्षित बाहर निकाला। इस घटना के दौरान उनके कपड़े फाड़ दिए गए, पत्थर और अंडे भी फेंके गए, जिससे उन्होंने हेलमेट पहनकर अपनी जान बचाई। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर दो मोटरसाइकिलें भी फेंक दीं, जिससे वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। यह घटना कमराबाद में हुई, जहां अभिषेक बनर्जी अपनी कार छोड़कर बाइक से इलाके में प्रवेश कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने उन्हें पीड़ित के घर से कुछ सौ मीटर पहले ही रोक लिया और "चोर-चोर" के नारे लगाने शुरू कर दिए। लोगों में अभिषेक बनर्जी के प्रति भारी गुस्सा देखा गया, जिसका कारण इलाके की बेहद खराब सड़कें और पानी की सप्लाई व्यवस्था बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, लगभग एक किलोमीटर तक सड़क की स्थिति बहुत खराब है और बारिश में पानी भर जाता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री रहते हुए भी कई बार सड़कों को ठीक करने और पानी की समस्या सुधारने के लिए गुजारिशें की गईं, आवेदन दिए गए, लेकिन उनकी समस्याओं पर कभी ध्यान नहीं दिया गया। लोगों का कहना था कि "जितना पैसा आया, सब खा लिया" और 15 साल से सत्ता में रहने के बावजूद इलाके का विकास क्यों नहीं हुआ, इसी को लेकर वे गुस्से में थे। कुछ स्थानीय लोगों ने खुद को किसी पार्टी का नहीं, बल्कि मजदूर बताया जो अपनी समस्याओं से परेशान हैं। इस हमले के बाद अभिषेक बनर्जी ने सीधे विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने इसे "बीजेपी द्वारा पूरी तरह से प्रायोजित" हमला बताते हुए मीडिया से कहा कि यह "इनके लोकतंत्र का असली नमूना" है। उन्होंने मौके पर पुलिस की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाया। इस घटना के बाद पूरे सोनारपुर इलाके में भारी राजनीतिक तनाव पैदा हो गया है। टीएमसी जहां इसे विपक्षी दल की "सोची-समझी साजिश" करार दे रही है, वहीं दूसरी तरफ से इसे "स्थानीय लोगों का गुस्सा" बताया जा रहा है। फिलहाल, इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और दोनों पार्टियों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक नया नियम जारी किया है, जिसके बाद लोन का भुगतान न करने की स्थिति में रिकवरी एजेंट अब गुंडागर्दी नहीं कर पाएंगे।1
- प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के अंतर्गत, सरकार द्वारा घर के निर्माण के लिए ₹2.5 लाख तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त, इस योजना के तहत होम लोन पर ब्याज सब्सिडी भी दी जाती है। इस सहायता का लाभ उठाने के लिए, लाभार्थी की वार्षिक आय ₹18 लाख तक होनी चाहिए और उनके परिवार के पास देश में कोई पक्का घर नहीं होना चाहिए।1
- नीट पेपर लीक और सीयूईटी परीक्षा के बदले समय को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने केंद्र की बीजेपी सरकार पर तीखा निशाना साधा है। AAP संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक वीडियो पोस्ट साझा करते हुए कहा कि नीट में पेपर लीक रोकने के लिए वायु सेना के जहाजों का इस्तेमाल करने जैसी बातें सरकार द्वारा 'अनपढ़ों जैसी' हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की पेपर लीक रोकने की नीयत ही नहीं है और देश की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से माफिया के चंगुल में आ चुकी है। केजरीवाल ने जोर देकर कहा कि इस समस्या को ठीक करने के लिए सबको मिलकर कुछ करना होगा, अकेले किसी के कुछ करने से यह संभव नहीं होगा। AAP नेता मनीष सिसोदिया ने सीयूईटी परीक्षा पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने केंद्रीय स्तर पर एनटीए (NTA) नामक एक एजेंसी का गठन किया, जिसका काम देश की सभी परीक्षाएं आयोजित करना है। सिसोदिया ने आरोप लगाया कि जब से यह एजेंसी बनी है, तब से देश के युवाओं और बच्चों के साथ एक 'बहुत बड़ा घोटाला' हो रहा है और कोई भी परीक्षा ठीक से आयोजित नहीं हो रही है। उन्होंने नीट, सीबीएसई और एसएससी तक की परीक्षाओं में सरकार को फेल बताया। सिसोदिया ने आगे कहा कि आज एनटीए ने सीयूईटी परीक्षा का भी मजाक बनाकर रख दिया है, जहाँ बच्चे परीक्षा केंद्र पर पहुँचते हैं तो परीक्षा का समय बदल दिया जाता है, किसी का केंद्र तो किसी की तारीख बदल दी जाती है, जिससे 'पूरी अव्यवस्था' फैल गई है। उन्होंने इस स्थिति को 'मजाक नहीं' बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बात को कभी नहीं समझ सकते कि परीक्षा के लिए पूरा परिवार कितनी मेहनत करता है।1
- Post by Rihan4
- दिल्ली में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। दिल्ली की CM रेखा गुप्ता के विधानसभा क्षेत्र शालीमार बाग से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं, जहाँ संभावित कार्रवाई की खबरों के बाद कई परिवारों ने अपने मकान खाली करने शुरू कर दिए हैं। इलाके में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और कई परिवार अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने में जुटे हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बुलडोजर कार्रवाई की चर्चाओं और प्रशासनिक गतिविधियों के बाद उन्होंने एहतियातन घर खाली करने का फैसला लिया है। कई जगहों पर परिवारों को घरेलू सामान, फर्नीचर और जरूरी दस्तावेजों को दूसरे स्थानों पर ले जाते देखा गया है। दिल्ली में हाल के महीनों में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ विभिन्न इलाकों में कार्रवाई देखने को मिली है, जहाँ प्रशासन ने नोटिस जारी कर लोगों को पहले ही जगह खाली करने के निर्देश दिए थे। इस तरह की कार्रवाइयों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है, जहाँ विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है। वहीं, प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई कानून और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार की जाती है। फिलहाल इलाके में स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। स्थानीय निवासी प्रशासन की अगली घोषणा का इंतजार कर रहे हैं, जबकि सुरक्षा और निगरानी भी बढ़ा दी गई है।1