11 सूत्रीय मांगो को लेकर सरपंच संघ का एक दिवसीय धरना प्रदर्शन,राज्यपाल व मुख्यमंत्री के नाम सौपा ज्ञापन,, *रिपोर्टर शिव नाथ बघेल *दिनांक ,8/01/2026* लोकेशन, सूरजपुर छत्तीसगढ़ सूरजपुर,जिले के सभी पंचायतों के विकास कार्यों की राशि लंबे समय से जारी नहीं होने से सरपंचों में भारी आक्रोश देखने को मिला। सरपंच संघ के जिला अध्यक्ष अमर सिंह मरकाम के नेतृत्व में जिले भर के सरपंचों ने एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन करते हुए रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचकर राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। 10 महीने से पंचायतों को नहीं मिली विकास राशि धरने को संबोधित करते हुए सरपंचों ने कहा कि पिछले 10 महीनों से ग्राम पंचायतों को विकास कार्यों के लिए कोई राशि प्राप्त नहीं हुई है। बजट के अभाव में पंचायतों में निर्माण कार्य, मूलभूत सुविधाएं और जनकल्याणकारी योजनाएं पूरी तरह ठप पड़ी हैं, जिससे ग्रामीण जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वादों पर खरा नहीं उतर रही सरकार सरपंच संघ के जिला अध्यक्ष अमर सिंह मरकाम ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “सरकार ने पंचायतों के विकास का वादा किया था। डबल इंजन के बाद ट्रिपल इंजन और अब चौथा इंजन भी जोड़ दिया गया, लेकिन आज भी पंचायतों तक बजट नहीं पहुंच पा रहा है। इससे स्पष्ट है कि सरकार सरपंचों और ग्रामीण जनता के साथ छल कर रही है।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही मांगें पूरी नहीं की गईं तो प्रदेश स्तरीय आंदोलन किया जाएगा। विकास ठप होने से आम जनता प्रभावित नगर के अग्रसेन चौक से कलेक्ट्रेट तक रैली निकालते हुए सरपंचों ने जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विकास कार्य रुकने से रोजगार, अधोसंरचना और ग्रामीण विकास सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की है। सरपंच संघ की 11 सूत्रीय प्रमुख मांगें ग्राम पंचायत को ₹50 लाख तक के निर्माण कार्यों में एजेंसी बनाया जाए। 15वें एवं 16वें वित्त आयोग की राशि तत्काल जारी की जाए। सरपंचों का मानदेय ₹15,000 व पेंशन ₹5,000 तथा पंचों का मानदेय ₹2,000 किया जाए। प्रत्येक ग्राम पंचायत को मूलभूत मद में प्रतिवर्ष ₹5 लाख दिए जाएं। सभी शासकीय कार्यक्रमों के लिए अलग से बजट का प्रावधान हो। प्रत्येक पंचायत को निर्माण कार्य हेतु प्रतिवर्ष ₹1 करोड़ का बजट मिले। जी.राम.जी. योजना के तहत 60:40 श्रम-सामग्री राशि तत्काल जारी की जाए। वित्त आयोग की राशि में टाइड-अनटाइड की बाध्यता समाप्त की जाए। भूमि खरीदी-बिक्री में पारदर्शिता हेतु सरपंच प्रमाण पत्र अनिवार्य हो। गौठानों के संचालन हेतु कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए धरती आबा योजना से पूरे सरगुजा संभाग की पंचायतों को जोड़ा जाए। बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि रहे मौजूद ज्ञापन सौंपने वालों में जिला सरपंच संघ अध्यक्ष अमर सिंह मरकाम, पिंकी सिंह, रामविलास सिंह, रनमानिया बाई, संत कुमार सिंह, प्रभु नारायण श्याम, अनिल सिंह, नंद देव सिंह, त्रिभुवन सिंह, गजमोचन सिंह, सुंदर सिंह, कपिल देव पैकरा, रामचंद्र टेकाम, निरूपा सिंह नेताम,नीरा पैकरा , सहित बड़ी संख्या में सरपंच, जनपद सदस्य एवं पंच उपस्थित रहे। मंच संचालन लाल केश्वर सिंह सरुता द्वारा किया गया।
11 सूत्रीय मांगो को लेकर सरपंच संघ का एक दिवसीय धरना प्रदर्शन,राज्यपाल व मुख्यमंत्री के नाम सौपा ज्ञापन,, *रिपोर्टर शिव नाथ बघेल *दिनांक ,8/01/2026* लोकेशन, सूरजपुर छत्तीसगढ़ सूरजपुर,जिले के सभी पंचायतों के विकास कार्यों की राशि लंबे समय से जारी नहीं होने से सरपंचों में भारी आक्रोश देखने को मिला। सरपंच संघ के जिला अध्यक्ष अमर सिंह मरकाम के नेतृत्व में जिले भर के सरपंचों ने एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन करते हुए रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचकर राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। 10 महीने से पंचायतों को नहीं मिली विकास राशि धरने को संबोधित करते हुए सरपंचों ने कहा कि पिछले 10 महीनों से ग्राम पंचायतों को विकास कार्यों के लिए कोई राशि प्राप्त नहीं हुई है। बजट के अभाव में पंचायतों में निर्माण कार्य, मूलभूत सुविधाएं और जनकल्याणकारी योजनाएं पूरी तरह ठप पड़ी हैं, जिससे ग्रामीण जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वादों पर खरा नहीं उतर रही सरकार सरपंच संघ के जिला अध्यक्ष
अमर सिंह मरकाम ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “सरकार ने पंचायतों के विकास का वादा किया था। डबल इंजन के बाद ट्रिपल इंजन और अब चौथा इंजन भी जोड़ दिया गया, लेकिन आज भी पंचायतों तक बजट नहीं पहुंच पा रहा है। इससे स्पष्ट है कि सरकार सरपंचों और ग्रामीण जनता के साथ छल कर रही है।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही मांगें पूरी नहीं की गईं तो प्रदेश स्तरीय आंदोलन किया जाएगा। विकास ठप होने से आम जनता प्रभावित नगर के अग्रसेन चौक से कलेक्ट्रेट तक रैली निकालते हुए सरपंचों ने जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विकास कार्य रुकने से रोजगार, अधोसंरचना और ग्रामीण विकास सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की है। सरपंच संघ की 11 सूत्रीय प्रमुख मांगें ग्राम पंचायत को ₹50 लाख तक के निर्माण कार्यों में एजेंसी बनाया जाए। 15वें एवं 16वें वित्त आयोग की राशि तत्काल जारी की जाए। सरपंचों का मानदेय ₹15,000 व पेंशन
₹5,000 तथा पंचों का मानदेय ₹2,000 किया जाए। प्रत्येक ग्राम पंचायत को मूलभूत मद में प्रतिवर्ष ₹5 लाख दिए जाएं। सभी शासकीय कार्यक्रमों के लिए अलग से बजट का प्रावधान हो। प्रत्येक पंचायत को निर्माण कार्य हेतु प्रतिवर्ष ₹1 करोड़ का बजट मिले। जी.राम.जी. योजना के तहत 60:40 श्रम-सामग्री राशि तत्काल जारी की जाए। वित्त आयोग की राशि में टाइड-अनटाइड की बाध्यता समाप्त की जाए। भूमि खरीदी-बिक्री में पारदर्शिता हेतु सरपंच प्रमाण पत्र अनिवार्य हो। गौठानों के संचालन हेतु कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए धरती आबा योजना से पूरे सरगुजा संभाग की पंचायतों को जोड़ा जाए। बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि रहे मौजूद ज्ञापन सौंपने वालों में जिला सरपंच संघ अध्यक्ष अमर सिंह मरकाम, पिंकी सिंह, रामविलास सिंह, रनमानिया बाई, संत कुमार सिंह, प्रभु नारायण श्याम, अनिल सिंह, नंद देव सिंह, त्रिभुवन सिंह, गजमोचन सिंह, सुंदर सिंह, कपिल देव पैकरा, रामचंद्र टेकाम, निरूपा सिंह नेताम,नीरा पैकरा , सहित बड़ी संख्या में सरपंच, जनपद सदस्य एवं पंच उपस्थित रहे। मंच संचालन लाल केश्वर सिंह सरुता द्वारा किया गया।
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- धोखे से ‘गोद’ लिया या ममता का सौदा ? मैनपाट के मजदूर दंपति ने पड़ोसी व कोलकाता के अग्रवाल परिवार पर लगाया बच्चा छीनने का आरोप, सरगुजा एसपी से शिकायत… ₹100 के स्टांप पर दस्तखत कराकर 2 माह के मासूम को ले जाने का दावा; 1 लाख रुपये के लेनदेन की भी चर्चा सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र के जामढ़ोढ़ी निवासी एक मजदूर दंपत्ति ने पुलिस अधीक्षक (SP) और पुलिस महानिरीक्षक (IG) को लिखित शिकायत सौंपकर अपने दो माह के मासूम बच्चे को साज़िश के तहत ‘गायब’ करने का संगीन आरोप लगाया है। पीड़ितों का दावा है कि उनकी गरीबी और अशिक्षा का लाभ उठाकर पड़ोसी और कोलकाता के एक दंपत्ति ने मिलकर उनके बच्चे को उनसे दूर कर दिया है। हालांकि, सच्चाई क्या है यह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। शिकायत के अनुसार: भविष्य का झांसा देकर विश्वास में लिया प्रार्थी विजय कुमार और उनकी पत्नी बसंती मरावी ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि वे मजदूरी कर अपने पांच बच्चों का भरण-पोषण करते हैं। उनके पड़ोसी दालू ने उन्हें विश्वास दिलाया कि कोलकाता निवासी गौतम कुमार अग्रवाल और उनकी पत्नी श्वेता दीवान बहुत संपन्न परिवार से हैं। प्रार्थी का आरोप है कि पड़ोसी ने उन्हें लालच दिया कि यदि वे अपने सबसे छोटे बच्चे ‘अयांश’ को उक्त दंपत्ति को सौंप देते हैं, तो वे उसका पालन-पोषण अपने पुत्र की तरह करेंगे। बच्चे के बेहतर भविष्य की उम्मीद में माता-पिता इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तैयार हो गए। न्यायालय परिसर में गोदनामे का खेल शिकायती पत्र में यह उल्लेख किया गया है कि 28 दिसंबर 2025 को आरोपियों ने पीड़ित दंपत्ति को अम्बिकापुर जिला न्यायालय परिसर बुलाया। यहाँ स्टाम्प वेंडर से 100 रुपए का स्टाम्प प्राप्त कर एक दस्तावेज तैयार कराया गया। पीड़ितों का आरोप है कि नोटरी के समक्ष उन पर विधि विरुद्ध तरीके से दबाव डाला गया और उनकी अनपढ़ता का फायदा उठाकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर व अंगूठे के निशान ले लिए गए। शिकायत के मुताबिक, इसी दौरान जच्चा-बच्चा कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र भी आरोपियों ने अपने कब्जे में ले लिए। 1 लाख रुपये के लेनदेन का आरोप और मानव तस्करी की आशंका पीड़िता बसंती मरावी ने आवेदन में दावा किया है कि आरोपी गौतम कुमार अग्रवाल और श्वेता दीवान ने इस कथित समझौते के एवज में पड़ोसी दालू को 1,00,000/- (एक लाख) रुपये का भुगतान किया है। प्रार्थी ने इसे मानव तस्करी से जोड़ते हुए आशंका जताई है कि उनके बच्चे को कहीं और विक्रय कर दिया गया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि अब उन्हें बच्चे से मिलने भी नहीं दिया जा रहा है और डराया-धमकाया जा रहा है। मामले में राउरकेला निवासी एक महिला पुष्पा अग्रवाल की भूमिका पर भी संदेह जताया गया है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगी हकीकत कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि गोद लेने की प्रक्रिया केवल ‘कारा’ (CARA) के नियमों के तहत ही मान्य होती है, स्टाम्प पेपर पर ऐसा कोई भी समझौता विधिक रूप से शून्य है। फिलहाल, यह पूरा मामला केवल पीड़ित पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत किए गए ₹100 के स्टांप पर हुए कथित गोदनामा पर आधारित है। सच्चाई की पुष्टि के लिए पुलिस को आरोपियों का पक्ष और दस्तावेजों की प्रमाणिकता की जांच करनी होगी। पीड़ित परिवार ने तत्काल FIR दर्ज करने और बच्चे की सुरक्षित बरामदगी की मांग की है। स्टाम्प पर बच्चा गोद लेना या देना ‘सफेद झूठ’ और दंडनीय अपराध इस मामले में ₹100 के स्टाम्प पर जिस ‘गोदनामा’ की बात सामने आई है, कानूनन उसकी कोई मान्यता नहीं है। देश में बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया बेहद सख्त है: CARA ही एकमात्र रास्ता: भारत में बच्चा गोद लेने के लिए ‘सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी’ (CARA) के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण और अदालती आदेश अनिवार्य है। जेजे एक्ट का उल्लंघन: जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act), 2015 के अनुसार, बिना कानूनी प्रक्रिया के बच्चे का हस्तांतरण करना ‘चाइल्ड ट्रैफिकिंग’ (मानव तस्करी) की श्रेणी में आ सकता है। इसमें दोषी को कड़ी जेल और जुर्माने का प्रावधान है। नोटरी की सीमा: कोई भी नोटरी या स्टाम्प वेंडर बच्चा गोद लेने का दस्तावेज प्रमाणित करने के लिए अधिकृत नहीं है। यदि ऐसा किया गया है, तो उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में आती है। क्यों है यह अवैध?: बच्चे कोई वस्तु नहीं हैं जिनका सौदा स्टाम्प पेपर पर किया जा सके। बिना जिला बाल संरक्षण इकाई और सीडब्ल्यूसी (CWC) की जांच के किसी को भी बच्चा सौंपना बच्चे के जीवन को खतरे में डालना माना जाता है।1
- Post by Prayas kaiwart1
- शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूल से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे शिक्षक समाज को झकझोर कर रख दिया है। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के बसकेपी हायर सेकेंडरी स्कूल में एक 9 महीने की गर्भवती महिला शिक्षिका ने स्कूल के प्राचार्य पर गाली-गलौज और मारपीट का गंभीर आरोप लगाया है। इस घटना के बाद शिक्षक संघ ने जिला शिक्षा अधिकारी से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है, वहीं पीड़िता ने थाने में भी मामला दर्ज कराया है।1
- जिले की चार विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत अनमैपड मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया है। इनकी 2003 की सूची मे मैपिंग नहीं हुई है । इन मतदाताओं के माता-पिता या दादा-दादी का नाम ही नहीं था। प्रारंभिक प्रकाशन में बचे मतदाताओं के हिसाब से जिले में विभिन्न वोटर्स को नोटिस जारी किया गया है। अब इन मतदाताओं को मान्य 11 में से कोई भी एक दस्तावेज देना होगा। तहसीलों में एआरओ सुनवाई भी कर रहे हैं। दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने पर नाम मतदाता सूची से कटने का डर है। एसआईआर की प्रारंभिक मतदाता सूची का प्रकाशन 23 दिसंबर को हो चुका है।1
- क्षेत्र की महिला स्व सहायता समूह के सदस्यों के साथ सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने किया विधायक कार्यालय में बैठक ,, महिला समूहों को सशक्त बनाने के लिए कई विषयों पर की चर्चा,, आज सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो जी ने विधायक कार्यालय में विधानसभा क्षेत्र के महिला स्व सहायता समूह के सदस्यों के साथ बैठक किया ,, और सभी समूहों के द्वारा किए जा रहे कार्यों के विषय में जानकारी लेते हुए उसके बारे मे विस्तार से चर्चा की ,, वहीं विधायक जी ने महिला समूहों के द्वारा बनाए जाने वाले सामग्रियों के क्वाल्टी , मात्रा,मार्केटिंग के विषय में जानकारी लिया ,, वहीं उन्होंने सभी से चर्चा करते हुए कहा कि आप के। समूहों द्वारा आय अर्जन हेतु किए जा रहे कार्यों को विस्तार देना अत्यंत आवश्यक है यदि आपके सामनों को लोगो के बीच पहुंचना है तो उसकी ब्रांडिग आवश्यक है जिससे उसकी खपत की मात्रा बढ़े और महिला समूहों के आय में भी वृद्धि हो,, हम अपने क्षेत्र की माता बहनों को आत्म निर्भर बनाना चाहते हैं, जिसके लिए हम योजना बना रहे हैं और इसी विषय को लेकर1